टाइटआपने बहुत से सफल लोगों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। ऐसे लोग अपने जीवन में कठिन से कठिन समय में खुद के हौसले को बुलंद रखते हुए जीवन में बड़ा मुकाम हासिल किया। ऐसे ही लोगों में एक बड़ा नाम है कभी रेलवे स्टेशन पर संतरा बेचने वाले और आज सालाना 400 करोड़ रुपये का टर्नओवर करने वाले अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट नाम की ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक और नागपुर के एक बिजनेसमैन प्यारे खान की।
आपको बता दें कि 1995 में नागपुर रेलवे स्टेशन के बाहर संतरे बेचने वाले प्यारे खान आज एक बड़े ट्रांसपॉर्टर हैं। 400 करोड़ कीमत की कंपनी के मालिक प्यारे के पास लगभग 300 ट्रकें हैं। प्यारे करीब 2 हजार ट्रकों के नेटवर्क को मैनेज करते हैं, जिसके दफ्तर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश में हैं। प्यारे खान का कहना है कि वह और उनके 2 भाई, बहन और माता-पिता नागपुर के एक स्लम एरिया में रहते थे। पिताजी गाँव- गाँव जाकर कपड़े बेचते थे लेकिन इसमें ज्यादा कमाई नहीं होने से उन्होंने काम करना बंद कर दिया।
इसके बाद मां ने हमारी परवरिश के लिए किराने की दुकान शुरू की। हमने जब से होश संभाला है तब से खुद को पालने के लिए पैसा कमाया। प्यारे खान आगे बताते है “जब मैं सिर्फ 13 साल का था तब से मैंने काम करना शुरू कर दिया था। 2 महीने गर्मी की छुट्टी में मैं रेलवे स्टेशन पर संतरा बेचने का काम करता था जिसमें प्रतिदिन 50-60 रुपये की बचत होती थी। मैंने कारों की सफाई जैसे बहुत सारे काम किये है। घर की स्थिति ऐसी थी कि मैं पढ़ नहीं सकता था इसलिए दसवीं में फेल होने के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया। जब मुझे अपना ड्राइविंग लाइसेंस मिला, तो मैंने एक कूरियर कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान जब मेरा एक्सीडेंट हुआ तो मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी।”
आगे प्यारे खान कहते है “मैंने 2005 में एक ट्रक खरीदा था और 2007 तक मेरे पास 12 ट्रक थे। फिर मैंने कंपनी को अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट के रूप में पंजीकृत किया। मैंने उन जगहों पर काम करना शुरू किया जहां दूसरे लोग काम करने से डरते थे। जोखिम उठाते हुए बड़े समूहों ने काम ढूंढना शुरू किया। कुछ साल पहले दो पेट्रोल पंप भी खोले गए थे। फिलहाल कंपनी का कुल कारोबार 400 करोड़ रुपये है। यहां कुल 700 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। हमने अगले दो साल में कंपनी के लिए 1,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। मैं कभी भी सफलता के पीछे नहीं भागा। यही मेरी सफलता का राज है।”
गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर में जब लोगों के बीच ऑक्सीजन की भारी अछत थी तब प्यारे ने अनगिनत रोगियों के जीवन को बचाने के लिए कड़ी मेहनत की। प्यारे खान ने नागपुर और उसके आसपास के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे रोगियों को 400 मीट्रिक टन से बहुत अधिक तरल मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराया था। उन्होंने मरीजों को ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च किए थे।
प्यारे खान की कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है और यह साबित करती है कि कठिनाइयों का सामना करके भी एक व्यक्ति कैसे सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। असली मेहनत, लगन और साहस से भरी उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि हालात कितने भी बिगड़ जाएँ, अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
प्यारे की पहचान केवल एक व्यवसायी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी है जिसने दूसरों की मदद करने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग किया। जब कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा, तब प्यारे ने सीमाओं को पार करते हुए अपनी कंपनी के माध्यम से स्वास्थ्य संकट में भी योगदान दिया। यह उनके अति संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचायक है। उनके कार्यों ने न केवल कई जीवन बचाए, बल्कि समाज में उनके प्रति विश्वास और सम्मान भी बढ़ाया।
प्यारे खान का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। जब उनके पिता कपड़ों की बिक्री में असफल रहे, तब परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। उनकी माँ ने किराने की दुकान खोलकर परिवार का पालन-पोषण किया। प्यारे ने बहुत छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया। रेलवे स्टेशन पर संतरा बेचना केवल एक व्यवसाय नहीं था, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षित भविष्य के प्रति एक कदम था। इस अनुभव ने उन्हें न केवल धन कमाने की प्रेरणा दी, बल्कि संघर्ष और मेहनत का महत्व भी सिखाया।
प्यारे खान की किशोरावस्था में ही काम के प्रति दीवानगी उनके जीवन की दिशा निर्धारित करने में सहायक बनी। उन्होंने छोटे-छोटे काम किए, जैसे कारों की सफाई, जिससे उन्हें कुछ पैसे मिले। लेकिन जब वह पढ़ाई में फेल हुए, तो उन्होंने अपनी शिक्षा को जारी रखने के बजाय काम में अधिक ध्यान केंद्रित किया। ड्राइविंग लाइसेंस पाने के बाद, उन्होंने कूरियर कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम किया। यह उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने उन्हें ट्रकिंग और परिवहन उद्योग के बारे में अधिक जानकारी दी।
2005 में जब प्यारे ने अपने पहले ट्रक की खरीद की, तब उन्होंने न केवल एक व्यवसाय की शुरुआत की, बल्कि अपने लिए एक नई पहचान भी बनाई। उन्होंने समझा कि व्यवसाय में जोखिम लेना जरूरी है। 2007 तक 12 ट्रकों के प्रबंधन के साथ, उन्होंने अश्मी रोड ट्रांसपोर्ट नाम से अपनी कंपनी स्थापित की। उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए उन क्षेत्रों में काम करने का निर्णय लिया, जहाँ अन्य लोग संकोच करते थे। उनके इस साहस ने उन्हें एक अद्वितीय व्यवसायिक पहचान दिलाई।
प्यारे ने समझा कि अगर स्मार्ट तरीके से काम किया जाए तो छोटे ठेके और लोडिंग-यार्ड के लिए बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जा सकता है। उनकी व्यवसायिक सूझबूझ ने उन्हें दूसरों से अलग खड़ा किया, जिससे वे तेजी से बढ़ते गए। प्यारे खान की कंपनी ने अब एक बड़ा ट्रक नेटवर्क बना लिया है जिसमें प्रभावित क्षेत्रों के सभी ग्राहकों को शामिल किया गया है।
प्यारे खान का प्रभाव केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हुए कार्य किए हैं। कोरोना महामारी के दौरान, जब स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गई थीं, उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और कर्मचारियों के साथ मिलकर मरीजों की मदद करने के लिए आगे बढ़े। उनके प्रयासों ने हजारों मरीजों को ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद की, जिससे कई जिंदगियाँ बच गईं। यह न केवल उनके व्यवसायिक कौशल को दर्शाता है, बल्कि यह भी कि वह एक सच्चे मानवतावादी हैं।
प्यारे खान के व्यक्तित्व में जो सबसे आकर्षक चीज़ है, वह है उनकी ठोस सोच और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी। यह केवल व्यवसायिक दृष्टिकोण नहीं था, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण बन गई

NSW अनुभवी लेखक -🥇

प्रातिक्रिया दे