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अधूरी मोहब्बत

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

 

मोहब्बत की क्या बात करूँ,

अधूरी ही सही, पर मेरे साथ है।

दिन भर तुम यूँ दूर रहते हो,

जैसे अपने काम में बहुत व्यस्त हो।

शाम ढलते ही तुम्हारी याद यूँ आती है,

जैसे तुम काम से लौटकर घर आए हो।

जब भी बैठूँ एक कप चाय लेकर,

तेरी मीठी-सी याद मुझे सताए।

जब भी कुछ बनाने का सोचूँ,

सबसे पहले तेरी पसंद याद आए।

रात जैसे-जैसे गहराती है,

तेरी याद मुझे और रुलाती है।

आँखें जब भी बंद करूँ,

बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है।

आँसू भले ही आँखों में हों,

पर होठों पर तेरी याद मुस्कान बन जाती है।

अधूरी सही मेरी मोहब्बत,

पर तेरी याद आज भी पूरी मेरी है

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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

Comments

“अधूरी मोहब्बत” के लिए प्रतिक्रिया 2

  1. shalini rawat अवतार
    shalini rawat

    बहुत सुंदर रचना

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