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एक अनकही शुरुआत

पढ़ने का समय : 5 मिनट

राधे राधे दोस्तों,

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“कभी-कभी जो सबसे अजनबी होता है, वही हमारी तक़दीर बन जाता है।”

ऐसी ही कुछ कहानी है, अनाया मेहरा और रणवीर प्रताप सिंह की। जो एक दूसरे से बारिश की अंधेरी रात में मिलते हैं । लेकिन उन्हें नहीं पता था ये अंजान मुलाकात उन्हें कहाँ लेकर जाएगी। 

 

 

मुंबई, इंडिया

एक बरसात की रात

 

     बारिश की बूंदें तेज़ी से कांच की खिड़कियों पर टकरा रही थीं, और बाहर घने बादलों के बीच बिजली कभी-कभी अपनी चमक बिखेर रही थी। मुंबई की यह बारिश हमेशा अनाया को पसंद थी, लेकिन आज उसे ये बारिश बेचैन कर रही थी।

 

     अनाया मेहरा, जो शहर की एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर थी, अपने ऑफिस से घर लौट रही थी। वह अपनी कार चला रही थी, लेकिन मन में अजीब सी घबराहट थी। शायद यह सिर्फ बारिश का असर था… या शायद कुछ और?

 

     रात के ग्यारह बज रहे थे, और सड़कें काफी हद तक खाली हो चुकी थीं। उसने अपने रेडियो का वॉल्यूम बढ़ाया और एक पुराना गाना बजने लगा – “जिंदगी कैसी है पहेली हाय…” । अनाया गाना गुनगुनाते हुए कार ड्राइव कर रही थी। 

 

     जैसे ही उसने एक सुनसान सड़क पर कार मोड़ी, अचानक सामने एक आदमी दौड़ता हुआ आया। अनाया ने जल्दी से ब्रेक लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

 

“धड़ाम!”

 

     उसका दिल जोर से धड़क उठा। कार किसी चीज़ से टकराई थी, और एक आदमी उसकी कार के सामने गिर पड़ा था।

 

     “हे भगवान! ये क्या हो गया? ” अनाया ने घबराते हुए कार का दरवाजा खोला और दौड़कर उस आदमी के पास गई।

 

     वह ज़मीन पर पड़ा था, काले कपड़ों में, और उसके माथे से खून निकल रहा था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन वह होश में था।

 

     “आप ठीक तो हैं ना?” अनाया ने घबराते हुए पूछा। 

 

     आदमी ने धीरे से सिर उठाया, और उसकी गहरी, तेज़ आँखें अनाया से मिलीं।

 

     “तुम्हें यहाँ नहीं होना चाहिए था,” उसने धीमे मगर सख्त लहज़े में कहा। उस आदमी की आवाज़ में एक अजीब सा वजन था—गंभीर, रहस्यमयी।

 

     “क्या?” अनाया उसकी बात समझ नहीं पाई। अनाया असमंजस भरी नजरों से उस आदमी को देख रही थी। 

 

    तभी, सड़क के दूसरी तरफ कुछ लोग दौड़ते हुए आ रहे थे, उनके हाथों में छुपे हुए हथियार चमक रहे थे।

 

     आदमी ने झटके से अनाया का हाथ पकड़ा और लगभग फुसफुसाते हुए कहा, “यहाँ से निकलो। अभी!”

 

     अनाया समझ नहीं पाई कि वह कौन था और उसके साथ क्या हो रहा था, लेकिन उसके दिल ने कहा कि वह मुसीबत में है। इसलिए बिना कोई और सवाल किए, अनाया ने उस आदमी की मदद की और कार के अंदर बैठने में सहायता की।

 

     “तुम कौन हो?” उसने कार स्टार्ट करते हुए पूछा।

 

     उस आदमी ने खिड़की से बाहर देखा। वह लोग अब उनके बहुत करीब थे।

 

     “रणवीर,” उसने बिना उसकी ओर देखे जवाब दिया। “और अगर तुम अपनी ज़िंदगी की परवाह करती हो, तो गाड़ी चलाओ! जल्दी! “

 

     अनाया ने कोई और सवाल नहीं किया और एक्सीलेरेटर पर ज़ोर दिया। कार तेज़ी से मुंबई की रात के अंधेरे में खो गई…

 

—-

 

     कार तेज़ी से मुंबई की सुनसान सड़कों पर दौड़ रही थी। बारिश अब और तेज़ हो चुकी थी, और अनाया का दिल भी उसी रफ्तार से धड़क रहा था। उसके दिमाग में हजारों सवाल उमड़ रहे थे—रणवीर कौन था? वो लोग कौन थे जो उसका पीछा कर रहे थे? और सबसे बड़ी बात—क्या उसने किसी मुसीबत को अपनी जिंदगी में बुला लिया था?

 

     रणवीर पैसेंजर सीट से टेक लगाकर बैठा हुआ था। उसके सिर से खून बह रहा था, लेकिन उसने अपनी तकलीफ को छिपा रखा था। अनाया की नजरें ना चाहते हुए भी रणवीर पर जा कर ठहर रही थी। 

 

     “अब बता सकते हो कि तुम कौन हो और तुम्हारा पीछा क्यों किया जा रहा था?” अनाया ने सख्त लहज़े में पूछा, लेकिन उसकी आवाज़ में छिपी घबराहट साफ़ थी। उसे डर भी लग रहा था । ” कहीं मैंने किसी गलत आदमी की तो मदद नहीं कर दी। ” अनाया सोचने लगी। 

 

     रणवीर ने एक गहरी सांस ली, फिर बिना उसकी तरफ देखे कहा, “तुमने बेवजह खुद को इस मामले में फंसा लिया है। जो देखा, उसे भूल जाओ और मुझे यहीं उतार दो।” रणवीर अनाया की तरफ देखते हुए बोला। 

 

     “मुझे भूल जाने की सलाह देने वाले तुम कौन होते हो? मेरी कार से टकराए तुम थे, मैं नहीं कहा था मेरी कार के सामने आओ। अब मुझे तुम्हारी हेल्प तो करनी ही थी।” अनाया रुडली बोली। 

 

     रणवीर हल्के से मुस्कुराया, लेकिन उसके चेहरे पर कोई नर्मी नहीं थी।

 

     “ये तुम्हारे बस की बात नहीं है, अनाया।” रणवीर बोला। 

 

     ” हैं! तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?” अनाया ने चौंककर ब्रेक लगाई।

 

     रणवीर ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी ठंडक थी। “मैं तुम्हारे बारे में सब जानता हूँ, अनाया मेहरा। तुम क्या करती हो, कहाँ रहती हो, तुम्हारी पसंद-नापसंद… और यहाँ तक कि तुम कॉफी में चीनी नहीं डालती, क्योंकि तुम्हें लगता है कि मीठा मोटा कर देता है।”

 

     अनाया का चेहरा सफेद पड़ गया। “तुम कौन हो?” उसकी आवाज़ अब हल्की कांप रही थी। उसकी आँखों में डर उतर आया था। 

 

     रणवीर उसके सवालों का जवाब देने के बजाय धीरे से कहा, “गाड़ी चलाओ, हमें अभी यहाँ से दूर जाना होगा।”

 

     अनाया के पास उसकी बात मानने की सिवा कोई और चारा नहीं था। उसने खुद ने ही ये बिन मांगी मुसीबत मोल ली है। अनाया ने दोबारा कार स्टार्ट की और आगे बढ़ने लगी। लेकिन अब उसका डर बढ़ चुका था। उसे लगा रणवीर कोई आम इंसान नहीं था।

 

कौन था रणवीर? वह सब कुछ कैसे जानता

था? और इस अजनबी के साथ अनाया की तक़दीर क्या मोड़ लेने वाली थी?

 

(जारी…)

 

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Neha Goyal

मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

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