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टैग: प्यार दर्द रोमांच

  • बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम

    बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम,
    मेरी यादों का पूरा आसमान हो तुम।

    कभी बूंदों बनकर चुपके से बरस जाते हो,
    तो कभी यादों का सैलाब बन दिल में उतर आते हो।

    जब भी तुम्हारी याद आती है,
    चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान छा जाती है।

    बीते हुए लम्हे फिर से जी उठते हैं,
    और अधूरी ख्वाहिशें भी हौले से गुनगुनाने लगती हैं।

    लेकिन जब भी तुम्हें देखने का दिल करता है,
    आँखों में अनजाने ही आँसू भर आते हैं।

    तुम्हारी कमी का एहसास
    दिल को फिर से तन्हा कर जाता है।

    बिन मौसम बरसात जैसे हो तुम,
    कभी सुकून तो कभी दर्द की बात जैसे हो तुम।

    मेरी हर दुआ, हर ख्वाब, हर एहसास में बसे हो,
    मेरी यादों के पूरे संसार जैसे हो तुम। ❤️🌹

  • अधूरा इश्क

    अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

     

    अधूरा इश्क

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।
    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।
    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।
    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।
    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।
    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

    “मेरे साथ मत आना…”

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।
    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”

     

  • गुरुर

    गुरुर

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    मैं सबसे अलग हूँ।

    मैं सबके जैसी नहीं,

    और यही मेरी पहचान है।

    कोई चाहे या ना चाहे,

    मैं अकेले भी खुश हूँ।

    जैसी भी हूँ,

    अपने माँ-पापा की बेटी हूँ।

    मैं सबसे अलग हूँ,

    पर उनके लिए सबसे प्यारी हूँ।

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    क्योंकि मैं जैसी हूँ, वैसी ही खुश हूँ।