ब्लाइंड डेट से मिला प्यार

पढ़ने का समय : 3 मिनट

एपिसोड 1 

राज होटल में आज मुंबई शहर का सबसे चर्चित ब्लाइंड डेट इवेंट था। शाम के ठीक पाँच बजे होटल का मुख्य हॉल हल्की नीली रोशनी और गहरे साए में डूबा हुआ था। वेटर्स ने अपने चेहरों पर काले मास्क पहन रखे थे और एंट्रेंस पर लंबी लाइन लगी थी। हर गेस्ट का कार्ड चेक किया जा रहा था, फिर उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें अलग-अलग कमरों की ओर ले जाया जा रहा था। माहौल में हल्का म्यूज़िक और अनजाना सा रोमांच घुला हुआ था।

उसी लाइन में खड़ी थी आरोही। हाथ में डायमंड वीआईपी पास और दिमाग में अनगिनत सवाल। वह यहां अपनी दोस्त रोशनी की जगह आई थी, बस थोड़ी देर के लिए। वह बार-बार अपने फोन की स्क्रीन देख रही थी, जैसे खुद से ही पूछ रही हो — क्या सच में अंदर जाना चाहिए?

तभी उसका फोन बजा। स्क्रीन पर रोशनी का नाम चमक रहा था। आरोही ने तुरंत कॉल उठाई और धीमी आवाज में बोली, “कहां है तू? तेरी बारी आने वाली है।” उधर से दर्द भरी आवाज आई, “सॉरी यार, मैं घर से निकलने ही वाली थी कि मेरा पैर मुड़ गया। अभी हॉस्पिटल में हूं। प्लीज तू मेरी जगह चली जा।”

आरोही ने झुंझलाते हुए कहा, “मुझे इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं है, और वैसे भी मेरे पास बॉयफ्रेंड बनाने का टाइम नहीं है।”

रोशनी ने लगभग विनती करते हुए कहा, “प्लीज… आखिरी बार। तुझे मेरी कसम।”

बस यही वो शब्द थे जिन पर आरोही हमेशा हार जाती थी। उसने गहरी सांस ली और कहा, “ठीक है, पर ये आखिरी बार है। तू मुझे हर बार ऐसे ही फंसा लेती है। बता यहां मुझे करना क्या है?”

रोशनी चहकते हुए बोली,

“कुछ खास नहीं, बस जैसी तू है वैसे ही रहना। और हां… लड़का मुझे ना कह दे, आगे मैं अपनी मॉम को संभाल लूंगी।”

कुछ ही देर बाद उसकी बारी आ गई। उसने हल्की सी मुस्कान के साथ अपना पास दिखाया। दो स्टाफ मेंबर्स उसके पास आए, उसकी आंखों पर काली पट्टी बांधी और उसे धीरे-धीरे एक शांत, अंधेरे कमरे तक ले गए। कुर्सी पर बैठाकर पट्टी हटा दी गई। कमरे में हल्की सी पीली रोशनी थी, इतनी कि सामने बैठे शख्स की परछाईं दिखे, चेहरा नहीं।

कुछ क्षणों तक खामोशी रही। फिर सामने से एक गहरी और संतुलित आवाज आई, “हेलो।”

आरोही ने भी जवाब दिया, “हाय।”

शुरुआती बातचीत औपचारिक थी, लेकिन धीरे-धीरे माहौल सहज होने लगा। आरोही का रुखापन भी थोड़ा कम होने लगा। जब उसने पूछा, “आप क्या करते हैं?” तो सामने वाले ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, “बस… बिज़नेस।”

“अच्छा है,” आरोही ने हंसते हुए कहा, “कम से कम आप अपने बॉस को रोज़ नहीं झेलते होंगे। मेरा बॉस तो… क्या बताऊं, चलता-फिरता टेंशन है। अगर पैसों की जरूरत ना होती तो उसकी कंपनी में एक दिन भी काम ना करती।”

सामने बैठा शख्स हल्का सा हंसा, “इतना बुरा है?”

आरोही बातों में इतनी खो गई कि उसने अपनी कंपनी का नाम भी बोल दिया — “AK Industries में काम करना कोई आसान बात नहीं है।”

जैसे ही ये शब्द उसके मुंह से निकले, सामने बैठे शख्स की उंगलियां कुर्सी के हैंडल पर हल्के से थम गईं। उसकी मुस्कान थोड़ी गहरी हुई, पर उसने अपनी प्रतिक्रिया छुपा ली।

बातचीत आगे बढ़ती रही। दोनो यहां वहा की बाते कर रहे थे ।

इवेंट खत्म होने का संकेत मिला तो सामने वाले ने शांत स्वर में पूछा, “क्या हम फिर मिल सकते हैं?”

 लेकिन आरोही ने शांत स्वर में मना करते हुए कहा,

“मेरा पहले से एक बॉयफ्रेंड है। मैं यहां बस अपनी मॉम की वजह से आई थी… इसलिए शायद हमें आगे नहीं मिलना चाहिए। यही हमारे लिए बेहतर है।”

वह उठी, दरवाज़ा खोला और बिना पीछे देखे बाहर चली गई।

कमरे में कुछ पल सन्नाटा रहा। फिर उसी अंधेरे में बैठा वह शख्स हल्के से मुस्कुराया और बहुत धीमी आवाज में बोला, “AK Industries… दिलचस्प।”

 

उसकी आंखों में अब हल्की सी चमक थी।

Comments

“ब्लाइंड डेट से मिला प्यार” को एक उत्तर

  1. Manoj Divana Namaste Story World अवतार

    बेहतरीन शुरुआत हुई है लाजवाब 🤗🤗💐💐

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