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मन की बात

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

 

 

 

मन की बात

 

मन की बात है गहरी, शब्दों में कैसे आए,

दिल के कोने में छुपी, हर किसी को न बताए।

 

कभी ये खुशियों की धुन, तो कभी दर्द सुनाए,

कभी शोर मचाए मन में, तो कभी चुप रह जाए।

 

सपनों की उड़ान इसमें, उम्मीदों की रोशनी,

कभी बादलों से घिर जाए, कभी चमके चाँदनी।

 

मन कहे सच बोलूं, मगर दुनिया से डरता हूँ,

अपनों की खुशियों खातिर, हर ग़म मैं सहता हूँ।

 

कभी बह जाए भावनाओं में, कभी बन जाए पत्थर,

कभी झूमे सावन जैसे, कभी सूखा कोई सागर।

 

मन की बात अधूरी है, कहो तो बोझ हल्का हो,

न कहो तो रह जाए दिल में, और आँसू बन टपका हो।

 

इसलिए सुनो मन की बातें, जो दिल में उमड़ती हैं,

कभी शब्दों में बहती हैं, कभी आँखों में तैरती हैं।

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