खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!
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याद आती है
पढ़ने का समय : < 1 मिनटखुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!
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एक अनोखा रिश्ता
पढ़ने का समय : 6 मिनटराहुल अपने मम्मी पापा के साथ मुंबई में एक फ्लैट में रहता था ,वह अपने दोस्तों के साथ सामने के खाली पड़े फ्लैट के सामने हमेशा अपने दोस्तों के साथ खेलता था , एक दिन उस फ्लैट में अचानक ही फर्नीचर का काम चालू हो गया ,और पता चला कि उस फ्लैट में अब कोई रहने आने वाला है। इससे राहुल और उसके दोस्त बहुत उदास हो गये। पर फिर भी उन्होंने फ्लैट में खेलना नहीं छोड़ा।
राहुल और उसके दोस्तों को शैतानी करते देखकर फर्नीचर वाले अंकल उन्हें हमेशा डांट कर भगाते थे पर वह नहीं सुनते थे।
एक दिन राहुल अपने दोस्तो के साथ फ्लैट में खेल रहा था और सामने फर्नीचर का काम भी चल रहा था , तभी वहां एक औरत एक छोटी सी लड़की को लेकर आई।
उसकी छोटी-छोटी आंखें और दबी हुई सी नाक थी। वो लड़की हमें डरी हुई नज़रों से देख रही थी, हमने उन्हें देखकर खेलना बंद कर दिया था।
“शायद ये लोग ही यहां रहने आए है।” अजय ने धीरे से राहुल के कान में कहा।
उसकी बात सुनकर राहुल के चेहरे में मुस्कान आ गई, उसे बड़ी खुशी हुई कि अब उनकी गैंग में एक और सदस्य जुड़ जाएगा।
उस लड़की की नज़रें जैसे ही राहुल की नजरो से टकराई तो राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
जब उस लड़की ने देखा कि मैं उसे देख कर मुस्करा रहा हूं, तो उस लड़की ने राहुल से मुंह फेर लिया।
उस लड़की के ऐसे मुंह फेरने से राहुल का चेहरा उतर गया , उसे बड़ा अजीब सा लगा और वह जल्दी से अजय के साथ वहां से चला गया।
अब राहुल और अजय ने वहां पर खेलना बन्द कर दिया क्योंकि वो लोग फ्लैट में रहने लगे थे ।
एक दिन राहुल की मम्मी सीमा उसके पापा से बात के रही थी ।
” सुनो जी मैंने सुना वो सामने वाले घर में जो लोग आए है ,वह हिमाचल से आए हैं। बस मां बेटी रहती है ,सुना है बच्ची के मम्मी-पापा का तलाक हो चुका था “।
अक्षय सीमा से बोला ,” छोड़ो ,हमे क्या करना है , वह उनका निजी मामला है “!
राहुल अपनी मम्मी पापा की बात सुनकर वहां से चला गया।
अब राहुल और अजय अपने और दोस्तों के साथ बिल्डिंग के नीचे वाले गार्डन में खेलते थे।
राहुल एक दिन खेल था , तभी उसकी नजर बालकनी में खड़ी उस लड़की में पड़ी , जो कभी अपने घर से बाहर नहीं निकलती थी ,पर कभी कहीं गलती से बालकनी में खड़ी दिख भी जाती, तब भी उसे देखकर अंदर चली जाती थी। आज भी वही हुआ जैसे ही राहुल और उस लड़की की नजरे टकराई ,वो लड़की अन्दर भाग गई।
कुछ दिनों बाद दीवाली आई और शाम को घर में पूजा हुई और पूजा खत्म होने के बाद सीमा ने राहुल को प्रसाद देते हुए कहा ,” जाओ राहुल ये प्रसाद लेकर सामने वाले फ्लैट की आंटी को दे दो।
राहुल प्रसाद लेकर जैसे ही सामने वाले घर में गया तो दरवाज़ा उस लड़की ने ही खोला, पर राहुल ने उसे इग्नोर किया और उसकी मम्मी के पास गया।
“ आंटी मम्मी ने प्रसाद दिया है और कहा है कि आप लोग हमारे साथ दिवाली मनाएं।” राहुल ने उसकी मम्मी को प्रसाद पकड़ाते हुए कहा।
“बेटा…हम दिवाली नहीं मनाते… बैठो मैं अभी आती हूं” आंटी ने राहुल को बैठने का इशारा करते हुए कहा और किचन से राहुल के लिए कुछ खाने के लिए लेने चली गईं।
“तुम्हारा नाम क्या है “? राहुल ने पूछा।
वो लड़की बहुत देर चुप रहने के बाद बोली ,” आकांक्षा “!
“तुम्हें पटाखे जलाना अच्छा नहीं लगता?” राहुल ने उस लड़की से पूछा।
“हां” बहुत देर तक चुप रहने के बाद आखिर कर वो लड़की बोली।
“तुम चलो बाहर हम साथ में पटाखे जलाएंगे” राहुल ने कहा।
“नहीं मम्मी बाहर जाने से मना करती हैं।” लड़की कहने लगी।
“अच्छा। हमसे बात करने के लिए भी?” राहुल ने चौंक कर पूछ लिया।
“नहीं।…उन्हें डर लगता है, लोग हमारा मज़ाक बनाते हैं।” लड़की ने धीरे से कहा।
“क्यों?” राहुल ने पूछा।
“क्योंकि हमारी छोटी आंखें हैं ना… हम यहां पहले रहते थे, वहां सब बच्चे मुझे चाइनीज.. चाइनीज…बोलकर चिढ़ाते थे। एक दिन मुझे गुस्सा आ गया। मैंने एक लड़के को घूंसा मार दिया। फिर उसकी मम्मी ने मेरी मम्मी से बहुत झगड़ा किया। मेरे पापा-मम्मी के बारे में गंदी-गंदी बातें की। फिर हमने वो घर छोड़ दिया। इसलिए ही मम्मी यहां किसी से बात करने के लिए मना करती हैं।” अभी वो बता ही रही थी कि उसकी मम्मी आ गई।
“आंटी आप नहीं आ रही तो मैं इसे ले जाऊं? हम साथ में पटाखे जलाएंगे, प्लीज़ आंटी।” राहुल ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा तो कुछ देर बाद उसकी मम्मी मान गईं।
राहुल ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “डरो मत यहां कोई तुम्हारा मज़ाक नहीं बनाएगा।” और वो दोनों बाहर जाकर पटाखे जलाने लगे ।
तभी कुछ बच्चे आए और आकांक्षा का मजाक बनाने लगे।
आकांक्षा सबको अपना मजाक बनाता देख रोते हुए भागने लगी।
जब बालकनी में खड़ी उसकी मां ने आकांक्षा का मजाक बच्चों को उड़ाते देखा तो वह भागकर नीचे चली गई।
इधर आकांशा भागकर जा ही रही थी कि वह सीमा और अक्षय से टकरा गई।
सीमा ने आकांक्षा को गले लगाते हुए कहा,” क्या हुआ बेटा तुम ऐसे रो क्यों रही हो “?
राहुल भी वहां आ गया और उसे सब बात बता दी।
जब सीमा ने अब बाते जानी तो वह आकांक्षा के आंसु पोछते हुए बोली ,” बेटा रोते नहीं लोग तो बाते बनाते रहते है ,उनकी बातो को दिल में नहीं लेते ,तुम भागेगी तो वह तुम्हे कमजोर समझेंगे ,और बार बार वही करेंगे ,तुम इन सबका डटकर सामना करो “!
आकांक्षा की मां राधा जैसे ही वहां आई ,तो उन बच्चों की मां बाते बनाने लगी ,” इस औरत का पता नहीं यहां कैसे आई ? पति से तलाक क्यों लिया और कोई पति है भी या नहीं ? कौन जानता है सच “!
सबको बात बनाता देखकर राधा की आंखे भर आई , सीमा सबको डांटते हुए बोली ,” चुप हो जाओ तुम अब ,शर्म नहीं आती एक औरत होकर दूसरी औरत के बारे में ऐसी बात। करते हुए “?
सीमा की डांट सुनकर अब चुप हो गए।
अक्षय गुस्से से बोला ,” आप सब ऐसे बाते मत बनाइए राधा बहन के बारे में ,किसकी क्या मजबूरी है कोई भी जानता, यह एक ईजेदार महिला है इन्हें ऐसे परेशान मत कीजिए ,अब जमाना बदल गया है ,एक औरत कमजोर नहीं ,वह अकेले भी खुद का और अपने बच्चों का अच्छा पालन पोषण कर सकती है”।
अब सब लोगों ने नजरे झुका ली।
अक्षय ने आकांक्षा को गोद में लिया और बोला ,” यह देखिए इस मासूम सी बच्ची को ,आप जैसे समाज के ठेकदारों की वजह से इसकी आंखों में आंसु है ,सब कहते है बच्चे भगवान का रूप होते है ,तो क्या आपको शोभा देता है ऐसे किसी बच्चे को परेशान करता देखकर “!
सभी को अपने किए पर शर्मिंदगी हुई और उन्होंने राधा और आकांशा से माफी मांगी।
उसके बाद सभी ने साथ मिलकर दिवाली मनाई ,और राहुल और उसके दोस्तों के साथ आकांशा ने खूब पटाखे जलाए।
इस तरह राहुल और आकांशा दोस्त बन गए ,और उनके बीच दोस्ती का एक अनमोल रिश्ता बन गया।
Mysterious chand
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सपनों का पुल
पढ़ने का समय : 2 मिनट
एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक प्यारा बच्चा रहता था। आरव को सपने देखना बहुत पसंद था। हर रात वह आँखें बंद करता और एक नई दुनिया में चला जाता—जहाँ रंग-बिरंगे पेड़ होते, उड़ते हुए फूल होते और हँसती हुई नदियाँ होतीं।
एक दिन उसने अपने सपने में एक अनोखा पुल देखा। वह पुल साधारण नहीं था—वह “सपनों का पुल” था। यह पुल इंद्रधनुष के रंगों से बना था और बादलों के ऊपर तैरता था। पुल के एक छोर पर “डर” खड़ा था और दूसरे छोर पर “हिम्मत और खुशी”।
आरव पहले तो डर गया। उसने सोचा, “अगर मैं गिर गया तो?” तभी एक छोटी सी चिड़िया आई और मुस्कुराते हुए बोली,
“डर को पार करना है तो पहला कदम बढ़ाना होगा।”
आरव ने गहरी साँस ली और पुल पर कदम रखा। जैसे ही उसने पहला कदम रखा, पुल थोड़ा और चमकने लगा। हर कदम के साथ उसका डर कम होता गया और उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया।
चलते-चलते उसे रास्ते में कई बच्चे मिले। कोई कह रहा था, “मुझे चित्र बनाना है, पर मैं अच्छा नहीं हूँ।” कोई कह रहा था, “मुझे गाना गाना है, पर लोग हँसेंगे।”
आरव मुस्कुराया और बोला, “चलो, हम सब साथ चलेंगे। यह पुल हमें सिखाता है कि कोशिश करने से ही सपने पूरे होते हैं।”
सब बच्चों ने मिलकर एक-दूसरे का हाथ थाम लिया और आगे बढ़ते गए। जैसे ही वे पुल के अंत तक पहुँचे, वहाँ एक सुंदर बगीचा था—जहाँ हर बच्चे का सपना सच हो रहा था।
आरव ने देखा, जो बच्चा डर रहा था, वही अब खूबसूरत चित्र बना रहा था। जो गाने से डरता था, वह खुशी-खुशी गा रहा था। सबके चेहरे पर मुस्कान थी।
तभी वही चिड़िया फिर आई और बोली,
“यह पुल हर बच्चे के अंदर होता है। जब तुम अपने डर से आगे बढ़ते हो, तो तुम्हारा ‘सपनों का पुल’ तुम्हें तुम्हारी खुशी तक ले जाता है।”
अगली सुबह जब आरव जागा, तो वह बहुत खुश था। उसने तय किया कि वह अपने सपनों से कभी नहीं डरेगा और हमेशा पहला कदम बढ़ाएगा।
सीख:
डर हमें रोकता है, लेकिन हिम्मत हमें आगे बढ़ाती है। जब हम अपने सपनों की ओर पहला कदम उठाते हैं, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं।
- और तब से, हर रात आरव अपने सपनों के पुल पर चलता… और हर दिन अपनी असली जिंदगी में एक कदम आगे बढ़ाता। 🌈
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ख्वाबों का आसमान…
पढ़ने का समय : < 1 मिनट
अंदर अंदर खुद से खुद
ही को सहेजे रखा है,
हां मैंने अपने हृदय में जीवंत
ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,
सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है
नकारात्मक प्रभाव से दूर एक
अलग ही जहां सजा के रखा है
हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा
कर रखा है , ये मेरी दुनिया है
मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया
छल कपट और वीरानियों से
इसे बहुत दूर रखा है,
हां मैंने किसी अपने खास के लिए
ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!
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प्रेम वो है…
पढ़ने का समय : < 1 मिनट
प्रेम वो नहीं, जो दुनिया को दिखाने का नाम हो,प्रेम वो है, जो तन्हाई में भी सिर्फ उसका गुलाम हो।
दूरी होने पर जो दूसरों में सुकून ढूँढने लगे वो समझौता है,
प्रेम वो है, जिसके लिए गैर की छुअन भी एक इल्जाम हो।
प्रेम वो नहीं, जो उसूलों की बेड़ियों में दम तोड़ दे,
और फिर हालात का नाम लेकर हाथ छोड़ दे…
प्रेम वो है,
जो पत्थर की दीवारों के बीच भी, मिलने का रास्ता ढूँढ ले।
प्रेम वो नहीं, जो सिर्फ साथ हँसने का वादा करे,
प्रेम वो है, जो तुम्हारे दर्द की अनुभव तुमसे ज्यादा करे।
जो टूटकर भी, जुड़ने की सिर्फ एक वजह माँगे,
और बिखरकर भी, तुम्हारी सलामती की दुआ अदा करे।
चंदर ने चाहा… पर सिर्फ अपने ख्यालों में,
हकीकत से भागकर, उलझा रहा अपने ही सवालों में…
और सुधा ने?
सुधा ने उस प्रेम को कफ़न की तरह ओढ़ लिया
जैसे वो कोई ऐसी मन्नत हो,
जो खुदा ने सुन तो ली, पर कभी पूरी नहीं की।
गुनाहों का देवता 📖
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तस्वीर…!!
पढ़ने का समय : < 1 मिनट
मै रख लू़ं तुम्हें अपने पास
क्या ऐसा मुमकिन है ,
तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं
ये कहां मेरे लिए मुमकिन है ,
मेरे हिस्से में तुम्हारी जुदाई आई,
मैं फिर भी खुश हूं तो क्या हुआ
जो आंख मेरी भर आई,
हालातों का हवाला क्यों देते
हो जब वफाओं का तुमपें जोर नहीं ,
हां ये सच है इश्क ❤️ की
बीमारी सिर्फ मेरे हिस्से आई ,
तुम जा रहे हो तो मैं नहीं तुम्हें रोकूंगी
बस तुम संग एक आखिरी
तस्वीर ले लूंगी,
यादों के झरोखों से जब
भी याद तुम्हारी आयेगी ,
अलमारी के कोने से
निकाल तस्वीर तुम्हारी देख लूंगी …!!




