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बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम,
मेरी यादों का पूरा आसमान हो तुम।

कभी बूंदों बनकर चुपके से बरस जाते हो,
तो कभी यादों का सैलाब बन दिल में उतर आते हो।

जब भी तुम्हारी याद आती है,
चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान छा जाती है।

बीते हुए लम्हे फिर से जी उठते हैं,
और अधूरी ख्वाहिशें भी हौले से गुनगुनाने लगती हैं।

लेकिन जब भी तुम्हें देखने का दिल करता है,
आँखों में अनजाने ही आँसू भर आते हैं।

तुम्हारी कमी का एहसास
दिल को फिर से तन्हा कर जाता है।

बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम,
कभी सुकून तो कभी दर्द की बात जैसे हो तुम।

मेरी हर दुआ, हर ख्वाब, हर एहसास में बसे हो,
मेरी यादों के पूरे संसार जैसे हो तुम। ❤️🌹

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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

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