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जय जीमूतवाहन भगवान! 🙏🌺

पढ़ने का समय : 2 मिनट

क्या आप जानते हैं, एक मां अपने बच्चे की लंबी उम्र के लिए ऐसा कठिन व्रत क्यों रखती है?

यह कहानी है एक ऐसी मां की, जिसके लिए उसका बेटा ही उसकी पूरी दुनिया था।

एक छोटे से गांव में कमला नाम की एक गरीब औरत रहती थी। उसका एक छोटा बेटा था, जिससे वह अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती थी। पति के गुजर जाने के बाद कमला ने अकेले ही अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया था।

एक दिन गांव में जितिया व्रत की चर्चा हो रही थी। सभी माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए व्रत रखने की तैयारी कर रही थीं। कमला ने भी अपने बेटे की सलामती के लिए जितिया व्रत रखने का संकल्प लिया।

उस दिन कमला ने निर्जला व्रत रखा और भगवान जीमूतवाहन से प्रार्थना की, “हे प्रभु! मेरे जीवन में चाहे कितने भी दुख आ जाएं, लेकिन मेरे बच्चे पर कभी कोई संकट मत आने देना।”

रात होते-होते कमला का बेटा अचानक बीमार पड़ गया। उसकी हालत बिगड़ती देखकर कमला घबरा गई। वह अपने बेटे को गोद में लेकर रोते हुए भगवान से प्रार्थना करने लगी।

कमला के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। वह मदद मांगने के लिए पड़ोसियों के घर पहुंची। उसकी पुकार सुनकर गांव के लोग आगे आए और बच्चे को वैद्य के पास ले गए।

कुछ समय बाद बच्चे की तबीयत सुधरने लगी। कमला की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। उसने हाथ जोड़कर भगवान जीमूतवाहन को धन्यवाद दिया।

कहा जाता है कि जितिया व्रत माताओं के अटूट प्रेम, त्याग और संतान की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है।

मां का प्यार दुनिया का सबसे अनमोल आशीर्वाद है।

 

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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

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