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इस कदर मेरी दोस्ती का_.इम्तेहान तो मत लिजीये

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

इस कदर मेरी दोस्ती का…

.इम्तेहान तो मत लिजीये… .

 

खफा हो क्यों… .

*ये तो बता दीजिये… .*

 

माफ कर दो अगर… .

हो गई हो हमसे कोई भूल… .

 

पर ऎसे याद ना कर के… .

*हमे सजा तो मत दीजिये!!*

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Alka Singh

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

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