राधे राधे दोस्तों,
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बारिश अब भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अनाया ने एक गहरी सांस ली और स्टीयरिंग व्हील पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
रणवीर अंधेरे में गायब हो चुका था, लेकिन उसका असर अब भी अनाया के दिलोदिमाग पर छाया हुआ था। उसकी बातों का रहस्यमय अंदाज़, उसके चेहरे की गंभीरता, और उसकी आँखों में छिपे अनकहे जवाब, सबकुछ अनाया के मन में एक पहेली की तरह घूम रहा था।
“यह सब क्या था?” उसने खुद से बुदबुदाया।
वह अपना सिर हल्के से झटककर सोचने लगी कि उसे अब घर जाना चाहिए। बहुत देर हो चुकी थी, और माँ अब तक उसकी चिंता कर रही होंगी। उसने धीरे-धीरे एक्सीलेरेटर पर पैर रखा और अगले ही पल कार को मैन सड़क की तरफ घुमा दिया।
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जब अनाया अपने अपार्टमेंट पहुंची, तो घड़ी रात के ढाई बजा रही थी। उसने चुपचाप दरवाज़ा खोला और हल्के कदमों से अंदर दाखिल हुई।
लिविंग रूम में हल्की रोशनी जल रही थी, और सोफे पर उसकी माँ रीतिका बैठी थीं, जिनकी आँखों में चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं।
“अनाया!” उनकी आवाज़ में राहत थी, लेकिन साथ ही हल्की नाराज़गी भी। “आज बहुत देर कर दी तुमने और फोन क्यों नहीं उठाया?”
अनाया ने पर्स टेबल पर रखा और घुटनों के बल बैठकर रीतिका का हाथ पकड़ लिया।
“सॉरी मम्मा, कार रास्ते में खराब हो गई थी, और फिर बारिश में थोड़ी देर लग गई,” उसने बहाना बनाया।
रीतिका ने उसे ध्यान से देखा, फिर उसके भीगे हुए कपड़ों और चेहरे की थकान को महसूस किया।
“ठीक है, जाओ, जल्दी से कपड़े बदल को नहीं तो ठंड लग जायेगी। मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाकर लाती हूँ।,” उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहा।
अनाया, ” नहीं मम्मा, मैं थक रही हूँ इसलिए बस सोना चाहती हूँ, आप भी जाकर सो जाइये। ” बोलकर अनाया अपने रूम की तरफ चली गई। उसके जाने के बात रीतिका भी अपने रूम में चली गई।
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अनाया अपने रूम में आई और क्लोसेट में से कपड़े निकालकर वॉशरूम की तरफ चली गई थोड़ी देर बाद वो बाहर आई उसने एक टी शर्ट और लोवर पहना हुआ था। वो अपने बेड पर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी। लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।
रणवीर का चेहरा उसकी आँखों के सामने घूम रहा था। कौन था वह? किससे भाग रहा था? और क्यों? उसके दिमाग में सवालों की बाढ़ आ गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं था। रणवीर के बारे में सोचते सोचते कब उसकी आँख लगी उसे पता ही नहीं चला।
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अगली सुबह
जब अनाया सुबह उठी, तो सूरज की किरणें हल्के पर्दों से छनकर उसके कमरे में आ रही थीं। उसने आलस से करवट बदली, लेकिन तभी उसका फोन वाइब्रेट होने लगा।
उसने स्क्रीन पर देखा, राहुल कॉलिंग।
राहुल उसका बचपन का दोस्त था और एक न्यूज रिपोर्टर भी। वह अक्सर शहर की बड़ी घटनाओं की खबरें जुटाने में व्यस्त रहता था।
“हेलो?” अनाया ने फोन उठाते ही कहा।
“अनाया, क्या तुमने आज सुबह की खबर देखी?” राहुल की आवाज़ में उत्सुकता थी।
“नहीं, क्यों? ऐसा क्या हो गया जो तू मुझे सुबह सुबह कॉल कर रहा है?” अनाया उबासी लेते हुए बोली।
“एक बड़ी वारदात हुई है। कल रात शहर के बाहर एक खुफिया ठिकाने पर पुलिस रेड हुई। वहाँ से कई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोग पकड़े गए, लेकिन मुख्य सरगना बच निकला।”
अनाया की धड़कन तेज हो गई। उसके सामने अपने आप ही रणवीर के चेहरा आ गया।
“और जानते है, सबसे दिलचस्प बात क्या है?” राहुल ने अपनी आवाज़ धीमी कर ली, “जिस आदमी की तलाश हो रही है, उसका नाम रणवीर है।”
अनाया की उंगलियाँ फोन के चारों ओर कस गईं।
“क्या?” उसकी आवाज़ फुसफुसाहट में बदल गई।
“हाँ, पुलिस उसे पूरे शहर में ढूंढ रही है। वो बहुत खतरनाक है, और जो कोई भी उससे जुड़ा है, वह खतरे में पड़ सकता है।”
अनाया को अपनी साँस अटकती हुई महसूस हुई।
“तुम ठीक तो हो न?” सामने से कोई रिस्पोंस ना मिलता देख राहुल ने पूछा।
“हाँ…हाँ, मैं ठीक हूँ,” उसने जल्दबाजी में जवाब दिया।
लेकिन सच तो यह था कि वह ठीक नहीं थी। क्योंकि रणवीर उससे जुड़ चुका था, चाहे वह उसे जानती हो या नहीं।
अनाया जल्दी से बोली, ” तू सुबह सुबह क्यों दिमाग खराब कर रहा है चल अब फोन रख मुझे रेडी होकर ऑफिस जाना है। “
राहुल से बात करने के बाद अनाया ने झटके से फोन काट दिया। लेकिन उसकी धड़कनें अभी भी तेज थीं, और दिमाग में सवालों का सैलाब था।
रणवीर का नाम सुनते ही जो बेचैनी उसके अंदर उठी थी, उसने उसे और उलझा दिया था। लेकिन उसने खुद से कहा कि वह इस बारे में ज्यादा नहीं सोचेगी। “रणवीर उसकी जिंदगी का हिस्सा नहीं था, और उसे उसकी कोई चिंता नहीं करनी चाहिए। बस वो एक एक्सीडेंट था और कुछ भी नहीं। ” अनाया ने खुद को समझाया।
अनाया रेडी होकर अपने ऑफिस के लिए निकल गई। अगले कुछ दिन सामान्य रूप से बीते। अनाया ने खुद को अपने काम में बहुत बिजी कर लिया। इस बीच शायद उसे रणवीर के बारे में सोचने का टाईम भी नहीं मिला और वो उस रात के बारे में भी भूल चुकी थी।
अनाया अपने केबिन में बैठी लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी तभी उसके केबिन का डॉर नॉक हुआ और एक लड़की अंदर आई। उस लड़की के हाथ में एक फाइल थी।
अनाया, ” हाँ, तनवी बोलो। “
तनवी उसके सामने चेयर पर बैठते हुए बोली, ” अनाया यार, एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट मिला है लेकिन उसके लिए हम में से किसी को दिल्ली जाना पड़ेगा। टीम के साथ। देख तू तो जानती है मैं नहीं जा सकती।”
अनाया ने तनवी के हाथ पर अपना हाथ रखा और उसकी तरफ देखते हुए बोली, ” इसमें तू इतना क्या सोच रही है? मुझे पता ही तेरी फैमिली प्रॉब्लम है ज्यादा मत सोच मैं चली जाऊँगी। तू और जाह्नवी यहाँ का काम संभाल लेना। “
तनवी खुश होते हुए बोली, ” Thanks yaar, और ये फाइल है जिसमें क्लाइंट की सारी डिटेल्स है। इसे अच्छे से रीड कर ले और फिर टीम भी रेडी करनी होगी। “
अपनी बात बोलकर तनवी वहाँ से चली गई।
क्या मोड़ लेने वाली है अनाया की जिंदगी?


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