बेवजह की मोहब्बत
मेरी लाइफ एकदम सॉर्टेड थी। अच्छी जॉब (सीनियर मैनेजर, गुड़गांव), एक प्यारी वाइफ (नेहा) और एक फ्लैट जिसकी ईएमआई (EMI) हर महीने मेरे अकाउंट को खाली करने की कसम खाती थी। मैं 32 साल का था, मैरिड था, और लाइफ की बोरियत को ‘सफलता’ मान चुका था।
फिर आई रिया। फेसबुक के एक रैंडम ग्रुप पर हमारी बहस हुई, “क्या चाय कॉफी से बेहतर है?” इस बेवकूफी भरे टॉपिक से शुरू हुई बात कब मैसेंजर से व्हाट्सएप और फिर वॉयस कॉल तक पहुँच गई, पता ही नहीं चला।
“शादीशुदा होने का मतलब यह नहीं है कि आपका दिल धड़कना बंद कर देता है, बस वह गलत दिशा में धड़कने का रिस्क नहीं लेना चाहता।” पर मेरा दिल उस समय एडवेंचर के मूड में था।
रिया मुझसे सात साल छोटी थी। बैंगलोर में रहती थी। उसकी आवाज़ में वो जादू था जो गुड़गांव के ट्रैफिक में भी मुझे सुकून देता था।
शुरुआत में सब ‘फ्रेंडली’ था। लेकिन धीरे-धीरे हमारी बातें ‘गुड मॉर्निंग’ से ‘आई मिस यू’ तक पहुँच गईं। नेहा (मेरी वाइफ) को लगता था कि मैं ऑफिस के कॉल्स पर बिजी हूँ। और एक तरह से मैं बिजी ही था, अपनी दूसरी लाइफ को मैनेज करने में।
रिया और मेरे बीच घंटों वॉयस कॉल्स होते थे। जब रात को घर के सब लोग सो जाते, मैं बालकनी में जाकर उससे बात करता।
“तुम शादीशुदा क्यों हो, अर्जुन?” वह अक्सर पूछती।
“क्योंकि मैं तुमसे पहले नेहा से मिला था। टाइमिंग का खेल है सब,” मैं मज़ाक में कहता।
लेकिन यह सिर्फ़ मज़ाक नहीं था। हमारे बीच खुलकर रोमांस होने लगा था। चैट पर वो बातें होती थीं जो शायद मैंने नेहा से कभी नहीं की थीं। वॉयस कॉल पर उसकी सांसों की आवाज़ सुनकर मुझे लगता था कि यही ‘सच्चा प्यार’ है। हमने हज़ारों वादे किए। हमने प्लान बनाया कि हम गोवा में मिलेंगे। वह कहती थी, अर्जुन, तुम मेरे सोलमेट हो। मुझे फर्क नहीं पड़ता कि तुम मैरिड हो, मुझे बस तुम चाहिए।”
मुझे लगा कि रिया वो ‘मिसिंग पीस’ है जो मेरी लाइफ की पहेली को पूरा कर देगी।
सब कुछ परफेक्ट चल रहा था, जैसे किसी बॉलीवुड फिल्म का पहला हाफ। फिर अचानक रिया के मैसेज कम होने लगे।
“बिजी हूँ,” “काम का प्रेशर है,” “मम्मी पास में हैं”, ये सब बहाने आम हो गए।
फिर एक हफ्ता ऐसा आया जब उसने मेरा कोई कॉल नहीं उठाया। मैं पागल हो रहा था। गुड़गांव की सड़कों पर कार चलाते हुए मैं बार-बार फोन चेक करता। नेहा को लगा कि ऑफिस में कुछ बड़ा पंगा हुआ है। उसे क्या पता था कि मेरा ‘दिल का ऑफिस’ बंद होने की कगार पर है।
“प्यार में ‘इंतज़ार’ करना अच्छा लगता है, लेकिन ‘इग्नोर’ होना दुनिया की सबसे गन्दी फीलिंग है।”
आठ दिन बाद उसका फोन आया। मेरी जान में जान आई।
“रिया! कहाँ थी तुम? मैं मर रहा था तुम्हारे बिना!”
दूसरी तरफ से जो आवाज़ आई, वो रिया की तो थी, पर उसमें वो ‘इश्क’ नहीं था।
“सुनो अर्जुन, मुझे लगता है हमें अब बात नहीं करनी चाहिए,” उसने बहुत ही ठंडे अंदाज़ में कहा।
मैं यह सुनकर सुन्न रह गया। “क्या? क्यों? क्या हुआ?”
“कुछ नहीं हुआ। बस मुझे रियलाइज हुआ कि यह सब ‘बेवजह’ है। तुम मैरिड हो। तुम्हारा फ्यूचर नेहा के साथ है। मैं अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहती हूँ,” उसने ऐसे कहा जैसे वह किसी क्लाइंट को प्रेजेंटेशन दे रही हो।
उसका अंदाज़ एकदम बदल गया था। वो रिया, जो कॉल पर रो पड़ती थी अगर मैं पाँच मिनट लेट फोन करूँ, अब पत्थर बन चुकी थी।
“लेकिन रिया, तुमने कहा था कि तुम मुझसे प्यार करती हो? गोवा का प्लान? हमारी वो बातें?”
“वो सब एक क्रेज था, अर्जुन। अब मैं मैच्योर हो गई हूँ। प्लीज, मुझे कॉल मत करना।”
उसने फोन काट दिया। मैंने दोबारा मिलाया। ब्लॉक। व्हाट्सएप चेक किया। ब्लॉक। इंस्टाग्राम? ब्लॉक।
मैंने हार नहीं मानी। मैंने अपने एक दोस्त के फोन से उसे कॉल किया। उसने उठाया।
“रिया, प्लीज एक बार बात कर लो। मैं अपनी शादी छोड़ दूंगा, मैं बैंगलोर आ जाऊंगा,” मैं गिड़गिड़ा रहा था। एक 32 साल का शादीशुदा आदमी, जो अपनी लाइफ में सब कुछ अचीव कर चुका था, एक 25 साल की लड़की के सामने भीख मांग रहा था।
“अर्जुन, तुम पैथेटिक लग रहे हो। गेट अ लाइफ!” रिया की आवाज़ में नफरत थी।
“पर क्यों? कम से कम वजह तो बताओ? कोई और मिल गया क्या?”
“वजह यह है कि मुझे अब तुममें कोई इंटरेस्ट नहीं है। ख़त्म।”
उसने फिर से ब्लॉक कर दिया। मैंने ईमेल लिखे, लंबे-लंबे पैराग्राफ लिखे। मैंने उसे वो वॉयस नोट्स याद दिलाए जो उसने मुझे भेजे थे। मैंने उसे हमारी वो ‘हॉट चैट्स’ याद दिलाईं। पर कोई जवाब नहीं।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि जो इंसान कल तक मेरे बिना सांस नहीं ले सकता था, वो आज मुझे कचरा कैसे समझ सकता है?
कुछ हफ़्तों बाद, एक कॉमन फ्रेंड के ज़रिए मुझे पता चला कि रिया की सगाई हो गई है। एक एनआरआई (NRI) लड़के के साथ। वो लड़का अनमैरिड था, अमीर था और अमेरिका में रहता था।
सब कुछ साफ़ हो गया। रिया के लिए मैं कोई ‘सोलमेट’ नहीं था। मैं बस एक ‘टाइमपास’ था, एक ‘फिलर’ था। जब तक उसे अपनी लाइफ का असली ‘हीरो’ नहीं मिला, वह मेरे साथ डिजिटल रोमांस का नाटक करती रही। मेरी शादीशुदा लाइफ उसके लिए एक सुरक्षा कवच थी, उसे पता था कि मैं कभी उस पर शादी का दबाव नहीं बनाऊंगा, इसलिए वह खुलकर एन्जॉय कर रही थी।
जैसे ही उसकी लाइफ में ‘सेटल’ होने का मौका आया, उसने मुझे ‘डिलीट’ कर दिया जैसे हम फोन से कोई फालतू ऐप डिलीट कर देते हैं।
आज मैं अपनी बालकनी में खड़ा हूँ। नेहा अंदर आरव (मेरा बेटा, जो अब हो गया है) को सुला रही है। लाइफ फिर से वही है, ईएमआई, ऑफिस और बोरियत।
रिया अब अमेरिका में है। शायद वह अपने पति के साथ वैसी ही बातें करती होगी जैसी मुझसे करती थी। या शायद नहीं।
यह कहानी एक लेसन पर खत्म होती है। मेरा लेसन यह था, ऑनलाइन प्यार अक्सर एक ‘फ्री ट्रायल’ की तरह होता है। जैसे ही सब्सक्रिप्शन लेने का टाइम आता है, कंपनी (या लड़की) हाथ खींच लेती है।”
मोहब्बत बेवजह नहीं होती, उसके पीछे हमेशा एक वजह होती है। कभी वो वजह ‘अकेलापन’ होती है, तो कभी ‘लालच’। रिया के लिए वजह ‘मनोरंजन’ थी, और मेरे लिए वजह ‘भटकाव’ था।
मैंने अपना फोन निकाला, रिया का नंबर जो आज भी मेरे ‘ब्लॉक लिस्ट’ में सबसे ऊपर था, उसे हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। लाइफ सॉर्टेड तो नहीं हुई, पर अब कम से कम ‘हैंग’ नहीं हो रही थी।
लेखक का सन्देश और आभार
मेरे प्यारे और दिल टूटे (या जुड़े हुए) पाठकों,
इस मॉडर्न, बेबाक और कड़वे सच से भरी शैली में रचित इस कहानी “बेवजह की मोहब्बत” को पढ़ने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया! यह कहानी हमें सिखाती है कि डिजिटल दुनिया के वादे अक्सर ‘नेटवर्क’ की तरह होते हैं, जो कभी भी गायब हो सकते हैं।
शादीशुदा लाइफ में जब हम बाहर सुकून ढूंढते हैं, तो अक्सर हम ‘सुकून’ नहीं, बल्कि ‘तूफान’ को दावत देते हैं। उम्मीद है कि अर्जुन की यह कहानी आपको अपनी प्राथमिकताओं को समझने में मदद करेगी।
क्या अर्जुन के साथ जो हुआ, वो सही था? क्या रिया ने जो किया, वह आज के समय की कड़वी सच्चाई है? अपनी राय और एक्सपीरियंस नीचे कमेंट सेक्शन में ज़रूर साझा करें।
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NSW नया लेखक 🥉

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