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रात में तुम ख्वाब नहीं, *नशा बनकर उतरती हो,*

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रात में तुम ख्वाब नहीं,

*नशा बनकर उतरती हो,*

 

छुए बिना ही तुम मेरी 

*रूह तक बिखरती हो…!!🌹*

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Alka Singh

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

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