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श्रेणी: ऑडियो कहानियां

कहानी पढ़ें हीं नहीं सुनें भी,आपके दिलों तक पहुंचाती खूबसूरत कहानियां पढ़ें लिखें और सुनें भी।

  • मेरी किताबों को पढ़ो

    मेरी किताबों को पढ़ो

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जानना है अगर मुझे

     तो मेरी कविताओं को पढ़ो

    शब्दों को नहीं उनमें छुपी

     मेरी भावनाओं को समझो

     पढ़ना है मुझे, तो उन लफ्ज़ों के बीच उतरना, 

    जहाँ हर खामोशी भी कुछ कहने की कोशिश करती है। 

    कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी ने कभी जानी नहीं,

     मैंने उन्हें चुपके से शब्दों में

     ढालकर कविताओं में छुपाया है।

    जानना चाहते हो मुझे, 

    तो मेरी किताबों को खोलो हर पन्ने पर लिखे 

    अनकहे एहसासों को पढ़ो।

     उतार दिया है मैंने अपना हाल-ए-दिल

    वो भी जो मैंने खुद से कभी कहा नहीं मेरी हर कविता में मेरा एक अधूरा हिस्सा रहता है कहीं।

    अगर सच में समझना है मुझे,

     तो लफ्ज़ों के उस समंदर में उतरना, 

    जहाँ दर्द भी लहर बनकर 

    चुपचाप किनारे छू जाता है। 

    शब्दों के इस विशाल समंदर से

     कुछ मोती चुराए हैं मैंने,

     और उनसे ही भावनाओं का

     एक पूरा जहां बनाया है। 

    एक बार उस समंदर में उतरकर तो देखो,

    शायद किनारे तक आते-आते

     तुम मुझे थोड़ा-सा समझ जाओ… 

    अगर जानना है मुझे, तो बस… 

    मेरी किताबों को पढ़ो। Lakshmi Kumari

  • प्यार करते हो तो तड़पाते क्यों हो

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    प्यार करते हो तो तड़पाते क्यों हो,

    दिल में बसाकर यूँ रुलाते क्यों हो।

    कहते हो जान हो मेरी हर घड़ी,

    फिर दूर रहकर ये सताते क्यों हो।

    वादा किया था साथ निभाने का,

    हर मोड़ पे हाथ थाम जाने का,

    फिर खामोशी की चादर ओढ़कर,

    मुझसे ही नज़रें चुराते क्यों हो।

    मेरे ख्वाबों में तुम ही तुम रहते हो,

    फिर हकीकत में बदल जाते क्यों हो।

    प्यार करते हो अगर सच्चे दिल से,

    तो हर बात पे यूँ आज़माते क्यों हो।

    दिल की हर धड़कन तेरे नाम कर दी,

    हर खुशी तेरे अरमान कर दी,

    फिर मेरी मोहब्बत को यूँ सवाल बना कर,

    मुझको ही गलत ठहराते क्यों हो।

  • तेरे जाने के बाद

    तेरे जाने के बाद

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    तेरे जाने के बाद …!!

    रास नहीं आया मुझको मेरे 

    ही घर का कोई कोना,

    सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,

    जहां दिन और रात ,अब काटने को

    दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,

    नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन

    अंधेरे में चली जाएगी,

    तेरे जाने के बाद  हां तेरे

    जाने के बाद एहसास हुआ

    मुझे कमी तेरी कमी यादों की

    चादर इस तरह तड़पाएगी ,

    तेरे जाने के बाद दिल

    खाली – खाली सा लगता है  ,

    तेरी पनाहों में आने को

    दिल कितना तड़पता है  ,

    आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,

    तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!

  • निभा नहीं सकते

    निभा नहीं सकते

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तुम निभा नहीं सकते, तो हम ज़ाहिर क्यों करें,

    तुम चार कदम चल नहीं सकते, तो हम हाथ क्यों थामें,

    • एक तरफ है प्यार मेरा,

    तो इसे एक तरफ ही क्यों ना रहने दें।

  • बच्चों की यात्रा

    बच्चों की यात्रा

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक नन्हा चाँद रहता था। उसका नाम था चमकीला। चमकीला हमेशा आकाश में तारे के साथ खेलता और रात का नज़ारा देखने आता। लेकिन एक दिन, उसे एक सपना आया। उसने देखा कि वह धरती पर जाकर सारे बच्चों से मिलना चाहता है।

    चमकीला ने अपने दोस्तों, तारे और बादल से कहा, “मैं धरती पर जाना चाहता हूँ। मैं वहाँ के बच्चों के साथ खेलना चाहता हूँ।” तारे ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन चमकीला, तुम तो आकाश का चाँद हो। तुम धरती पर कैसे जा सकते हो?” 

    चमकीला ने कहा, “मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा। मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए।” उसने बादल से पूछा, “क्या तुम मुझे नीचे लाने में मदद करोगे?” बादल ने कहा, “बिल्कुल, मैं तुम्हें नीचे ले चलूँगा। लेकिन तुम्हें जल्दी आना होगा, वरना सूरज उग जाएगा।”

    तो चमकीला और बादल ने मिलकर एक योजना बनाई। बादल ने चमकीला को अपने विशाल पंखों में समेटा और धीरे-धीरे नीचे की ओर उड़ने लगा। जैसे ही वे धरती के करीब पहुँचे, चमकीला बहुत उत्साहित था।

    जब वे धरती पर पहुँचे, तो चमकीला ने देखा कि बच्चे खेल रहे थे, हंस रहे थे और खुश थे। चमकीला ने तुरंत बच्चों के बीच में आने की इच्छा व्यक्त की। बच्चे उसकी चमकीली रोशनी और सुंदरता को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने चाँद से कहा, “क्या आप सच में चाँद हैं?

    चमकीला ने कहा, “हाँ, मैं ही हूँ! मैं यहाँ खेलने आया हूँ। चलो, हम साथ में खेलते हैं!” बच्चे बहुत खुश हुए और उन्होंने चमकीला के साथ खेलना शुरू कर दिया। वे दौड़ने लगे, कूदने लगे और चाँद की रोशनी में तारे की तरह चमकने लगे

    चमकीला ने देखा कि बच्चे कितने खुश हैं। वह उनके साथ खेलते हुए समय को भूल गया। लेकिन जल्द ही सूरज की किरणें फैलने लगीं। चमकीला को जल्दी समझ में आया कि अब उसे वापस आकाश में जाना होगा।

    बच्चों ने उसे रोकने की कोशिश की, “नहीं, चमकीला! मत जाओ!” लेकिन चमकीला ने कहा, “मुझे जाना होगा, लेकिन मैं हमेशा तुम सबके साथ रहूँगा। जब भी तुम रात में मुझे देखोगे, तो याद रखना, मैं तुम्हारे दोस्त हूँ।

    बादल ने फिर से चमकीला को अपने पंखों में समेटा और धीरे-धीरे उसे आसमान में ले जाने लगा। जब वह वापस चाँद पर पहुँचा, तो उसने अपने दोस्तों को बताया कि उसने धरती पर बच्चों के साथ कितना मजेदार समय बिताया

    उस रात, जब बच्चे सो रहे थे, उन्होंने चाँद को अपनी खिड़की से देखा और मुस्कुराने लगे। उन्हें पता था कि उन पर हमेशा चमकीला की नज़र है।

    सपने देखने और उन्हें पूरा करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। दोस्ती और खुशी हर जगह मिलती है, बस हमें उसे पहचानने का तरीका सीखना होता है।

  • सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    अर्ज किया है,,

    बिछड़े हुए लोग जब बुरे दौर से मिलेंगे 

    दर्द जब भी मिलेंगे चारों ओर से मिलेंगे!!

    सुना है बहुत खुश है वो किसी ओर से मिल कर 

    आग तो तब लगेगी जब हम किसी ओर से मिलेंगे… 😎😎

  • अच्छे इंसान की पहचान…

    अच्छे इंसान की पहचान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    स्त्री की भावनाएं सराय जैसी नहीं हैं

    कि कोई भी आया , रूका और चला गया

    स्त्री की भावनाएं मनमोहक महल जैसी हैं

    जिसमें या तो कोई आ नहीं सकता

    और यदि आ जाए

    तो फिर जीवन भर जा नहीं सकता

    एक औरत में अगर आपको कुछ जानना हैं

    तो मौन को पढ़िए..

    सुन्दरता देखनी हैं

    तो सादगी में ढूंढिए

    और खुशी देखनी हैं

    तो बंधनों से मुक्त करिये ….इससे बेहतर आप किसी स्त्री को समझ नहीं सकते. इसीलिए आप एक अच्छे स्त्री की संतान  है इसका पता बस ऐसे ही लग सकता है की आप दूसरे स्त्री को कितना समझते है और उसे कितना सम्मान देते है.. आपके कर्म ही आपको ऊंचा उठती है इसीलिए ज़ब भी कुछ कीजिये एक बार खुद से जरूर पूछिए क्या ये सही है.. और फिर ज़ब आपके अंदर से जवाब आये तो वो काम बिना डरे कर दीजिये.. पर इस बात का खास ध्यान रखे की आपके कारण किसी को तकलीफ ना हो.. क्योकि इस दुनिया मे गम देना आसान है पर किसी को ख़ुशी देना बहुत मुश्किल…तो किसी के चेहरे की ख़ुशी की वजह बने ना की उनकी तकलीफो की…✍️✍️

  • टैम्पो स्टैंड

    टैम्पो स्टैंड

    पढ़ने का समय : 6 मिनट
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    अजय ऑटो आने का ईंतजार कर रहा होता है ! कुच्छ कुच्छ देर पर अपने जेब से अपना मोबाईल फोन नीकाल कर टाईम देखता रहता है ! पता नहीं क्या हो गया है….आज एक भी ऑटो नजर नहीं आ रही है ! अजय ऑटो के ईंतजार करते हुए बोला …..कुच्छ लोग और टैम्पो का ईंतजार कर रहे होते हैं ! भीड़ भार से थोरा दुर यह गांव का छोटा सा ऑटो स्टैन्ड है ! यहां भीड़ भार कम होती है ! आप जानते हीं हैं…की गांव की सड़क कैसी होती है…यहां कम लोगों के हीं आना जाना होती है ! इस लिए ईस रूट में सवारी गाड़ी कम हीं चला करती है ..अब शहर जितना सुविधा तो नहीं ना मिलती है ! गांव में रहने वाले लोगों को..
    शहर में रहने वालें लोगों को तो हर प्रकार की सविधा उनके घर तक भी…पहुंच जाती है ! क्यों की शहर में अमीर लोग बहुत पैसे वाले लोग रहते हैं……और वे लोग ज्यादा पैसा खर्च करके…अपने दैनिक सुविधाओं को पुरा कर अपने जिवन आसान बनाते हैं ! आधी से ज्यादा सवारी से भरी हुई  ऑटो आकर रूकती है ! 
    अजय भीड़ को देख कर नहीं बैठता है ! दो तीन लोग उसमें बैठ कर चले जाते हैं ! अजय परेशानी से फीर से ऑटो आने का ईंतजार करने लगता है ! तभी एक सवारी से भरी टैम्पो आती है…अजय अपने हांथ हिलाकर ऑटो को रूकने का ईशारा करता है….ऑटो नही रूकता है !
    तभी एक तरफ से शीला कान्धे में पर्श और हांथ में किताब कॉपी लिए आती हुई नजर आती है ! शीला भी आकर खड़ी होती है ! हे भगवान मैं काफी लेट हो गई हूं….बस जल्दी से कोई गाड़ी मिल जाये….यह बोलकर शीला ईधर उधर नजर घुमाके देखने लगती है…..तभी शीला की नजर अजय पर परती है ! जो मायुशी से किसी सवारी गाड़ी आने का ईंतजार कर रहा होता है ! आप…..आप भी कहीं जाने के लिए गाड़ी का ईंतजार कर रहे हैं क्या….शीला ने अजय के पास आते हुये बोलकर अजय के जबाव का ईंतजार करने लगी…हां हां हमे भी मार्केट जाना था….अजय ने शीला को जबाव देते हुए बोला….मैं काफी देर से कीसी ऑटो पकरने के लिए बहुत मस्सकत कर रहा हूं कोई मिल हीं नहीं रही है ! अजय शीला के तरफ देखकर एक बार फीर बोला……शीला कुच्छ बोल पाती उसी समय एक ई-रिक्सा दोनो के पास आकर रूकी..
    कहां जाना है आप लोगों को….ई- रिक्सा वाला सभी सवारियों के तरफ देखते हुए जोर से बोलता है ! मार्केट तक…अजय रिक्से वाले के तरफ मुरते हुए बोला….जब कोई भी गाड़ी नही आ रही थी तब अजय….दुसरे साईड मुरकर खड़ा था…जब रिक्से वाले के कड़क आवाज अजय के कानों में परा तब अचानक मुरते हुए जबाव दिया था ! 
    चलिये आपका ईंतजार खत्म हुआ….अबतो गाड़ी भी आ गई है…शीला अजय के तरफ देखते हुए मुश्कुरा कर बोली…और हाथों चलने के लिए ईसारा करने लगी….हां हां चलिए चलते हैं ! अजय शीला को बरे प्यार से देखते हुए बोला रिक्से के अन्दर बैठने के लिए चल दिया…..चलिए सभी लोग जल्दी जल्दी बैठिए….रिक्से वाला सभी सावारियों के तरफ देखकर जोर से बोलता है….सभी लोग बारी बारी से गाड़ी में आकर बैठ जाते हैं ! अजय शीला आमने सामने बैठते हैं और जब सब लोग गाड़ी में चढ़जाते हैं तो गाड़ी चल देती है !
    दोनो आमने सामने बैठ तो गये थे पर थे दोनो खामोश….कुच्छ भी नाहीं अजय बोल रहा था नाहीं शीला हीं कुच्छ बोल रही थी…..गाड़ी अपने तेज स्पीड मे चल रही थी अन्य सावारी अपने आप में कुच्छ कुच्छ बाते कर रहे थे…तो कोई अपने घर परिवार में फोन लगा कर बाते कर रहे थे की मै ऑटो में बैठ गया हूं…इतने देर में वहां पहुंच जाऊंगा….आदि आदि बातों से ऑटो गुन्जने लगा था….ईधर शीला और अजय एक दुसरे को देख भी नहीं रहे थे…एक की नजर गाड़ी के इस तरफ तो दुसरे की नजर गाड़ी के उस तरफ….हां बीच बीच में गाड़ी में ब्रेक लगने टाईम पर नजर की एक दो बार टक्कर जरूर होती थी….अईसा नही है की अजय शीला एक दुसरे को नही जानते हैं…..दोनो में बात नही होती है…बल्की अभी कुच्छ सेचुयेशन हीं कुच्छ अयशी थी की दोनो एक दुसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे….अजय शोच रहा था की आज ईस लड़की को क्या हो गया कबसे कुच्छ भी बोल भी नही रही है….उधर भी वही हाल था….शीला के मन में भी वही सब चल रही थी की…आज ये लड़का कुच्छ बोल भी नहीं रहा है….बस नजर से नजर मिल जाती थी वो भी गाड़ी में ब्रेक लगने के टाईम पर…गाड़ी रूकती है किसी के आवाज लगाने पर कि गाड़ी रोको ड्राईवर जी हमें उतरना है…
    ड्राईवर गाड़ी रोक देता है साईड में कर कर….एक लेडिस और एक जैन्स गाड़ी से उतर ते हैं ! और ड्राईवर को किराये का पैसा देकर साईड हो जाते हैं…और गाड़ी फीर से चल परती है ! अब जब दो सीट खाली हो गई थी तो….दोनो के मन थोरा नॉर्मल हुआ था…..अब दोनो बाते करने के बारे में सोच रहे थे…पर सुरूआत कौन करे यही फैसला नहीं हो पा रहा था …..एक बार जब अजय का नजर शीला के तरफ गया तो उसने देखा शीला भी उसी के तरफ ध्यान से देख रही है ! जब अजय का नजर शीला के नजर पर परी तो शीला नजर हटाई नहीं….बल्की उसकी मुंह खुल गई…..आपसे कई मुलाकात हो गई है ! पर अभी तक आपका नाम नहीं जान पाई हूं….आप का नाम क्या हुआ…बोलकर शीला अजय को ध्यान से देखने लगी……मैं भी यही सोच रहा था मैने कई बार चाहा की आपसे आपका नाम पूछ लूं पर नहीं पूछ पाया….अजय बोलकर शीला को देखने लगा था ! अब तो मैने हीं पूछ लिया आपसे तो अब आप बता दिजिए…..बोलकर शीला अजय के जबाव का वेट करने लगी …अजय….शीला से बोला…..मै शीला…मेरा नाम शील है !शीला अजय को जबाव देते हए बोली……और अजय को गॉर से देखने लगी…….परिवार में और कौन कौन हैं?अजय शीला से पूछा…..पापा मम्मी एक बहन दो भाई दादा दादी तीन चाचा दो चाची…..और आपके….बोलकर शिला खिल खीला कर हंसने लगी…..पापा मम्मी चाचा चाची दादा दादी एक भाई एक बहन छोटी……..बोलकर अजय शीला को देखकर मुश्कुरा देता है ! शीला अजय का अपनी साईकिल ठिक करने वाली बात को याद करने लगती है !
    अरे आप कहां खो गईं….बोलकर अजय हंस देता है ! शीला भी मुश्कुरा देती है…….नही कुच्छ….थोरी देर रूक कर…..आपकी पढ़ाई….बोलकर शीला अजय के तरफ देखने लगी….पढ़ाई बीच में ही छोरना पर गया चुकी मेरे घर के माली हालत ठिक नहीं थी तो पढ़ाई छोर कर काम करना पर गया…बोलकर अजय शीला को बरे प्यार से देखने लगा था…साईड में होके रिक्सा रूकता है….दो लोग गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देते हैं….और गाड़ी आगे की ओर चल परती है…..

    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में……..

    📚 इस कहानी के सभी भाग

    👉 भाग 4
    👉 भाग 5
    👉 भाग 6

  • गोल गप्पा

    गोल गप्पा

    पढ़ने का समय : 6 मिनट
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    गोल गप्पा का दुकान लगा हुआ है चार पांच लड़के गोल गप्पे खा रहे होते हैं कुच्छ दुर से चलकर एक लड़की गोल गप्पे के दुकान पर आती है ,”भईया कितने के गोल गप्पे देते है?”
    लड़की जीसका नाम शीला है गोल गप्पे वाले के तरफ देखते हुये बोली। 
    “दस रूपये के पांच मैडम जी कितने देदूं बोलिए ” गोल गप्पे वाले ने शीला के तरफ एक नजर देखते हुये बोला। काफी सालों से दिनेश गोल गप्पे के दुकान लगा रहा था दुर दुर से लोग आकर दिनेश के यहां का गोल गप्पा का स्वाद लेते थे कफी मशहुर हो गया था ये गोल गप्पे का दुकान लोग जब भी शाम के टाईम बाहर निकलते जैसे सौपींग करने कहीं घुमने तो दिनेश के हांथ के बने गोल गप्पे जरूर खाते थे।
    “बीस रूपये के बना दो तीखा थोरा कम करना भईया। ” शीला दिनेश को आग्रह करते हुये बोली।
    “चलो दोस्तों अपना तो हो गया अब चलते हैं। ” उस में से एक लड़का गोल गप्पा खा कर प्लेट नीचे रखते हुए बोलता है।
    “अरे अभी कहां पांच चार और खाले ना तब चलते हैं। ” दुसरा लड़का पहले लड़का से हंसते हुये बोलता है।   
    शीला गोल गप्पे वाले से बलती है ,” भईया जल्दी कर दो ना लेट हो रही है .”
    गोल गप्पे की दुकान पर आये शीला को आधे घंटे हो गई थी। होगी भी क्यों नही इतनी मशहुर गोल गप्पे के दुकान पर जो आई थी दर अशल दुकान पर काफी बहुत भीड़ होती है और सभी को अपना गोल गप्पा खाने के लिए अपने बारी का ईंतजार करना होता है दिनेश भी अपने सभी ग्राहंको को बारी बारी से गोल गप्पे खिलाने में व्यसत रहता है पांच से छह घंटे इनके बहुत ही मेहनती होते हैं तभी दुसरी ओर से एक लड़का एक गीत गुन गुनाते हुये गोल गप्पे के दुकान के तरफ आ रहा होता है।
    नीन्द आवे नही अंखिया में तुहीं बसल बारू संसीया में साधारन सा जिंस टी शर्ट पहने हांथ में एक पलास्टीक के बैग लिये बालों को हवा में उराते हुये दुकान के तरफ बढ़ रहा है होठों पे गीत लिये मुश्कुराते हुए गीत के बोल सुनकर वहां मौजूद सभी की भी नजर उस आती हुई आवाज के तरफ मुर जाता है मुरेगा भी क्यों नहीं वो आवाज हीं इतनी सुरीली थी। दुकान के पास आने पर एक लड़का जो अजय को सामने देख कर बहुत खुश था हंसते हुए बोला, “क्या अजय भाई कौन आपके शांस में बस गई है और आपकी निन्द चुरा रही है ?”
    उस लड़के ने अजय के हांथों में अपना हांथ रखते हुए बोला, ” नही नही अयसी कोई बात नही है। “
    बस अईसे ही बोलकर अजय अपने मुश्कान छुपाने लगा था अब आईये अजय के बारे में जानते हैं अजय एक साधारन किसान परिवार का सबसे बरा और होन हार बेटा था यूं कहिये एक अच्छे बेटा एक अच्छे भाई और एक अच्छे दोस्त सभी गुण अजय में कुट कुट कर भरी हो आज तक किसी को भी अजय निरास नही किया था लोग नाराज भी नही रहते थे अजय से दिनेश भईया गोल गप्पा खिलाईये हो दस बीस रूपया के अजय शीला के तरफ अपनी नजर तीरछी करके मगर देखते हुये बोला ये लिजीए मैडम दिनेश शीला को प्लेट देते हु़ए बोला शीला प्लेट पकर लेती है और गोल गप्पे मुंह में रख कर खाने लगती है ,”वाऊ बहुत टेस्टी है। “
    शीला गोल गप्पे खाते हुये बोलती है थोरा जल्दी जल्दी खिला दिजीए बोलकर खाने लगती है दिनेश भईया का गोल गप्पा अईसे हीं नही मशहुर है दिनेश भईया के हांथ में तो जादू है जो एकवार खाये बार बार आये ! अजय दिनेश की तारिफ करते हुए बोला शीला अजय को देख कर मुश्करा देती है पर बोलती ,”कुच्छ नहीं है। “
    तीसरा लड़का उठकर ,”चलो दोस्तों अब चलते हैं। “
    लड़का उठकर चल देता है तो सभी लोग चल देते हैं  
    एक चौराहा
    सड़क सुनसान होती है शीला अपनी साईकील चलाकर कहीं जा रही होती है साईकील चलाते हुये शीला काफी सुन्दर लग रही है शीला एक अमीर परिवार की बहुत हीं सुन्दर शुशील समझदार और मेहनती लड़की है जो अपनी पढ़ाई से अपने गांव समाज के साथ साथ अपने परिवार के भी नाम रौशन कर रही है अब आप सोचेंगे की पहले गांव समाज फीर बाद में परिवार का नाम रौशन कर रही है क्यूं बोला तो उसका भी एक कारन है जिसके बारे में बाद में विशेष चर्चा करेंगे अभी शीला साईकील थोरा स्पीड कर के तेज गती से साईकिल के पाईडील मार रही थी साईकिल भी बहुत तेज रफ्तार से सड़क पर दौर रही थी चौराहा आते आते शीला की साईकिल की चैन खट खटाती आवाज करती हुई उतर जाती है अब साईकिल की रफ्तार ज्यादा थी तो अचानक पाईडील रूकने बाद भी कुच्छ दुर जाकर रूकी शीला साईकिल के सीट से उतर कर साईकिल के चैन के तरफ देखती है उसका चेहरा गुस्से से लाल हो जाती है और शीला अपने साईकिल की चैन चढ़ाने की कोशीस करने लगती है ईस चैन को भी यहीं उतरना था शीला गुस्से में बर बरा ने लगती है क्या हो गया साईकिल गरबर हो गई कफी परेशान लग रहे हैं एक जानी पहचानी आवाज शीला के कान में आकर परी शीला आवाज की तरफ मुरकर देखी और बोली,” आप आप यहां क्या कर रहे हैं ?”
      शीला ने अजय के तरफ देख कर बोली शीला अपने माथे पर आये पसीना कलाई से पोछते हुए” ये महाराज परेशान कर रखा है ईसकी चैन लगहीं नहीं रही। “
    शीला साईकिल के पहिये को गोल गोल घुमाते हुए बोली। यह बोलते हुये शिला थोरा मायुश हो गई थी।
    “लाईये हम कोशीस करके देखते हैं। ” अजय शीला के नजदीक आते हुए बोला।
    “हो जायेगी एक बार और चढाने की कोशीश करते हैं। ” बोलकर शीला चैन चढाने लगती है दर अशल शीला अपना काम खुद करना जानती थी ईसी लिए अजय को अपनी साईकिल ठिक करने के लिए नही देना चाहती थी लाईए ना दिजिए ना हम टराई करके देखते हैं नही तो आप ऐसे हीं जुझती रह जायेंगी ये लिजिये आप भी अपने हांथ गन्दे कर लिजिए शीला अपना हांथ अजय को दिखाते हुये बोली जिसमे बहुत सारा काला तेल और ग्रीस लग गया था कोई बात नहीं अजय चेहरे पर हल्की मुश्कान लिए बोला शीला उठकर खड़ी हो जाती है अजय बैठ कर साईकिल पकर कर चैन ठिक करने की कोशीश करने लगता है अब सड़क पर लोग भी आने जाने लगे थे।
    आने जाने वाले लोग एक नजर शीला और अजय पर जरूर डाल देते थे कुच्छ देर मेहनत करने के बाद अजय कामयाब हो जाता है और साईकिल की चैन चढ़ाकर साईकिल ठीक कर देता है आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप अगर नही आते अभी तो मैं अईसे हीं स्ट्रगल करती रह जाती शीला अजय की तरफ दोनो हांथ जोरते हुए प्यार से बोली आप हांथ क्यों जोड़ रहे हैं इसकी कोई जरूरत नही है चलिए अबतो आपकी साईकिल भी ठीक हो गई है हां साईकिल तो ठीक हो गई शीला खुशी से हंस्ते हुए बोली तो फिर अब चला जाए अजय कपड़े से हांथ पोछते हुए बोला हां ठिक है शीला बोली और दोनो मुश्कुराते हुए अपने अपने रास्ते चल दिये  

    📚 इस कहानी के सभी भाग

    👉 भाग 1
    👉 भाग 2
    👉 भाग 3