अजय ऑटो आने का ईंतजार कर रहा होता है ! कुच्छ कुच्छ देर पर अपने जेब से अपना मोबाईल फोन नीकाल कर टाईम देखता रहता है ! पता नहीं क्या हो गया है….आज एक भी ऑटो नजर नहीं आ रही है ! अजय ऑटो के ईंतजार करते हुए बोला …..कुच्छ लोग और टैम्पो का ईंतजार कर रहे होते हैं ! भीड़ भार से थोरा दुर यह गांव का छोटा सा ऑटो स्टैन्ड है ! यहां भीड़ भार कम होती है ! आप जानते हीं हैं…की गांव की सड़क कैसी होती है…यहां कम लोगों के हीं आना जाना होती है ! इस लिए ईस रूट में सवारी गाड़ी कम हीं चला करती है ..अब शहर जितना सुविधा तो नहीं ना मिलती है ! गांव में रहने वाले लोगों को..
शहर में रहने वालें लोगों को तो हर प्रकार की सविधा उनके घर तक भी…पहुंच जाती है ! क्यों की शहर में अमीर लोग बहुत पैसे वाले लोग रहते हैं……और वे लोग ज्यादा पैसा खर्च करके…अपने दैनिक सुविधाओं को पुरा कर अपने जिवन आसान बनाते हैं ! आधी से ज्यादा सवारी से भरी हुई ऑटो आकर रूकती है !
अजय भीड़ को देख कर नहीं बैठता है ! दो तीन लोग उसमें बैठ कर चले जाते हैं ! अजय परेशानी से फीर से ऑटो आने का ईंतजार करने लगता है ! तभी एक सवारी से भरी टैम्पो आती है…अजय अपने हांथ हिलाकर ऑटो को रूकने का ईशारा करता है….ऑटो नही रूकता है !
तभी एक तरफ से शीला कान्धे में पर्श और हांथ में किताब कॉपी लिए आती हुई नजर आती है ! शीला भी आकर खड़ी होती है ! हे भगवान मैं काफी लेट हो गई हूं….बस जल्दी से कोई गाड़ी मिल जाये….यह बोलकर शीला ईधर उधर नजर घुमाके देखने लगती है…..तभी शीला की नजर अजय पर परती है ! जो मायुशी से किसी सवारी गाड़ी आने का ईंतजार कर रहा होता है ! आप…..आप भी कहीं जाने के लिए गाड़ी का ईंतजार कर रहे हैं क्या….शीला ने अजय के पास आते हुये बोलकर अजय के जबाव का ईंतजार करने लगी…हां हां हमे भी मार्केट जाना था….अजय ने शीला को जबाव देते हुए बोला….मैं काफी देर से कीसी ऑटो पकरने के लिए बहुत मस्सकत कर रहा हूं कोई मिल हीं नहीं रही है ! अजय शीला के तरफ देखकर एक बार फीर बोला……शीला कुच्छ बोल पाती उसी समय एक ई-रिक्सा दोनो के पास आकर रूकी..
कहां जाना है आप लोगों को….ई- रिक्सा वाला सभी सवारियों के तरफ देखते हुए जोर से बोलता है ! मार्केट तक…अजय रिक्से वाले के तरफ मुरते हुए बोला….जब कोई भी गाड़ी नही आ रही थी तब अजय….दुसरे साईड मुरकर खड़ा था…जब रिक्से वाले के कड़क आवाज अजय के कानों में परा तब अचानक मुरते हुए जबाव दिया था !
चलिये आपका ईंतजार खत्म हुआ….अबतो गाड़ी भी आ गई है…शीला अजय के तरफ देखते हुए मुश्कुरा कर बोली…और हाथों चलने के लिए ईसारा करने लगी….हां हां चलिए चलते हैं ! अजय शीला को बरे प्यार से देखते हुए बोला रिक्से के अन्दर बैठने के लिए चल दिया…..चलिए सभी लोग जल्दी जल्दी बैठिए….रिक्से वाला सभी सावारियों के तरफ देखकर जोर से बोलता है….सभी लोग बारी बारी से गाड़ी में आकर बैठ जाते हैं ! अजय शीला आमने सामने बैठते हैं और जब सब लोग गाड़ी में चढ़जाते हैं तो गाड़ी चल देती है !
दोनो आमने सामने बैठ तो गये थे पर थे दोनो खामोश….कुच्छ भी नाहीं अजय बोल रहा था नाहीं शीला हीं कुच्छ बोल रही थी…..गाड़ी अपने तेज स्पीड मे चल रही थी अन्य सावारी अपने आप में कुच्छ कुच्छ बाते कर रहे थे…तो कोई अपने घर परिवार में फोन लगा कर बाते कर रहे थे की मै ऑटो में बैठ गया हूं…इतने देर में वहां पहुंच जाऊंगा….आदि आदि बातों से ऑटो गुन्जने लगा था….ईधर शीला और अजय एक दुसरे को देख भी नहीं रहे थे…एक की नजर गाड़ी के इस तरफ तो दुसरे की नजर गाड़ी के उस तरफ….हां बीच बीच में गाड़ी में ब्रेक लगने टाईम पर नजर की एक दो बार टक्कर जरूर होती थी….अईसा नही है की अजय शीला एक दुसरे को नही जानते हैं…..दोनो में बात नही होती है…बल्की अभी कुच्छ सेचुयेशन हीं कुच्छ अयशी थी की दोनो एक दुसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे….अजय शोच रहा था की आज ईस लड़की को क्या हो गया कबसे कुच्छ भी बोल भी नही रही है….उधर भी वही हाल था….शीला के मन में भी वही सब चल रही थी की…आज ये लड़का कुच्छ बोल भी नहीं रहा है….बस नजर से नजर मिल जाती थी वो भी गाड़ी में ब्रेक लगने के टाईम पर…गाड़ी रूकती है किसी के आवाज लगाने पर कि गाड़ी रोको ड्राईवर जी हमें उतरना है…
ड्राईवर गाड़ी रोक देता है साईड में कर कर….एक लेडिस और एक जैन्स गाड़ी से उतर ते हैं ! और ड्राईवर को किराये का पैसा देकर साईड हो जाते हैं…और गाड़ी फीर से चल परती है ! अब जब दो सीट खाली हो गई थी तो….दोनो के मन थोरा नॉर्मल हुआ था…..अब दोनो बाते करने के बारे में सोच रहे थे…पर सुरूआत कौन करे यही फैसला नहीं हो पा रहा था …..एक बार जब अजय का नजर शीला के तरफ गया तो उसने देखा शीला भी उसी के तरफ ध्यान से देख रही है ! जब अजय का नजर शीला के नजर पर परी तो शीला नजर हटाई नहीं….बल्की उसकी मुंह खुल गई…..आपसे कई मुलाकात हो गई है ! पर अभी तक आपका नाम नहीं जान पाई हूं….आप का नाम क्या हुआ…बोलकर शीला अजय को ध्यान से देखने लगी……मैं भी यही सोच रहा था मैने कई बार चाहा की आपसे आपका नाम पूछ लूं पर नहीं पूछ पाया….अजय बोलकर शीला को देखने लगा था ! अब तो मैने हीं पूछ लिया आपसे तो अब आप बता दिजिए…..बोलकर शीला अजय के जबाव का वेट करने लगी …अजय….शीला से बोला…..मै शीला…मेरा नाम शील है !शीला अजय को जबाव देते हए बोली……और अजय को गॉर से देखने लगी…….परिवार में और कौन कौन हैं?अजय शीला से पूछा…..पापा मम्मी एक बहन दो भाई दादा दादी तीन चाचा दो चाची…..और आपके….बोलकर शिला खिल खीला कर हंसने लगी…..पापा मम्मी चाचा चाची दादा दादी एक भाई एक बहन छोटी……..बोलकर अजय शीला को देखकर मुश्कुरा देता है ! शीला अजय का अपनी साईकिल ठिक करने वाली बात को याद करने लगती है !
अरे आप कहां खो गईं….बोलकर अजय हंस देता है ! शीला भी मुश्कुरा देती है…….नही कुच्छ….थोरी देर रूक कर…..आपकी पढ़ाई….बोलकर शीला अजय के तरफ देखने लगी….पढ़ाई बीच में ही छोरना पर गया चुकी मेरे घर के माली हालत ठिक नहीं थी तो पढ़ाई छोर कर काम करना पर गया…बोलकर अजय शीला को बरे प्यार से देखने लगा था…साईड में होके रिक्सा रूकता है….दो लोग गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देते हैं….और गाड़ी आगे की ओर चल परती है…..
आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में……..
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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