लेखक: Manoj Divana Namaste Story World

  • विडियो सबूत

    विडियो सबूत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
    ” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
    राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
    ” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
    शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
    ” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
    रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
    चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
    ” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
    रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
    ” अब क्या किया जाए।”
    चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
    ” मुझे माफ करदो।”
    और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
    ” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
    शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
    ” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
    एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
    पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
    मीटिंग हॉल
    मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
    उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
    ” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
    प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
    ” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
    नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
    ” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
    एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
    ” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
    पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
    ” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
    एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
    एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
    ” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
    प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

  • सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    कहानी के इस भाग में एक रहस्य से पर्दा उठता है। जिसका इंतजार लगभग सभी को रहता है। चलिए कहानी की ओर चलें…
    ” अब रोने की बारी उनकी है। जिसने तुम्हें रूलाने की कोशिश की है । अब तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है। “
    शीला बोलती हुई,राधा को ढांढस बंधा रही थी। शीला और चांदनी दोनो मिलकर  राधा और रूपा को रस्सी के बंधन से आजाद कर चुकी थी । चारो सहेलियां एक दुसरे से आपस में लिपट कर रोने लगी थी। अब इन सभी के जिन्दगी में जो दु:ख के बादल छाये थे वो अब छट चुके थे। इन सबके जिवन में तुफान लाने वाला सख्श धराशाई होकर बेसुध फर्श पर परा था।
    “अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो, हमें यहां से चलना चाहिए।”
    बोलकर चांदनी बारी बारी से तीनो के तरफ देखती है।
    ” हां हमें चलना चाहिए इससे पहले की कोई और प्रोबलम खड़ा हो हमें यहां से निकल जाना चाहिए।”
    शीला भी अपने आप को शांत करते हुए आंख से आंसू के बुंद को साफ करते हुए बोली थी ।
    ” हां दीदी जायेंगे पर इसे ऐसे छोड़कर नहीं इसको इसके किए की सजा देने के बाद।”
    रूपा कठोर होते हुए बोली थी। राधा को बहुत बरा सदमा लगा था। वो अभी भी बहुत डरी हुई थी। उसे अभी भी यकिन नही हो रहा था की सब कुछ नॉर्मल हो गया है। और वो मन ही मन अपने आप को कोस भी रही थी। की ये जो कुछ भी हुआ है, सब उसी के वजह से हुआ है। और वो उसी के वजह से आज रूपा और चांदनी शीला के जान का भी खतरा हो सकता था।
    ” क्या इसको ऐसे हीं छोड़ दोगे दीदी आप लोग?”
    शीला और चांदनी के तरफ देखकर कमल के तरफ अपनी उंगली से इशारा करते हुए राधा बोली थी। और एक बार फीर राधा के आंख से आंसू बहने लगे थे।
    ” नहीं दीदी, हम लोग इस कमीने को छोड़ेंगे नहीं। बल्कि पुलिस में देंगे।”
    रूपा राधा के आंख से आंसू पोंछते हुए बोली थी। रूपा की बात सुनकर सभी रूपा को आशचर्य से देखने लगे थे। तीनो के मन में एक साथ एक बात चली थी। की रूपा कितनी समझदार है, वो कितनी समझदारी की बात कर रही है। पर राधा रूपा को समझदार के साथ साथ बहुत हिम्मत वाली भी मानने लगी थी। आज जिस तरह से रूपा कमल के साथ डटकर मुकाबला की थी। उसको कमल से मार भी खानी परी थी। पर वो जिस तरह से अपना हिम्मत नहीं हारी थी। रूपा की यही सब गुण राधा के नजर में रूपा को महान बना रही थी।
    अभी उधर ये सब चारो सहेलियों में चल हीं रहा था। कि इधर धीरे धीरे  कमल के हांथ पैर हिलने लग गया था। उसको होस आने लगा था। कमल का आंख धीरे धीरे खुलता है। कमल का हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं था। उसके बदन में अभी भी बहुत अ सहनीय दर्द हो रहा था। उसके मुंह से बहुत सारा खून भी बह गया था। ज्यादा खून बह जाने के कारण हीं कमल को होश नहीं आ पाया था। जब कमल का आंख खुलता है। तो वो नजर घुमाकर सभी लड़कियों के तरफ देखता है। वो कुछ बोलना चाहता है, पर वो कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। उसके शरीर के अंदर इतनी भी शक्ती नहीं बच पाई थी। की वो कुछ बोल भी पाये। यही सब सोचकर कमल अपने आप को बहुत लाचार और कमजोर महसूस कर रहा था।
    ” इसको मीटिंग हॉल में लेकर चलते हैं। वहां ले जा कर प्रिंसिपल मैम के हवाले कर देते हैं। अब वही  इसके साथ जो करना होगा करेंगे।”
    शीला अपनी समझदारी से सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” दीदी पुलिस को कॉल करके बुला लेते हैं ना, इसको पुलिस के हवाले कर देंगे।”
    बोल कर रूपा शीला को प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी थी।
    ” नही इसको प्रिंसिपल मैम के पास लेकर चलते हैं।”
    शीला रूपा को जबाव देते हुए बोली थी।
    ” नहीं दीदी इस भेड़िये को खुला छोड़ना ठीक नहीं होगा।”
    रूपा शीला से बोली थी। कमल को होश में आने के बाद उसके दिमाग में एक हीं बात राऊंड मारते हुए चल रहा था। की ये दोनो क्लास रूम में कैसे आया था। और आकर उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ दिया था। कमल का बात सही भी था। अगर उस टाइम शीला और चांदनी आ कर, कमल पर अटैक नहीं किया होता तो अभी सारा सिचुएशन उसके अंडर में होता। और शीला और चांदनी से उसको इतना मार नहीं पड़ा होता तो वो,अभी फर्श पर नहीं पड़ा होता।
    ” तुम दोनो अंदर कैसे आए?”
    कमल दर्द से कराहते हुए हिम्मत करते हुए शीला और चांदनी से अपनी बात पुछ हीं लिया था। ये आवाज चारो सहेलियों के कान में जैसे ही गई सभी आशचर्य से उस आती हुई आवाज के तरफ मुड़कर देखी। सभी सहेलियों के चेहरे के हाव भाव एक दम से बदल गये थे। सभी एक्शन मोड में आ गयी थी। सभी एक साथ एक बार फिर से कमल पर अटैक करने चल पड़ी थी। यह सीन देखकर कमल के होश उड़ गये थे। डर के मारे उसके पसीने छुटने लगे थे। वो सोचने लगा अब उसके शरीर में और मार बर्दास्त करने की छमता नहीं है। अब अगर और मार पड़ा तो वो जिन्दा बच नहीं पायेगा। इसी लिए अब वो दिमाग से काम लेना चाहा। कमल हिम्मत करके उठकर बैठ गया था।
    ” तो तुम्हें जानना है। की हम क्लास रूम के अंदर कैसे आए?”
    चांदनी कमल पर चीखते हुए जोर से बोली थी।
    ” हां इसे बता हीं देते हैं। की हम दोनो क्लास रूम के अंदर कैसे आए।”
    शीला चांदनी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली थी। हालाकी राधा और रूपा भी कमल के इस सवाल का जबाव जानना चाहती थी। वो दोनो भी अपनी दीदी के तरफ देखने लगी थी। सभी चलकर कमल के पास पहूंच गये थे। रूपा का लात कमल के पीठ पर पड़ता है। जो कमल अभी अभी उठकर बैठा हीं था। एक भारी चीख कमल के मुंह से निकल जाता है।
    ” पहले इसको इसके सवाल का जबाव सुनने दो बहन, फिर उसके बाद तुम इस पर अपना बॉक्सिंग का प्रेक्टिस कर लेना।”
    शीला रूपा को रोकते हुए बोली थी। सुनकर रूपा रूक जाती है।
    “इसमें तुम्हारी हीं बेवकूफी है भेड़िए।”
    चांदनी गुस्से से दांत पीस कर कमल के तरफ मुड़कर बोली थी।
    ” मैं चाहती तो, तुम्हें वहीं सबक सीखा सकती थी। जब तुम्हें रस्सी और डंडा लिये क्लास रूम के तरफ आते हुए देखी थी। और छुपकर तुम्हारा पीछा करने लगी थी।”
    बीना रूके शीला बोलते रही।
    ” .मैं जानना चाहती थी। की आखिर बात क्या है। तुम रस्सी और डंडे लेकर क्या करने वाले हो। और सोने पे सुहागा तो तब हुआ, जब तुम्हारा दोनो हांथ खाली नहीं होने के वजह से तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया। इसी बात का फायदा हमने उठायी और दोनो भीतर आके दरवाजे बंद कर ली थी। ताकी तुम्हें भी बचकर भागने नहीं दूं।”
    चांदनी ने कमल को पुरी बात बतायी थी ।
    ” दीदी जब आप पहले हीं आ गईं थी तो, आपने हमें पहले हीं क्यों नहीं बचाई थी। आप अपनी आंखों के सामने हमें रस्सी से बंधते और पिटते हुए देखी थी।”
    रूपा बोलकर शीला और चांदनी के तरफ सवालिया नजर से देखने लगी थी।
    ” इसका मतलब, दीदी मैं आपके आंखों के सामने बेहोश हुई थी।”
    राधा भी शीला और चांदनी से सवाल की थी। इस पर शीला और चांदनी कुछ भी नहीं बोलती है। बस दोनो अपना शर हां में हिला देती है।
    ये सुनकर कमल के पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी थी। उसमे अब हिम्मत भी नहीं थी। की वो उन सब से फाइट कर सके तो उसने अपनी जान बचाने का एक तरीका निकाला जो एक हारा हुआ हर इंसान लगभग यही करता है। और कमल ने भी वही किया था। वो झुक कर शीला के पैर पकर लिया था।
    ” मुझे माफ कर दो,मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है। प्लीज मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो।”
    कमल शीला के पैरों में गिरकर नाक रगड़ते हुए बोला था।
    ” कमीने सुअर की औलाद, तुम्हें माफ कर दूं। निकल गयी सारी हेकड़ी, अब रेप नहीं करेगा मेरी दीदी का हां।”
    रूपा गुस्से में अपनी आंखे लाल करते हुए कमल से बोली थी । और धमा धम दो लात उसको रसीद करदी थी। कमल रूपा के पैर की चोट खा कर पुरी तरह से हिल गया था। अब उसको समझ आने लगा था। की उसकी ग़लती छोटी नहीं है।
    ” अब पछतावा आ रहा है। अपने किये पर पहले ये क्यों नहीं सोचा अपना अंजाम ये सब करने से पहले।”
    चांदनी जो राधा के कंधे में अपनी बांह डाली हुई थी। कमल से  बोली थी।
    “माफी तो तुम्हें मिलने से रही, पर तुम्हे जेल जरूर मिलेगी।”
    रूपा कमल को बाल से खींचते हुए बोली थी।
    ” अब इसके साथ बहस करने से, कोई फायदा नही है दीदी।”
    कहानी और भी मजेदार होने वाली है ! पढिए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

  • अटूट भक्ति का प्रकाश जय श्री हनुमान

    अटूट भक्ति का प्रकाश जय श्री हनुमान

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    🌺 “जय हनुमान: अटूट भक्ति का प्रकाश” 🌺
    संकट के हर अंधेरे में, तुम दीप बनकर आते हो,
    भटके हुए हर राही को, तुम राह सच्ची दिखाते हो।
    जय बजरंगबली, जय अंजनी के लाल,
    तुमसे ही जग में जगमग है हर एक उजियाल।
    राम नाम की ज्योति लिए, तुमने जग को राह दिखाई,
    भक्ति, शक्ति और सेवा की, सच्ची परिभाषा समझाई।
    तुमसे ही साहस मिलता है, तुमसे ही विश्वास,
    हर संकट में तुम बन जाते हो जीवन की आस।
    जब-जब मन घबराया है, तुमने ही थाम लिया,
    डगमगाते कदमों को तुमने, फिर से थाम लिया।
    तुम हो शक्ति के सागर, तुम हो दया के धाम,
    तुमसे ही जीवित रहता है हर दिल में श्रीराम।
    तुमने लंका जलाकर भी, अहंकार को हराया,
    सच्चे धर्म की खातिर तुमने, हर अत्याचार मिटाया।
    तुम हो वीरता की पहचान, तुम हो भक्ति की मिसाल,
    हर युग में गूंजेगा सदा— “जय हनुमान, जय बजरंगबली” का कमाल।
    इस पावन दिन पर हम सब, सिर झुकाकर ये कहते हैं,
    हे पवनसुत, तुमसे ही हम जीवन जीना सीखते हैं।
    हमारे हर दुख को हर लो, हर भय को दूर भगाओ,
    अपने चरणों में जगह देकर, जीवन सफल बनाओ।
    जय-जय हनुमान, संकट मोचन, कृपा की वर्षा करो,
    हम सबके जीवन में सदा, सुख-शांति का सागर भरो।
    तेरे नाम का दीप जले, हर दिल के हर कोने में,
    हनुमान जयंती की महिमा गूंजे, इस सारे जग के सोने में।
    जय श्री हनुमान 🌺🌺🙏🙏🌹🌹

  • टूटा घमंड

    टूटा घमंड

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    कमल राधा को भी बांध दिया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ था।ये बात तो आप लोग जानते हीं हैं की कैसे तीनो के बीच की बहस और लड़ाई इतनी बढ़ गई थी। जो कमल राधा को रेप करने तक की बात भी बोल दिया था। रेप की बात सुनकर राधा और रूपा बहुत घबरा गई थी। दोनो लड़की पसीने से पानी पानी हो गयी थी।
    रेप एक ऐसा शब्द है। जो ये  शब्द  जीस कसी के नाम के साथ जुड़ जाती है। तो उसकी जिंदगी, जीते जी नरक बन जाती है। ये समाज बालात्कार को समाजिक और कानूनी एक बहुत हीं जघन्य अपराध के श्रेणी में रखा है। इस अपराध को करने वाले के खीलाफ बहुत सख्त कानून बनाया गया है। और इसमें सख्त से सख्त सजा देने का प्रवधान भी किया गया है। इसके अंदर सजा आजीवन जेल में रहने से लेकर फांसी की सजा तक भी दी जा सकती है।
    आइए हमलोग अपनी कहानी के ओर बढ़ते हैं।
    कमल का हौसला अब ज्यादा बढ़ गया था। वो दोनो लड़की पर कंट्रोल जो कर लिया था। राधा और रूपा अपने उपर से रस्सियों के बंधन से छुटने के लिये हांथ पैर तो नही मार सकती थी। क्योंकी बंधे हुए थे। बस अपनी ताकत लगाकर कसमसाने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी।
    ” देख तेरी ना करने की जिद्द ने तुम्हें कहां लाकर खड़ी कर दी है।तुम्हे शायद मालुम नही, मुझे ना सुनने की बिल्कुल भी आदत नहीं है। जब मैं अपनी मम्मी पापा के ना कहे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं। तो तुम्हारा कैसे करूंगा?”
    ” कमल राधा के तरफ देखते हुए बोला था। राधा सिर्फ लाचारी से कमल को देखती रहती है। कमल के बात में सच्चाई थी। वो एक अमीर बाप का बेटा था। उसके मॉम डैड उसे बहुत प्यार करते थे ! वे उसके हर जायज नजायज जिद्द को पुरा कर रहे थे। कोई भी चीज का मांग अगर कमल करता था। तो वो उसे लाकर हर हाल में देते थे । कमल के मॉम डैड कमल के पालन पोसन में किसी भी प्रकार के कोई कमी नहीं होने दिये थे। इसी लार प्यार का नतीजा है। की आज उनका बेटा एक रेपिस्ट बनने जा रहा था।
    ” तुम अपनी सोच कमीने, यहां से तुम बचकर नही जाएगा जिन्दा।”
    रूपा कमल पर चिल्ला कर जोर से बोली थी ।
    ” तू इसी तरह फरफराती रह, तुम लोग कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो मेरा। कुछ भी नहीं करोगी तुम लोग। “
    कमल रूपा से बोला और राधा के तरफ बढ़ा और उसकी गले में बांह डालकर अपने दुसरे हांथ से उसके गाल गर्दन को टच करते हुए हांथ नीचे के तरफ बढ़ा दिया था। ये देखकर रूपा को बहुत गुस्सा आ रही थी। वो कमल को कच्चा चबा जाना चाहती थी।
    रूपा सोच रही थी। अगर अभी वो बंधी नहीं होती, और उसके हांथ पांव खुले होते तो वो कमल को अच्छा खासा सबक सीखा सकती थी। बंधे होने से वो अपने आपको बहुत हीं लाचार और मजबूर फील कर रही थी। वो यहां से निकलने का मन में तड़किव सोच रही थी। रूपा को आभास हो गयी थी। की रूपा राधा कमल के अलावा भी कोई क्लास रूम में मौजुद है। मगर कौन,वो सोची कही कमल और लोगों को तो नहीं बुला रखा है। हम दोनो से अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए। वो क्लास रूम के चारो तरफ अपनी नजर घुमाके देखने लगी थी। रूपा फिर सोची अगर कमल किसी को बुलाया होता तो वो हम लोगों के सामने लाता हमसे बदला लेने के लिए। फीर मन हीं मन बोली, नही नही शायद यह हमारा वहम है।अगर कमल किसी को बुलाया हुआ होता तो वो उसे छुपने को थोड़ी बोलता।
    रूपा राधा के सामने थी। पर कुछ दूरी थी, और बीच में कमल था। अगर रूपा राधा को कुछ भी बताती की उसने क्या महसूस किया है।तो उस बात को कमल भी सुन सकता था। इस लिए रूपा कुछ नहीं बोली। और सोची कोई तो है पर कौन? रूपा अभी ये सब सोच हीं रही थी कि तभी कमल राधा को कस कर पकड़ कर अपने सीने से चिपका लेता है। और अपना चेहरा राधा के चेहरे के सामने ले जा कर राधा को चूमना चाहता है। कमल का मुंह राधा के मुंह से सटने हीं वाला था। की तभी एक साथ दो मुक्का कमल के दोनो जबड़े  पर आकर पड़ा। हमला अचानक हुआ था। मुक्के के थ्रो इतना जबरदस्त था। की कमल के बत्तीसी हिल गया था। उसके मुंह से खून बहने लगा था। वो समझ नहीं पा रहा था की उस पर हमला कौन किया था। जब की वो क्लास रूम के दरवाजे को लॉक कर के रखा था। तो बाहर से कोई कैसे आ सकता था। सवाल हीं नही पैदा हो सकता है की कोई बाहर से आ जाए, क्लास रूम के अन्दर।
    उसे अच्छे से याद था। कि जब वो दुबारा वापस क्लास रूम में आया था। तो दरवाजे को अच्छे से लॉक किया था। फीर ये कौन अंदर आगया था और कैसे? यही सवाल लिए कमल उपर की तरफ देखता है। देखकर कमल भौचक्का रह गया था। ये कैसे हो सकता है। ये दोनो अन्दर कैसे आ सकती हैं। दर्द तो बहुत हो रहा था कमल को पर इन सवालों के जबाव जानने के लिए। धीमी और रूआंसी आवाज में बोलता है।
    तुम, तुम यहां कैसे आई?”
    अब आप समझ हीं गये होंगे की वहां कौन आ गयी थी। कमल ये बोला हीं था की आठ दस लात सात आठ मुक्का कमल को और रसीद हो गया था। कमल दर्द से चीख उठा था। चांदनी और शीला कुछ भी बोल नही रही थी। बस उनके हांथ और पांव चल रहे थे।कमल को लग रहा था। कि जैसे अब उसके शरीर से जान नीकल हीं जायेगा। दोनो फाइटर बिल्कुल भी नहीं रूक रहे थे। ताबड़तोड़ लात और मुक्का बरसा रहे थे। मार मार के दोनो सहेली कमल का कचूमर बाहर कर दिया था। जब मार खा खा कर कमल बेहोशी से फर्श पर बेसुध हो गया था। तब दोनो दोस्त अपनी फाइट को विराम दी थी।
    ” तुम दोनो को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम आ गये हैं।
    चांदनी अपने दोनो हाथों को मोड़कर अपने सीने से चिपका कर बोली थी।
    ” हां तुम लोग डरो मत, तुम्हारी दीदी तुम लोगों को कुछ नही होने देगी।”
    शीला भी राधा और रूपा को देख कर बोली थी।
    थैंक्यू दीदी, जो आप लोग यहां आ गयी ।
    राधा को बोलते हुए आंसू बहने लगे थे।
    ” देखो, तुम्हे रोने की कोई जरूरत नही है। “
    चांदनी राधा के पास जाकर उसके आंख से आंसू पोछने लगती है।
    ” हां बहन, अब रोने की बारी उनकी है। जिन्होने तुम्हारे आंखों में आंसू दिए हैं। चुप हो जाओ राधा। “
    शीला बोलते हुए राधा के कंधे पर हाथ फेर रही थी। और शीला और चांदनी दोनो के बंधे रस्सी को खोलने लगती है।
    आगे कि कहानी पढिए अगले भाग में….

  • मुश्किल में जान

    मुश्किल में जान

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    ” जा चला जा अब क्यों पिटाई खा रहा है।”
    राधा कमल को बहर के  रास्ते के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।
    ” अब ये नहीं जाएगा दीदी, इसको ऐसे जाने नहीं दुंगी ।”
    रूपा बात को आगे बढाते हुए फिर बोलती है।
    ” इसको ऐसा सबक सिखाऊंगी, की ये ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगा।”
    बोलकर रूपा फिर कमल के उपर अटैक करना चाहती है। पर राधा का इसारा पा कर रूक जाती है।
    कमल जो दोनो की बात सुन रहा था । वो एक दम से पिछे मुड़ता है, और गेट के तरफ बढ़ जाता है। दरवाजा खोलकर बाहर निकल जाता है। पर दरवाजे को बाहर से बंद कर देता है ! और आगे बढ़ जाता है। आपको क्या लगता है। की कमल चला गया? क्या वो फीर वापस आयेगा? चलिए कहानी के तरफ चलते हैं, और जनने की कोशिश करते हैं।
    राधा और रूपा एक दुसरे को आशचर्य से देखने लगती है।
    ” चलो बाहर चलते है “
    राधा बोलती है, और रूपा का हांथ पकड़ कर दरवाजे के तरफ जाने लगती है। दोनो चलकर दरवाजे पास आती है और दरवाजे के हेन्डल पकड़ कर अन्दर के तरफ खींचती है। उसे एहसास होती है की दरवाजा बाहर से लॉक है।
    ” दीदी कमल ने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया है।”
    रूपा राधा के तरफ देखते हुए बोली थी। जब दोनो ने देखा की दरवाजा बाहर से बंद है। तो फिर दोनो के मन में डर और भी ज्यादा बढ़ गया था। दोनो यही सोच सोच कर परेशान हो रही थी, की अब क्या होगा। ना जाने कब उसका कमल जैसे आफत से छुटकारा मिलेगा।
    ” मोबाइल भी नहीं है, कि जिससे दीदी को कॉल करके बता देती।”
    रूपा ने खामोशी तोड़ते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी भी परेशान होगी, वो भी क्या सोच रहीं होंगी की ये दोनो कहां रह गयी।”
    राधा रुआंसे स्वर में बोली थी ।
    इधर शीला और चांदनी के भी कदम तेजी से क्लास रूम के तरफ बढ़ रहे थे। उसे नहीं पता था की क्लास रूम में इतनी बड़ी लड़ाई चल रही थी। परेशानी दोनो के चेहरे पर साफ झलक रही थी।
    ” चांदनी, राधा और रूपा बहुत बड़ी मुसिबत में है। मेरा दिल बहुत घबरा रहा है।”
    शीला बोली और चांदनी के हांथ पकड़ कर खींचते हुए भागने लगी थी।
    ” हां, मुझे भी लगता है। की कुछ तो गड़बड़ है।”
    चांदनी शीला से बोली और ये भी शीला के साथ दौड़ने लगी थी।

    क्लास रूम का दरवाजा एक बार फीर से खुलता है। और कमल क्लास रूम में ऐन्टर करता है। इस बार कमल का हाव भाव चेहरे का एक्सप्रेशन बॉडी लोंगबेज पुरी तरह से बदल गया था। उसका चेहरा एक दम से डरावना हो गया था। लाल लाल आंख बिखरे बाल एक हांथ में डंडा तो दुसरे हांथ में फोल्ड किया हुआ मोटी मोटी दो रस्सी लिए कमल क्लास रूम में प्रवेश किया था।
    ” अब क्यों आये हो कमल, क्या लेने आये हो दुबारा। चलो हटो मेरे रास्ते से मुझे जाना है।”
    रूपा कमल के तरफ अपनी उंगली प्वाइंट ऑट करते हुए बोली थी।
    ” कमल रास्ता छोड़ो मेरा, मैं कह देती हूं। अच्छा नहीं होगा।”
    राधा भी कमल को गुस्से से बोली और रूपा के हांथ को मजबूती से पकड़ कर आगे बढ़ी।
    ” अरे रूक जा, इतनी भी जल्दी क्या है। तुम लोगों को जाने की।”
    बिना रूके कमल फीर बोला
    ” अभी तो तुम लोगों को बहुत सारा हिसाब देना है।”
    बोलकर कमल राधा और रूपा के तरफ लपका 
    राधा और रूपा अचानक हुए इस हमले से सम्भल नहीं पाई थी। इसी बात का कमल को फायदा मिला वो राधा और रूपा को पकड़ चुका था। वो बात अलग था कि उसके शरीर मे इतना ताकत नहीं था। की दोनो लड़कीयों से ये अकेला एक साथ मुकाबला कर सके, लेकिन इस बार कमल अपने लिए ज्यादा पॉजीटीव था।  शरीर को चुस्त दिमाग दुरुस्त कर के आया था। वो अपने दिमाग के घोड़े को तेज गती से दौड़ाने लगा था। वो मन हीं मन सोच लिया था की इन दोनो लड़कियों से एक साथ मुकाबला करना आसान नहीं है। इस लिए वो एक प्लान तैयार किया था कि,ये दोनो को किसी तरह अलग करना पड़ेगा। नहीं तो फिर इन दोनो के हाथों मार खाना पड़ सकता है।
    ” रूक जा शाली, मैं तुम दोनो को अभी बताता हूं।”
    बोलते हुए कमल राधा को एक जोरदार थप्पड़ मार देता है। थप्पड़ खा कर राधा सीधे फर्श पर जा गिरती है।राधा सम्भल पाये उस से पहले कमल के पैर राधा के कमर पर पड़ता है। चोट इतनी जोर की लगी की राधा की चीख निकल गई थी। रूपा का हांथ कमल नहीं छोड़ा था इसका भी कारण है। आपने देखा नहीं कि, थोड़ी देर पहले रूपा कैसे कमल की बैण्ड बजाई थी। यही कारण था कि कमल राधा पर अटैक कर रहा था। और रूपा पर कंट्रॉल बनाना चाह रहा था। दो चार लात और राधा को मारता है। राधा बेहोश हो जाती है।अब बारी थी रूपा की।
    ” शाली हरामजादी,तुने मुझे मारा था। अब रूक मैं तेरा क्या हाल करता हूं।”
    कमल अपना दांत पीस कर रूपा से बोला था।
    ” क्या करेगा तू मेरा,हां, इतना जल्दी भुल गया की मैं तेरा क्या हालत किया था।”
    रूपा कमल पर गुस्से से चिल्लाते हुए जोर से बोलती है।और कमल के घुटने के नीचे पैर पर एक जोरदार लात मार देती है। कमल दर्द के मारे कराह देता है।
    ‘ आ आ आ ह “
    रूपा इतना हीं पर नहीं रूकती है। कमल जो रूपा के दोनो हांथ पकड़े हुए था। रूपा तेज झटके के साथ अपना एक हांथ कमल के पकड़ से आजाद करा चुकी थी। आजाद हीं नहीं ताबड़ तोड़ छः सात चमाटे भी लगा चुकी थी। ऐसा लग रहा था अब सिचुएशन पुरी तरह से रूपा के कंट्रोल में आ गयी थी। राधा अभी भी फर्श पर बेहोश परी थी। रूपा सोच रही थी की, अगर हमें राधा दीदी को सेफ करना है। तो इस कमल रूपी रावण को एक अच्छा सा सबक सीखाना हीं पड़ेगा। वो दुबारा पैर से अटैक करना चाहती थी। जैसे हीं वो अपना पैर अटैक करने के लिए उठाई एक जोर दार मुक्का उसकी सीना पर आ कर लगी मुक्के का भार इतना जबर्दस्त था। रूपा हिल गई थी। दर्द इतना तेज हुआ की रूपा दर्द के मारे कांप गई थी। रूपा का शरीर थर थर कांपने लगा था। इसी वक्त का कमल फायदा उठाया। रूपा के कान के बगल में लगातार थप्पड़ मारा जिससे रूपा और लाचार हो गई थी। होती भी क्यों नहीं इतनी मार जब किसी लड़के को पर जाए तो वो हिल जाये फीर भी ये तो एक लड़की थी। वो भी 17 वर्ष की
    ‘ अब मैं तुझे बताउंगा कि मुझ पर हांथ उठाने का अंजाम क्या होता है।”
    कमल रूपा पर चिल्ला कर बोला था। रूपा को बहुत ज़ोर कि दर्द हो रही थी। वो कुछ बोली नहीं सिर्फ कमल को गुस्से से देखती रही।
    ” बहुत ज्यादा उर रही थी तब से, अब दिखा अपनी ताकत और स्टाइल “
    कमल बोलते हुए रस्सी हांथ में उठा लेता है। और रूपा के कमर में रस्सी लपेटा देता है। दोनो हांथ पीछे करके रूपा का हांथ रस्सी से बांध दिया था। और उसे बाल से खींचते हुए एक बैंच पर ले जाकर बिठा दिया था। इतने में राधा को होश आने  लगा था। उसके हांथ पैर हिलने लगे थे। राधा का आंख धीरे धीरे खुलता है। और राधा की नजर बंधी हुई रूपा पर पड़ती है। वो सहम जाती है। और वो मन में सोचने लगती है। की रूपा कितनी अच्छी है। उसने मेरे लिये अपनी जान की बाजी लगा दी है। शायद इस जगह मेरी अपनी सगी बहन भी होती तो शायद ये सब नहीं करती वो अपनी जान की परवाह किए बगैर हमारा साथ दे रहीं है। कमल से लड़ रही है। ये सब सोच सोच कर राधा रूपा पर प्राऊड फील कर रही थी। और उसके आंख में आंसू आ गई थी ! वो हिम्मत कर के उठ कर बैठती है।
    ” कमल ये क्या हरकत है तुम्हारा, तुमने रूपा को बांध क्यों रखे हो खोल,खोल, खोल कमीने मेरी बहन को।”
    राधा कमल को गुस्से से हुई अपनी लाल आंख दिखाते हुए बोली थी।
    ” अच्छा, तो तुम होश में आ गई हो। रूक मैं आता हूं। तेरी भी खबर लेने।”
    .बोलकर कमल राधा के पास आता है। राधा कुछ कर पाती उससे पहले कमल उसकी कमर में रस्सी लपेट चुका था । कमल राधा को एक हांथ खुला  छोड़ कर  बाकी कमर और एक हांथ को बांध दिया था। कहानी का अगला भाग और मजेदार होने वाली है। तो पढिए पुरी कहानी केवल , नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड डॉट कॉम पर।
     

  • फाइटर बेटियां

    फाइटर बेटियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    चलो ठिक है तो हम दोनो जा रहे हैं ! तुम बैठो क्लास रूम मे…राधा बोली और जाने लगी….रूको राधा तुम ऐसे नहीं जा सकती मेरे सवाल का जबाव दिए बगैर…कमल को गुस्सा आने लगा था !

    ” मैं क्या जबाव दूं ..कौनसी बात का जबाव दूं, हां “

    राधा डांटते हुए कमल से बोली थी। बिना रूके फीर बोली…

    ” देखो, मैं ना तो तुम्हें चाहती हूं। ना हीं मेरे मन मे तुम्हारे लिए कुछ है। ना था ना है ना रहेगा “

    राधा अपने तरफ से बात साफ करते हुए बोली थी।

    ” तुम्हें समझ में नही आता क्या कुछ भी?,जब दीदी मना कर रही है, तो तुम क्यो पागलों जैसी हरकत कर रहे हो।”

    रूपा कमल को समझाने की कोशिश की थी।

    ” देखो तुम्हें जो समझना है समझो, पर आज मैं तुम्हे पाकर रहूंगा राधा “

     अपनी उंगलियों से चुटकियां बजाते हुए कमल, अपना डिसीजन क्लियर कर दिया था ।

    ” तुम बहुत गलत कर रहे हो कमल, तुम्हें पता भी है, कि तुम क्या कह रहे हो। जिस बात का कोई मतलब हीं नही है।”

    राधा कमल को, समझा बुझा कर उससे अपना पिछा छुड़वाना चाह रही थी । 

    ” क्या तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है? “

    कमल राधा के आंखों से आंख मिलाकर बोला था।

    ” बिल्कुल नहीं “

    राधा कमल को जबाव देते हुए बोली थी।

    ” जब दीदी बोल दी है नही, तो अब तुम्हारा यहां रूकने का कोई मतलब हीं नही बनता है। अब तुम जा सकते हो,जाओ जल्दी यहां से “

    रूपा कमल को गुस्से से देखते डांट कर जोर से हुए बोली थी।

     

    क्लास बिल्डिंग रास्ता 

     

    इधर चांदनी रूपा के नम्बर पर कॉल लगा रही थी। रिंग बजकर कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, दुबारा से नम्बर डायल कर दी थी। इस बार भी कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, हैरानी से शीला के तरफ देखी।

    ” ये भी कॉल नही उठा रही है । “

     चांदनी शीला से बोली।

    ” चलो चलकर देखते हैं।अब वहीं जाकर पता चलेगा, की आखिर बात क्या है। “

    शीला चांदनी से बोली और आगे चलने लगी थी।

    ” ठीक चलो वही चलते हैं। “

    बोलते हुए चांदनी भी चल पड़ी थी। आज पहली बार हुआ था की राधा और रूपा इन दोनो के कॉल रिसीव नही की थी ।इससे पहले जब भी ये दोनो, राधा या रूपा को कॉल करती थी।तो कॉल रिसीव होते हीं उनके चहकती हुई खनखनाती हुई आवाजों से इनका स्वागत होता था। पड़ ना जाने आज क्या हो गया था ,की कॉल रिसीव हीं नही हो रही थी। यही सोचते हुए दोनो आगे बढ़ रही थी।

     

    क्लास रूम 

     

    ” रूपा जुवान सम्भल कर बात करो, तुम्हें बीच में बोलने के लिए किसने बोला है। अगर तुमको जाना है, तो तुम जा सकती हो।राधा कहीं नहीं जा रही है। मैं बोल दिया तो बोल दिया। “

    कमल रूपा को आंख दिखाते हुए बोला था ।

    ” अबे मजनू के औलाद, तुम्हे बात कुछ समझ में आता है की नहीं। बहुत बात से  समझा लिया तुमको, अब शायद  तुम लात खाके हीं मानोगे। “

    रूपा कमल पर चिल्ला कर गुस्से से चीखते हुए बोली थी।

    ” कमल तुम जाओ यहां से,मैं तुम्हे बार बार बोल रही हूं। मुझे छोड़ दो, मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है। तुम क्या, किसी भी लड़के के लिए मेरे दिल में कुछ भी नहीं है। समझो बात को, और जाओ यहां से। “

    राधा बोली,राधा बोल रही थी। इतने में कमल राधा का हांथ पकड़ लेता है। राधा झटक कर कमल से अपना हांथ छुड़ा लेती है। कमल जितना भी राधा के पास आना चाह रहा था। राधा कमल से उतनी हीं दुर जा रही थी। यह देखकर कमल का सब्र का बांध टुटता जा रहा था। कहते हैं, लोग प्यार में पागल हो जाता है। और जब प्यार एक तरफा हो तो पागल पंती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। कमल को गुस्सा इस बात से नहीं था। की राधा ने उसे रिजेक्ट किया था। बल्की गुस्सा इस बात से था।की वो ऐसा कर कैसे सकती है। मैं हेंडसम हूं। पढा लिखा हूं। पैसा प्रोपर्टी है हमारे पास, फीर भी मुझे ये रिजेक्ट कर रही है। यही कारण है। की प्यार रिस्पेक्ट आदर से शुरूआत हुई बात अब जोर जबर्दस्ती नीच पंती तक पहुंच गयी थी। 

    ” समझा समझा कर थक गयी हूं तुम्हे, पर तुम हो की समझने का नाम हीं नहीं ले रहे हो। “

    राधा बोली और अपनी आंख लाल करते हुए कमल को देखी।

    ” मुझे कुछ नहीं समझना है। अब जो भी समझना है। सिर्फ और सिर्फ तुन्हें समझना है। बोलकर कमल राधा के गाल को हांथ लगाना चाहता है। पर इससे पहले की कमल का हांथ राधा के गाल को टच करता उससे पहले हीं कमल के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा थप्पड़ के साउंड इतना तेज था। की पूरा क्लास रूम गन गना गया था। थप्पड़ खा कर जब कमल पिछे मुरा तो देखा, रूपा अपनी कमर पर हांथ रखी हुई कमल के तरफ देख रही थी। 

    ” तुम, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे थप्पड़ मारने की “

    कमल रूपा को गुस्से से देखते हुए बोला था। अभी भी कमल का हांथ उसके गाल पर हीं था।

    ” वैसे हीं, जैसे तुम्हारा हिम्मत हुआ।  मेरी दीदी के साथ बदसलूकी करने का “

    बोलकर रूपा कमल को घुरने लगी थी।

    ” महंगा पड़ेगा, तुम लोगों को ये थप्पड़ । समझी तुम.”

    कमल रूपा पर गुर्राया।

    ” क्या महंगा पड़ेगा बे “

    बोलकर रूपा  तेजी से झपट कर कमल के कमर पर एक लात मारी कमल अपने आप को सम्भाल पाता इससे पहले रूपा ताबड़तोड़ मुक्का बरसाने लगी। अब जब कमल को मार पर हीं गया था। तो वो भी कहां पिछे रहने वाला था। उसने रूपा के गाल पर जोरदार तमाचा मारा रूपा हिल गयी थी।  पर वो रूकी नही अब पहले से और भी ताकत के साथ कमल पर अटैक करी थी।

    ” ले मजनू की औलाद, ये ले, और ले “

    रूपा लगातार कमल के पेट में पंच कर रही थी। 

    ” रूपा तुम ज्यादा उड़ रही हो तुम,  पड़ कुचलना पड़ेगा तुम्हारी। समझी रूपा की बच्ची। “

    कमल दांत पीस कर रूपा के तरफ देखते हुए बोला था।

    ” पड़ कुचलेगा हराम खोर, तेरी तो मैं जान निकाल दूंगी। मेरी दीदी को परेशान करता है। अब तो तुझे उपर वाला भी नही बचा सकता है। ले, ये ले लात खा कमीने। सुधर तो तुम सकते नहीं, तो मर जायेगा ऐसे हीं।  तुम्हारे खानदान में सारे कमीने ही होंगे इस लिए तुम ऐसी नीच वाला हरकत करता है। “

    बोलते हुए रूपा कमल को बेसुध पिटाई कर रही थी।मार खाते हुए कमल कराह रहा था। राधा जो ये सब देख रही थी। रूपा को रोकना चाह रही थी। पर कमल के हरकत से उसे भी बहुत दु:ख पहुंचा था।चाहकर भी वो रूपा को नही रोक पायी वो भी कमल के ठीक सामने आकर खरी हो गयी थी।

    ”  चला भी जा अब, जा,क्यों पिटाई खा रहा है। “

    राधा कमल को रूपा के हाथों पिटते हुए कमल पर दया दिखाते हुए गंभीर स्वर में बोली थी।

    क्या कमल पिटाई खा कर चला गया?या उसने कोई चाल चली। क्या रूपा कमल के चंगुल से राधा को बचा पाई?या रूपा भी फंस गई। क्या शीला और चांदनी राधा और रूपा के पास पहूंच पाई ? क्या होगा राधा और रूपा के साथ? क्या होगा कमल का अगली चाल इन्हीं सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए इस कहानी के साथ। आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में…..।

  • कुछ तो है

    कुछ तो है

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    राधा और रूपा का इंतजार  करते करते  शीला और चांदनी को बहुत देर हो जाती है तो परेशान होकर दोनो सहेली क्लास के रूम के तरफ भागती है….शीला के क्लास वाले बिल्डिंग से मीटिंग हॉल बीच में चार बिल्डिंग छोड़कर थी ! दोनो तेजी से दौर कर अपने क्लास रूम पहुंच जाना चाहती थी।

    ” क्या हुआ नही हुआ एक बार फोन करके भी बता देती..”

    शीला बोली बोलते हुए शीला हांफ भी रही थी। तेजी से दौड़ने से शीला के सांस  चढ़ गई थी। यही हाल चांदनी की भी थी।

    ” हां उसे कॉल कर लेना चाहिए.”

    चांदनी बोली और अपना मोबाईल अपने जेब से निकालने लगी….

    ” मैं ही कर लेती हूं कॉल रूको शीला ऐसे में तुम बीमार पर जाओगी……चांदनी बोली और रूक गई…

    “.मेरी छोड़ो पहले उसको फोन लगाओ जल्दी”

    शीला बोलकर वो भी रूक जाती है ! चलते चलते दोनो तीन बिल्डिंग क्रोस कर गई थी ! अब दोनो की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई थी ! “ना जाने क्या हुआ है उन दोनो के साथ क्लास में कोई स्टूडेंटस भी नहीं थे “

     चांदनी बोलकर नम्बर डायल कर दी थी ! रिंग होने लगी थी अब दोनो कॉल रिसीव होने का इंतजार करने लगी थी। फुल रींग होने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं होती है ! 

    “नही उठाई”

    शीला चांदनी को मायूसी से देखी और बोली..

    ” नही”

    चांदनी बोली।

    ” रूपा के नम्बर पे लगाओ कॉल “

    शीला बोली शीला का दिल बैठा जा रहा था ! सेम कंडिशन से चांदनी भी गुजर रही थी।

    ” हां हां लगाती हूं “

     चांदनी बोली और स्क्रोल डाउन करने लगी चांदनी और शीला के चेहरा साफ उतर गया था ! ऐसा लग रहा था अब रो देगी दोनो ! फोन लगाकर अपने कान मे सटा लेती है ! चांदनी और शीला एक दूसरे को देख रही है। और मन हीं मन दोनो सोच रही थी की

     कुछ तो है..

     

    क्लास रूम

     

    ” देखो कमल मुझे जाने दो तुम्हारी ये हरकत मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है ! दीदी वेट कर कर के परेशान हो गई होंगी….राधा बोली और कमल के हांथ से अपना हांथ को झटक कर झटका मार कर छुड़ाना चाहा पर पकड़ इतनी मजबूत थी की छुड़ा नहीं पाई…

    ” अरे मेरी जान, तुम्हें छोड़ने के लिए थोड़े हीं ना पकड़ा हूं ! बहुत दिन से तुम्हे पकड़ना चाह रहा था पर तुम तो हांथ हीं नही लगती थी आज जब मौका मिला है तो तुम नखरा हीं ज्यादा करने लगी है ” कमल बोलता है…..

    ” कुत्ते हरामजादे छोड़ मेरी बहन को छोड़ कमीने छोड़..”

    रूपा बहुत गुस्से मे कमल से बोलती है.।

    ” तुम क्यों फड़ फड़ा रही है तुम्हें मैं कुछ नहीं करूंगा तुम बस शान्ती से तमाशा देखती जा “

    कमल रूपा को डांटते हुए बोला था।

    ” कमीने करेगा तो तब जब तू कुछ करने के लायक बचेगा, तब ना ..हमें बांधकर हिरो बन रहा है।अगर इतना हीं पावर है तुझमें तो खोल के दिखा मुझे फीर मैं बताती हूं की तू कहां का हिरो है ” बोलकर रूपा कमल को ललकारी ! बंधी तो राधा भी थी ! लेकिन राधा का एक हांथ कमल खोल रखा था ! जीसे पकड़ कर राधा को कमल बार बार अपने से चिपकाने की कोशिश करता रहता था ! 

    ” देख राधा आज तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता है ! चाहे तुम जितनी भी कोशिश कर लो “

    कमल घमंड में चुर होकर राधा से बोला था ! 

    ” तुम बिल्कुल भी ठीक नहीं कर रहे हो कमल, मैने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा जो तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो। देखो खोल दो हम दोनो को और जाने दो हमें,कहीं ऐसा ना हो की तुम्हें बाद में चलकर पछताना पड़े”

    राधा कमल को समझाते हुए बोली थी।

    ” नहीं मैं तुम्हें आज ऐसे कभी नहीं जाने दुंगा,आज तुम्हे मेरी होनी पड़ेगी “

    कमल राधा को गुस्से से देखते हुए बोला था। 

    ” तेरी इतनी मजाल की तू दीदी से इस तरह बात करेगा “

    रूपा बात आगे बढाते हुए फिर बोली…

    ” अपनी शक्ल देखा है कभी आईने में बड़ा आया है मेरी दीदी का लवर बनने वाला “

    बोलकर रूपा अपने बदन को गुस्से में कस मसाने लगती है ! 

    ” देख कमल मैं तेरी शिकायत प्रिंसीपल मैम से करूंगी अगर मेरी बात नहीं माना तो”

    राधा कमल को समझाने कि कोशिश की

    ” हरामजादी अभी तक तेरी गर्मी शांत नही हुआ है ! बहुत उछल रही है ना रूक अब मैं तुम्हें ऐसे नहीं छोड़ूंगा अब तेरा रेप होगा “

    कमल दांत पीसकर गुस्से से आंख लाल करते हुए बोला था ! रेप का नाम सुनकर राधा और रूपा दोनो बहुत घबरा गई थी !

    दोनो मन हीं मन सोच रही थी की कहां फस गई मैं  वे दोनो फोन भी नहीं कर सकती थी की शीला और चांदनी उन दोनो को मदद कर सके इन दोनो के फोन कमल छीन कर साइलेंट मोड में डालकर अलग रख दिया था ! कमल का नजर काफी समय से राधा पर था ! वो राधा को चाह रहा था ये बात अलग है की कभी भी कमल राधा को सामने से प्रपोज नहीं किया था ! राधा भी कभी इस बात को नोटिस नही किया था ! वैसे भी राधा प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर हीं रहना चाहती थी ! बस उसका मकसद था की पढाई लिखाई कर के अपना फ्यूचर बनाना उसको इन सब से कोई भी मतलब नहीं था। कमल भी अपने दिल में राधा को बसाये एक तरफा मोहब्बत लिए घुम रहा था। वो राधा को बताने वाला था की वो उससे प्यार करता है ! कई बार बात करने की कोशिश किया भी पर नहीं कर पाया था। क्यों की राधा कभी अकेली रहती हीं नहीं थी। चारो सहेलियां हमेशा साथ रहती थी कॉलेज में ! इसी लिए कमल को मौका नहीं मिल पाता था ! आज मीला भी तो सिच्यूशन हीं कुछ अलग बन गई थी। अब आप कहेंगे की ये क्लास रूम में कैसे पहुंचा तो बता दें दर असल कमल राधा और रूपा को मैन गेट से हीं पिछा कर रहा था ! जब देखा वो दोनो क्लास रूम में गई है तो पिछे पिछे कमल भी क्लास रूम में चला गया था। जब राधा और रूपा ने देखा तो 

    ” तुम,तुम यहां क्या कर रहे हो कमल?”

    .राधा कमल को उंगली से प्वाइंट  करते हुए बोली थी 

    ” मैं, मैं यहां तुमसे मिलने आया था।”

     कमल बोला और दोनो के पास आकर बैंच पर बैठ गया था ! 

    ” तुम जाओ यहां से हम लोग भीं जा रहें हैं मीटिंग हॉल में “

    रूपा कमल से बोली और उठने लगी…

    ” ठिक है तुम जाओ, हमे राधा से अकेले में कुछ बात करना है।”

    कमल रूपा से बोला था।

    क ,क क्या क्या, बात करना है तुमको मुझसे?”

     राधा हकलाते हुए आशचर्य से कमल को देख कर बोली थी।

    ” राधा रूको ना थोड़ी देर बात कर लो फीर चली जाना “

     कमल राधा से बोला और मुस्कुराने लगा…

    ” नही मुझे नही करनी है तुमसे कोई भी बात तुम चले जाओ यहां से  “

    .राधा कमल पर चिल्लाते हुए बोली थी।

    ” हां तुम जाओ यहां से मैं बोल देती हूं नहीं तो अच्छा नहीं होगा “

    रूपा गरज कर बोली..

    ” तुम लोग बेकार में ऐसी बातें कर रही हो “

    कमल शांत होते हुए बोला था !

    ”  मैं कहती हूं ना तुम जाओ यहां से तो जाओ मुझे परेशान मत करो “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…

    अरे खा म खा तुम लोग हाइपर हो रही हो कुछ भी ऐसी वैसी बात नही है “

    कमल दोनो को देखते हुए बोला था।

    ” चलो ठिक है, तो हम दोनो जा रहे हैं। ठिक है, तुम बैठो क्लास रूम में “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…. आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में ….

     

  • चार सहेलियां

    चार सहेलियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    मीटींग हॉल में छात्र छात्रायें जुटने लगे थे ! जीसको जहां जगह मिल रही थी बैठ जा रहे थे ! टीचर्स के टीम भी मीटींग हॉल में आ गये थे ! सभी लड़के लड़कियाँ लाईन से लगे कुर्सी पर आकर के बैठ रहे थे ! 
    शीला और चान्दनी भी चलकर मीटींग हॉल में प्रवेश करती है !आगे आगे शीला पीछे चान्दनी और उसके पीछे तीन चार लड़की हॉल के अंदर अपने सीट लेने के लिए बढ़ रही होती है ! ये सभी भी कुर्सीयों पर बैठ जाते हैं !
    चान्दनी अभी मीटींग स्टार्ट होने में टाईम है जरा राधा को कॉल करके पूछेगी कि वो कहां रह गई…. हमें रूपा से भी बात करना चाहिए …..शीला चान्दनी से कहने लगी और वो खुद भी अपनी फोन भी नीकालने लगी थी…हां ठिक है सही कह रही है तुम यहां तो बहुत शोर है बाहर नीकल के बात करनी पड़ेगी….चान्दनी बोलकर शीला को देखने लगी
    हां हां तो चलते हैं ना हॉल रूम से बाहर…चलके बात कर लेते हैं…बोली और शीला उठकर चान्दनी को दोनो हांथ पकर कर उठाने लगती है ! चान्दनी शीला के साथ उठकर चल देती है ! हॉल से बाहर निकलकर दोनो सहेली एक छोटा सा रास्ते की दुरी चलने के बाद गार्डेन में पहूंची…..गार्डेन में बने सीमेंट के बैन्च पर बैठ जाती है ! चलो अब करते हैं बात…तू लगायेगी फोन या मैं करूं कॉल….शीला चान्दनी से बोली ……मैं करती हूं कॉल ….वैसे मैतो सुबह भी बात की थी…चाहो तो अभी तुम बात करलो…वो भी हैप्पी हो जायेगी की दीदी की फोन आई…..बोलकर चान्दनी शीला के तरफ देखने लगी ……ओके चलो मैं हीं करती हूं कॉल उसे…बोलकर शीला ने मोबाईल में नम्बर स्क्रोल डाऊन करने लगी..नम्बर मील गया तो डाईल कर के स्पीकर पर डाल दिया था रिंग बजना स्टार्ट हो गया था जब आधे से ज्यादा रींग बज गया लास्ट होने वाली थी रींग तब कॉल रिसीव किया गया ….हैल्लो शीला दीदी माय लवली जान….कॉल रिसीव करते हीं राधा बोलती है !कैसी हो आप ….राधा फीर बोली……..मैं ठिक हूं कहां रह गई तूं कॉलेज नहीं आ रही क्या …..शीला राधा को बोली…..अरे तुने हीं मुझे कॉल करके बोली सुबह और तुमहीं नहीं आई….चान्दनी बोली….आ रही हूं मैं बस पहुंच हीं गई….क्या बात है आज फीर सभी सहेलियां एक साथ होंगे….रूपा भी मेरे साथ हीं आ रही है….राधा फोन पर बोलकर हंसने लगी……अरे हां ये तो अच्छी बात है….तो आ जाओ तुम दोनो जल्दी से ….शीला बोली….हां बस बस पहुंच हीं गई….राधा बोलकर फोन कट कर दिया…..फोन रखकर शीला और चान्दनी एक दुसरे को देखकर मुश्कुराने लगी थी….
    चार सहेलियों की जोड़ी पुरे कॉलेज में मशहुर धी सब लोग इन चारो के दोस्ती के मिशाल दिया करते थे !ये चारो जब एक साथ कहीं भी चली जाती थी कहीं भी एक साथ खड़ी हो जाती थी तो ये बिल्कुल भी नही लगता था की ये सभी सगी बहनें नहीं है ! चोरों के एक दुसरे के लिए ईज्जत प्यार सम्मान एक दुसरे के लिए समर्पन यही सब चारो दोस्तों को महान बनाती थी ! अईसा नहीं है की हमेशा इन सब में प्यार हीं रहता था…इनके भी जीन्दगी में उदासी मनमुटाव छोटे मोटे झगड़े भी इनके जीन्दगी में हिस्सा ले लेते थे ! ये बात अलग है की ज्यादा दिनो तक एक दुसरे बिना रह नही पाते थे ! कहते हैं ना की ऊतार चढाव हीं जिवन के दो पहलु है..दु:ख शु:ख तो जिवन के आधार है !किसी के शु़:ख में भले हीं साथ नहीं खड़ा हुआ हो लेकिन इन चारो में से कीसी को भी अगर दु:ख हुआ हो उस टाईम पर ये चारो सभी एक साथ चट्टान के तरह खड़े मिलते थे ! चान्दनी के फोन बजने लगती है….चान्दनी फोन रिसीव करती है…..कहां हो दीदी आप लोग मै और रूपा क्लास रूम में हैं……उधर से राधा बोली…..अरे हां मैं तुम लोगो को बताना हीं भुल गई थी.की हम क्लास रूम में नहीं हैं…तुम लोग मीटींग हॉल के तरफ आ जाओ हम लोग वहीं हैं…..चान्दनी राधा को फोन पर जबाव दिया ….ठिक है दीदी मैं अभी आई….राधा बोली….ओके आ जाओ तुम लोग जल्दी….बोलकर चान्दनी कॉल कट कर दी थी !
    उधर मीटींग हॉल में सभी प्रोफेसरस आ गये थे.सभी स्टूडेन्टस भी अपनी अपनी जगह लेकर बैठ चुके थे ! सभी छात्रों के मन में एकहीं शावाल थे जो बार बार दिमाग में घुम रहे थे जो की इतनी बड़ी मीटींग का अरेन्जमैंट किया गया था पर ये बात किसी के कानो कान तक भनक भी नहीं परे थे कि इतनी बरी मिटींग किस बात को लेकर बुलाई गई है..अब आप सोचीये इस मीटींग को सीक्रेट मीटींग कहा जाए तो तनीक भी ताज्जुव वाली बात नही होगी..है ना ?
    चलो अब हमें मीटींग हॉक के अन्दर चलना चाहिये…..शीला चान्दनी से बोली और क्लास रूम वाली बिल्डींग के तरफ नजर दौरादी…..राधा और रूपा कहां रह गई बोली थी क्लास रूम तक तो आ गई हूं फीर आने में इतनी देर कहां लगादी….चान्दनी थोरी परेशान होते हुए बोली और शीला कंधे पर प्यार से हांथ रखी…..आ जाए गी घबराओ मत आती हीं होगी हो सकता है क्लास रूम में बैठकर थारा रिलैक्स कर रही होगी….कमजोर तो वो पहले से हीं है आते आते थक गई होगी शीला बोली …नही मेरा दिल घबरा रहा है अभी तक तो उसे आ जाना चाहिए कहीं कुच्छ…..इससे पहले की चान्दनी अपनी बात पुरी कर पाती शीला बीच में हीं चान्दनी के बात काटते हुए बोली….कच्छ भी मत बोलो उसे कुच्छ नहीं हो सकता है ! अगर तुम अईसी बात सोचती हो तो चलो क्लास रूम चलकर हीं देख लेते हैं वैसे भी वो अकेले नहीं है रूपा भी साथ में है उसके….शीला चान्दनी पर थोरा सख्त लहजे में उसके आंख में आंख डालकर बोली…..तो चलो फीर क्लास रूम चलकर देखते है मेरा जी घबरा रहा है ….चान्दनी चीन्तीत होते हुये बोली….चान्दनी का चहकता हुआ चेहरा अब मुरझाने लगा था ! होगा भी क्यों नहीं अपने बहन से भी ज्यादा इन सभी दोस्तों को जो मानती थी…अईसा नहीं है की शीला कठोर है उसे इन सबकी फिकर नहीं है वो भी उतनी ही चीन्तीत थी जीतनी की चान्दनी थी..फर्क सिर्फ इतना था की चान्दनी चीन्ता साफ झलक रही थी और शीला अपनी चीन्ता बाहर नही आने देना चाह रही थी ! शीला की ये आदत भी थी की वो चाहे जितना भी टेन्शस में वो दुसरे के सामने जाहीर नही होने देती थी की वो कीसी टेन्शन में है या उसे कोई प्रोबलम है ! ये बात तो आप समझ हीं गये होंगे जब शीला की साईकिल खराब हुई थी तो अजय को जल्दी हांथ नही लगाने दिया था ! दोनो उठकर क्लास रूम के तरफ चल देती है !
    चलते चलते रास्ते में यही सोचती रहती है की कितनी ला परवाह हो गई है ये दोनो लड़की..जरासा सा भी हम लोगों की फिकर नहीं है उसके पास….सोचने का एक पहलु ये भी थी की कहीं उन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं हुआ है ! नही नही ये मैं क्या सोच रही हूं ! अईसा नहीं हो सकता उनके साथ ! लग भग एक हीं तरह के सोच दोनो सहेलियों के दिमाग में चल रही थी ! एक तरह से ये भी सोचना जायज थी ! क्योंकी सारे स्टूडेन्टस और टीचर्स मीटींग हॉल के तरफ गये हुए थे ! ये दोनो अकेली क्लास रूम में गई थी ! इस बात का फायदा उठाकर कहीं कोई ईन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं कर दिया …..चान्दी हमें जल्दी से जल्दी क्लास रूम पहुंचना चाहिए….शीला बोली अब शीला के मन में भी डर जन्म ले लिया था……हां हां तुम ठीक कह रही हो हमें जल्दी वहां पहुंच कर देखना चाहिए की आखीर बात क्या है ! चान्दनी बोलती है और उसके कदम तेज हो जती है ! भागो चान्दनी अब अईसे काम नहीं चलेगा……शीला बोलकर दौर लगा देती है ! यह देखकर की शीला दौर रही है ! चान्दनी भी तेजी से दौरने लगती है ! क्या होगा जब शीला और चान्दनी क्लास रूम पहुंचेगी…और मीटींग हॉल में क्या हुआ जानने के लिए पढिए आगे की कहानी अगले भाग में……

  • वेलकम कॉलेज

    वेलकम कॉलेज

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    ऑटो तेज रफ्तार में चल रही है ! अजय शील आपस में बाते करते हंस्ते मुश्कुराते आगे बढ़ रहे थे…अब थोरी दुर आगे हमें उतर कर जाना होगा आ गई वो जगह जहां हमें जाना है….बातो हीं बातों में पता हीं नही चला कब सफर पुरा हो गया…बोलकर अजय शीला के आँखों में देखने लगा

    अजय शीला के साथ और वक्त बिताना चाहता था…वो सोच सोच कर परेशान हो रहा था की अब छोर के जाना परेगा..पर क्या करे जाना तो परेगा जब से अजय शीला को देखा था तब से शीला के लिए एक अलग हीं प्रकार के उसके दिल में फिलींगस जाग गई थी ! शीला की खुबशुर्ती उसकी व्यवहार हाजीर जवाबी…उसकी आकर्शन नयन नक्स और तो और शीला का अजय के साथ बात करने का अंदाज अजय के दिल को तार तार कर रहा था….भाई साहब के बुरा हाल तो हो हीं रहा था…भाई साब गाड़ी रोकना….ड्राईवर से बोलकर शीला के तरफ बरे प्यार से देखने लगा….अब मुझे जाना होगा मैं जा रहा हूं आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा रास्ता ईतना जल्दी कट गया पता हीं नही चला…अजय शीला से बोलकर रिक्सा से उतर गया…..बस कुच्छ हीं दुर मैं भी उतरूंगी.मेरा कॉलेज भी आ हीं गई हैं..बोलकर शीला अजय को देखने लगी…अजय ड्राईवर को किराया दिया और साईड हो गया साईड में आकर शीला को वाय कहा….शीला भी अजय को वाय बोलकर हांथ हिलाने लगी…अजय भी हांथ हिला कर शीला को लगातार देखने लगा…..गाड़ी चलदी थी

    अजय वहीं खड़ा रह गया था..लग रहा था जैसे की किसीने उसको स्टेचू बोल दिया हो.और वो मुर्ती बन गया हो ! अजय शीला की गाड़ी को तब तक देखता रहा जब तक वो गाड़ी अजय के आँखो से ओझल नहीं हो गया…..जब गाड़ी अजय के नजर से गायब हुआ तब वो भी अपने मंजील के तरफ चला गया

    उधर गाड़ी कॉलेज के मैन गेट के पास आकर रूकी….लिजीए मैडम आपकी कॉलेज आ गई…..ड्राईवर शीला से गाड़ी रोकते हुए बोला…..जी…शीला बोलकर उतरने लगी और गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देकर अपने कॉलेज के तरफ आगे चल परी…..

    कॉलेज शहर बीचो बीच काफी दुर तक फैला हुआ है ! कॉलेज के चारो तरफ कंस्ट्रक्संस के मजबुत बॉन्डरी वॉल किया गया था कॉलेज के सभी बिल्डींगस तीन चार मंजीला ईमारत की थी….कॉलेज को बेहतरीन ढंग से सजाया गया था कॉलेज को अपना एक क्रिकेट स्टेडियम भी था गार्डेन पार्क रंग बिरंगी फुलों के पौधो से सजाया गया था…कॉलेज के अन्दर के सड़कों को अलग अलग कलर के टाईलों से डिजाईन किया गया था जो कॉलेज के शोभा में चार चांद लगा रहा था कॉलेज के गार्डेन में फलदार पेड़ भी लगाये गए थे…कॉलेज के सभी बिल्डींगस को बेहतरीन कलर से पेन्ट किया गया था….ग्राऊण्ड में स्ट्रीट लाईट और बील्डींगस के सभी रूम कैमड़े से लैस है…..यह कॉलेज शहर के सबसे टॉप लेवल के कॉलेजों मे से एक है….मैनगेट से ईंटर होके शीला अपने क्लास वाले बिल्डींग की और चलकर जाने लगी…बहुत सारे गर्लस वॉवाईस आ जा रहे थे शीला भी अपने रास्ते चली जा रही थी……वेल्कम यू कॉलेज माय डियर शीला…..एक जानी पहचानी पतली सी आवज शीला के कान में आकर परी ….बिना मुरे हीं शीला बोली वेल्कम माय स्वीट हॉर्ट चान्दनी…कैसी हो दो तीन दिन बाद नजर आई हो क्या बात….शीला चान्दनी से बोली….हैल्लो जान अभी तक तो तेरी नजर मुझपर परी भी नही है….चान्दनी बोलकर हंसने लगी…शीला मुरकर चान्दनी के तरफ देखती है….ओ…हो..जींस टॉप…..मस्त लग रही हो बेवी….शीला चान्दनी को देखकर मुश्कुराते हुए बोली….

    शीला और चान्दनी नम्बर वन फ्रेन्ड हैं…दोनो एक दुसरे के लिए हमेशा तईयार रहते हैं ! दोनो की दोस्ती स्कूल के दिनो से हीं चलती आ रही है ! पढ़ाई में भी दोनो बहुत अच्छे हैं ! किसी भी प्रकार की कोई भी प्रोबलम हो दोनो दोस्त मिलकर एक दुसरे के साथ डटकर सामना करके उस प्रोबलम को समाप्त कर लेते थे ! अईसा नहीं है की ये दोनो सिर्फ आपस में हीं व्यवहारिक थे…..बल्की ये दोनो सभी को अपना अच्छा दोस्त हीं मानते थे….इनके क्लास के हीं नही…बल्की कॉलेज के बहुत अईसे लड़के लड़कियाँ थे जो ईनके क्लास से सीनीयर और जुनियर थे….सभी ईन्हे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते थे ! पर ये बात अलग थी की…शीला चान्दनी राधा और रूपा….ये चार दोस्त आपस मे सबसे पक्के दोस्त थे ! जब ये चार दोस्तों कि पलटन एक साथ चलती थी ! तो नजारा देखकर सभी के दिल वाग वाग हो जाते थे…..तुम्हारी ड्रेस भी कुच्छ कम नहीं है….तुम भी बहुत सुन्दर लग रही हो मेरी जान…..शीला के कन्धे पर अपनी हांथ रखते हुए चान्दनी बोली…..राधा को फोन करके पूछी नही की वो कॉलेज आ रही है की नहीं….शीला चान्दनी के बाल के चोटी को अपने हांथ से सहलाते हुए बोली……हां की थी मैं फोन उसे बोली थी आऊंगी शायद आ भी गई होगी….उसका घर तो हम दोनो के घर से नजदीक हीं है ! बोलकर चान्दनी शीला के एक हांथ अपने हांथ में लेली….आज तो छोटी महारानी भी आ रही है….सुबह सुबह हीं कॉल करी थी…मेरी निंद भी नही खुली थी उस टाईम….बोल रही थी आ रही हूं मैं आप लोगों से स्पेशली कुच्छ कहना है….मैं बोली बोल ना क्या कहना चाहती हो तो मै खुद सबके सामने कहुंगी फोन पर नहीं….चान्दनी बोली…दोनो सहेली चलते चलते बात कर रहे थे….अच्छा तो होगी कोई बात जो रूपा आकर हीं हम लोगों को बताना चहती हो…कोई बात नही हम मिलेंगे उससे तो पता भी चल हीं जाएगी आखीर बात क्या है…बोलकर शीला चान्दनी को समझाने की कोसीस की…..

    चलते चलते दोनो दोस्त अपने क्लास रूम के पास पहुंच गई थी ! जैसे हीं क्लास में एन्टर होना चहा  वैसे हीं तीन चार छात्रायें क्लास रूम से बहर आ रही होती है….सभी की नजर शीला और चान्दनी पर परती है ! उस में से एक लड़की चान्दनी के पास आकर ….कैसी हो चान्दनी दीदी….आप दोनो बहुत सुन्दर लग रही हो आज….बोलकर दोनो के सामने खड़ी हो जाती है….आई एम फाईन….हम बहुत अच्छे हैं और तुम सब क्लास रूम से बाहर क्यों जा रही हो क्या बात हुई है….चान्दनी उस लड़की को जवाब देते हुये…उस लड़की से शवाल करदी थी ! हां तुम लोग बाहर क्यों जा रही हो….शीला भी सभी को पॉवाईंट करते हुए बोली थी….आज क्लास एक से डेढ़ घण्टे देरी से स्टार्ट होने वाली है…अभी सभी स्टूडैन्ट को प्रींशीपल मैम मीटींग हॉल में पहुंचने को बोली हैं…..वहां सभी स्टूडैन्टस और सभी प्रोफेसरों के बीच मीटींग होने वाली है ! इस लिए सभी छात्र छात्रायें मीटींग हॉल में जा रहे हैं….आप लोग भी चलिए….उस में से एक लड़की बोली…..अच्छा मैं समझ गई क्यों मीटींग बुलाई गई है..और मीटींग में क्या होने वाली है ! बोलकर शीला सभी के तरफ देखने लगी…..तुम क्या समझ गई जरा मुझे भी बताए गी की माजरा क्या है….बोलकर चान्दनी शीला के गाल पर अपने हांथ की चार उंगलीयाँ रखी…..चलो मीटींग हॉल वहीं सबको मालुम चल जाएगी की क्या होने वाला है ! शीला बोली और चान्दनी के हांथ पकर कर खीचीं और आगे चलने लगी…..चलो चलकर हीं देखते हैं की प्रीशीपल मैडम क्या कहती हैं……बोल कर चान्दनी शीला के साथ चल परती है ! साथ में सभी मीटींग हॉल के तरफ चल देते हैं ! 

    मीटींग हॉल में एक स्टेज लगी है…साऊंड का भी ईंतजाम किया गया है ! स्टेज के उपर कई सारी कुर्सीयां लगाई गई है ! स्टेज के सामने नीचे सभी स्टूडैन्टस के बैठने के लिए कुर्सीयां लगाई गई है जो दो साईडों में बांटा गया हैं ! एक तरफ लड़कों के लिए तो दुसरी तरफ लड़कियों के लिए…बीच मे रास्ता छोरा गया है ! लोगों के आने जाने के लिए……पढिए कहानी के  अगले भाग में ……रोमांचक किस्से….

     

  • मुस्कान और शरारतों भरा दिन

    मुस्कान और शरारतों भरा दिन

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    💫 पहली सुबह के बाद मुस्कान और शरारतों भरा दिन


    सुबह की चाय में आज
    थोड़ी सी नई मिठास थी,
    तुम्हारी आँखों की चमक में
    फिर वही पहली सी बात थी।


    नज़रें मिलतीं… झुक जातीं,
    होंठों पर आधी सी हँसी रहती,
    बातें छोटी-छोटी होतीं
    पर दिल की धड़कन तेज़ रहती।


    कभी तुम मुझे चिढ़ाती,
    कभी मैं तुम्हें सताता था,
    रूठने की सारी यादों को
    हम हँसकर दूर भगाता था।


    तुम्हारा यूँ पास से गुजरना,
    और हल्का सा छू जाना,
    मेरे हर पल को जैसे
    एक मीठा सा गीत बना जाना।


    दोपहर की धूप में भी
    तुम्हारी छाँव साथ रही,
    हर छोटी शरारत में
    मोहब्बत की बात रही।


    दिन यूँ ही बीतता गया—
    हँसी, नज़रों और बातों में,
    जैसे फिर से जी उठे हम
    पहली-पहली मुलाक़ातों में।


    🌙 फिर वही शाम दिलों की बढ़ती नज़दीकियाँ


    शाम ढली तो हवा में
    फिर वही नरमी उतर आई,
    तुम्हारे पास बैठते ही
    दिल में खामोशी मुस्कुराई।


    सूरज की आख़िरी किरणें
    तुम्हारे चेहरे को छू रही थीं,
    मेरी नज़रें चुपचाप
    तुम्हारी हर अदा को पढ़ रही थीं।


    बातें कम… एहसास ज़्यादा,
    धड़कनों का शोर सुनाई दे,
    तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में
    जैसे पूरी दुनिया समाई दे।


    धीरे से तुम और करीब आई,
    मैंने भी दूरी भुला दी,
    उस पल की गर्माहट ने
    हर थकान को सुला दी।


    न कोई जल्दी… न कोई शोर,
    बस दिलों का सुकून भरा मेल,
    शाम ने फिर से लिख डाला
    हम दोनों का नया सा खेल।


    रात की पहली आहट तक
    हम यूँ ही साथ बैठे रहे,
    बढ़ती नज़दीकियों में
    अपने सारे डर बहते रहे।