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टैग: दर्द

  • तेरे जाने के बाद

    तेरे जाने के बाद

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    तेरे जाने के बाद …!!

    रास नहीं आया मुझको मेरे 

    ही घर का कोई कोना,

    सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,

    जहां दिन और रात ,अब काटने को

    दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,

    नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन

    अंधेरे में चली जाएगी,

    तेरे जाने के बाद  हां तेरे

    जाने के बाद एहसास हुआ

    मुझे कमी तेरी कमी यादों की

    चादर इस तरह तड़पाएगी ,

    तेरे जाने के बाद दिल

    खाली – खाली सा लगता है  ,

    तेरी पनाहों में आने को

    दिल कितना तड़पता है  ,

    आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,

    तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • क्रुप

    क्रुप

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सावरी का कॉलेज का पहला दिन था। वह अपनी नाक पर चश्मा लगाकर, गोरखा पहनकर कॉलेज गई। गोरखा उसका पहचान का हिस्सा बन चुका था, और वह इससे कभी पीछे नहीं हटी। लेकिन आज, उसके गोरखे का रंग और अधिक चमकीला लग रहा था। गोरखा पहनने के पीछे उसका एक गहरा कारण था, जिसे शायद किसी ने नहीं समझा।

     

    कॉलेज के नए माहौल में प्रवेश करते ही, लड़के और लड़कियां उसकी ओर टेढ़ी नजर से देखने लगे। कुछ ने उसे घूरा, कुछ बुदबुदाए और कुछ ने अदब से मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से कहा, “क्या फर्क है, ये गोरखा पहनकर आई है!” सावरी के मन में एक डर सताने लगा। उसने हमेशा यही समझा था कि देखने के मामले में वह अलग है। उसके चेहरे पर एसिड के जले हुए निशान थे, जिन्हें वह किसी से छिपाना चाहती थी। उसे लगता था कि अगर किसी ने उसके चेहरे पर ध्यान दिया, तो सब उसकी उपहास करेंगे और उससे दूर रहना पसंद करेंगे।

     

    जब उसकी दोस्त जिया ने उससे पूछा, “तू गोरखा क्यों पहनती है, हर कोई तो पैंट-टॉप्स में आता है?” तो सावरी ने संकोच में सिर झुका लिया। उसका चेहरा धुंधला हो गया, जैसे उसने अपने अंदर की लड़ाई को छिपा लिया हो। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखों के इशारे से जिया को समझाया कि यह एक गहरा विषय है, जिसे सुलझाना आसान नहीं है।

     

    कॉलेज के पहले दिन, सावरी ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह किसी को अपने बारे में कुछ न बताने दे। लेकिन एक दिन, जब वह लाइब्रेरी में बैठी थी, उसने एक दोस्ताना आवाज सुनी। “तो तुम गोरखा में क्यों आती हो? क्या तुम्हें लगता है कि इससे तुम किसी से अलग लगती हो?” यह आवाज आयशा की थी, जो मुस्लिम समुदाय की एक लड़की थी। सावरी ने अपने दिल की धड़कन को धीमा करने की कोशिश की। उसने अपनी आंखों में खामोशी के साथ जवाब दिया, “बस, मेरी पसंद है।”

     

    आयशा ने उसकी आंखों में गहराई देखी और समझ गई कि सावरी कुछ छुपा रही है। वह पास आई और धीमी आवाज में समझाया, “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जब तुम अपनी पहचान को छुपाती हो, तो तुम खुद को एक बंधन में बांध लेती हो।” सावरी इस बात को सुनकर चुपचाप मुस्कुरा दी, लेकिन उसके दिल में एक हलचल थी। वह जानती थी कि आयशा सही कह रही है, लेकिन उसके लिए वह खुद को दिखाना बहुत कठिन था।

     

    दिन बीतते गए, और सावरी ने धीरे-धीरे कुछ दोस्तों को बना लिया। लेकिन कॉलेज में जब भी कोई नया आया, सभी के बीच चर्चाओं का केंद्र बनी हुई थी सावरी का गोरखा। सावरी ने यह भी पाया कि कुछ लड़के उसे देखकर मजाक करते, “वह तो गोरखा की रानी है!” उसे भले ही इस बात का दुख नहीं हुआ लेकिन वह महसूस करती थी कि कुछ लोग उसके प्रति संवेदनशील नहीं थे।

     

    एक दिन, कॉलेज में एक वर्कशॉप का आयोजन हुआ, जिसमें सभी को अपनी कहानी साझा करने के लिए कहा गया। सावरी ने सोचा कि शायद यहां वह अपनी कहानी साझा कर पाएगी। उसने अपनी आँखों को बंद किया और खुद को यह बताते हुए अंदर से मजबूत बनाने की कोशिश की, “मैं खुद को दूसरों के सामने क्यों नहीं रख सकती?” लेकिन जब उसकी बारी आई, तो वह झिझक गई।

     

    सावरी ने अपने गोरखे का पल्ला खींचते हुए एक गहरी सांस ली। वह जानती थी कि उसका यह क्षण उसके लिए कितना महत्वपूर्ण था। कॉलेज की वर्कशॉप में जब उसने अपने गोरखे को नीचे फेंका, तो कमरे में गहरी खामोशी छा गई। सभी की आंखें उसकी ओर थीं। कुछ क्षणों के लिए, उसने सोचा कि क्या उसने सही किया? लेकिन फिर, उसके मन में एक ताकत का अहसास हुआ। यह केवल उसका चेहरा नहीं था, बल्कि यह उसकी पूरी कहानी थी, जिसे उसने अब तक छिपाने की कोशिश की थी।

     

    “मैं सावरी हूँ,” उसने धीरे-धीरे कहना शुरू किया, “और मेरा ये चेहरा, इसने मुझे ताकत दी है। यह एक एसिड हमले का परिणाम है। मुझे पहले लगा कि अपने चेहरे को छिपाकर मैं खुद को औरों से अलग रख सकती हूँ, लेकिन आज मैंने समझा कि यह मुझे और भी अधिक खड़ा बनाता है।”

     

    कमरे में उसके शब्दों की गूंज ने सबको झकझोर दिया। कुछ लड़कियों के चेहरे पर जबरदस्त सहानुभूति का भाव था, और कुछ लड़कों की आंखों में अफसोस। सावरी ने अपनी कहानी को आगे बढ़ाया, “यह सब एक दिन हुआ जब मैं स्कूल जा रही थी। अचानक मेरे किसी परिचित ने मुझ पर एसिड फेंक दिया। मेरे चेहरे के जले हुए निशान एक दाग हैं, लेकिन यह मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा हैं। मैंने इससे लड़ाई लड़ी है, और आज मैं इसे अपने गोरखे के माध्यम से स्वीकार कर रही हूँ।”

     

    आगंतुकों में से एक लड़के ने पूछा, “ये गोरखा तुम्हारे लिए क्या मतलब रखता है?” सावरी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “यह मेरे साथ एक पहचान है। यह बताता है कि मैं खुद को कैसे देखती हूँ। मैं इसे पहन कर यह नहीं छिपा रही हूँ कि मैं अलग हूँ, बल्कि यह मेरे गर्व का प्रतीक है।”

     

    धीरे-धीरे, लोग उसकी बातों को सुनने लगे। उन्हें समझ में आने लगा कि सावरी का गोरखा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि यह उसके आत्मविश्वास, संघर्ष और साहस का प्रतीक था। कोई भी व्यक्ति जब खुद को स्वीकार करता है, तो वह बाकी दुनिया को भी साहस देता है।

     

    उसने अपनी कहानी में यह भी कहा कि किस तरह पिछले दिनों में लोग उसके गोरखे को मज़ाक में लेते थे। “लेकिन अब मैं समझती हूँ कि यह उनका मामला है, मेरा नहीं। मैं अपनी पहचान के लिए शर्मिंदा नहीं हूँ। मेरे अंदर ऐसा कुछ नहीं है जिसकी मैं शर्म करूँ।” उसकी आवाज़ में अब आत्मविश्वास था।

     

    इस शेयरिंग से न केवल सावरी, बल्कि अन्य छात्रों ने भी अपने अपने अनुभव साझा किए। यह वर्कशॉप एक जागरूकता कार्यक्रम बन गई थी, जिसमें सबने अपने जीवन की कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की। एक अन्य लड़की ने कहा, “मुझे भी मेरी क्यूटनेस के लिए हमेशा सफेद त्वचा की जरूरत महसूस होती थी। लेकिन अब मुझे अपने असली रूप को स्वीकार करने की जरूरत है।”

     

    वर्कशॉप के अंत में, सभी छात्रों ने सावरी के प्रति एकजुटता दिखाई। उन्होंने उसे सराहा और कहा कि वह उनकी टेम्पलेट में हमेशा से थी। इसने सावरी के मन में एक नई ऊर्जा का संचार किया। वह जानती थी कि यह सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए एक नई शुरुआत थी। उसने यह अनुभव किया कि सबका अनुभव अलग है, लेकिन सबकी लड़ाई एक ही है – खुद को स्वीकारना।

     

    उस दिन के बाद, सावरी ने कॉलेज में अपनी आवाज़ को और ऊँचा किया। इस तरह साबरी ने कुरूप चेहरे को सबके सामने गोरखे की मदद

    से अपनी एक नई पहचान बना ली। 

     

     

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • एक गलती

    एक गलती

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सौरभ कॉलेज का बिगड़ा हुआ लड़का था, जिसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी। वो हमेशा क्लास में लेट आता और पढ़ाई से ज्यादा समय नशे और दोस्तों के साथ बिताता था। एक दिन, कॉलेज में एक नया लड़का आया, जिसका नाम आकाश था। आकाश बेहद गंभीर और संजीदा था, लेकिन उसकी सोच और व्यवहार में एक अलग तरह की गहराई थी।

    आकाश ने सौरभ को पहले दिन ही देखा और समझा कि वह एक कठिन दौर से गुजर रहा है। उसने सौरभ से दोस्ती करने का फैसला किया। शुरुआत में सौरभ ने इसे हल्के में लिया, लेकिन आकाश की मेहनत और दोस्ती ने धीरे-धीरे उसका मन बदल दिया। आकाश ने सौरभ को समझाया कि जीवन में सही दिशा में चलना कितना ज़रूरी है और पढ़ाई की अहमियत को जाने बिना भविष्य को संवारना मुश्किल है।

    एक दिन, आकाश ने सौरभ को एक किताब दी और कहा, “ये किताब तुझे सोचने पर मजबूर करेगी।” सौरभ ने शुरुआत में अनमने तरीके से पढ़ना शुरू किया, लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ता गया, उसके अंदर की जिज्ञासा जाग गई। आकाश ने उसे न केवल पढ़ाई की दिशा में प्रेरित किया, बल्कि उसे अपनी जिंदगी के प्रति नई दृष्टि भी दी।

    एक दिन सौरभ ने आकाश से कहा चलो क्लब चलते हैं आकाश तो माना करते है लेकिन सौरभ के जिंदा करने पर वो चला जाता हैं। लेकिन ओह सौरभ से एक भूल हो जाती है मजाक मजाक में उसने आकाश को दारू पीला देता है

    सौरभ ने जब देखा कि आकाश धीरे-धीरे नशे के असर में डूबता जा रहा है, तो उसे यह एहसास हुआ कि उसकी ये मजाकिया हरकत कहीं न कहीं उनकी दोस्ती के लिए खतरा बन गई है। शुरू में तो वह सोचता रहा कि वह बस थोड़ी मस्ती कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे आकाश की स्थिति बिगड़ती गई, सौरभ को समझ में आया कि यह मजाक की सीमा से बाहर जा चुका है।

    उसने जल्दी से आकाश को पकड़ा और उसे बाथरूम ले जाकर उसे पानी पीने के लिए कहा। “आकाश, मैं माफ़ी चाहता हूँ, मैं जानता था कि मैंने मजाक किया, लेकिन मैंने तुम्हें बहुत अधिक पीने दिया। तुम ठीक हो जाओ,” सौरभ ने कहा, उसकी आवाज़ में चिंता थी।

    आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, सौरभ। लेकिन तुम समझते हो कि ये मजाक और जिम्मेदारी का मिक्सचर नहीं होता है। मैं जानता था कि तुम मुझे उत्साहित करने के लिए ये कर रहे हो, लेकिन कभी-कभी मजाक अपनी सीमाएं पार कर जाता है।”

    आकाश की तबियत धीरे धीरे ओर बिगड़ती जा रही थी।

    सौरभ ने आकाश को बाथरूम में लिटाया और उसके माथे पर पानी का छींटा मारकर उसे जगाने की कोशिश की। आकाश की आंखें थकी-थकी थीं, और उसके शरीर में झुनझुनी आ चुकी थी। सौरभ को भय लगने लगा था। जब उसे लगा कि आकाश बेहोश हो रहा है, उसने तुरंत उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन आकाश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

    “आकाश! तुम्हें सुनाई दे रहा है? तुम ठीक हो जाओ!” सौरभ ने चिल्लाया। वह बेताब हो गया था, और उसके अंदर एक भयावह डर समाने लगा। आकाश की तबियत और बिगड़ती गई, और अंततः उसे पता चला कि उसके मजाक ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। उसकी उंगलियां कांपने लगीं और उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

    सौरभ बिना समय गंवाए, अपने दोस्त को अपने कंधों पर लेकर बाहर की ओर भागा। क्लब का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। सभी लड़के-लड़कियों की नजरें उन पर थी, और कुछ लोग उनकी मदद के लिए आए। “क्या हुआ? क्या उसने कुछ खाया या पीया?” एक छात्र ने पूछा।

    “वो ठीक नहीं है! उसे जल्दी अस्पताल लेजाने की जरूरत है!” सौरभ ने तेजी से उत्तर दिया, उसके गले में एक भारी भावुकता थी। भीड़ में से कुछ छात्र मदद के लिए आगे बढ़े और उन्होंने आकाश को सहारा दिया। सौरभ ने अपने दोस्तों को कहा, “किसी को एम्बुलेंस बुलाने दो! हमें जल्दी करना होगा!”

    कुछ ही क्षणों में, एम्बुलेंस वहां पहुंची। सौरभ ने आकाश को सारा ध्यान देकर एम्बुलेंस में लिटाया। उसकी आंखों में आंसू थे, और दिल में पछतावा। “मैंने तुम्हें इस हालत में नहीं देखना चाहा था, आकाश,” वह बुदबुदाया। आकाश की आंखें अब आधी बंद थीं, लेकिन उसने धीरे से सौरभ को देखा।

    “सौरभ,” उसने मुश्किल से कहा, “यह तुम्हारी गलती नहीं है। लेकिन हम सबको अपनी सीमाएं जाननी चाहिए।”

    सौरभ ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मैंने तुम्हें समझने की बजाय मजाक में लेने की गलती की। मैं नहीं जानता था कि यह सब इतनी गंभीरता से बदल जाएगा।” वह खुद को कोसने लगा। एम्बुलेंस में डॉक्टर ने जांच शुरू की, और सौरभ ने अपनी दीर्घकालिक चिंता को बाहर नहीं आने दिया।

    जब एम्बुलेंस अस्पताल पहुंची, तो सौरभ आकाश के
    माथे पर हाथ रखे हुए उसके साथ आया। अस्पताल के अंदर, डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत आकाश का इलाज शुरू किया। सौरभ की धड़कनें तेजी से चल रही थीं। वह इंतज़ार के दौरान अपने किए पर पछताने लगा। उसने सोचा, “अगर मैंने उस दिन मजाक नहीं किया होता, तो आज यह सब नहीं होता।”

    कुछ समय बाद, एक डॉक्टर ने आकर सौरभ से कहा, “उसकी हालत स्थिर है, लेकिन उसे कुछ समय की ज़रूरत होगी। हम उसे सामान्य स्थिति में वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।” सौरभ ने राहत की सांस ली, लेकिन उसका दिल अभी भी भारी था।

    आकाश थोड़ी देर बाद होश में आया। उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं और सौरभ को देखा। “सौरभ, क्या हुआ?” उसने मिचली आवाज़ में पूछा।

    “तुम ठीक हो, लेकिन तुमने बहुत ज़्यादा पी लिया था। मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो गलत था,” सौरभ ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।

    आकाश ने मुस्कुराकर कहा, “मैं जानता हूँ, तुमने क्या सोचा। लेकिन याद रखो, ज़िन्दगी में मजाक और जिम्मेदारी के बीच में एक सही संतुलन होना चाहिए। हर बात में सीमाएं होती हैं।”

    सौरभ ने सिर झुकाया और सोचा कि आकाश की सोच कितनी मज़बूत है, भले ही वह खुद मुश्किल में था। “मैंने तुम्हें समझा नहीं, दोस्त। कभी-कभी हम अपनी मस्ती के लिए दूसरों को खतरे में डालते हैं।”

    आकाश ने कहा, “जो हुआ, वह हुआ। हम समझने लगे हैं कि हमारी दोस्ती का क्या महत्व है। हम एक-दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं, यह जानना ज्यादा ज़रूरी है।”

    अस्पताल में कुछ समय बिताने के बाद, आकाश ठीक होने लगा। इस घटना ने सौरभ को गहराई से प्रभावित किया। उसने पढ़ाई में भी ध्यान देना शुरू कर दिया, और आकाश के साथ विचार साझा करने लगा।

    सौरभ ने आकाश से कुछ किताबें उधार लीं और उनके बारे में चर्चाएं करने लगा। आकाश की प्रेरणादायक बातें अब सौरभ के लिए एक नए सिरे से जीवन जीने का माध्यम बन गईं। अब वह अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता था।

    उनकी दोस्ती अब और भी मजबूत हो चुकी थी। आकाश ने सौरभ को सिखाया कि सुधार केवल तब संभव है जब हम अपने गलतियों से सीखते हैं। सौरभ ने आकाश को वादा किया कि वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जाएगा, और वह अपने लक्ष्य की ओर मेहनत करेगा।

    “जब हम एक-दूसरे का साथ देंगे, तो हम और भी मजबूत होंगे,” सौरभ ने कहा।

    “बिल्कुल, यही दोस्ती का असली अर्थ है,” आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा।

    ऐसे ही, सौरभ और आकाश की दोस्ती ने साबित कर दिया कि सही दोस्त की मौजूदगी ही इंसान को सही दिशा में ले जा सकती है और मुश्किल परिस्थितियों में मदद कर सकती है।

    Lakshmi Kumari

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • नुकसान

    नुकसान

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दूर जाने के फ़ायदे तो बहुत हैं,

    अब खुद को दर्द नहीं देंगे,

    बस एक नुकसान रहेगा 

    हम चुपके-चुपके रो लेंगे।

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अधूरा इश्क

     

    EPISODE 1 — पहली दस्तक

     

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।

    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

     

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

     

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।

    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।

    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

     

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

     

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

     

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।

    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

     

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

     

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

     

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

     

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

     

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

     

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।

    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

     

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

     

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

     

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

     

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

     

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

     

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

     

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

     

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

     

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

     

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

     

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

     

    “मेरे साथ मत आना…”

     

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

     

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

     

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

     

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

     

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।

    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

     

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

     

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    अर्ज किया है,,

    बिछड़े हुए लोग जब बुरे दौर से मिलेंगे 

    दर्द जब भी मिलेंगे चारों ओर से मिलेंगे!!

    सुना है बहुत खुश है वो किसी ओर से मिल कर 

    आग तो तब लगेगी जब हम किसी ओर से मिलेंगे… 😎😎

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • मर क्यों नहीं जाते हो…??

    मर क्यों नहीं जाते हो…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    आखिर कह ही डाला उसने

     एक दिन…..

    इस कदर टूटे हो बिखर क्यो 

    नही जाती हो…..??

    कब तक निभाओगे ये 

    दर्द भरी जिंदगी…..??

    किसी रात खामोशी से मर

     क्यो नही जाती हो……?? 😭😭

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇

    जो हमसे दूर हुए..

    हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • आखिर कौन…??

    आखिर कौन…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    ना दोस्त है ना दुश्मन हैं

      हमसे लड़ता कौन ?

    ना तूफान हैं ना सैलाब हैं

      हमसे डरता कौन ?

    ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं

       हमको पढ़ता कौन ?

     ना साँसे हैं ना धड़कन हैं 

      हम पर मरता कौन ?

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇

    जो हमसे दूर हुए..

    हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    कहानी के इस भाग में एक रहस्य से पर्दा उठता है। जिसका इंतजार लगभग सभी को रहता है। चलिए कहानी की ओर चलें…
    ” अब रोने की बारी उनकी है। जिसने तुम्हें रूलाने की कोशिश की है । अब तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है। “
    शीला बोलती हुई,राधा को ढांढस बंधा रही थी। शीला और चांदनी दोनो मिलकर  राधा और रूपा को रस्सी के बंधन से आजाद कर चुकी थी । चारो सहेलियां एक दुसरे से आपस में लिपट कर रोने लगी थी। अब इन सभी के जिन्दगी में जो दु:ख के बादल छाये थे वो अब छट चुके थे। इन सबके जिवन में तुफान लाने वाला सख्श धराशाई होकर बेसुध फर्श पर परा था।
    “अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो, हमें यहां से चलना चाहिए।”
    बोलकर चांदनी बारी बारी से तीनो के तरफ देखती है।
    ” हां हमें चलना चाहिए इससे पहले की कोई और प्रोबलम खड़ा हो हमें यहां से निकल जाना चाहिए।”
    शीला भी अपने आप को शांत करते हुए आंख से आंसू के बुंद को साफ करते हुए बोली थी ।
    ” हां दीदी जायेंगे पर इसे ऐसे छोड़कर नहीं इसको इसके किए की सजा देने के बाद।”
    रूपा कठोर होते हुए बोली थी। राधा को बहुत बरा सदमा लगा था। वो अभी भी बहुत डरी हुई थी। उसे अभी भी यकिन नही हो रहा था की सब कुछ नॉर्मल हो गया है। और वो मन ही मन अपने आप को कोस भी रही थी। की ये जो कुछ भी हुआ है, सब उसी के वजह से हुआ है। और वो उसी के वजह से आज रूपा और चांदनी शीला के जान का भी खतरा हो सकता था।
    ” क्या इसको ऐसे हीं छोड़ दोगे दीदी आप लोग?”
    शीला और चांदनी के तरफ देखकर कमल के तरफ अपनी उंगली से इशारा करते हुए राधा बोली थी। और एक बार फीर राधा के आंख से आंसू बहने लगे थे।
    ” नहीं दीदी, हम लोग इस कमीने को छोड़ेंगे नहीं। बल्कि पुलिस में देंगे।”
    रूपा राधा के आंख से आंसू पोंछते हुए बोली थी। रूपा की बात सुनकर सभी रूपा को आशचर्य से देखने लगे थे। तीनो के मन में एक साथ एक बात चली थी। की रूपा कितनी समझदार है, वो कितनी समझदारी की बात कर रही है। पर राधा रूपा को समझदार के साथ साथ बहुत हिम्मत वाली भी मानने लगी थी। आज जिस तरह से रूपा कमल के साथ डटकर मुकाबला की थी। उसको कमल से मार भी खानी परी थी। पर वो जिस तरह से अपना हिम्मत नहीं हारी थी। रूपा की यही सब गुण राधा के नजर में रूपा को महान बना रही थी।
    अभी उधर ये सब चारो सहेलियों में चल हीं रहा था। कि इधर धीरे धीरे  कमल के हांथ पैर हिलने लग गया था। उसको होस आने लगा था। कमल का आंख धीरे धीरे खुलता है। कमल का हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं था। उसके बदन में अभी भी बहुत अ सहनीय दर्द हो रहा था। उसके मुंह से बहुत सारा खून भी बह गया था। ज्यादा खून बह जाने के कारण हीं कमल को होश नहीं आ पाया था। जब कमल का आंख खुलता है। तो वो नजर घुमाकर सभी लड़कियों के तरफ देखता है। वो कुछ बोलना चाहता है, पर वो कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। उसके शरीर के अंदर इतनी भी शक्ती नहीं बच पाई थी। की वो कुछ बोल भी पाये। यही सब सोचकर कमल अपने आप को बहुत लाचार और कमजोर महसूस कर रहा था।
    ” इसको मीटिंग हॉल में लेकर चलते हैं। वहां ले जा कर प्रिंसिपल मैम के हवाले कर देते हैं। अब वही  इसके साथ जो करना होगा करेंगे।”
    शीला अपनी समझदारी से सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” दीदी पुलिस को कॉल करके बुला लेते हैं ना, इसको पुलिस के हवाले कर देंगे।”
    बोल कर रूपा शीला को प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी थी।
    ” नही इसको प्रिंसिपल मैम के पास लेकर चलते हैं।”
    शीला रूपा को जबाव देते हुए बोली थी।
    ” नहीं दीदी इस भेड़िये को खुला छोड़ना ठीक नहीं होगा।”
    रूपा शीला से बोली थी। कमल को होश में आने के बाद उसके दिमाग में एक हीं बात राऊंड मारते हुए चल रहा था। की ये दोनो क्लास रूम में कैसे आया था। और आकर उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ दिया था। कमल का बात सही भी था। अगर उस टाइम शीला और चांदनी आ कर, कमल पर अटैक नहीं किया होता तो अभी सारा सिचुएशन उसके अंडर में होता। और शीला और चांदनी से उसको इतना मार नहीं पड़ा होता तो वो,अभी फर्श पर नहीं पड़ा होता।
    ” तुम दोनो अंदर कैसे आए?”
    कमल दर्द से कराहते हुए हिम्मत करते हुए शीला और चांदनी से अपनी बात पुछ हीं लिया था। ये आवाज चारो सहेलियों के कान में जैसे ही गई सभी आशचर्य से उस आती हुई आवाज के तरफ मुड़कर देखी। सभी सहेलियों के चेहरे के हाव भाव एक दम से बदल गये थे। सभी एक्शन मोड में आ गयी थी। सभी एक साथ एक बार फिर से कमल पर अटैक करने चल पड़ी थी। यह सीन देखकर कमल के होश उड़ गये थे। डर के मारे उसके पसीने छुटने लगे थे। वो सोचने लगा अब उसके शरीर में और मार बर्दास्त करने की छमता नहीं है। अब अगर और मार पड़ा तो वो जिन्दा बच नहीं पायेगा। इसी लिए अब वो दिमाग से काम लेना चाहा। कमल हिम्मत करके उठकर बैठ गया था।
    ” तो तुम्हें जानना है। की हम क्लास रूम के अंदर कैसे आए?”
    चांदनी कमल पर चीखते हुए जोर से बोली थी।
    ” हां इसे बता हीं देते हैं। की हम दोनो क्लास रूम के अंदर कैसे आए।”
    शीला चांदनी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली थी। हालाकी राधा और रूपा भी कमल के इस सवाल का जबाव जानना चाहती थी। वो दोनो भी अपनी दीदी के तरफ देखने लगी थी। सभी चलकर कमल के पास पहूंच गये थे। रूपा का लात कमल के पीठ पर पड़ता है। जो कमल अभी अभी उठकर बैठा हीं था। एक भारी चीख कमल के मुंह से निकल जाता है।
    ” पहले इसको इसके सवाल का जबाव सुनने दो बहन, फिर उसके बाद तुम इस पर अपना बॉक्सिंग का प्रेक्टिस कर लेना।”
    शीला रूपा को रोकते हुए बोली थी। सुनकर रूपा रूक जाती है।
    “इसमें तुम्हारी हीं बेवकूफी है भेड़िए।”
    चांदनी गुस्से से दांत पीस कर कमल के तरफ मुड़कर बोली थी।
    ” मैं चाहती तो, तुम्हें वहीं सबक सीखा सकती थी। जब तुम्हें रस्सी और डंडा लिये क्लास रूम के तरफ आते हुए देखी थी। और छुपकर तुम्हारा पीछा करने लगी थी।”
    बीना रूके शीला बोलते रही।
    ” .मैं जानना चाहती थी। की आखिर बात क्या है। तुम रस्सी और डंडे लेकर क्या करने वाले हो। और सोने पे सुहागा तो तब हुआ, जब तुम्हारा दोनो हांथ खाली नहीं होने के वजह से तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया। इसी बात का फायदा हमने उठायी और दोनो भीतर आके दरवाजे बंद कर ली थी। ताकी तुम्हें भी बचकर भागने नहीं दूं।”
    चांदनी ने कमल को पुरी बात बतायी थी ।
    ” दीदी जब आप पहले हीं आ गईं थी तो, आपने हमें पहले हीं क्यों नहीं बचाई थी। आप अपनी आंखों के सामने हमें रस्सी से बंधते और पिटते हुए देखी थी।”
    रूपा बोलकर शीला और चांदनी के तरफ सवालिया नजर से देखने लगी थी।
    ” इसका मतलब, दीदी मैं आपके आंखों के सामने बेहोश हुई थी।”
    राधा भी शीला और चांदनी से सवाल की थी। इस पर शीला और चांदनी कुछ भी नहीं बोलती है। बस दोनो अपना शर हां में हिला देती है।
    ये सुनकर कमल के पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी थी। उसमे अब हिम्मत भी नहीं थी। की वो उन सब से फाइट कर सके तो उसने अपनी जान बचाने का एक तरीका निकाला जो एक हारा हुआ हर इंसान लगभग यही करता है। और कमल ने भी वही किया था। वो झुक कर शीला के पैर पकर लिया था।
    ” मुझे माफ कर दो,मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है। प्लीज मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो।”
    कमल शीला के पैरों में गिरकर नाक रगड़ते हुए बोला था।
    ” कमीने सुअर की औलाद, तुम्हें माफ कर दूं। निकल गयी सारी हेकड़ी, अब रेप नहीं करेगा मेरी दीदी का हां।”
    रूपा गुस्से में अपनी आंखे लाल करते हुए कमल से बोली थी । और धमा धम दो लात उसको रसीद करदी थी। कमल रूपा के पैर की चोट खा कर पुरी तरह से हिल गया था। अब उसको समझ आने लगा था। की उसकी ग़लती छोटी नहीं है।
    ” अब पछतावा आ रहा है। अपने किये पर पहले ये क्यों नहीं सोचा अपना अंजाम ये सब करने से पहले।”
    चांदनी जो राधा के कंधे में अपनी बांह डाली हुई थी। कमल से  बोली थी।
    “माफी तो तुम्हें मिलने से रही, पर तुम्हे जेल जरूर मिलेगी।”
    रूपा कमल को बाल से खींचते हुए बोली थी।
    ” अब इसके साथ बहस करने से, कोई फायदा नही है दीदी।”
    कहानी और भी मजेदार होने वाली है ! पढिए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”

    रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। 

    लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”

    रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”

    रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,

    वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”

    रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”

    वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”

    रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”

    लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं, 

    रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”

    रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…

    वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।

    .. to be continue….

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏