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  • अधूरी इबादत

    अधूरी इबादत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

     भाग~1 अद्वैत और वो अनजान लड़की

    ————

    रात अपने सन्नाटे में डूबी थी। सड़कों पर दूर-दूर तक वीरानी पसरी थी, बस कभी-कभी किसी गाड़ी के गुजरने की हल्की सी आवाज़ उस खामोशी को तोड़ देती थी। अद्वैत अपनी कार चलाते हुए ख्यालों में गुम था। उसका मन उस रात किसी उलझन में था, जैसे कोई अधूरी बात ज़हन के किसी कोने में अटकी हो, बार-बार लौटकर उसे बेचैन कर रही हो।

    उसके भीतर का तूफान उससे कहीं ज़्यादा शोर मचा रहा था, जितना बाहर की खामोशी में मुमकिन था। उसकी आंखें सड़क पर थीं, मगर दिमाग कहीं और भटक रहा था। अतीत की परछाइयाँ उसकी सोच पर हावी थीं — कुछ बातें जिन्हें वह भुला देना चाहता था, मगर वे हर बार नए ज़ख्म खोल जाती थीं।

    उसकी उंगलियां स्टीयरिंग पर कसकर जकड़ी हुई थीं, जैसे अगर उसने अपनी पकड़ ढीली की तो उसके भीतर का दर्द अचानक उबल पड़ेगा। सड़क किनारे जलती स्ट्रीट लाइट्स उसकी कार की खिड़की पर छोटे-छोटे प्रतिबिंब बनाती और फिर ग़ायब हो जातीं, ठीक वैसे ही जैसे उसकी ज़िन्दगी के वो पल, जो कभी चमकदार थे, मगर अब सिर्फ धुंधली यादों के अक्स बनकर रह गए थे।

    हवा ठंडी थी, लेकिन उसके माथे पर पसीने की हल्की बूँदें थीं। ना जाने क्यों, उसके दिल में एक अनजानी बेचैनी दौड़ रही थी — बिना वजह, बिना नाम की।  

    तभी उसकी नज़र सामने पुल पर पड़ी। वहाँ एक लड़की खड़ी थी….. 

    सफ़ेद सलवार-कुर्ते में लिपटी, उसके बाल हवा में बेतरतीब लहरा रहे थे। उसके कंधे झुके हुए थे, जैसे उसकी आत्मा ही उसका भार संभालने से इनकार कर रही हो। उसकी नज़रें नीचे गहरी खाई में टिकी थीं — एक भयावह खालीपन, जिसमें गिरने के बाद शायद कुछ भी बाकी न रहे।

    उसकी चाल में ठहराव नहीं था, वो बस किसी खयाल में डूबी आगे बढ़ती जा रही थी — सीधा पुल के किनारे की तरफ। अद्वैत ने हैरानी से उसकी तरफ देखा। लड़की का चेहरा आधा छुपा था, मगर उसके कंधे पर बिखरे बाल और काँपती देह साफ दिख रही थी। 

    अद्वैत के भीतर कुछ धड़क उठा। उसके मन में अजीब-सी बैचेनी थी।

    “ये क्या कर रही है?” उसने खुद से कहा और बिना सोचे समझे तेज़ी से ब्रेक पर पैर मारा। टायरों की चीखती आवाज़ सन्नाटे को चीर गई।  

    वो कार से उतरकर लगभग दौड़ते हुए पुल की ओर भागा। लड़की अब पुल की रेलिंग पर खड़ी थी — आगे झुकी हुई, बस एक हल्की हवा के झोंके में गिर जाने को तैयार।  

    “रुको!” अद्वैत की आवाज़ अचानक फट पड़ी, मगर लड़की ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।  

    उसके कदम तेज़ हुए। उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वह उस लड़की की तरफ़ क्यों खींचा चला जा रहा है — शायद यह डर था कि वो किसी की जान जाते हुए अब नहीं देख पाएगा या फिर कहीं भीतर दबा वो दर्द जो किसी को भी टूटता हुआ देखना और सहन नहीं कर सकता था।

    “रुको, सुनो!” उसने फिर पुकारा।  

    लड़की ने धीरे-से उसकी तरफ देखा — उसकी आँखें सूनी थीं, जैसे भीतर सब कुछ टूट चुका हो। उसके होठों पर कंपन था और चेहरे पर आँसुओं की गीली लकीरें। वो इतनी खोई हुई थी कि उसके कानों तक अद्वैत की आवाज़ ठीक से पहुंच भी नहीं पा रही थी।  

    लड़की ने अपनी आँखें बंद कर लीं और खुद को आगे झुका लिया।  

    अद्वैत ने बिना कुछ सोचे हल्का दौड़कर उसे पीछे खींच लिया। लड़की का हल्का शरीर उसकी बाहों में झूल गया। दोनों का संतुलन बिगड़ा और वे वहीं पुल के फर्श पर गिर पड़े।  

    अद्वैत का सिर हल्का-सा घूम गया था, मगर उसकी बाहों में लड़की का चेहरा था — ठंडा और बेजान-सा, मगर उसकी साँसें अब भी चल रही थीं।  

    उसके भीगे बाल अद्वैत के हाथों में उलझ गए थे। अद्वैत ने उसके चेहरे को गौर से देखा — चेहरा इतना मासूम था कि उसे यकीन ही नहीं हुआ कि यही लड़की अभी कुछ ही पल पहले अपनी जान देने जा रही थी। उसकी आँखें सुर्ख थीं, शायद कई रातों से सोई नहीं थी। उसकी पलकें आधी खुली थीं, बाल बिखरे हुए थे और होंठ सफ़ेद हो चुके थे… मानो उसकी आत्मा धीरे-धीरे उसके जिस्म से अलग हो रही हो। 

    “तुम ठीक हो?” अद्वैत ने उसके चेहरे पर हाथ रखते हुए पूछा, मगर लड़की की पलकें धीरे-धीरे झपकने लगीं।

    “शिट!” अद्वैत फुसफुसाया।।  

    “सुनो….. सुनो!” अद्वैत ने हल्के से उसे झिंझोड़ा, मगर कोई जवाब नहीं आया।  

    उसका मन घबराने लगा। उसे समझ नहीं आया कि क्या करे। आसपास कोई और दिखाई नहीं दे रहा था। वो लड़की को इस हालत में यूँ ही वहाँ नहीं छोड़ सकता था।  

    “अब क्या करूँ?” उसके मन में सवाल घूमने लगे।

    लड़की की हालत देखकर उसे यकीन हो गया कि उसे उसकी देखभाल की ज़रूरत है। बिना ज्यादा सोचे, थोड़ा हिचकिचाते हुए उसने लड़की को अपनी बाहों में उठाया और उसे कार में ले आया। उसके कपड़े बर्फ जैसे ठंडे हो चुके थे। अद्वैत ने अपना जैकेट उसके ऊपर डाल दिया और गाड़ी स्टार्ट कर दी।  

    रास्ते भर उसके मन में सवालों का सैलाब उमड़ रहा था — “ये लड़की कौन है? इसके साथ ऐसा क्या हुआ होगा? और किस बात ने उसे इतना तोड़ दिया था कि ख़ुदकुशी ही उसे आखिरी रास्ता लगी?”

    लड़की का चेहरा कार की रोशनी में हल्का-हल्का चमक रहा था — उस चेहरे पर कुछ ऐसा था जो अद्वैत को बेचैन कर रहा था… एक मासूमियत, एक खोखली उदासी….. कुछ ऐसा जिसे देखकर लगता था कि ये लड़की बहुत कुछ सह चुकी है।  

    अपने अपार्टमेंट पर पहुँचकर अद्वैत ने उसे गोद में उठाया और अंदर ले आया। कमरे का अंधेरा उसे आज ज़्यादा ठंडा और सुनसान लगा। उसने लड़की को धीरे-से सोफे पर लिटाया और उसे ढकने के लिए चादर ढूंढने लगा।  

    अपने कमरे से एक अतिरिक्त मुलायम चादर लाकर अद्वैत ने उसे पूरी तरह ढक दिया। तभी अद्वैत का हाथ उसकी ब्रेसलैट से टकराया, जिसमे सुन्दर सी कैलीग्राफी में “रूहानी” नाम लिखा हुआ था। 

     

    “रूहानी” उसने फुसफुसाते हुए दोहराया, मानो कोई मंत्र उच्चारण कर रहा हो।  

    अद्वैत ने धीरे-से उसके हाथों को अपने हाथ में लिया — उसकी उंगलियाँ सख्त और ठंडी थीं। वो उस हाथ को अपने हाथों में मसलने लगा ताकि उसकी ठंडक कुछ कम हो सके।  

    रूहानी की आँखें हल्की-सी खुलीं, मगर वो उसे देख भी नहीं पाई। उसके होंठ हिले, मगर कोई आवाज़ नहीं निकली।  

    “तुम. … ठीक हो?” अद्वैत ने झुककर पूछा।  

    रूहानी के होंठ काँप रहे थे, जैसे किसी डर ने उसकी आवाज़ छीन ली हो।  

    “मैं…. मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगा,” अद्वैत की आवाज़ में अजीब-सा अपनापन था, जिसे सुनकर लड़की के चेहरे पर हल्की राहत की परछाई उभरी।  

    वो धीरे से पास वाले सोफे पर बैठ गया, उसके चेहरे की ओर देखते हुए।   

    कमरे में सिर्फ दीवार घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। अद्वैत का दिल अब भी तेजी से धड़क रहा था। 

    आखिर रूहानी के साथ क्या हुआ होगा? उसकी आँखों में जो खालीपन था, उसमें कितनी कहानियाँ दबी थीं… अद्वैत जानना चाहता था, मगर इस वक्त सबसे ज़रूरी था कि वो सुरक्षित रहे।  

    “शायद कल सुबह ही सब कुछ समझ आए…” उसने खुद को दिलासा दिया और अपने कमरे में चले गया सोने के लिए मगर उस रात नींद उसके लिए दूर की चीज़ थी…

    —————

    क्या अद्वैत ने सच में रूहानी को बचा लिया, या वो सिर्फ एक परछाई थी जो उसकी ज़िंदगी में अचानक दाखिल हो गई?

    रूहानी की आँखों में जो डर था, वो किसी एक रात की देन था या एक लंबे अतीत का बोझ?

    क्या अद्वैत सच में जानना चाहता था कि रूहानी की कहानी क्या है, या वो बस उसकी उदासी में खुद को देख रहा था?

  • साजन साजन तेरी दुल्हन_तुझको पुकारे_आजा_❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरी राहों में बिछे हैं मेरे अरमान सारे,

    • तेरे बिना अधूरे हैं ये ख्वाब हमारे।

    साजन, तेरी दुल्हन हर पल तुझे ही पुकारे,

    आ जा कि थम जाएँ ये इंतज़ार के किनारे।

    सिंदूर की लकीरों में बस तेरा ही नाम है,

    मेरी हर धड़कन पे लिखा तेरा पैगाम है।

    साजन, तेरी दुल्हन सजी बैठी है चौखट पे,

    आ जा कि तेरे बिना सब कुछ वीरान है।

    भीगी सी पलकों में तेरी तस्वीर बसाई है,

    तेरे ख्यालों से ही ये दुनिया सजाई है।

    साजन, तेरी दुल्हन अब और ना तरसाए खुद को,

    आ जा कि तेरे बिना हर खुशी पर परछाई है।

    रूठी हुई रातें भी तुझसे ही मानेंगी,

    सूनी ये बाहें बस तुझको ही जानेंगी।

    साजन, तेरी दुल्हन तेरे कदमों की आहट सुने,

    आ जा कि ये साँसें अब तुझसे ही चलेंगी।