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Dil sabhal ja jara part – 16

पढ़ने का समय : 4 मिनट

Part – 16 dil ki गहराइयां 

 

ठाकुर हाउस में अब एक नई चुप्पी छा गई थी – वो चुप्पी जो दो दिलों के बीच के अनकहे पलों से भरी होती है। प्रिया और आरव अब एक-दूसरे से नजरें नहीं चुराते थे। नजरें मिलतीं तो लंबी हो जातीं, और फिर मुस्कुराहट में बदल जातीं। वो मुस्कुराहट जो सालों की कमी को भर रही थी। घरवाले कुछ-कुछ समझ रहे थे, लेकिन कोई कुछ नहीं बोलता। रिया सबसे ज्यादा खुश थी – वो चुपके से दोनों को चिढ़ाती, लेकिन अब मजाक में नहीं, बल्कि सपोर्ट में।

 

एक शाम बर्फबारी फिर शुरू हो गई। घर में लाइट्स डिम थीं, फायरप्लेस जल रहा था। राजेश पापा और आदित्य अंकल बाहर गए थे – किसी पुराने दोस्त की पार्टी में। रिया अपने कमरे में थी, हेडफोन लगाकर म्यूजिक सुन रही। घर में सिर्फ प्रिया और आरव।

 

प्रिया लाइब्रेरी में किताब पढ़ रही थी। आरव अंदर आया। हाथ में दो मग – हॉट चॉकलेट। “प्रिया… ठंड है। ले।”

 

प्रिया ने मुस्कुराकर लिया। “थैंक्स भैया।”

 

आरव उसके बगल में सोफे पर बैठ गया। करीब। उनकी कंधें छू रहे थे। फायरप्लेस की लौ दोनों के चेहरों पर नाच रही थी। आरव ने प्रिया के बालों में उलझी बर्फ की बूंद हटाई। “प्रिया… आज तू बहुत खूबसूरत लग रही है।”

 

प्रिया शर्मा गई। “भैया… तुम भी।”

 

आरव ने उसका हाथ लिया। धीरे से उंगलियां आपस में घुमाईं। “प्रिया… मुझे अब डर नहीं लगता। तू मेरे साथ है ना?”

 

प्रिया ने उसकी आंखों में देखा। “हां भैया। हमेशा।”

 

आरव ने उसे करीब खींचा। प्रिया का सिर उसके सीने पर टिका। उसकी धड़कन सुनाई दे रही थी – तेज़, लेकिन सुकून भरी। आरव ने उसके बालों को सहलाया। “प्रिया… सालों से मैं तुझे खोजता रहा। अब तू मिली है… पूरी तरह।”

 

प्रिया ने ऊपर देखा। आरव का चेहरा करीब था। उसने धीरे से प्रिया के होंठों को छुआ – पहला किस। नरम, गर्म, लंबा। प्रिया की आंखें बंद हो गईं। वो जवाब में करीब आई। दोनों के होंठ मिले – धीरे, लेकिन गहराई से। वो किस सालों के इंतजार का था, कमी का, और अब मिलन का। आरव के हाथ प्रिया की कमर पर थे, प्रिया के हाथ उसके गले में। फायरप्लेस की लौ चटक रही थी, बाहर बर्फ गिर रही थी।

 

किस टूटा। दोनों सांसें तेज़। आरव ने प्रिया के माथे पर होंठ रखे। “प्रिया… मैं तुझे कभी दुख नहीं दूंगा।”

 

प्रिया ने उसे फिर किस किया – इस बार खुद से। “भैया… तू मेरा पहला और आखिरी प्यार है।”

 

दोनों सोफे पर लेट गए। आरव की बाहों में प्रिया। वो बातें करने लगे – बचपन की, मां की, भविष्य की। आरव ने कहा, “प्रिया… एक दिन सबको बताएंगे। धीरे-धीरे। लेकिन तू मेरी है।”

 

प्रिया ने कहा, “हां। तेरी हूं।”

 

रात गहरा गई। दोनों फायरप्लेस के सामने लेटे रहे। हाथ थामे, होंठ मिले, आंखें बंद। रोमांस अब गहरा हो चुका था – वो गहराई जो सिर्फ स्पर्श में नहीं, दिलों के मिलन में थी। आरव का कॉन्फ्लिक्ट अब प्यार में बदल चुका था। प्रिया का डर अब सुकून में।

 

सुबह हुई। रिया नीचे आई। दोनों को सोफे पर देखा – प्रिया आरव की बाहों में सो रही थी। रिया मुस्कुराई। चुपके से कंबल ओढ़ाया और ऊपर चली गई।

 

लेकिन बाहर तूफान आ रहा था। राजेश पापा को अनाम लेटर मिल चुका था। वो आदित्य अंकल से बात कर रहे थे। “आदित्य जी… आरव और प्रिया… कुछ गलत तो नहीं?”

 

आदित्य ने कहा, “राजेश, बच्चे बड़े हो गए हैं। लेकिन प्रिया मेरी बेटी है। अगर कुछ है तो बात करनी होगी।”

 

पापा ने आरव को बुलाया। “आरव… प्रिया से तेरा रिश्ता… क्या है?”

 

आरव चौंका। “पापा… वो मेरी…”

 

पापा ने लेटर दिखाया। आरव का चेहरा सफेद पड़ गया। “पापा… मैं प्रिया से प्यार करता हूं। बहन से ज्यादा।”

 

पापा स्तब्ध। “आरव… ये… ये गलत है। तुमने उसे बहन माना सालों।”

 

आरव ने कहा, “पापा… खून का रिश्ता नहीं है। और प्यार… दिल से है।”

 

प्रिया आई। सब सुन लिया। वो रो पड़ी। “पापा… मैं भी आरव से प्यार करती हूं।”

 

आदित्य अंकल ने कहा, “बच्चो… ये आसान नहीं। समाज, फैमिली… सब देखेगा।”

 

लेकिन राजेश पापा ने गहरी सांस ली। “अगर तुम दोनों खुश हो… तो मैं साथ हूं। रानी भी यही चाहती।”

 

सब रो पड़े। फैमिली ने अपनाया। रिया ने ताली बजाई। “फाइनली!”

 

लेकिन अवनी और विक्रम का प्लान फेल हो गया। विक्रम जेल में और गुस्सा। “अवनी, अब आखिरी हथियार। मीडिया को बता दो। ठाकुर फैमिली का स्कैंडल।”

 

अगले दिन न्यूज चैनल्स पर ब्रेकिंग – “ठाकुर फैमिली में अनैतिक रिश्ता? भाई-बहन का प्यार?”

 

प्रिया और आरव बाहर निकले। कैमरे, माइक। आरव ने प्रिया का हाथ थामा। “हम साथ हैं। प्यार में कुछ गलत नहीं।”

 

प्रिया ने कहा, “हमारा प्यार सच्चा है।”

 

मीडिया का तूफान आया। लेकिन दोनों मजबूत थे। रोमांस अब गहरा था – चुनौतियों के बीच और मजबूत।

 

आरव ने प्रिया को गले लगाया। “प्रिया… दुनिया कुछ भी कहे, तू मेरी है।”

 

प्रिया ने कहा, “और तू मेरा। हमेशा।”

 

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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

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