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Series: एक अनकही शुरुआत

  • एक अनकही शुरुआत

    एक अनकही शुरुआत

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

     

     

     

     

     

    राधे राधे दोस्तों,

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         ड्राइवर ने गाड़ी एक विशाल मेंशन के सामने रोकी। अनाया ने खिड़की से बाहर देखा, सामने एक बहुत बड़ा महल जैसा मेंशन बना हुआ था। देखने में बहुत ही सुंदर। 

     

         रणवीर बोला, “अब गाड़ी में बैठ कर ही देखते रहना है या बाहर चलकर करीब से देखना चाहोगी। ” अनाया ने रणवीर को घूरते हुए गाड़ी का गेट खोला और गाड़ी से बाहर निकल गई। जब वो गेट बंद कर रही थी। उसकी एक फिंगर दब गई। 

     

        जिसकी वजह से उसके मुँह से सिसकी निकल गई और उसने अपनी आँखें मींच ली। रणवीर दौड़ के उसके पास आया और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बोला, ” कुछ काम ठीक से नहीं कर सकती लगा ली ना चोट। ” 

     

         रणवीर ने उसकी फिंगर अपने मुँह में डाल ली। 

     

         अनाया की नजरें सिर्फ रणवीर पर थी, जिसके चेहरे पर उसके लिए सिर्फ चिंता थी। लेकिन तभी उसे पुरानी बातें याद आ गई। उसने जल्दी से अपना हाथ पीछे खींच लिया। 

     

         अनाया, ” आपको मेरी इतनी चिंता करने की जरूरत नहीं है, मिस्टर सिंघानिया। ” अनाया मेंशन के अंदर चली गई। रणवीर ने अपना हाथ देखा फिर वो भी उसके पीछे पीछे चला गया। 

     

         अनाया की टीम के बाकी मेंबर पहले ही आ चुके थे और वहाँ का केयर टेकर उन्हें मेंशन का टूर करा रहा था। सच में वो मेंशन बहुत आलीशान था। बस पुराने टाइम का बना हुआ था इसलिए उसे रिडिजाइन की जरूरत थी। 

     

         रणवीर ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “आओ, मैं तुम्हें लोकेशन दिखा दूँ।”

         “ये मेंशन मेरे दादाजी ने बनवाया था,” रणवीर ने चलते हुए कहा। “हर चीज़ में उनकी पसंद झलकती है।”

     

         अनाया ने सरसरी निगाह डाली, फिर धीरे से कहा, “हम यहाँ इमोशनल कहानियाँ सुनने नहीं आए हैं, मिस्टर सिंघानिया। बस काम की जगह दिखाइए।”

     

         रणवीर के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन उसकी आँखों में वही गहराई थी।

     

         “इधर से,” रणवीर ने एक रास्ते की तरफ इशारा किया।

     

         दोनों एक विशाल हॉल में पहुँचे। छत पर झूमर झिलमिला रहा था, और हर कोने में लक्ज़री का अहसास था। अनाया अपने काम को लेकर काफी पेशेवर थी, इसलिए उसने तुरंत जगह का निरीक्षण शुरू कर दिया।

     

         “यहाँ बदलाव की जरूरत होगी,” उसने दीवारों पर हाथ फेरते हुए कहा। “रोशनी कम पड़ रही है। अगर हम कुछ बड़े फ्रेंच विंडोज़ लगा दें, तो यह जगह और भी एलिगेंट लगेगी।”

     

         रणवीर ने उसकी बात को ध्यान से सुना, फिर बोला, “मैं जानता था कि तुम परफेक्शनिस्ट हो, लेकिन यह नहीं पता था कि तुम इतनी जल्दी किसी भी जगह को बदलने की योजना बना सकती हो।”

     

         अनाया उसकी आँखों में देखे बिना बोली, “मुझे अपने काम से मतलब है, मिस्टर सिंघानिया। आपकी जगह को बेहतरीन बनाना मेरी जिम्मेदारी है।”

     

         रणवीर ने उसके करीब आते हुए कहा, “और मेरे सवालों का जवाब देना?”

     

         अनाया ने ठंडी नजरों से उसकी ओर देखा। “सवाल वही पूछे जाते हैं, जिनका कोई मतलब हो। और आपके सवालों का जवाब देना मेरे प्रोफेशन का हिस्सा नहीं है।”

     

         रणवीर हल्का सा हंसा, लेकिन उसमें एक चुनौती की झलक थी। “तो क्या यह सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता है, अनाया?”

     

         अनाया ने उसकी आँखों में सीधे देखा। “बिल्कुल। और मैं चाहती हूँ कि आप भी इसे इसी तरह देखें।”

     

         रणवीर कुछ पल तक उसे देखता रहा, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला, “देखेंगे, मिस मेहरा। यह तो वक्त ही बताएगा। क्या प्रोफेशनल है और क्या पर्सनल। वैस आप जितनी जल्दी हो यहाँ का काम शुरू कर दें। क्योंकि बहुत जल्द मैं शादी करके अपनी वाइफ अपनी लाइफ के साथ यहाँ रहने वाला हूँ। “

     

         ” शादी! ” अनाया के मन में एक टीस सी उठी। 

     

         रणवीर अपनी एक आइब्रो चढ़ाते हुए बोला, ” क्यों नहीं करनी चाहिए। अरे भई मैं 32 साल का हो चुका हूँ हाँ माना कि लगता नहीं हूँ लेकिन अब हूँ तो ना। और मैं कुँवारा नहीं मरना चाहता इसलिए सोचा शादी ही कर लूँ। “

     

         अनाया की आँखें लाल हो गई। उसने अपने गॉगल्स पहनते हुए कहा, ” वेल, कांग्रेट्स मिस्टर सिंघानिया। ” तभी वहाँ पर बाकी लोग भी आ गए। 

     

    जिगर अनाया को देखते हुए बोला, ” अनाया हमने पूरा मेंशन देख लिया है और सबकुछ समझ कर सब नोट भी कर लिया है। “

     

         अनाया ने कहा, ” गुड। “

     

         शिरशा बोली, ” अनाया आई थिंक हमें यहाँ का काम करने के लिए यहीं रहना चाहिए। होटल से आने जाने में बहुत टाइम वेस्ट हो जाया करेगा। “

     

         अनाया, ” गुड आईडिया।”

     

         अनाया ने फिर रणवीर की तरफ देखा और बिना किसी भाव के बोली, ” तो ठीक है मिस्टर सिंघानिया, फिल्हाल हम चलते हैं कल से हम यहीं रहेंगे अगर आपको कोई प्रोब्लम ना हो तो। “

     

        रणवीर जो एक पिलर के सहारे टेक लगाकर खड़ा था वो बोला, ” नो, नॉट एट आल, फिल्हाल के लिए इसे आप अपना ही मेंशन समझिए। और जैसा आपको पसंद हो वैसा इसे डिजाइन कीजिए। “

     

         ” मिस्टर सिंघानिया, एक और बात। ” अनाया जाते जाते रुक गई और बोली, ” आप आपकी वुड बी वाइफ से भी पूछ लेना अगर उनकी कोई चॉइस हो तो। नहीं तो बाद में इन्हीं छोटी छोटी बातों को लेकर बड़े बड़े आर्गुमेंट हो जाते हैं। “

     

         रणवीर सीधा खड़ा हुआ और अनाया की तरफ कदम बढ़ाते हुए उसके पास आकर खड़ा हो गया। उसने अनाया की आँखों पर से उसके गॉगल्स हटाए और उसकी आँखों में देखते हुए बोला, ” मिस मेहरा, मैंने आपसे कहा ना आपको जैसा पसंद हो आप इसे डेकोरेट कीजिए। अब से ये मेंशन आपका। “

     

         अनाया से रणवीर की नजरों की तपिश नहीं झेली जा रही थी इसलिए उसने अपनी नजरें झुका ली और वहाँ से जाने लगी। लेकिन अचानक ही उसकी सैंडिल की हील टूट गई जिसकी वजह से उसका पाँव लड़खड़ा गया और वो गिरने लगी। 

     

         लेकिन रणवीर की मजबूत बाहों ने उसे संभाल लिया। अनाया का दिल बुलेट ट्रेन की स्पीड से भी तेजी से दौड़ रहा था। उसकी साँसें अनियमित हो गईं जब उसने खुद को रणवीर की मजबूत बाहों में पाया। उनके बीच की दूरी अब ना के बराबर थी। 

     

         रणवीर की आँखें उसकी आँखों में कुछ ढूंढ रही थीं। शायद वो अनकही बातें, जो अनाया ने सालों से दिल में दबा रखी थीं।

     

    दिल का दरिया बह ही गया

    इश्क़ इबादत बन ही गया

    खुद को मुझे तू सौंप दे

    मेरी ज़रूरत तू बन गया

    बात दिल की नज़रों ने की

    सच कह रहा तेरी क़सम

    तेरे बिन अब ना लेंगे एक भी दम

    तुझे कितना चाहने लगे हम

     

         “हमेशा की तरह, मैं तुम्हें गिरने नहीं दूँगा, मिस मेहरा,” रणवीर ने हल्के से कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी।

     

    तेरे बिन अब ना लेंगे एक भी दम

    तुझे कितना चाहने लगे हम

    तेरे साथ हो जाएंगे ख़त्म

    तुझे कितना चाहने लगे हम

     

         अनाया ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन रणवीर की पकड़ और मजबूत हो गई। 

     

         ” प्लीज छोड़िए ना मुझे,  मिस्टर सिंघानिया। ” अनाया खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली। 

     

         रणवीर उसकी आँखों में भरे समुंदर को देखते हुए बोला, ” अनाया, मैंने तुम्हारा हाथ तुम्हें छोड़ने के लिए नहीं थामा था। वो तो बस….. ” 

     

    इस जगह आ गई चाहतें अब मेरी

    छीन लूँगा तुम्हें सारी दुनिया से ही

    तेरे इश्क़ पे हाँ हक़ मेरा ही तो है

    कह दिया है ये मैंने मेरे रब से भी

    जिस रास्ते तू ना मिले उसपे ना हो मेरे क़दम

    तेरे बिन अब ना लेंगे एक भी दम

    तुझे कितना चाहने लगे हम

    तेरे साथ हो जाएंगे ख़त्म

    तुझे कितना चाहने लगे हम

    तुझे कितना चाहने लगे हम

     

         रणवीर की बात सुनते ही उसकी आँखों के सामने चार साल पहले का मंजर आ गया। उसने जल्दी से खुद को सँभाला और एक कदम पीछे हटते हुए बोली, “थैंक यू। लेकिन मैं खुद को सँभाल सकती हूँ।”

     

         रणवीर हल्का सा मुस्कुराया,  “शायद… लेकिन मेरी आदत नहीं गई तुम्हें गिरने से बचाने की।”

     

         अनाया ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे अब आदत डालनी होगी कि मैं किसी के सहारे के बिना भी खड़ी रह सकती हूँ। और वैसे भी गिराने वाले से संभालने की क्या उम्मीद करनी।”

     

         रणवीर ने उसकी बात सुनी, लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं दिया।

     

         तभी जिगर और बाकी टीम वहाँ आ गई।

     

         “अनाया, सब ठीक है?” जिगर ने चिंता से पूछा। जिगर ने अनाया का हाथ पकड़ा हुआ था। जैसे ही रणवीर की नजर अनाया के हाथ पर पड़ी उसकी मुट्ठियाँ कस गई। 

     

         “हाँ, बस सैंडल की हील टूट गई,” अनाया ने सामान्य स्वर में कहा।

     

         रणवीर ने बिना कुछ कहे जेब से अपना फोन निकाला और किसी को कॉल किया। “एक ब्रांड न्यू फुटवेयर लेकर आओ, साइज 6।”

     

         अनाया ने तुरंत उसे रोका, “मिस्टर सिंघानिया, इसकी कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद खरीद लूँगी।”

     

         रणवीर ने सिर हिलाते हुए कहा, “अब से यहाँ की हर चीज़ मेरी ज़िम्मेदारी है, मिस मेहरा। तुम्हें जो चाहिए, बस मुझसे कहना।”

     

         अनाया ने गहरी सांस ली। “मुझे किसी से कुछ नहीं चाहिए, रणवीर।”

     

         अनाया ने अपनी सैंडिल अपने हाथ में ली और वहाँ से बाहर आ गई। उसके दिल के समुद्र में जो सुनामी आ रही थी सिर्फ वो ही समझ सकती थी। 

     

    हैलो दोस्तों, 

     

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    Neha Goyal

    मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

  • एक अनकही शुरुआत

    एक अनकही शुरुआत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

     

     

    राधे राधे दोस्तों,

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         रणवीर की आखिरी बात अनाया के दिमाग में गूंजने लगी। “मेरा अतीत तुम्हारे वर्तमान से जुड़ने वाला है।”

     

         वह ठिठक गई, लेकिन खुद को जबरन संभालते हुए बिना कोई जवाब दिए वहाँ से बाहर निकल गई।

     

         बाहर आते ही जिगर ने उसकी ओर देखा। “सब ठीक है?”

     

        अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया, “हाँ, चलो यहाँ से।” लेकिन उसकी आवाज़ में अनजानी घबराहट थी, जिसे जिगर भांप चुका था।

     

    रात का समय

     

         अनाया होटल रूम की विंडो के पास बैठी हुई थी। बैठे बैठे वो पुरानी यादों में खो गई।

     

    चार साल पहले…

     

         वह पार्टी जहाँ उसकी मुलाकात रणवीर से पहली बार हुई थी… वही पहली मुलाकात जिसने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी।

     

         चार साल पहले की उस रात को याद करते ही अनाया की आँखें बंद हो गईं, और वह अपने अतीत में खो गई…

     

         चार साल पहले… मुंबई का एक ग्रैंड इवेंट

     

         रॉयल क्राउन होटल के बॉलरूम में रौशनी का एक अलग ही जलवा था। ऊँची सोसाइटी के लोग, बिजनेस टायकून्स, और सेलिब्रिटीज वहाँ मौजूद थे।

     

         अनाया उस समय महज 20 साल की थी। वह वहाँ अपनी कंपनी के सीईओ के साथ आई थी। वह इंटीरियर डिज़ाइनिंग कंपनी में एक इंटर्न डिज़ाइनर थी और यह पार्टी उनके क्लाइंट द्वारा दी गई थी।

     

         अनाया ने एक खूबसूरत ब्लैक गाउन पहना हुआ था, हल्का मेकअप और उसके खुले बाल उसकी मासूमियत में एक अलग ही नूर जोड़ रहे थे।

     

         तभी उसकी नज़र भीड़ के बीच एक शख्स पर पड़ी, रणवीर सिंघानिया।

     

         ऊँचा कद, शार्प फीचर्स, और काले सूट में बिल्कुल परफेक्ट लुक। उसकी गहरी आँखों में एक रहस्यमयी चमक थी, जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती थी।

     

         वह बार काउंटर के पास खड़ा था, एक ग्लास में ड्रिंक लिए हुए, लेकिन उसकी नज़रें सीधी अनाया पर आकर टिकी। अनाया उस भीड़ से थोड़ी अलग खड़ी हुई थी। शायद उसे ये माहौल अच्छा नहीं लग रहा था। 

     

         अनाया ने थोड़ा अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही उसके पास उसकी कंपनी के सीईओ आए और बोले, “अनाया, मैं तुम्हें किसी खास इंसान से मिलवाना चाहता हूँ।”

     

         वह मुड़ी और देखा कि सामने वही खड़ा था, रणवीर सिंघानिया।

     

         “मिस्टर सिंघानिया, यह हमारी कंपनी की सबसे टैलेंटेड डिज़ाइनर अनाया मेहरा हैं, वैसे ये अभी इंटर्न है लेकिन इनका काम काबिले तारीफ है।” सीईओ ने परिचय करवाया।

     

         रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ उसका हाथ थामा, “नाइस टू मिट यू मिस अनाया।”

     

         उसकी आवाज़ में एक अजीब सा आकर्षण था, जिससे अनाया थोड़ी असहज हो गई।

     

         “आप भी इंटीरियर डिज़ाइन में इंटरेस्ट रखते हैं, मिस्टर सिंघानिया?” अनाया ने औपचारिकता से पूछा।

     

         रणवीर ने हल्का सा सिर झुकाया, “मुझे दिलचस्पी इंसानों में ज़्यादा होती है, डिज़ाइन में कम।”

     

         अनाया ने हल्की हंसी के साथ कहा, “फिर तो गलत जगह आ गए हैं आप।”

     

         रणवीर ने बस मुस्कराकर अपना ग्लास उठाया, लेकिन उसकी नज़रों में वही रहस्य बना रहा।

     

    रात और गहरी होती गई…

     

         इवेंट के दौरान, अनाया ने महसूस किया कि रणवीर की नज़रों का पीछा हर समय उसके साथ था। सबकी उन दोनों की एज में एक अच्छा खासा डिफरेंस था फिर भी वो दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित हो रहे थे। 

     

     

    वर्तमान में…

     

         अनाया की आँखें खुलीं। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। सुबह का सूरज निकल चुका था। 

     

         “नहीं… मैं दोबारा उन यादों में नहीं जाना चाहती,” उसने खुद से कहा।

     

          लेकिन अब, जब रणवीर वापस आ चुका था… क्या वह अपने अतीत को पीछे छोड़ पाएगी?

     

         करीब एक घंटे बाद अनाया रेडी होकर अपने रूम से बाहर निकली उसकी टीम मेंबर भी रेडी थे। उन सब ने एक साथ ब्रेकफास्ट किया और फिर होटल से बाहर आ गए। आज उन्हें रणवीर के मेंशन जाना था। बाहर एक गाड़ी खड़ी हुई थी। जिसमें बाकी टीम मेंबर बैठ गए। लेकिन उसमें अनाया के बैठने की जगह नहीं बची थी। 

     

         अनाया बोली, ” आप लोग चलिए, मैं कैब करके पहुँच जाऊँगी। ” फिर वो गाड़ी वहाँ से चली गई। अनाया होटल से बाहर की तरफ आ रही थी। तभी उसके सामने एक गाड़ी आकर रूकी। 

     

        गाड़ी की बैक सीट का शीशा नीचे हुआ, अंदर बैठे शख्स को देखकर देखकर अनाया की साँसें एक पल के लिए थम गईं।

     

         “अंदर बैठो,” रणवीर ने अपने ठंडे और सख्त लहजे में कहा।

     

         अनाया ने सीधा उसकी आँखों में देखा। “Thanks, लेकिन मैं खुद चली जाऊँगी,” उसने बिना कोई भाव दिखाए जवाब दिया।

     

         रणवीर के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन उसकी आँखें अब भी गंभीर थीं। “ज़िद मत करो, अनाया। यहाँ से मेंशन तक कैब आसानी से नहीं मिलेगी।”

     

         अनाया जानती थी कि रणवीर सही कह रहा था, लेकिन उसके साथ अकेले कार में जाना उसे ठीक नहीं लगा। वह पलटकर जाने ही वाली थी कि रणवीर ने फिर कहा, “डरो मत, मैं तुम्हें खा नहीं जाऊँगा। या फिर तुम मुझसे वाकई में डर रही हो? हूँ! “

     

         अनाया ने गहरी सांस ली। वह इतना तो जानती है कि ये इंसान कितना जिद्दी है। अनाया ने बिना कुछ कहे बैक सीट का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गई।

     

         रणवीर बोला, ” ड्राइवर स्टार्ट द कार। “

     

         गहरी खामोशी ने दोनों के बीच की दूरी को और बढ़ा दिया। रणवीर एक साइड बैठा अपने आई पैड में कुछ कर रहा था और अनाया अपने फोन में। 

     

         “काफी साल बाद फिर से तुम्हारे साथ इस तरह सफर कर रहा हूँ,” रणवीर ने आखिरकार खामोशी तोड़ी।

     

         अनाया ने फोन में देखते हुए कहा, “हर सफर को याद रखना जरूरी नहीं होता, मिस्टर सिंघानिया।”

     

         रणवीर हल्का सा हंसा। “लेकिन कुछ सफर भुलाए भी नहीं जा सकते, मिस मेहरा। खासकर तब, जब वो हमारे अतीत का हिस्सा हों।” रणवीर ने अनाया को उसी की टोन में जवाब दिया। अचानक से ड्राइवर ने ब्रेक लगाई। अनाया का सिर आगे वाली सीट से लगता लेकिन उससे पहले ही रणवीर ने वहाँ हाथ रख लिया। 

     

         “देख कर नहीं चला सकते। ” रणवीर धीरे से लेकिन थोड़ा सख्त लहजे में बोला। “

     

         ड्राइवर बोला, ” सर वो अचनाक से आगे वाली गाड़ी ने ब्रेक लगा दी थी इसलिए मुझे भी ब्रेक लगानी पड़ी। “

     

         अनाया ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी गहराई थी, जो चार साल पहले भी उसे परेशान कर देती थी। वो बोली, ” अभी भी आपकी गुस्सा करने की आदत गई नहीं। ” 

     

         रणवीर गहरी सांस लेते हुए बोला, ” कुछ आदतें मरने के बाद ही छूटती है मिस मेहरा। ” अनाया ने रणवीर की तरफ देखा जिसका ध्यान अभी भी उसके आई पैड में था। उसका रूड बिहेवियर देखकर अनाया की आँखों में नमी आ गई। 

     

         “शायद कुछ लोगों के लिए अतीत ही सबकुछ होता है। लेकिन मेरे लिए… वो सिर्फ एक अधूरी कहानी है, जिसे मैं पूरा नहीं करना चाहती,” अनाया ने ठंडे लहजे में कुछ सोचते हुए कहा।

     

         रणवीर ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “लेकिन कभी-कभी, अधूरी कहानियाँ खुद को पूरा करने के लिए लौटती हैं, मिस मेहरा। और इस बार, मैं इसे अधूरा नहीं छोड़ूँगा। ये मेरा वादा है।”

     

         अनाया का दिल ज़ोर से धड़का। क्या रणवीर सच में अतीत को फिर से दोहराना चाहता था? या फिर, यह सिर्फ एक नई जंग की शुरुआत थी?

     

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    Neha Goyal

    मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।