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एक अनकही शुरुआत

📚 सीरीज: एक अनकही शुरुआत
पढ़ने का समय : 6 मिनट

 

 

राधे राधे दोस्तों,

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     रणवीर की आखिरी बात अनाया के दिमाग में गूंजने लगी। “मेरा अतीत तुम्हारे वर्तमान से जुड़ने वाला है।”

 

     वह ठिठक गई, लेकिन खुद को जबरन संभालते हुए बिना कोई जवाब दिए वहाँ से बाहर निकल गई।

 

     बाहर आते ही जिगर ने उसकी ओर देखा। “सब ठीक है?”

 

    अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया, “हाँ, चलो यहाँ से।” लेकिन उसकी आवाज़ में अनजानी घबराहट थी, जिसे जिगर भांप चुका था।

 

रात का समय

 

     अनाया होटल रूम की विंडो के पास बैठी हुई थी। बैठे बैठे वो पुरानी यादों में खो गई।

 

चार साल पहले…

 

     वह पार्टी जहाँ उसकी मुलाकात रणवीर से पहली बार हुई थी… वही पहली मुलाकात जिसने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी।

 

     चार साल पहले की उस रात को याद करते ही अनाया की आँखें बंद हो गईं, और वह अपने अतीत में खो गई…

 

     चार साल पहले… मुंबई का एक ग्रैंड इवेंट

 

     रॉयल क्राउन होटल के बॉलरूम में रौशनी का एक अलग ही जलवा था। ऊँची सोसाइटी के लोग, बिजनेस टायकून्स, और सेलिब्रिटीज वहाँ मौजूद थे।

 

     अनाया उस समय महज 20 साल की थी। वह वहाँ अपनी कंपनी के सीईओ के साथ आई थी। वह इंटीरियर डिज़ाइनिंग कंपनी में एक इंटर्न डिज़ाइनर थी और यह पार्टी उनके क्लाइंट द्वारा दी गई थी।

 

     अनाया ने एक खूबसूरत ब्लैक गाउन पहना हुआ था, हल्का मेकअप और उसके खुले बाल उसकी मासूमियत में एक अलग ही नूर जोड़ रहे थे।

 

     तभी उसकी नज़र भीड़ के बीच एक शख्स पर पड़ी, रणवीर सिंघानिया।

 

     ऊँचा कद, शार्प फीचर्स, और काले सूट में बिल्कुल परफेक्ट लुक। उसकी गहरी आँखों में एक रहस्यमयी चमक थी, जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती थी।

 

     वह बार काउंटर के पास खड़ा था, एक ग्लास में ड्रिंक लिए हुए, लेकिन उसकी नज़रें सीधी अनाया पर आकर टिकी। अनाया उस भीड़ से थोड़ी अलग खड़ी हुई थी। शायद उसे ये माहौल अच्छा नहीं लग रहा था। 

 

     अनाया ने थोड़ा अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उसके पास उसकी कंपनी के सीईओ आए और बोले, “अनाया, मैं तुम्हें किसी खास इंसान से मिलवाना चाहता हूँ।”

 

     वह मुड़ी और देखा कि सामने वही खड़ा था, रणवीर सिंघानिया।

 

     “मिस्टर सिंघानिया, यह हमारी कंपनी की सबसे टैलेंटेड डिज़ाइनर अनाया मेहरा हैं, वैसे ये अभी इंटर्न है लेकिन इनका काम काबिले तारीफ है।” सीईओ ने परिचय करवाया।

 

     रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ उसका हाथ थामा, “नाइस टू मिट यू मिस अनाया।”

 

     उसकी आवाज़ में एक अजीब सा आकर्षण था, जिससे अनाया थोड़ी असहज हो गई।

 

     “आप भी इंटीरियर डिज़ाइन में इंटरेस्ट रखते हैं, मिस्टर सिंघानिया?” अनाया ने औपचारिकता से पूछा।

 

     रणवीर ने हल्का सा सिर झुकाया, “मुझे दिलचस्पी इंसानों में ज़्यादा होती है, डिज़ाइन में कम।”

 

     अनाया ने हल्की हंसी के साथ कहा, “फिर तो गलत जगह आ गए हैं आप।”

 

     रणवीर ने बस मुस्कराकर अपना ग्लास उठाया, लेकिन उसकी नज़रों में वही रहस्य बना रहा।

 

रात और गहरी होती गई…

 

     इवेंट के दौरान, अनाया ने महसूस किया कि रणवीर की नज़रों का पीछा हर समय उसके साथ था। सबकी उन दोनों की एज में एक अच्छा खासा डिफरेंस था फिर भी वो दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो रहे थे। 

 

 

वर्तमान में…

 

     अनाया की आँखें खुलीं। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। सुबह का सूरज निकल चुका था। 

 

     “नहीं… मैं दोबारा उन यादों में नहीं जाना चाहती,” उसने खुद से कहा।

 

      लेकिन अब, जब रणवीर वापस आ चुका था… क्या वह अपने अतीत को पीछे छोड़ पाएगी?

 

     करीब एक घंटे बाद अनाया रेडी होकर अपने रूम से बाहर निकली उसकी टीम मेंबर भी रेडी थे। उन सब ने एक साथ ब्रेकफास्ट किया और फिर होटल से बाहर आ गए। आज उन्हें रणवीर के मेंशन जाना था। बाहर एक गाड़ी खड़ी हुई थी। जिसमें बाकी टीम मेंबर बैठ गए। लेकिन उसमें अनाया के बैठने की जगह नहीं बची थी। 

 

     अनाया बोली, ” आप लोग चलिए, मैं कैब करके पहुँच जाऊँगी। ” फिर वो गाड़ी वहाँ से चली गई। अनाया होटल से बाहर की तरफ आ रही थी। तभी उसके सामने एक गाड़ी आकर रूकी। 

 

    गाड़ी की बैक सीट का शीशा नीचे हुआ, अंदर बैठे शख्स को देखकर देखकर अनाया की साँसें एक पल के लिए थम गईं।

 

     “अंदर बैठो,” रणवीर ने अपने ठंडे और सख्त लहजे में कहा।

 

     अनाया ने सीधा उसकी आँखों में देखा। “Thanks, लेकिन मैं खुद चली जाऊँगी,” उसने बिना कोई भाव दिखाए जवाब दिया।

 

     रणवीर के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन उसकी आँखें अब भी गंभीर थीं। “ज़िद मत करो, अनाया। यहाँ से मेंशन तक कैब आसानी से नहीं मिलेगी।”

 

     अनाया जानती थी कि रणवीर सही कह रहा था, लेकिन उसके साथ अकेले कार में जाना उसे ठीक नहीं लगा। वह पलटकर जाने ही वाली थी कि रणवीर ने फिर कहा, “डरो मत, मैं तुम्हें खा नहीं जाऊँगा। या फिर तुम मुझसे वाकई में डर रही हो? हूँ! “

 

     अनाया ने गहरी सांस ली। वह इतना तो जानती है कि ये इंसान कितना जिद्दी है। अनाया ने बिना कुछ कहे बैक सीट का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गई।

 

     रणवीर बोला, ” ड्राइवर स्टार्ट द कार। “

 

     गहरी खामोशी ने दोनों के बीच की दूरी को और बढ़ा दिया। रणवीर एक साइड बैठा अपने आई पैड में कुछ कर रहा था और अनाया अपने फोन में। 

 

     “काफी साल बाद फिर से तुम्हारे साथ इस तरह सफर कर रहा हूँ,” रणवीर ने आखिरकार खामोशी तोड़ी।

 

     अनाया ने फोन में देखते हुए कहा, “हर सफर को याद रखना जरूरी नहीं होता, मिस्टर सिंघानिया।”

 

     रणवीर हल्का सा हंसा। “लेकिन कुछ सफर भुलाए भी नहीं जा सकते, मिस मेहरा। खासकर तब, जब वो हमारे अतीत का हिस्सा हों।” रणवीर ने अनाया को उसी की टोन में जवाब दिया। अचानक से ड्राइवर ने ब्रेक लगाई। अनाया का सिर आगे वाली सीट से लगता लेकिन उससे पहले ही रणवीर ने वहाँ हाथ रख लिया। 

 

     “देख कर नहीं चला सकते। ” रणवीर धीरे से लेकिन थोड़ा सख्त लहजे में बोला। “

 

     ड्राइवर बोला, ” सर वो अचनाक से आगे वाली गाड़ी ने ब्रेक लगा दी थी इसलिए मुझे भी ब्रेक लगानी पड़ी। “

 

     अनाया ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी गहराई थी, जो चार साल पहले भी उसे परेशान कर देती थी। वो बोली, ” अभी भी आपकी गुस्सा करने की आदत गई नहीं। ” 

 

     रणवीर गहरी सांस लेते हुए बोला, ” कुछ आदतें मरने के बाद ही छूटती है मिस मेहरा। ” अनाया ने रणवीर की तरफ देखा जिसका ध्यान अभी भी उसके आई पैड में था। उसका रूड बिहेवियर देखकर अनाया की आँखों में नमी आ गई। 

 

     “शायद कुछ लोगों के लिए अतीत ही सबकुछ होता है। लेकिन मेरे लिए… वो सिर्फ एक अधूरी कहानी है, जिसे मैं पूरा नहीं करना चाहती,” अनाया ने ठंडे लहजे में कुछ सोचते हुए कहा।

 

     रणवीर ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “लेकिन कभी-कभी, अधूरी कहानियाँ खुद को पूरा करने के लिए लौटती हैं, मिस मेहरा। और इस बार, मैं इसे अधूरा नहीं छोड़ूँगा। ये मेरा वादा है।”

 

     अनाया का दिल ज़ोर से धड़का। क्या रणवीर सच में अतीत को फिर से दोहराना चाहता था? या फिर, यह सिर्फ एक नई जंग की शुरुआत थी?

 

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Neha Goyal

मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

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