अमन देखने में बहुत अच्छा लड़का था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत ने उसके पूरे परिवार को परेशान कर रखा था—उसे शराब और नशे की लत थी।
उसकी छोटी बहन नेहा उससे बहुत प्यार करती थी। बचपन में दोनों साथ खेलते थे। अमन अपनी बहन को स्कूल छोड़ने जाता और उसकी छोटी-छोटी फरमाइशें पूरी करता।
लेकिन कॉलेज के बाद अमन गलत दोस्तों के संपर्क में आ गया।
धीरे-धीरे नशा उसकी जिंदगी बन गया।
मां कई बार समझाती।
“बेटा, अपनी जिंदगी बर्बाद मत कर।”
अमन कहता, “मुझे पता है मुझे क्या करना है।”
नेहा कुछ नहीं कहती थी। वह सिर्फ अपने भाई को बदलते हुए देखती रहती।
एक दिन अमन नशे में घर आया और गुस्से में अपनी मां पर चिल्लाने लगा।
नेहा ने पहली बार अपने भाई को रोकते हुए कहा, “बस भैया!”
अमन चौंक गया।
नेहा बोली, “आपको पता है मां आपसे डरती हैं?”
अमन चुप हो गया।
“और मैं भी।”
यह सुनकर अमन की आंखें भर आईं, लेकिन वह कुछ बोला नहीं।
कुछ महीनों बाद रक्षाबंधन आया।
नेहा ने सुबह से तैयारी की थी।
अमन घर आया तो नेहा ने राखी की थाली उसके सामने रख दी।
“बैठिए।”
अमन बैठ गया।
नेहा ने राखी उठाई, लेकिन बांधी नहीं।
अमन ने पूछा, “क्या हुआ?”
नेहा बोली, “पहले मेरी एक बात माननी होगी।”
“क्या?”
“आप मुझे कोई महंगा तोहफा मत देना।”
अमन मुस्कुराया, “तो क्या चाहिए?”
नेहा ने कहा, “मुझे सिर्फ एक अच्छा भाई चाहिए।”
अमन की मुस्कान गायब हो गई।
नेहा बोली, “भैया, मैं आपसे अपनी रक्षा का वादा नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि आप खुद को उस रास्ते से बचाएं जिस पर आप चल रहे हैं।”
अमन की आंखें नम हो गईं।
नेहा ने कहा, “अगर आप सच में मेरी राखी की लाज रखना चाहते हैं तो शराब छोड़ दीजिए। नशा छोड़ दीजिए। गुस्सा छोड़ दीजिए। और किसी भी लड़की को कभी गलत नजर से मत देखिए।”
अमन ने धीरे से पूछा, “क्या तुम मुझसे इतना सब चाहती हो?”
नेहा बोली, “हां। क्योंकि मुझे सिर्फ अपना भाई नहीं चाहिए। मुझे ऐसा भाई चाहिए जिस पर हर लड़की भरोसा कर सके।”
उस दिन अमन ने अपनी जिंदगी बदलने का फैसला किया।
उसने नशा छोड़ने के लिए मदद ली। पुराने दोस्तों से दूरी बनाई। कुछ महीने उसके लिए बेहद कठिन रहे।
कई बार उसका मन करता कि वह वापस नशे की ओर चला जाए।
लेकिन हर बार उसे अपनी कलाई पर बंधी राखी दिखाई देती।
वह खुद से कहता—
“मुझे अपनी बहन की राखी की लाज रखनी है।”
समय बीतता गया।
अमन अब काम करने लगा था। उसकी मां के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई थी।
एक दिन वह बस स्टैंड पर खड़ा था। वहां उसने देखा कि एक लड़की का मोबाइल एक युवक छीनकर भागने की कोशिश कर रहा है।
लड़की मदद के लिए चिल्लाई।
अमन ने तुरंत आसपास के लोगों को बुलाया और पुलिस को सूचना दी। उसने बिना जोखिम बढ़ाए लड़की की मदद की और आरोपी को पकड़ने में लोगों की सहायता की।
लड़की ने कहा, “भैया, अगर आप नहीं आते तो पता नहीं क्या होता।”
अमन ने कहा, “बहन, डरना मत। गलती तुम्हारी नहीं थी।”
यह शब्द सुनकर अमन को अपनी बहन याद आ गई।
कुछ साल बाद अमन ने युवाओं के साथ मिलकर एक अभियान शुरू किया।
उसका उद्देश्य था—नशे से दूर रहना और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना।
एक कार्यक्रम में नेहा भी मौजूद थी।
मंच से अमन ने कहा, “कभी मेरी बहन ने मुझे एक राखी बांधी थी। उस राखी ने मुझे सिखाया कि बहन की रक्षा करने से पहले इंसान को अपनी बुरी आदतों से लड़ना पड़ता है।”
नीचे बैठी नेहा की आंखों में आंसू थे।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद उसने भाई की कलाई पर हाथ रखा।
“अब मुझे आप पर गर्व है।”
अमन ने कहा, “ये सब तुम्हारी वजह से हुआ।”
नेहा मुस्कुराई।
“नहीं भैया। मैंने सिर्फ रास्ता दिखाया था। चलना आपने खुद सीखा।”
सीख:
बहन की राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। सच्चा भाई वही है जो अपनी बुरी आदतों को छोड़कर ऐसा इंसान बने, जिसके सामने किसी भी लड़की को डर महसूस न हो।

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
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शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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