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सोन परी की जादुई दुनिया

पढ़ने का समय : 13 मिनट

 

यह कहानी है एक सात साल की प्यारी और नटखट बच्ची की, जिसका नाम था फ्रूटी। फ्रूटी एक ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार में रहती थी जहाँ उसके माता-पिता दोनों ही नौकरी करते थे। सुबह होते ही उसके माता-पिता अपने-अपने दफ्तर के लिए निकल जाते और शाम को देर से लौटते। घर में फ्रूटी अकेली रह जाती, या फिर उसकी देखभाल के लिए एक सख्त मिजाज आया (घरेलू सहायिका) रहती, जो उसे टीवी देखने से रोकती, समय पर होमवर्क कराने के लिए डाँटती और उसे खेलने के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं देती थी।

फ्रूटी बहुत ही कल्पनाशील बच्ची थी। वह घंटों खिड़की के पास बैठकर आसमान में उड़ते बादलों को देखा करती थी। उसे परियों की कहानियाँ सुनना बहुत पसंद था। उसकी दादी ने उसे बचपन में परियों की कई कहानियाँ सुनाई थीं—परियों की रानी, उनका चमकता हुआ परी लोक, जादू की छड़ी और पंखों वाले खूबसूरत लिबास। फ्रूटी अक्सर सोचती थी कि काश उसकी जिंदगी में भी कोई परी आ जाए, जो उसकी सुननी सहेली बन सके, जिसके साथ वह खेल सके और अपने दिल की सारी बातें साझा कर सके।

एक दिन फ्रूटी स्कूल से लौटी तो उसका मन बहुत उदास था। उसे स्कूल में एक ड्राइंग प्रतियोगिता में भाग लेना था, लेकिन उसकी अध्यापिका ने उसे डाँट दिया क्योंकि वह अपनी पेंटिंग समय पर पूरी नहीं कर पाई थी। घर आने पर आया ने भी उसके बस्ते को देखकर नाराजगी जताई और बिना बात के डाँट दिया। फ्रूटी अपने कमरे में आई, पलंग पर बैठकर फफक-फफक कर रोने लगी। उसने आसमान की तरफ देखते हुए रोते हुए कहा, “हे भगवान! अगर परियाँ सच में होती हैं, तो आप किसी परी को मेरे पास क्यों नहीं भेजते? क्या कोई मेरी सुनने वाला नहीं है?”

वह रोते-रोते ही थक गई और उसकी आँखें बंद हो गईं। कमरे में सन्नाटा छा गया। खिड़की से आती शाम की ठंडी हवा ने उसके आँसू सुखा दिए। किसी को क्या पता था कि उस नन्हीं बच्ची की पुकार उस दुनिया तक पहुँच चुकी थी, जहाँ इंसानों की पहुँच नहीं होती—परी लोक तक।

आसमान के उस पार, बादलों की ओट में एक बेहद खूबसूरत दुनिया बसी थी, जिसे ‘परी लोक’ कहा जाता था। यह जगह सोने की तरह चमकने वाले महलों, बहती हुई दूधिया नदियों और संगीत जैसी सुरीली हवाओं से भरी हुई थी। यहाँ हर तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे जो कभी मुरझाते नहीं थे। परी लोक पर न्याय और प्रेम की मूरत, ‘परी माँ’ का शासन था।

परी माँ का दरबार सजा हुआ था। सभी परियाँ अपनी-अपनी जगहों पर बैठी थीं। तभी परी लोक के जादुई आईने में धरती पर रोती हुई नन्हीं फ्रूटी की तस्वीर उभरी। परी माँ ने उस तस्वीर को देखकर गहरी साँस ली और कहा, “धरती पर इंसानों की दुनिया में भौतिकता बढ़ रही है। वहाँ के बच्चे बड़े-बड़े महलों में रहते हैं, लेकिन उनके पास अपनों का प्यार और समय नहीं होता। नन्हीं फ्रूटी बहुत अकेली है। उसकी पुकार ने हमारे परी लोक की दीवारों को छू लिया है।”

दरबार में बैठी सभी परियों ने फ्रूटी की मदद करने की इच्छा जताई। लेकिन परी माँ ने अपनी विशेष शक्ति से फौरन निर्णय लिया। उन्होंने अपनी सबसे खास, दयालु और ऊर्जावान परी की ओर देखा, जिनके सोने जैसे सुनहरे पंख और सुनहरी पोशाक पूरे दरबार को जगमगा रही थी। उनका नाम था—सोन परी।

परी माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “सोन परी! यह कार्य केवल तुम्हारे बस का है। तुम जाओ धरती पर और उस नन्हीं फ्रूटी की जिंदगी में खुशियों के रंग भर दो। उसकी हर मुश्किल में उसकी ढाल बनो, लेकिन एक बात याद रखना—तुम्हारी शक्तियाँ तभी तक काम करेंगी जब तक तुम किसी अच्छे उद्देश्य के लिए उनका उपयोग करोगी और अपनी असली पहचान को इंसानों की दुनिया में छिपा कर रखोगी।”

सोन परी ने आदर से अपना सिर झुकाया और कहा, “जैसी आपकी आज्ञा, परी माँ। मैं अभी धरती के लिए रवाना होती हूँ।”

सोन परी ने अपने सुनहरे पंख फड़फड़ाए और एक तेज़ सुनहरी रोशनी के साथ वह परी लोक से सीधे फ्रूटी के कमरे में जा उतरीं। जब फ्रूटी की आँख खुली, तो उसका कमरा किसी साधारण कमरे जैसा नहीं लग रहा था। पूरे कमरे में सुनहरे रंग की चमक फैली हुई थी, और हवा में फूलों की भीनी-भीनी खुशबू महक रही थी।

फ्रूटी ने अपनी आँखें मलते हुए पलंग पर उठकर देखा। उसके सामने एक बेहद खूबसूरत महिला खड़ी थीं। उन्होंने सुनहरे रंग का खूबसूरत गाउन पहना हुआ था, उनके सिर पर जगमगाता हुआ ताज था और पीठ पर दो सुनहरे पंख थे, जो हल्की रोशनी बिखेर रहे थे। उनके चेहरे पर ममता और अपनापन का ऐसा भाव था जिसे देखते ही फ्रूटी का सारा डर छूमंतर हो गया।

फ्रूटी ने आँखें फाड़कर आश्चर्य से पूछा, “आप… आप कौन हैं? क्या आप कोई परी हैं?”

सोन परी ने मुस्कुराते हुए प्यार से अपना हाथ फ्रूटी के सिर पर फेरा और कहा, “हाँ फ्रूटी! मैं सोन परी हूँ। तुम्हारी पुकार ने मुझे आसमान से खींचकर यहाँ बुला लिया है। अब तुम अकेली नहीं हो। मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।”

फ्रूटी खुशी से उछल पड़ी। उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसने सोन परी को गले से लगा लिया और बोली, “क्या सचमुच? मेरी कोई परी दोस्त है? आप कहीं चली तो नहीं जाएंगी?”

सोन परी ने हँसते हुए कहा, “नहीं फ्रूटी, मैं यहीं तुम्हारे पास रहूँगी। जब भी तुम्हें मेरी जरूरत होगी, मैं तुम्हारे पास आ जाऊँगी। बस तुम्हें अपनी जादुई अंगूठी से मुझे याद करना होगा।”

सोन परी ने अपनी उंगली से एक चमकती हुई छोटी सी सुनहरी अंगूठी निकाली और फ्रूटी की उंगली में पहना दी। उन्होंने कहा, “इस अंगूठी को छूकर जब तुम मेरा नाम लोगी, तो मैं तुरंत तुम्हारे सामने प्रकट हो जाऊँगी। लेकिन याद रखना, इस राज़ को किसी को नहीं बताना है—न अपने मम्मी-पापा को और न ही अपनी आया को।”

फ्रूटी ने उत्साह से सिर हिलाया, “वादा! मैं किसी को नहीं बताऊँगी।”

उसी क्षण, घर की डोरबेल बजी। फ्रूटी के माता-पिता दफ्तर से लौट आए थे। सोन परी ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो फ्रूटी, तुम्हारे मम्मी-पापा आ गए हैं। मैं अभी जाती हूँ, लेकिन हम जल्द ही फिर मिलेंगे।” और एक चमकती हुई रोशनी के साथ सोन परी हवा में ओझल हो गईं। फ्रूटी ने अपनी उंगली की अंगूठी को छुआ और उसके चेहरे पर एक बहुत बड़ी मुस्कान आ गई। उसकी जिंदगी अब पहले जैसी नहीं रहने वाली थी।

अगले कुछ दिनों में फ्रूटी की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अब उसका अकेलापन गायब हो चुका था। जब भी उसके माता-पिता काम पर चले जाते और आया उसे डाँटती, फ्रूटी चुपके से अपने कमरे में जाती, अंगूठी को छूती और सोन परी को बुला लेती।

सोन परी सिर्फ एक जादुई शख्सियत नहीं थीं, बल्कि वह फ्रूटी की मार्गदर्शक भी थीं।

 

एक दिन फ्रूटी का गणित का होमवर्क बहुत कठिन था और वह रो रही थी। सोन परी ने चुटकी बजाई और किताबों के पन्ने अपने आप पलटने लगे, लेकिन साथ ही उन्होंने फ्रूटी को प्यार से समझाया भी कि जादू सिर्फ मदद के लिए है, मेहनत तुम्हें खुद ही करनी होगी ताकि तुम्हारा दिमाग तेज हो सके।

 

एक अन्य दिन, जब फ्रूटी उदास थी क्योंकि उसकी सहेली ने उसके साथ खेलना बंद कर दिया था, तो सोन परी ने उसके कमरे को एक जादुई खेल के मैदान में बदल दिया। वहाँ हवा में तैरने वाले खिलौने थे और रंग-बिरंगे गुब्बारे थे, जिनके साथ दोनों ने मिलकर खूब मस्ती की।

सोन परी ने फ्रूटी को जीवन के बहुत से मूल्य सिखाए। उन्होंने सिखाया कि दूसरों की मदद कैसे करनी चाहिए, बड़ों का आदर कैसे करना चाहिए और हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहना चाहिए। फ्रूटी के माता-पिता ने भी गौर किया कि उनकी बेटी अब पहले से ज्यादा खुश, समझदार और तरोताजा रहने लगी थी। उन्हें हैरानी होती थी कि जो बच्ची बात-बात पर रोती थी, वह अब हमेशा मुस्कुराती रहती थी।

लेकिन हर कहानी में सुख के साथ परीक्षा की घड़ी भी आती है। परी लोक में सिर्फ भलाई और उजाला ही नहीं था, बल्कि वहाँ कुछ ऐसी शक्तियाँ भी थीं जो नकारात्मकता और अहंकार से भरी हुई थीं। उनमें सबसे प्रमुख थीं—काली परी।

काली परी और उनके सहयोगी ‘अलटामा’ का यह मानना था कि इंसानों की दुनिया में प्यार, मासूमियत और जादू का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। काली परी हमेशा इस ताक में रहती थीं कि कब सोन परी से कोई गलती हो और वह परी लोक के नियमों का उल्लंघन करके सोन परी को नीचा दिखा सकें। काली परी जानती थीं कि सोन परी को फ्रूटी से बहुत लगाव हो गया है, और यही लगाव सोन परी की सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता था।

एक शाम, जब फ्रूटी अपने स्कूल के प्रोजेक्ट के लिए कुछ रंग ढूँढ रही थी, तभी कमरे का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया। खिड़कियाँ अपने आप बंद होने लगीं और कमरे की सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे बैंगनी और धुएँ जैसी नीली रोशनी में बदलने लगी।

फ्रूटी डरकर बिस्तर के कोने में दुकक गई। उसने काँपते हुए कहा, “सोन परी… आप कहाँ हैं?”

कमरे के बीचों-बीच हवा में एक काली परछाई उभरी। धीरे-धीरे वह परछाई एक भयानक और गुस्से से भरी हुई सूरत में बदल गई। उसने काले रंग के पंख फैला रखे थे और उसके चेहरे पर एक अजीब सी क्रूर हँसी थी। वह थीं—काली परी।

काली परी ने अपनी भारी और गूँजती हुई आवाज में कहा, “तो यह है वो नन्हीं लड़की, जिसके लिए हमारी महान सोन परी अपने सारे कर्तव्य भूलकर इस छोटी सी दुनिया में बैठी रहती है!”

फ्रूटी ने डरते हुए पूछा, “आप कौन हैं? सोन परी को क्यों परेशान कर रही हैं?”

काली परी ने ठहाका लगाते हुए कहा, “मैं काली परी हूँ! और तुम्हारी उस तथाकथित सोन परी की असलियत बहुत जल्द सबके सामने आने वाली है। तुम दोनों की यह दोस्ती परी लोक के नियमों के खिलाफ है। सोन परी को इंसानों से इतना मोह नहीं रखना चाहिए।”

ठीक उसी समय, कमरे के दरवाजे पर एक तेज़ सुनहरी चमक फूटी और वहाँ सोन परी प्रकट हो गईं। उनके चेहरे पर चिंता और दृढ़ता दोनों भाव थे।

सोन परी ने कड़े शब्दों में कहा, “काली परी! फ्रूटी एक मासूम बच्ची है। उसे डराने की कोशिश मत करो। अगर तुम्हें कोई शिकायत है, तो सीधे परी लोक में परी माँ के सामने बात करो।”

काली परी ने मुस्कुराते हुए कहा, “शिकायत मैं वहीं करूँगी, सोन परी! लेकिन उससे पहले मैं यह देखना चाहती हूँ कि तुम इस छोटी सी बच्ची को बचाने के लिए अपनी कौन सी जादुई ताकत गँवाती हो।” और एक भयानक अट्टहास के साथ काली परी वहाँ से गायब हो गई।

काली परी के जाने के बाद फ्रूटी बहुत घबरा गई थी। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने सोन परी का हाथ पकड़कर कहा, “सोन परी, क्या वह बुरी परी आपको वापस परी लोक खींच ले जाएगी? क्या आप मुझे छोड़कर चली जाएंगी?”

सोन परी ने फ्रूटी के आँसू पोछे और उसे गले से लगाते हुए कहा, “घबराओ मत, फ्रूटी! सच्चाई और प्यार की ताकत सबसे बड़ी होती है। जब तक मेरे दिल में तुम्हारी और इंसानों की भलाई की भावना है, तब तक कोई भी काली शक्ति मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। लेकिन… हमें सावधान रहना होगा।”

अगले ही दिन, काली परी ने अपनी चाल चलनी शुरू कर दी। उसने फ्रूटी के जीवन में मुश्किलें पैदा करनी शुरू कर दीं। फ्रूटी के स्कूल के बस्ते से उसकी जरूरी किताबें गायब हो गईं, उसके प्रोजेक्ट का सामान नष्ट हो गया, और यहाँ तक कि उसकी माँ के दफ्तर में भी कुछ अनहोनी हो गई जिससे उसके माता-पिता बहुत तनाव में आ गए। घर का माहौल फिर से उदास हो गया।

आया ने फ्रूटी पर शक करना शुरू कर दिया कि वह ठीक से ध्यान नहीं देती। फ्रूटी अंदर ही अंदर बहुत टूट रही थी। उसे लगा कि शायद उसकी वजह से ही सोन परी और उसके परिवार पर यह संकट आया है।

एक रात, फ्रूटी ने अकेले में अपनी अंगूठी को छुआ और रोते हुए कहा, “सोन परी, मुझे माफ कर दीजिए। मेरी वजह से आप पर और मेरे मम्मी-पापा पर मुसीबत आ गई है। शायद मुझे आपको कभी नहीं बुलाना चाहिए था।”

सोन परी तुरंत प्रकट हुईं। उन्होंने फ्रूटी के कंधे पर हाथ रखा और बहुत प्यार से समझाया, “फ्रूटी, कभी भी यह मत सोचना कि तुम्हारी वजह से कुछ बुरा हुआ है। मुश्किलें जिंदगी का हिस्सा हैं। असली ताकत तब दिखती है जब हम मुश्किलों के सामने हार मानने के बजाय उनका सामना करते हैं। क्या तुम मेरा साथ दोगी?

फ्रूटी ने अपने आँसू पोंछे और दृढ़ता से सिर हिलाया, “हाँ, सोन परी! मैं डरूँगी नहीं। हम दोनों मिलकर उस काली परी को हरा देंगे।”

सोन परी जानती थी कि इस समस्या का समाधान केवल परी लोक में ही हो सकता है। उन्हें परी माँ के सामने जाकर यह साबित करना था कि फ्रूटी के साथ उनकी यह दोस्ती सिर्फ एक व्यक्तिगत मोह नहीं, बल्कि इंसानों की दुनिया में उम्मीद और अच्छाई का बीज बोने का जरिया है।

सोन परी ने फ्रूटी से कहा, “फ्रूटी, आज रात मुझे परी लोक जाना होगा। वहाँ एक बड़ी सभा बैठी है जहाँ काली परी ने मेरे खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन जाने से पहले मैं तुम्हें अपनी विशेष शक्ति का एक अंश देती हूँ, ताकि तुम इस जादुई लॉकेट को पहनकर सुरक्षित रह सको।”

सोन परी ने अपने हाथों से एक चमकता हुआ सुनहरी लॉकेट फ्रूटी के गले में पहना दिया। लॉकेट पहनते ही फ्रूटी के अंदर एक असीम ऊर्जा और साहस का संचार हो गया। इसके बाद, सोन परी एक सुनहरी रोशनी के साथ परी लोक के लिए रवाना हो गईं।

परी लोक का दरबार खचाखच भरा हुआ था। परी माँ अपने सिंहासन पर विराजमान थीं। काली परी ने अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हुए सबके सामने आरोप लगाया कि सोन परी ने इंसानों की दुनिया में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया है और नियमों को तोड़ा है।

परी माँ ने गंभीर मुद्रा में सोन परी से पूछा, “सोन परी, क्या यह सच है कि तुमने इंसानों के बीच रहकर अपने कर्तव्यों की सीमा लाँघी है?”

सोन परी ने बिना डरे, आदर के साथ सिर झुकाकर कहा, “परी माँ, मैंने नियमों को तोड़ा नहीं है, बल्कि उनके असली अर्थ को निभाया है। प्रेम, करुणा और उम्मीद—यही तो परी लोक की असली ताकत है। फ्रूटी अकेली थी, उसके पास अपनों का प्यार नहीं था। अगर एक परी इंसानों के आंसुओं को न पोंछ सके, तो ऐसे परी लोक का क्या फायदा जो सिर्फ बादलों में चमकता हो और धरती के दुखों से अनजान रहे?”

दरबार में सन्नाटा छा गया। सभी परियाँ सोन परी के पक्ष में सोचने लगीं। तभी, दूर धरती से एक जादुई किरण परी लोक के दरबार में पहुँची। वह फ्रूटी की पुकार थी। फ्रूटी ने अपने गले के लॉकेट को छूकर मन ही मन पुकारा था, “सोन परी, हम सब आपके साथ हैं!”

फ्रूटी की उस सच्ची और मासूम पुकार ने परी लोक के विशाल आईने को रोशन कर दिया। परी माँ ने जब उस दृश्य को देखा, तो उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई। उन्होंने समझ लिया कि सोन परी का कदम पूरी तरह सही था।

परी माँ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “काली परी! तुम्हारे आरोप निराधार हैं। सोन परी ने हमारे लोक के नियमों का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि उन्हें सार्थक बनाया है। प्रेम और भलाई से बड़ी कोई शक्ति नहीं है।”

काली परी गुस्से में लाल हो गईं, लेकिन वह परी माँ के आदेश के आगे कुछ नहीं कह सकीं। वह काले बादलों के साथ परी लोक के अंधेरे कोने में लौट गईं। दरबार में सभी ने सोन परी के पक्ष में जयजयकार की।

अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण फ्रूटी की खिड़की से अंदर आई, तो पूरा कमरा पहले से कहीं ज्यादा चमक रहा था। फ्रूटी की नींद खुली तो उसने देखा कि उसके माता-पिता उसके कमरे में खड़े हैं और उनके चेहरे पर एक बहुत प्यारी मुस्कान है। उसके पिता ने उसे गले से लगाया और कहा, “बेटी, हमारी दफ्तर की सारी परेशानियाँ दूर हो गई हैं, और आज हम छुट्टी पर हैं। हम पूरा दिन तुम्हारे साथ बिताएंगे!”

फ्रूटी खुशी से उछल पड़ी। उसने तुरंत अपनी खिड़की की तरफ देखा। खिड़की की मुंडेर पर सोन परी खड़ी थीं। उन्होंने अपनी सुनहरी छड़ी से हवा में एक खूबसूरत दिल का निशान बनाया और मुस्कुराते हुए फ्रूटी की तरफ देखा।

फ्रूटी ने मन ही मन कहा, “धन्यवाद, सोन परी!”

सोन परी ने मुस्कुराते हुए हवा में हाथ हिलाया और धीरे-धीरे बादलों के पीछे परी लोक की तरफ ओझल हो गईं। लेकिन फ्रूटी जानती थी कि सोन परी कहीं नहीं गई हैं। वह हमेशा उसकी उंगली की उस अंगूठी में, उसके दिल में और उसके आसपास की हर अच्छी चीज में मौजूद रहेंगी।

  1. फ्रूटी की जिंदगी अब अकेली नहीं थी। उसके पास उसके मम्मी-पापा का प्यार था, और सबसे बढ़कर—एक जादुई दोस्त, सोन परी का अटूट साथ था। और इस तरह, हँसी-खुशी और जादू के साये में फ्रूटी का बचपन एक खूबसूरत परी कथा की तरह आगे बढ़ने लगा।
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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

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