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  • सावन

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    🌧️ सावन 🌿

    सावन आया, बदली छाई,

    मिट्टी ने फिर खुशबू पाई।

    बूंदों ने जब गीत सुनाया,

    मन ने भी कुछ याद किया।

    पेड़ों पर झूले, होंठों पर गान,

    हर ओर बिखरा प्रेम का अरमान।

    ठंडी हवा जब छूकर जाए,

    सावन दिल को फिर महकाए। ❤️

  • जंगल के बीच फंसे कियान नैन तारा

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    पहाड़ों के जंगल में नैन तारा और कियान

     

    नैन तारा को बचपन से ही पहाड़ बहुत पसंद थे। जब भी टीवी पर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, झरने और घने जंगल दिखाई देते, वह घंटों उन्हें देखती रहती।

     

    एक दिन उसने अपने माता-पिता से कहा, “मुझे इस बार पहाड़ों की सैर पर अकेले जाना है।”

     

    उसकी माँ ने तुरंत मना कर दिया।

     

    “अकेले? बिल्कुल नहीं। तुम अभी इतनी बड़ी नहीं हुई हो कि अनजान जगह पर अकेली घूम सको।”

     

    नैन तारा ने मुँह बनाते हुए कहा, “माँ, मैं बच्ची नहीं हूँ। मैं अपना ध्यान रख सकती हूँ।”

     

    पिता ने भी समझाया, “बात तुम्हारे बच्ची होने की नहीं है। पहाड़ों पर रास्ते कभी भी बदल जाते हैं और जंगल में जाना तो बिल्कुल सुरक्षित नहीं।”

     

    लेकिन नैन तारा अपनी जिद पर अड़ी रही।

     

    कई दिनों तक वह माता-पिता से इसी बात को लेकर बहस करती रही। आखिरकार एक सुबह वह बिना किसी को बताए पास के पहाड़ी इलाके की तरफ निकल गई। उसके पास थोड़ा पानी, कुछ खाने का सामान, एक जैकेट और छोटा सा बैग था।

     

    शुरुआत में सब कुछ उसकी उम्मीद से भी अच्छा था।

     

    चारों तरफ ऊँचे पहाड़ थे। दूर कहीं झरने की आवाज आ रही थी और ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी।

     

    नैन तारा मुस्कुराई।

     

    “देखा! मैं बेकार में ही डर रही थी।”

     

    वह एक पतली पगडंडी पर आगे बढ़ती चली गई।

     

    उसे लगा कि यह रास्ता शायद किसी छोटे से गाँव तक जाता होगा।

     

    लेकिन लगभग एक घंटे बाद रास्ता अचानक दो हिस्सों में बंट गया।

     

    नैन तारा रुक गई।

     

    “अब किधर जाऊँ?”

     

    उसने पीछे मुड़कर देखा।

     

    जिस रास्ते से वह आई थी, वह भी पेड़ों के बीच कहीं गायब-सा हो चुका था।

     

    वह थोड़ी घबराई, लेकिन खुद को संभालते हुए बोली, “ठीक है… वापस चलते हैं।”

     

    वह वापस मुड़ी, मगर कुछ कदम चलने के बाद उसे एहसास हुआ कि वह रास्ता पहचान नहीं पा रही थी।

     

    धीरे-धीरे जंगल घना होता जा रहा था।

     

    पेड़ों की शाखाएँ ऊपर इतनी फैल चुकी थीं कि सूरज की रोशनी भी जमीन तक मुश्किल से पहुँच रही थी।

     

    नैन तारा के कदम रुक गए।

     

    “ओह नहीं… मैं सच में खो गई।”

     

    उसने अपना फोन निकाला, लेकिन नेटवर्क नहीं था।

     

    उसने माँ को फोन करने की कोशिश की।

     

    कॉल नहीं लगी।

     

    उसकी आँखों में डर साफ दिखाई देने लगा।

     

    तभी दूर झाड़ियों में कुछ हिला।

     

    नैन तारा ने ध्यान से देखा।

     

    दो चमकती हुई आँखें उसे घूर रही थीं।

     

    उसका शरीर डर से बिल्कुल स्थिर हो गया।

     

    झाड़ियों से एक भेड़िया धीरे-धीरे बाहर आया।

     

    नैन तारा पीछे हटने लगी।

     

    भेड़िया भी उसकी ओर बढ़ने लगा।

     

    उसके मुँह से हल्की गुर्राहट निकल रही थी।

     

    नैन तारा का दिल तेजी से धड़कने लगा।

     

    उसने भागने की कोशिश नहीं की। उसे समझ आ गया था कि भागना स्थिति को और खतरनाक बना सकता है।

     

    वह धीरे-धीरे पीछे हटते हुए एक पेड़ के पास पहुँच गई।

     

    तभी ऊपर से पत्तों के हिलने की आवाज आई।

     

    नैन तारा ने डरकर ऊपर देखा।

     

    एक लड़का पेड़ की मोटी शाखा पर बैठा था।

     

    लगभग इक्कीस साल का वह लड़का शांत नजर आ रहा था। उसके कंधे पर एक छोटा बैग था और हाथ में लकड़ी की मजबूत छड़ी।

     

    अगले ही पल वह पेड़ से नीचे कूद गया और नैन तारा के सामने आकर खड़ा हो गया।

     

    “पीछे हटो!” उसने नैन तारा से कहा।

     

    लड़के की आवाज सख्त थी।

     

    नैन तारा तुरंत कुछ कदम पीछे हो गई।

     

    लड़के ने भेड़िए की तरफ देखा और ऊँची आवाज में उसे दूर जाने के लिए डराया।

     

    भेड़िया कुछ पल वहीं खड़ा रहा।

     

    फिर लड़के की तरफ देखकर पीछे हटने लगा और थोड़ी देर बाद झाड़ियों के बीच गायब हो गया।

     

    नैन तारा ने राहत की सांस ली।

     

    “तुम… कौन हो?”

     

    लड़के ने उसकी तरफ देखा।

     

    “मेरा नाम कियान है।”

     

    “तुम यहाँ अकेले क्या कर रहे हो?”

     

    कियान ने हल्की नाराजगी से पूछा, “पहले ये बताओ कि तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो?”

     

    नैन तारा चुप हो गई।

     

    “मैं… घूमने आई थी।”

     

    “घूमने?”

     

    “हाँ।”

     

    “और रास्ता भूल गई?”

     

    नैन तारा ने धीरे से सिर हिला दिया।

     

    कियान ने लंबी सांस ली।

     

    “तुम्हें पता भी है कि तुम कितनी दूर जंगल के अंदर आ चुकी हो?”

     

    नैन तारा ने घबराकर पूछा, “कितनी?”

     

    “इतनी कि अकेले वापस जाना ठीक नहीं होगा।”

     

    यह सुनकर नैन तारा के चेहरे का रंग उड़ गया।

     

    “तो अब क्या होगा?”

     

    कियान ने कहा, “पहले घबराना बंद करो। जब तक हम शांत रहेंगे, रास्ता ढूँढना आसान होगा।”

     

    नैन तारा उसके पीछे चलने लगी।

     

    कुछ दूर जाने के बाद उसने पूछा, “तुम्हें ये जंगल इतना अच्छी तरह कैसे पता है?”

     

    कियान ने जवाब दिया, “मैं यहीं आसपास रहता हूँ। बचपन से इन पहाड़ों और जंगलों में घूमता आया हूँ।”

     

    वह चलते-चलते पेड़ों पर बने छोटे निशान देख रहा था।

     

    नैन तारा ने पूछा, “तुम ये निशान क्यों देख रहे हो?”

     

    “ये पुराने रास्ते के संकेत हैं। बारिश और भूस्खलन की वजह से कई रास्ते बदल गए हैं, इसलिए ध्यान से चलना पड़ता है।”

     

    कुछ देर बाद दोनों को एक छोटी सी पहाड़ी धारा दिखाई दी।

     

    कियान ने कहा, “यहाँ थोड़ी देर आराम कर लेते हैं।”

     

    नैन तारा पत्थर पर बैठ गई।

     

    उसने अपना फोन फिर देखा।

     

    अब भी नेटवर्क नहीं था।

     

    उसकी आँखें भर आईं।

     

    “मेरे माँ-पापा बहुत परेशान हो रहे होंगे।”

     

    कियान कुछ पल चुप रहा।

     

    फिर बोला, “जब हम सुरक्षित बाहर निकलेंगे, सबसे पहले उन्हें फोन करना।”

     

    नैन तारा ने सिर हिलाया।

     

    “मुझे उनसे झूठ बोलकर यहाँ नहीं आना चाहिए था।”

     

    कियान ने कहा, “गलती हो गई है तो अब उसे दोहराना मत। अभी हमारा ध्यान बाहर निकलने पर होना चाहिए।”

     

    दोनों आगे बढ़े।

     

    लेकिन शाम होते-होते मौसम अचानक बदल गया।

     

    आसमान पर काले बादल छा गए।

     

    ठंडी हवा तेज होने लगी।

     

    कियान ने चारों तरफ देखा।

     

    “हमें जल्दी कोई सुरक्षित जगह ढूँढनी होगी।”

    नैन तारा ने पूछा, “क्यों?”

    “पहाड़ों में मौसम का भरोसा नहीं होता।”

    कुछ ही मिनट बाद बारिश शुरू हो गई।

    दोनों एक बड़ी चट्टान के नीचे बने प्राकृतिक छज्जे में जाकर खड़े हो गए।

    बारिश तेज होती जा रही थी।

    नैन तारा चुपचाप बाहर देख रही थी।

    अचानक उसे दूर पहाड़ के दूसरी तरफ एक हल्की-सी रोशनी दिखाई दी।

    “कियान! वहाँ देखो!”

    कियान ने रोशनी की तरफ देखा।

    उसके चेहरे पर पहली बार राहत की झलक आई।

     

    “वो शायद पहाड़ी रास्ते पर बने पुराने वन-चौकी की रोशनी है।”

    “तो हम वहाँ जा सकते हैं?”

    “बारिश थोड़ी कम होने दो।”

    नैन तारा ने धीरे से पूछा, “कियान… अगर तुम आज यहाँ नहीं होते तो?”

    कियान ने उसकी बात बीच में रोक दी।

    “उस बारे में मत सोचो। अब तुम सुरक्षित हो।”

    बारिश धीरे-धीरे कम होने लगी।

    कियान ने अपना बैग उठाया।“चलो।”

    दोनों सावधानी से उस रोशनी की दिशा में बढ़ने लगे।

    लेकिन जैसे ही वे चट्टान के पीछे से निकले, कियान अचानक रुक गया।

    उसने जमीन पर कुछ देखा।

    कीचड़ में बने ताजे पैरों के निशान।

    वे किसी इंसान के थे।

    नैन तारा ने पूछा, “क्या हुआ?”

    कियान ने जवाब नहीं दिया।

    उसने कुछ दूर जंगल की ओर देखा।

    फिर धीमी आवाज में बोला“हम इस जंगल में अकेले नहीं हैं।”

    नैन तारा का चेहरा डर से बदल गया।

    “मतलब?”

    कियान ने उसकी ओर देखा।

    “मुझे नहीं पता… लेकिन ये निशान अभी-अभी किसी ने छोड़े हैं।”

    दोनों कुछ पल वहीं खड़े रहे।

     

    दूर अंधेरे जंगल में अचानक किसी सूखी टहनी के टूटने की आवाज आई।

    कियान ने नैन तारा को पीछे रहने का इशारा किया।

    और उसी पल पेड़ों के बीच एक परछाईं तेजी से हिली…

    नैन तारा ने डरकर कियान की तरफ देखा।

     

    अब सवाल सिर्फ जंगल से बाहर निकलने का नहीं था।

     

    सवाल यह था कि उस सुनसान जंगल में उनके अलावा तीसरा कौन था?