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पहली मुलाकात

पढ़ने का समय : 6 मिनट

कुकी ने हिम्मत जुटाई और खरगोशों की ओर बढ़ी। “नमस्कार, मैं कुकी हूँ, क्या मैं आपके साथ खेल सकती हूँ?” उसने शर्माते हुए पूछा। खरगोशों ने उसे घूरा और फिर हंसते हुए कहा, “तुम इतनी धीमी हो, हम तुम्हारे साथ कैसे खेल सकते हैं?”

कुकी का दिल टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। “मैं धीमी हो सकती हूँ, लेकिन मैं आपके साथ खेल का एक नया तरीका ढूंढ सकती हूँ,” उसने कहा। “क्या आप मुझे मौका देंगे?”

बंटी और चंचल एक-दूसरे की ओर देखे और लम्बी श्वास लेते हुए बंटी ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हें एक मौका देंगे। लेकिन तुम्हें हमें ज़रूर दिखाना होगा कि तुम हमारी तरह खेल सकती हो।” चंचल ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, बस हमें दिखाओ कि तुम खेल में कैसे शामिल हो सकती हो।”

कुकी ने खुशी से सहमति जताई। “धन्यवाद, दोस्तों! मैं पूरी कोशिश करूँगी!” अब कुकी के मन में उत्साह भर गया था। उसने सोच लिया कि उसे अपनी ताकत दिखाने का सही मौका मिल गया है। उसने तुरंत एक योजना बनाई।

कुकी ने सोचा कि सबसे पहले उन्हें एक ऐसा खेल खेलना चाहिए जिसमें धैर्य और रणनीति दोनों की आवश्यकता हो। “चलो, हम एक तनावपूर्ण दौड़ का आयोजन करते हैं!” उसने प्रस्ताव रखा। “हम दौड़ते हुए एक दूसरे को कुछ संकेत देंगे और उसके अनुसार खेलेंगे।”

सभी जानवरों को यह विचार पसंद आया क्योंकि इस खेल में उन्हें अंततः अपनी योग्यताओं का इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा था। कुकी ने गेम के नियम स्थापित किए:

1. सभी प्रतिस्पर्धियों को एक निश्चित बिंदु से दौड़ना होगा, जो पूरे जंगल में होगा।
2. जहाँ भी रास्ते में रुकावट आएगी, उन्हें बिना भागे सही रास्ता ढूंढना होगा।
3. अंत में, सभी ko मिलकर सुराग भेड़ने होंगे और अपने-अपने रास्ते पर पहुँचने का प्रयास करना होगा।

“यहाँ एक महत्वपूर्ण बात है,” कुकी ने कहा। “हमें धैर्य से काम लेना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। जो भी पहले पहुंचा, उसे विजेता का नाम मिलेगा, लेकिन सच्चा विजेता वो होगा जो दूसरों की मदद करेगा।”

खरगोशों ने विचार किया और फिर उनमें से बंटी ने कहा, “अच्छा, यह तो दिलचस्प लग रहा है। चलो देखते हैं कि क्या तुम यह कर सकती हो।” चंचल ने भी उत्साहित होते हुए हंसते हुए कहा, “हमें तुम्हारी मदद से यह देखना होगा कि तुम कितनी अच्छी हो!”

खेल का आरंभ हुआ और सभी जानवर अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गए। कुकी ने सभी को बताना शुरू किया कि उन्हें शुरुआत में क्या करना है। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, बंटी और चंचल तेज़ी से दौड़ने लगे। कुकी अपनी धीमी गति के साथ उनके पीछे चलने लगी।

दौड़ में पहले ही मोड़ पर ज़मीन में गड्ढे थे। बंटी और चंचल ने सर्किट को चिह्नित किया और पहले ही आगे बढ़ गए। लेकिन कुकी ने देखा कि गड्ढों के पास एक ऐसा रास्ता था जो दोनों जानवरों ने नहीं देखा। वह गड्ढों को चकमा देकर उस रास्ते पर चलने लगी।

जैसे ही वह गड्ढों को पार कर रही थी, उसके मन में एक विचार आया: “यह मेरी धीमी गति का फायदा है!” इसने उसे यह समझने में मदद की कि कभी-कभी धीमे चलने का मतलब यह नहीं होता कि कोई पीछे रह गया है।

आखिरकार, उसने मोड़ पर पहुँचकर देखा कि बंटी और चंचल एक साथ में खड़े थे और अपने आगे के रास्ते पर विचार कर रहे थे। कुकी ने खुशी-खुशी वहाँ पर पहुँचकर कहा, “मैंने एक और रास्ता देखा जो हमें ज्यादा तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है। हमें वहाँ से चलना चाहिए।”

बंटी और चंचल ने कुकी की बात सुनी और उसका ध्यानपूर्वक गौर किया। “तुम सच में सोच रही हो, कुकी!” बंटी ने कहा। “हम बस अपनी गति में चलने के चक्कर में इसे देख नहीं पाए।” चंचल ने सहमति जताते हुए कहा, “हाँ, चलो देखते हैं कि यह रास्ता हमें कहाँ ले जाता है।”

कुकी ने संकेत किया और वे सभी मिलकर उस नए रास्ते पर चलने लगे। यह रास्ता थोड़ा कठिन था, लेकिन कुकी की धारणा और उसके धैर्य ने उन्हें जल्दी ही सही दिशा में पहुँचाने में मदद की। जब वे आगे बढ़ रहे थे, तो कुकी ने ध्यान दिया कि रास्ते में कई ऐसे बाधाएँ थीं, जिनका सामना करना पड़ा।

“हमें एक बड़ा पत्थर पार करना है,” चंचल ने कहा और तुरंत खुद को दौड़कर पत्थर पर चढ़ा दिया। बंटी ने भी उसका अनुसरण किया। लेकिन कुकी अपने धीमे कदमों से पहले झुक गई और सोचने लगी, “क्या मैं इससे आगे निकलने के लिए कोई और उपाय कर सकती हूँ?”

उसने पत्थर के पीछे झुककर देखा और पाया कि वहाँ एक जगह थी जहाँ से वे पत्थर के चारों ओर जा सकते थे। “दोस्तों, यहाँ एक और रास्ता है!” उसने शोर नहीं मचाते हुए कहा। “यहाँ से हम पत्थर के चारों ओर जा सकते हैं।”

बंटी और चंचल ने एक पल के लिए उसे घूरा, लेकिन फिर वे उसके साथ उस हिस्से में गए। धीरे-धीरे और सावधानी पूर्वक वे सभी उस नई रूट से आगे बढ़ने लगे। अब उनमें से कोई भी और तेजी से दौड़ नहीं रहा था, बल्कि सभी कुकी की सुझाई दिशा का अनुसरण कर रहे थे।

जैसे-जैसे दौड़ आगे बढ़ी, कुकी के द्वारा बताई गई हर छोटी सलाह ने उन्हें और अधिक समर्थ बना दिया। उन्होंने समझा कि कुकी की धीमी गति में भी एक विशेषता थी – साहस, धैर्य और सहानुभूति। कुकी ने न केवल अपनी गति से दूसरों को मदद की, बल्कि उसने उन्हें यह भी बताया कि कैसे सहकारिता सबसे महत्वपूर्ण है।

अब जंगली कौन सा जानवर सबसे तेज दौड़ रहा था, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्होंने अपनी ताकतों का सही उपयोग करना शुरू कर दिया। जब भी कोई रुकावट आती, वे मिलकर उसे पार कर जाते। कुकी की बुद्धिमता और सृजनात्मकता ने उन्हें उन बाधाओं को पार करने में मदद की जो पहले कठिन लग रही थीं।

“धन्यवाद, कुकी, तुमने हमें नई रणनीतियों के बारे में बताया!” चंचल ने चहकते हुए कहा। “तुमने साबित कर दिया कि केवल तेज़ दौड़ने से ही नहीं, दोस्तों को मदद कर के भी हम जीत सकते हैं।”

आख़िरकार, जब वे दौड़ समाप्त करने के करीब पहुँच गए, एक तेज़ झरने का भाग उनके सामने आया। बंटी और चंचल थोड़े चिंतित दिखे। “हम इसे कैसे पार करेंगे? हम तैर नहीं सकते!” बंटी ने कहा।

कुकी ने सोचा और फिर कहा, “हम इसे एक-दूसरे की मदद से पार कर सकते हैं। तुम दोनों उस ओर कूदो, मैं तुम्हें एक मजबूत तने से पकड़ने में मदद करूँगी।”

बंटी और चंचल ने एकजुट होकर काम किया और कुकी की योजना के अनुसार पहुँच गए। कुकी ने धीरे-धीरे तने पर चढ़ाई की और अंत में दोनों को सुरक्षित पार कर दिया। अब उन्हें एक पल के लिए कुकी की योजना के बिना जीत की कोई उम्मीद नहीं

 

 

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Lakshmi Kumari

NSW  अनुभवी लेखक -🥇

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