Writer Lakshmi Kumari
Story titel “काश उस दिन मैंने…”
बारिश की बूंदें आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ थीं… जैसे आसमान भी किसी के बिछड़ने का ग़म मना रहा हो। सड़क के किनारे खड़ा अर्जुन भीगता रहा… लेकिन उसे परवाह नहीं थी। उसकी आँखों में खालीपन था… और दिल में सिर्फ एक ही आवाज़ गूंज रही थी।।
“काश उस दिन मैंने अपने दिल की सुन ली होती…”
उसने अपनी मुट्ठी कस ली, सामने कब्रिस्तान था और एक कब्र पर नाम लिखा था “रोहन”
उस नाम को देखते ही उसकी सांसें भारी हो गईं… और यादों का सैलाब उसे बहा ले गया।
कॉलेज का पहला दिन हर तरफ नए चेहरे नई उम्मीदें और थोड़ी सी घबराहट थी।
अर्जुन क्लास के एक कोने में बैठा था… सिर झुकाए… किताब खोलकर। वह हमेशा से ऐसा ही था चुप चाप, सीधा, अपनी दुनिया में रहने वाला लड़का।
तभी किसी ने उसके सामने कुर्सी खींची “भाई, यहाँ बैठ जाऊं? या ये सीट भी तेरी तरह अकेली रहना चाहती है?”
अर्जुन ने सिर उठाया—एक लड़का मुस्कुरा रहा था… आँखों में शरारत और चेहरे पर मुस्कान थी।
“बैठ जाओ…” अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
“वैसे नाम क्या है तेरा? मैं रोहन… कॉलेज का फ्यूचर सुपरस्टार”
अर्जुन हँस पड़ा “मैं अर्जुन… बस एक आम इंसान…”
तभी पीछे से एक धीमी आवाज आई“अगर आम लोगों की बात हो रही है… तो मैं भी शामिल हो सकता हूँ?”
दोनों ने मुड़कर देखा, एक लंबा, शांत लड़का… जिसकी आँखों में गहराई थी।
उसने अपना हाथ आगे “कबीर…” उसने अपना नाम बताया।
बस… वहीं से शुरू हुई एक ऐसी दोस्ती… जो वक्त के साथ और गहरी होती चली गई।
तीनों साथ बैठते साथ हँसते साथ लड़ते और फिर खुद ही मना भी लेते।
एक दिन कैंटीन में बैठे-बैठे रोहन ने कहा “यार, अगर हमारी दोस्ती पर कोई फिल्म बने ना… तो सुपरहिट जाएगी!”
कबीर मुस्कुराया “लेकिन उसका एंडिंग sad नहीं होना चाहिए…”
अर्जुन ने हाथ बढ़ाया “तो वादा करते हैं… हम कभी अलग नहीं होंगे”
तीनों ने एक-दूसरे के हाथ पर हाथ रखा “हमेशा साथ”
सब कुछ सही चल रहा था… जब तक सिया नाम की लड़की उनकी जिंदगी में नहीं आई थी
पहली बार जब सिया क्लास में आई… तो जैसे वक्त थम गया। उसकी आँखों में मासूमियत थी… और मुस्कान में एक सुकून।
धीरे-धीरे तीनों उससे दोस्ती करने लगे… और अनजाने में तीनों के दिल में उसके लिए एक खास जगह बन गई।
लेकिन… किसी ने कुछ कहा नहीं, एक रात हॉस्टल की छत पर बैठे हुए रोहन बोला “यार… मुझे लगता है मैं सिया को पसंद करने लगा हूँ…”
अर्जुन चुप हो गया… क्योंकि वह भी यही महसूस कर रहा था।
कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा “तो बता दे उसे…”
लेकिन उसके दिल में हलचल थी क्योंकि वह भी सिया को चाहता था।
तीनों दोस्त… एक ही लड़की से प्यार करने लगे थे… और किसी को इसका अंदाज़ा नहीं था।
कुछ दिनों बाद अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और एक चिट्ठी लिखी।
उसके हाथ काँप रहे थे… लेकिन दिल साफ था “सिया मैं तुम्हें पसंद करता हूँ… शायद ये सही समय नहीं है… लेकिन मैं और छुपा नहीं सकता हूं”
उसने वह चिट्ठी कबीर को दी “यार… तू इसे सिया तक पहुँचा दे… मुझसे नहीं होगा…”
कबीर ने चिट्ठी ली… और उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी आ गई। वह अकेले में गया… और चिट्ठी को देखा…
कुछ पल के लिए वह चुप रहा… फिर धीरे-धीरे चिट्ठी को फाड़ दिया।
उसके हाथ काँप रहे थे “मुझे माफ कर देना अर्जुन…”
फिर वह अर्जुन के पास आया “यार… सिया ने मना कर दिया…”
अर्जुन की आँखों में एक पल को उम्मीद चमकी… फिर बुझ गई।
“ओह… ठीक है…” उसने मुस्कुराने की कोशिश की… लेकिन उसकी आवाज टूट गई।
उस रात… अर्जुन बहुत रोया।
अब कबीर अपने झूठ में फंस चुका था। कुछ दिनों बाद रोहन ने कहा “मैं सिया को प्रपोज करने वाला हूँ…”
कबीर का दिल फिर से डगमगाया “नहीं… तू नहीं कर सकता…” उसने जल्दी से कहा।
“क्यों?” रोहन ने पूछा, “क्योंकि अर्जुन और सिया एक-दूसरे को पसंद करते हैं…”
रोहन सन्न रह गया “क्या? लेकिन उसने कभी बताया नहीं…”
“शायद वो तुझसे छुपा रहा है…” कबीर ने झूठ को और गहरा कर दिया।
रोहन का चेहरा उतर गया “ठीक है अगर ऐसा है तो मैं पीछे हट जाऊँगा।”
धीरे-धीरे… तीनों के बीच खामोशी आ गई।
एक दिन…
“तूने मुझसे झूठ क्यों बोला?” रोहन ने अर्जुन से पूछा।
“मुझ से झूठ तो तुम दोनों ने बोला!” अर्जुन चिल्लाया।
“तू सिया से प्यार करता है और मुझे बताया तक नहीं!” रोहन का गुस्सा फूट पड़ा।
अर्जुन हैरान था “क्या? मैंने कब कहा ऐसा?”
कबीर बीच में आया “बस करो”
“तू चुप रह!” दोनों एक साथ बोले।
उस दिन… उनकी दोस्ती बिखर गई।
कुछ महीनों बाद रोहन की मुलाकात सिया से हुई। “तुम लोग इतने दूर क्यों हो गए?” सिया ने पूछा।
रोहन ने सब बताया।
सिया चौंक गई “मुझे तो कभी कोई चिट्ठी मिली ही नहीं…”
रोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“क्या…?”
उसे सब समझ आ गया। वह भागा… अर्जुन के पास… सब सच बताने…
बारिश हो रही थी… सड़क फिसलन भरी थी…
रोहन जल्दी में था… उसके दिल में सिर्फ एक बात थी।
“मुझे अर्जुन से माफी मांगनी है…”
लेकिन एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने रोहर को टक्कर मार दी
अर्जुन और कबीर दौड़ते हुए अस्पताल पहुँचे।
रोहन ICU में था… साँसें टूट रही थीं। अर्जुन उसका हाथ पकड़कर रो पड़ा “रोहन उठ जा प्लीज।”
रोहन ने धीरे से आँखें खोलीं “अर्जुन” उसकी आवाज कमजोर थी…
“मुझे… सच पता चल गया…”
अर्जुन की आँखें भर आईं “कुछ मत बोल… तू ठीक हो जाएगा…”
रोहन मुस्कुराया “काश… उस दिन… मैंने अपने दिल की सुन ली होती और तुझसे पूछ लिया होता…”
उसने कबीर की तरफ देखा “और तू… अपने दिल से मत भागना…”
इतना कहकर… उसकी सांस रुक गई।
अर्जुन जमीन पर बैठ गया “नहीं रोहन नहीं…”
कबीर फूट-फूट कर रोने लगा “मैंने उसे मार दिया… ये सब मेरी गलती है…”
आज अर्जुन और कबीर रोहन की कब्र के सामने खड़े थे।
हवा शांत थी… लेकिन दिलों में तूफान उठा हुआ था।
अर्जुन बोला “काश… उस दिन हम एक बार बैठकर बात कर लेते…”
कबीर रोते हुए बोला “काश… उस दिन मैंने अपने दिल की सुन ली होती… और सच बता दिया होता।”
दोनों ने कब्र पर हाथ रखा “हम तुझे कभी नहीं भूलेंगे।”
कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं कुछ गलतफहमियाँ जिंदगी छीन लेती हैं और कुछ पछतावे उम्र भर साथ चलते हैं तीनों की दोस्ती खत्म हो गई…
लेकिन एक सच्चाई हमेशा गूंजती रहेगी “काश उस दिन हमने अपने दिल की सुन ली होती।”

NSW अनुभवी लेखक -🥇


प्रातिक्रिया दे