शाम का वक्त था। हल्की-हल्की ठंडी हवा बह रही थी, और आसमान में ढलता हुआ सूरज जैसे किसी अधूरी कहानी का आख़िरी पन्ना लिख रहा हो। शहर की भीड़-भाड़ से दूर, उस पुराने पार्क की एक बेंच पर आरव चुपचाप बैठा था। उसकी आँखों में एक अजीब-सी खालीपन था—जैसे बहुत कुछ खो चुका हो, या शायद अभी तक कुछ पाया ही न हो।
आरव हमेशा से ही थोड़ा अलग था। उसे भीड़ में रहना पसंद नहीं था, पर अकेलापन भी उसे खा जाता था। वह अक्सर सोचता था—क्या ज़िंदगी में सच में किसी “एक” इंसान की ज़रूरत होती है? कोई ऐसा, जो सिर्फ तुम्हारा हो… जो बिना कहे सब समझ जाए।
उसी सोच में डूबा हुआ वह आसमान को देख रहा था कि तभी पास से एक मधुर आवाज़ आई—
“क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ?”
आरव ने चौंक कर देखा। सामने एक लड़की खड़ी थी—सफेद सूट में, बालों को हल्के से बांधे हुए, और आँखों में एक अजीब-सी चमक। वह मुस्कुरा रही थी।
“हाँ… हाँ, बिल्कुल,” आरव ने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
लड़की उसके पास बैठ गई। कुछ देर तक दोनों चुप रहे। फिर उसने कहा,
“आप रोज़ यहाँ आते हैं, ना?”
आरव ने हैरानी से पूछा, “आपको कैसे पता?”
“मैं भी रोज़ आती हूँ,” उसने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “बस… आप शायद ध्यान नहीं देते।”
आरव को थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अच्छा भी। “मैं आरव हूँ,” उसने कहा।
“मीरा,” उसने जवाब दिया।
उस दिन के बाद से दोनों की मुलाकातें रोज़ होने लगीं। पहले छोटी-छोटी बातें होती थीं—मौसम, किताबें, पसंद-नापसंद। फिर धीरे-धीरे बातों का दायरा बढ़ता गया। अब वे अपने सपनों, डर, और बीते हुए दर्द तक की बातें करने लगे थे।
मीरा बहुत अलग थी। वह हर छोटी चीज़ में खुशी ढूंढ लेती थी—गिरते हुए पत्ते, उड़ते हुए परिंदे, या फिर बारिश की पहली बूंद। आरव को उसके साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा था। उसकी ज़िंदगी में जैसे रंग वापस आने लगे थे।
एक दिन मीरा ने पूछा,
“तुम्हें सबसे ज्यादा किस चीज़ की कमी महसूस होती है?”
आरव कुछ देर चुप रहा, फिर बोला,
“एक ऐसा इंसान… जो बिना शर्त प्यार करे। जो मुझे जैसे हूँ वैसे ही अपनाए। बस… एक सनम चाहिए।”
मीरा ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में कुछ अलग था उस दिन।
“अगर वो मिल जाए, तो क्या करोगे?” उसने धीरे से पूछा।
“उसे कभी जाने नहीं दूंगा,” आरव ने तुरंत जवाब दिया।
मीरा मुस्कुराई, लेकिन उसकी मुस्कान में हल्की-सी उदासी थी।
“हर किसी की किस्मत में वो नहीं होता, आरव।”
दिन बीतते गए। अब आरव को मीरा का इंतज़ार रहने लगा था। अगर वह एक दिन भी नहीं आती, तो उसे बेचैनी होने लगती। उसे एहसास हो रहा था कि वो मीरा से प्यार करने लगा है।
एक शाम, जब हल्की बारिश हो रही थी, आरव ने हिम्मत जुटाई।
“मीरा, मुझे तुमसे कुछ कहना है।”
“हम्म?” मीरा ने उसकी तरफ देखा।
“मुझे लगता है… नहीं, मैं यकीन से कह सकता हूँ… कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”
बारिश की बूंदें तेज़ हो गई थीं। मीरा चुप थी। उसकी आँखें नम हो गई थीं।
“कुछ तो कहो, मीरा…” आरव ने घबराते हुए कहा।
मीरा ने गहरी सांस ली।
“काश… तुम ये बात पहले कहते।”
“क्या मतलब?” आरव का दिल धड़कने लगा।
“मतलब ये कि… अब बहुत देर हो चुकी है,” मीरा की आवाज़ कांप रही थी।
“देर? क्यों? क्या हुआ?” आरव ने बेचैनी से पूछा।
मीरा ने अपने बैग से एक लिफाफा निकाला और उसे दे दिया।
“ये पढ़ लेना… सब समझ आ जाएगा।”
इतना कहकर वह उठी और धीरे-धीरे बारिश में भीगती हुई वहाँ से चली गई। आरव उसे रोक भी नहीं पाया।
कंपकंपाते हाथों से उसने लिफाफा खोला। उसमें एक चिट्ठी थी—
“प्रिय आरव,
जब तुम ये चिट्ठी पढ़ रहे होगे, तब शायद मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होऊँगी।
मुझे तुमसे पहली मुलाकात में ही लग गया था कि तुम वही इंसान हो, जिसकी मुझे तलाश थी। लेकिन मेरी ज़िंदगी में एक सच्चाई थी, जिसे मैं तुम्हें बताने से डरती रही।
मुझे एक गंभीर बीमारी है… डॉक्टरों ने कहा है कि मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है।
मैं नहीं चाहती थी कि तुम मुझसे प्यार करो, क्योंकि मैं तुम्हें अधूरा छोड़कर जाना नहीं चाहती थी। लेकिन मैं खुद को तुमसे दूर भी नहीं रख पाई।
तुम्हारे साथ बिताया हर पल मेरे लिए जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहा है।
तुम कहते थे ना—‘बस एक सनम चाहिए’?
काश… मैं वही बन पाती, हमेशा के लिए।
लेकिन अब मुझे जाना होगा।
एक वादा करना—मेरे जाने के बाद भी तुम जीना मत छोड़ना। किसी और को अपनी जिंदगी में आने देना। क्योंकि तुम प्यार के लायक हो… पूरा, सच्चा और हमेशा रहने वाला प्यार।
तुम्हारी,
मीरा”
चिट्ठी पढ़ते ही आरव की दुनिया जैसे रुक गई। उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वह उसी बेंच पर बैठा रहा, घंटों तक… जैसे समय थम गया हो।
अगले दिन वह अस्पतालों में, सड़कों पर, हर जगह मीरा को ढूंढता रहा। लेकिन वह कहीं नहीं मिली। जैसे वो कभी थी ही नहीं—सिर्फ एक खूबसूरत सपना।
महीने बीत गए। आरव फिर उसी पार्क में जाने लगा, उसी बेंच पर बैठने लगा। लेकिन अब वह पहले जैसा नहीं था। उसके चेहरे पर एक दर्द था, लेकिन साथ ही एक सुकून भी—क्योंकि उसने सच्चा प्यार महसूस किया था, भले ही थोड़े समय के लिए।
एक दिन, जब वह बेंच पर बैठा था, एक छोटी-सी लड़की उसके पास आई।
“भैया, ये आपके लिए है,” उसने एक छोटा सा फूल देते हुए कहा।
“किसने भेजा?” आरव ने पूछा।
लड़की ने मुस्कुराकर आसमान की तरफ इशारा किया और दौड़ती हुई चली गई।
आरव ने फूल को देखा और हल्के से मुस्कुरा दिया। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार वो दर्द के नहीं, बल्कि यादों के थे।
उसने आसमान की तरफ देखा और धीरे से कहा—
“तुमने कहा था ना, मुझे जीना होगा… मैं जी रहा हूँ, मीरा। लेकिन तुम्हें कभी भूल नहीं पाऊँगा।”
हवा फिर से बहने लगी थी। पेड़ के पत्ते सरसराने लगे थे, जैसे कोई धीमे से गुनगुना रहा हो—
“बस एक सनम चाहिए…”
और उस दिन आरव को समझ आया—
कभी-कभी ज़िंदगी हमें वो नहीं देती जो हम चाहते हैं…
लेकिन वो हमें वो एहसास ज़रूर देती है, जो हमें हमेशा के लिए बदल देता है।
मीरा उसकी ज़िंदगी में आई, थोड़े समय के लिए…
लेकिन उसने उसे सिखा दिया कि सच्चा प्यार वक्त का मोहताज नहीं होता।
आरव अब भी उस पार्क में जाता है। कभी-कभी मुस्कुराता है, कभी आँखें नम हो जाती हैं।
लेकिन अब वह अकेला नहीं है—
क्योंकि उसके दिल में एक कहानी बस गई है…
एक अधूरी, लेकिन बेहद खूबसूरत कहानी—
जिसमें उसे सच में “बस एक सनम” मिला

NSW. उभरते लेखक 🥈
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
Manoj Divana Namaste Story World को प्रतिक्रिया दें जवाब रद्द करें