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एक अनकही शुरुआत

📚 सीरीज: एक अनकही शुरुआत
पढ़ने का समय : 7 मिनट

 

पार्ट 9

राधे राधे दोस्तों,

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     रणवीर कुछ बोलता, इससे पहले ही बैकग्राउंड में हल्का म्यूजिक बजने लगा और सगाई की रस्म शुरू होने की अनाउंसमेंट हुई।

 

     रणवीर ने तान्या का हाथ पकड़ा और उसे मंच तक ले गया। लोग तालियाँ बजा रहे थे, कैमरे फ्लैश कर रहे थे, लेकिन रणवीर की आँखें बार-बार अनाया की तरफ जा रही थीं। वहीं अनाया की आँखें हल्की हल्की लाल थी क्योंकि वो अपने आँसू रोकने की कोशिश कर रही थी। अनाया जिगर, शिरशा और अपने बाकी के टीम मेम्बर के साथ जाकर खड़ी हो गई।

 

     पहले तान्या ने रणवीर को रिंग पहनाई, उसके बाद जैसे ही रणवीर ने रिंग उठाई, उसका दिल एक सेकंड के लिए ठहर सा गया।

 

     “क्या मैं सही कर रहा हूँ?” खुद से पूछा।

 

     रणवीर की उंगलियों में पकड़ी रिंग हल्की सी कांपी। उसकी नजरें अनाया पर गईं, जो खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों की नमी ने उसे धोखा दे दिया था।

 

     हर किसी की नजर रणवीर पर थी, तान्या की आँखों में एक सवाल था, लेकिन रणवीर का ध्यान सिर्फ एक ही चीज़ पर था, क्या वो सही कर रहा है?

 

     उसके अंदर एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था।

 

     “रणवीर?” तान्या ने धीरे से उसका हाथ छूकर कहा, मानो उसे होश में लाने की कोशिश कर रही हो।

 

     रणवीर ने उसकी ओर देखा, फिर वापस अनाया को देखा। एक सेकंड का सन्नाटा… फिर अचानक उसने रिंग नीचे रख दी।

 

     पूरी महफ़िल में हलचल मच गई। फोटोग्राफर्स के कैमरे कुछ सेकंड के लिए थम गए, और वहां मौजूद मेहमान फुसफुसाने लगे।

 

     “रणवीर?” तान्या ने बोला। उसकी आवाज में हैरानी और झुंझलाहट दोनों थे।

 

     रणवीर ने एक लंबी सांस ली, फिर माइक उठाया।

 

     “आई एम सॉरी, लेकिन ये सगाई नहीं हो सकती।”

 

     तान्या ने गुस्से से रणवीर को देखा, “क्या मजाक है ये, रणवीर? यह कोई खेल नहीं है!”

 

     रणवीर ने उसकी आँखों में देखा और शांत स्वर में कहा, “नहीं तान्या, ये मजाक नहीं है। मैं तुम्हारे साथ नाइंसाफी नहीं कर सकता। यह रिश्ता सिर्फ एक समझौता था, और मैं अब और झूठ नहीं जी सकता। मैं तुमसे प्यार नहीं करता।”     

 

     महफ़िल अब भी सन्नाटे में थी। हर कोई रणवीर के फैसले से हैरान था। तान्या की आँखों में गुस्सा और बेबसी दोनों थे, लेकिन उसकी परवरिश ने उसे कभी किसी के सामने कमजोर नहीं दिखने दिया।

 

     “रणवीर, तुम्हें लगता है कि तुम यूँ सबके सामने मुझे अपमानित करके निकल जाओगे?” तान्या की आवाज़ ठंडी लेकिन तीखी थी।

 

     रणवीर ने उसे शांत नज़रों से देखा, “मैंने तुम्हें पहले ही सच बता दिया था तान्या, कि मेरे लिए यह रिश्ता सिर्फ एक समझौता था। मैं तुम्हें झूठे रिश्ते में नहीं बांध सकता।”

 

     तान्या की मुट्ठियाँ भिंच गईं, “और यह सच तुम्हें सगाई के समय ही याद आया?”

 

     रणवीर कुछ नहीं बोला।

 

     “तो फिर बताओ, वो कौन है? जिससे तुम्हें इतनी मोहब्बत है कि उसके लिए तुमने मेरे साथ यह रिश्ता तोड़ने का फैसला कर लिया?”

      

     अब तक अनाया वहाँ से निकलने की कोशिश कर चुकी थी, लेकिन रणवीर ने उसका हाथ पकड़ रखा था। तान्या की नज़रें अनाया पर गईं और उसने एक कड़वी हंसी हंसी।

 

     “ओह… तो यह अनाया की वजह से हुआ?”

 

     अनाया ने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया, “तान्या, इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है। रणवीर खुद—”

 

     “तो क्या तुम रणवीर से प्यार करती हो?” तान्या ने बिना समय गँवाए सीधे सवाल किया।

 

     अनाया चुप रह गई।

 

     रणवीर की आँखें भी अनाया के जवाब की तरफ लगी थीं। आखिर वो भी तो इस बात का जवाब जानने के लिए बेसब्र था। 

 

     “बोलो अनाया,” रणवीर की आवाज़ गहरी हो गई थी। “क्या तुम्हें फर्क पड़ता है?”

 

     अनाया की आँखों में बेचैनी थी। उसकी सांसें तेज़ हो गई थीं। वह वहाँ से बस भाग जाना चाहती थी, लेकिन उसके कदम जैसे जड़ हो गए थे।

 

     “नहीं…” उसने बड़ी मुश्किल से कहा, “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

 

     रणवीर की आँखें कुछ पल के लिए दर्द से भर गईं, लेकिन अगले ही पल वह हंस पड़ा।

 

     “झूठ।”

 

अनाया ने उसकी तरफ देखा, “रणवीर, प्लीज़—”

 

     रणवीर ने उसकी तरफ एक कदम बढ़ाया, “तुम मेरी आँखों में देखो और यह बात दोहराओ, कि तुम्हें फर्क नहीं पड़ता।”

 

     अनाया ने कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों ने उसे धोखा दे दिया। उसकी आँखों में वही जज़्बात थे जो रणवीर की आँखों में थे।

 

     महफ़िल में चारों तरफ हलचल थी। तान्या ने गहरी सांस ली और एक कड़वी मुस्कान के साथ रणवीर को देखा, “बधाई हो, रणवीर। लगता है तुम्हें तुम्हारा जवाब मिल गया।”

 

     फिर उसने अपना पर्स उठाया और तेज़ कदमों से वहाँ से चली गई।

 

     रणवीर ने अब अनाया की तरफ देखा, “अब भी कहोगी कि तुम्हें फर्क नहीं पड़ता?”

 

     अनाया की आँखों में आँसू आ चुके थे।

 

     “रणवीर, यह सही नहीं है…” उसकी आवाज़ कमजोर थी।

 

     रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “प्यार सही या गलत नहीं होता, अनाया। प्यार बस प्यार होता है और अब मैं अपने प्यार को खोने नहीं दूँगा।”

 

     महफ़िल अब बिखर चुकी थी। तान्या जा चुकी थी, मेहमान फुसफुसाते हुए एक-एक कर वहाँ से निकल रहे थे। लेकिन रणवीर और अनाया के बीच अभी भी एक अधूरी बात बाकी थी।

 

     अनाया ने अपने आँसू रोकने के लिए खुद को मजबूत किया और रणवीर से दूर जाने की कोशिश की।

 

     “अब और ड्रामा मत करो, रणवीर। सबके सामने तमाशा बना दिया, अब और क्या चाहिए?” उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन वह खुद को संयम में रख रही थी।

 

     रणवीर ने उसकी कलाई पकड़ ली, “मुझे तुम्हारा सच चाहिए, अनाया। तुम कब तक खुद से भागती रहोगी?”

 

     अनाया ने उसकी पकड़ छुड़ाने की कोशिश की, “सच? सच क्या है, रणवीर? यही कि तुमने सगाई के दिन सबके सामने तान्या को छोड़ दिया, और अब मुझसे जबरदस्ती कबूल करवाना चाहते हो कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ?”

 

     रणवीर ने उसे और करीब खींच लिया, उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, “हाँ, क्योंकि यही सच है!”

 

     अनाया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने अपनी नज़रें फेर लीं।

 

     “यह तुम्हारा सच हो सकता है, लेकिन मेरा नहीं।”

 

     रणवीर की आँखों में हल्की उदासी झलकने लगी। उसने एक गहरी साँस ली और धीमे से कहा, “ठीक है, अनाया। अगर तुम सच में यह मानती हो कि तुम्हें मुझसे कोई फर्क नहीं पड़ता, तो मैं तुम्हें जाने दूँगा। लेकिन एक आखिरी सवाल का जवाब देकर जाना।”

 

     अनाया चुप रही।

 

     रणवीर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “अगर तुम्हें मुझसे कोई फर्क नहीं पड़ता, तो तुम्हारी आँखों में आँसू क्यों हैं?”

 

     अनाया का गला सूख गया। उसकी आँखों में ठहरे आँसू अब छलकने को थे।

 

     “क्योंकि…” वह कुछ कहने वाली थी, लेकिन खुद को रोक लिया।

 

     रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ सिर झुका लिया, “यही तो फर्क है, अनाया। तुम खुद को जितना भी समझाने की कोशिश करो, दिल से प्यार को मिटा नहीं सकती।”

 

      अनाया ने खुद को संभाला और एक कदम पीछे हटाई।

 

     “अगर तुम्हें लगता है कि प्यार सिर्फ कह देने से साबित होता है, तो तुम गलत हो, रणवीर। प्यार त्याग भी होता है, और मैं… मैं अपने जज़्बातों को अपने अंदर रखना ही सही समझती हूँ।”

 

     रणवीर कुछ पल उसे देखता रहा, फिर एक हल्की उदासी भरी मुस्कान के साथ बोला, “शायद तुम सही कह रही हो, लेकिन मैं हार मानने वालों में से नहीं हूँ। मैं इंतज़ार करूँगा, जब तक तुम खुद से सच नहीं कह देती।”

 

     अनाया ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा। वह बस मुड़कर वहाँ से चली गई।

     रणवीर वहीं खड़ा रहा, लेकिन उसकी आँखों में एक नया इरादा था।

 

     “यह कहानी यहीं खत्म नहीं होगी, अनाया। यह हमारी नई शुरुआत है।”

(कहानी समाप्त)

 

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Neha Goyal

मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

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