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रात गहराती जा रही थी। बारिश की मोटी बूंदें विंडशील्ड पर गिरकर हल्की धुंध बना रही थीं, जिससे सड़क के दृश्य और भी धुंधले हो गए थे। पूरे शहर में सन्नाटा था, बस कभी-कभी दूर से आती कारों की हल्की आवाज़ उस खामोशी को तोड़ देती।
अनाया ने अपने भीतर की घबराहट को दबाते हुए कार की स्पीड बढ़ा दी। उसकी उंगलियाँ स्टीयरिंग व्हील पर कसकर जमी थीं, लेकिन उसका ध्यान बीच बीच में अपने साइड में बैठे अंजान और घायल शख्स पर जा कर ठहर रहा था।
रणवीर, एक अजनबी, जिसे वह जानती तक नहीं थी, अब उसकी कार में बैठा था। माथे से बहता खून उसकी सफेद शर्ट को लाल कर रहा था, लेकिन उसकी आँखों में न कोई दर्द झलक रहा था, न ही कोई कमजोरी।
“हम कहाँ जा रहे हैं?” अनाया ने आखिरकार चुप्पी तोड़ते हुए पूछा। उसकी आवाज़ में हल्की झुंझलाहट थी।
रणवीर की नजरें अब भी खिड़की से बाहर टिकी थीं। उसकी चौकस निगाहें हर उस चीज़ पर थीं, जो उनकी कार का पीछा कर सकती थी।
“तुम्हें कुछ भी जानने की जरूरत नहीं है, बस गाड़ी चलाती रहो,” रणवीर ने ठंडी आवाज़ में कहा।
उसका लहजा आदेश देने वाला था, उसके इस अंदाज को देखकर साफ पता लगाया जा सकता था कि उसे लोगों को अपने काबू में रखना पसंद है। लेकिन अनाया को यह अंदाज़ बिल्कुल पसंद नहीं आया।
“देखो, मैंने तुम्हारी मदद की है,” अनाया ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं तुम्हारी हर बात मानूँगी। मुझे घर जाना है, और तुम्हें। तुम्हें डॉक्टर की ज़रूरत है!” अनाया ने ड्राइव करते हुए तिरछी नजरों से रणवीर को देखा।
रणवीर ने पहली बार अपनी निगाहें उससे मिलाईं। उसकी आँखों में एक अजीब सा सख्तपन था, लेकिन उनमें एक रहस्य भी छुपा था।
“अगर तुमने गाड़ी रोकी, तो यकीन मानो, तुम्हें इसका पछतावा होगा। और मैं कुछ भी करने से पहले नहीं सोचता।” उसने शांत लेकिन चेतावनी भरे लहज़े में कहा।
” Oh god! मैं कहाँ फंस गई। please save me. ” अनाया ने बेचारी सी शक्ल बनाते हुए मन में सोचा।
अनाया का दिल तेजी से धड़क रहा था। उसने महसूस किया कि रणवीर कोई आम इंसान नहीं है। उसके अंदाज़ में एक अलग ही आभा थी। एक ऐसा रहस्य जिसे कोई समझ नहीं सकता था।
कुछ देर बाद, जब कार शहर की मुख्य सड़कों से दूर निकल आई, रणवीर ने अचानक कहा, “इस जगह से राइट turn लो।”
अनाया ने हिचकिचाते हुए कार एक सुनसान गली में मोड़ दी। वहाँ दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा था। सड़क के दोनों ओर पुराने बंद मकान थे, जिनकी खिड़कियाँ भी अंधेरे में खोई हुई लग रही थीं। हल्की रोशनी में बारिश की बूंदें चमक रही थीं, और हवा में एक अजीब सा सर्द अहसास था।
“यहाँ रोक दो,” रणवीर ने धीमे स्वर में कहा।
अनाया ने कार को रोक दिया। उसने बाहर झांक कर देखा, वहाँ एक पुराना सा लेकिन बड़ा सा मकान था। उसकी नज़र रणवीर के माथे से बहते खून पर गई। वह जानती थी कि अगर जल्दी उसका इलाज नहीं हुआ तो वह मुश्किल में पड़ सकता है।
“रुको! तुम्हें डॉक्टर की ज़रूरत है,” अनाया ने धीमे लेकिन दृढ़ स्वर में कहा।
रणवीर हल्के से मुस्कुराया, मानो उसकी चिंता उसे मज़ाक लग रही हो।
“मुझे कई चीज़ों की ज़रूरत है, लेकिन डॉक्टर उनमें से एक नहीं है,” रणवीर ने रहस्यमय लहजे में कहा।
अनाया की सहनशीलता अब जवाब देने लगी थी। उसने झुंझलाकर कहा, “तुमने मेरी गाड़ी में खून बहाया है, और ऊपर से मुझे धमका भी रहे हो! आखिर हो कौन तुम?”
रणवीर ने कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, लेकिन तभी अनाया ने उसका हाथ पकड़ लिया। रणवीर ने पहले अपने हाथ की तरफ देखा और फिर अनाया की तरफ। जो उसे बड़े गौर से देख रही थी।
“रुको!” उसकी आवाज़ में अब घबराहट कम, जिज्ञासा ज्यादा थी। “कम से कम यह तो बताओ कि यह सब क्या था? कौन थे वो लोग जो तुम्हारा पीछा कर रहे थे?”
रणवीर कुछ पल के लिए रुका। उसके चेहरे पर एक पल को हल्की कठोरता छा गई, लेकिन फिर वह सहज हो गया।
“कुछ जवाब जितना कम जानो, उतना बेहतर होता है,” रणवीर ने शांत स्वर में कहा और गाड़ी से उतर गया।
अनाया उसे जाते हुए देखती रही, लेकिन उसका मन इस रहस्य से बाहर नहीं निकल पा रहा था।
जब रणवीर कार से उतरा और अंधेरे में गायब होने लगा, तो अनाया का मन नहीं माना। उसने खिड़की से झांककर उसे जाते हुए देखा। उसका कद लंबा और चाल में एक आत्मविश्वास था, मानो वह किसी से डरता ही न हो।
बारिश अब भी गिर रही थी, लेकिन उसके भीतर एक तूफान उठ चुका था।
“आखिर कौन था वो आदमी?” उसने खुद से फुसफुसाते हुए कहा।
उसकी जिंदगी हमेशा से सीधी-सादी थी, लेकिन आज रात ने सब कुछ बदल दिया था। वह जानती थी कि वह चाहकर भी इस रात को भुला नहीं सकेगी।
क्या यह मुलाकात केवल एक संयोग था, या फिर उसकी तक़दीर ने किसी नए मोड़ की तरफ उसका रास्ता मोड़ दिया था?
(जारी…)

राधे राधे दोस्तों,
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