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  • स्वाद की खोज

    स्वाद की खोज

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

     

    जॉन एक युवा शेफ था जो न्यूयॉर्क शहर में रहता था। उसका सपना था कि वह दुनिया के विभिन्न हिस्सों के व्यंजनों को सीखकर अपने रेस्तरां में पेश करे। एक दिन, उसने यूरोप की यात्रा करने का निर्णय लिया ताकि वहाँ के पारंपरिक व्यंजनों का अध्ययन कर सके।

    पहला पड़ाव इटली था, जहाँ उसने पिज़्ज़ा और पास्ता के विभिन्न प्रकारों को बनाना सीखा। नेपल्स में, उसने असली नेपोलिटन पिज़्ज़ा के रहस्यों को जाना, जबकि बोलोग्ना में उसने टैग्लिएटेल अल रागू की विधि सीखी।

    इसके बाद, वह फ्रांस गया, जहाँ उसने पेस्ट्री और बेकिंग की कला में महारत हासिल की। पेरिस में, उसने क्रोइसेंट और बैगेट बनाना सीखा, जबकि लियोन में उसने कोक औ विन और बुफ़ बौर्गिन्योन जैसे पारंपरिक व्यंजनों का ज्ञान प्राप्त किया।

    स्पेन में, जॉन ने तपस और पेला की विविधताओं का अध्ययन किया। बार्सिलोना में, उसने पेला वेलेंसियाना बनाना सीखा, जबकि मैड्रिड में उसने विभिन्न तपस व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी तैयारी की विधियाँ सीखीं।

    यूरोप की इस यात्रा ने जॉन के ज्ञान को समृद्ध किया और उसे पाश्चात्य व्यंजनों की गहराई और विविधता का अनुभव कराया। अपने देश लौटकर, उसने अपने रेस्तरां में इन सभी व्यंजनों को शामिल किया, जिससे उसके ग्राहकों को विभिन्न पाश्चात्य स्वादों का आनंद मिला।

    इस प्रकार, जॉन की यह यात्रा न केवल उसके व्यक्तिगत विकास का साधन बनी, बल्कि उसने अपने समुदाय को भी पाश्चात्य व्यंजनों की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।

  • मन की बात

    मन की बात

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

     

     

    मन की बात

     

    मन की बात है गहरी, शब्दों में कैसे आए,

    दिल के कोने में छुपी, हर किसी को न बताए।

     

    कभी ये खुशियों की धुन, तो कभी दर्द सुनाए,

    कभी शोर मचाए मन में, तो कभी चुप रह जाए।

     

    सपनों की उड़ान इसमें, उम्मीदों की रोशनी,

    कभी बादलों से घिर जाए, कभी चमके चाँदनी।

     

    मन कहे सच बोलूं, मगर दुनिया से डरता हूँ,

    अपनों की खुशियों खातिर, हर ग़म मैं सहता हूँ।

     

    कभी बह जाए भावनाओं में, कभी बन जाए पत्थर,

    कभी झूमे सावन जैसे, कभी सूखा कोई सागर।

     

    मन की बात अधूरी है, कहो तो बोझ हल्का हो,

    न कहो तो रह जाए दिल में, और आँसू बन टपका हो।

     

    इसलिए सुनो मन की बातें, जो दिल में उमड़ती हैं,

    कभी शब्दों में बहती हैं, कभी आँखों में तैरती हैं।

  • अकेलापन….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपनों के बीच होकर भी गैर हो गया हूं मैं,

    क्या कहूं ऐ जिन्दगी कितना मजबूर हो गया हूं मैं , 

    हंसी होंठों से जाने नहीं देता

    इस दिल से कितना बेगैरत हो गया हूं मैं ,

    यादों की लाली मेरी आंखों से जाती नहीं,

    बस कह नहीं सकता कितना टूट गया हूं मैं, 

    अकेलापन अब तो सालता है मुझे ,

    आ देख! मुझे आकर तेरे बगैर कैसे जी रहा हूं मैं ,

    अकेलापन महसूस किया है मैंने अब तेरी पनाहों में,

    क्या कहूं दिल से कितना मजबूर हो गया हूं मैं …!!

  • बातों का विश्वास

    बातों का विश्वास

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    शीला कमल को मार मारकर उसे बेहोशी की दुनिया में पहुंचा दिया था। कमल के बेहोश होने के बाद भी शीला के लात रुक नहीं रही थी।‌‌ लगातार लातों की बारिश कर रही थी। गुस्से से शीला के चेहरे पसीने में भीग गया था। पिछे से शीला के कंधे पर दो हाथ पड़ने के आभास होता है। और शीला की तंद्रा भंग होती है। वो पिछे मुड़कर देखतीं हैं। रूपा और राधा उसकी कंधों को धिरे से सहला रही थी। दोनों के चेहरे पर एक खुशी झलक रही थी। और दोनों मुस्कुरा रही थी। वो दोनों अपने दीदी के कमल पर हुई जीत पर प्राउड फील कर रही थी।‌‌

     ” दीदी आप शांत हो जाइए,आप को चोट लगी है।”

    चांदनी धिरे धिरे शीला के तरफ बढ़ते हुए कैजुअली अंदाज में बोली थी।

    ” हां दीदी, अब तो आप हम लोगों पर छोड़ दिजिए। हम देख लेंगे की क्या करना है। इस कमिने के साथ।”

    राधा कमल के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।

    ” अब हमें कमल को लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलना चाहिए।”

    रुपा अपने कमर पर हाथ रख कर मुस्कुराती हुई बोल रही थी।

    राधा चांदनी और शीला एक साथ बोलती है।

    ” हां ठीक है चलो चलते हैं।”

    कमल को होश तो था नहीं, जो वो चलकर जाता। तो अब उसे लेकर जाने की जिम्मेदारी,इन चारों सहेलियों के कंधे पर थी । चारों सहेलियों ने कमल के एक एक पैर और एक एक हाथ पकड़ कर उठाई और चल दी थी।

    इधर मीटिंग हाल में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर कालेज में फंक्शन की तैयारी करने को लेकर प्रिंसिपल स्टूडेंट प्रोफेसर के बीच बाद संवाद चल रही थी। सभी प्रोफेसर अपने स्टूडेंट को भगवान श्री कृष्ण के जीवन के बारे में तो उनके द्वारा किए गए लीला के बारे में अपने स्टूडेंट के सामने ब्यख्यान कर रहे थे।

    जब प्रोफेसर शुक्ला अपनी बात स्टूडेंट के सामने रख रहे थे। तब एक स्टूडेंट अपने कुर्सी से उठ कर प्रोफेसर शुक्ला से एक सवाल किया।

    दरअसल इस शवाल का जवाब उस स्टूडेंट के साथ साथ आप हम और उस मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोगों को चाहिए था। वो लड़का अपनी चेयर से उठा और वो प्रोफेसर शुक्ला को बीच में रोकते हुए बोला।

    ” माफ़ किजियेगा सर, मैं आपको बीच में रोक रहा हूं। सर मैं जानना चाहता हूं। कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव तो हम हमारे कालेज में हर साल मनाते आ रहे हैं। तो फिर हमें इस बार और पहली बार मनाया जाएगा, ऐसा क्यों बताया जा रहा है?”

    उस लड़के ने साफ शब्दों में अपनी बात प्रोफेसर शुक्ला के सामने रख दिया था। उस लड़के की आवाज जब वहां मौजूद सभी लोगों के कानों में जाते हैं। तो सभी के ध्यान उस लड़के पर टिक जाती है। जब ये सवाल उठ हीं गई है तो इसका जवाब जानने कि कोशिश में कुछ लोग और आगे आते हैं। एक लड़की अपनी चेयर से उठ कर बोलती है।

    ” हां सर, हम लोग तो श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर साल मनाते हैं। और कॉलेज में अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन किया जाता है। तो फिर ये क्यों?”

    उस लड़की ने भी अपने तरफ से एक सवाल पूछ लिया था।इन सवालों के जवाब स्टूडेंट को प्रोफेसर शुक्ला देने वाले हीं थे। कि सभी की नजर मीटिंग हाल के दरवाजे पर पहुंच जाती है।देख कर सभी शौक हो जातें हैं। मीटिंग हाल के माहौल अब बदलने वाला था। जहां तक बदल ही गया था। शीला कमल चांदनी राधा रुपा को देख कर सभी स्तब्ध रह गए थे। सन्नाटा पसर गया था। एक साथ सभी लोगों के जुवान बंद हो गया था। कोई कुछ भी नहीं बोल रहे थे। सभी सीर्फ एक टक उन पांचों को देख रहे थे। अब कोई आगे आकर वेलकम तो करने वाले थे नहीं, तो चारों सहेलियों ने खुद आगे बढ़कर अंदर आने लगी थी। शीला और चांदनी कमल के एक एक हाथ पकड़ कर टांगी हुई थी तो राधा और रूपा एक एक टांग सभी चलकर स्टेज के सामने आकर खड़ी हुई थी।

    खामोशी को भंग करते हुए एक छात्रा इन सभी को देख कर बोली थी।

    ” क्या हुआ है इसे, यह बेहोश क्यों है?”

     उस छात्रा ने अपनी उंगली से कमल को प्वाइंट आऊट करते हुए बोली थी। बीच में से एक और छात्र का आवाज गुंजा।

    ” तुम लोग कमल को ऐसे टांग कर क्यों लाई हो? क्या हुआ है इसके साथ, क्या ये एक्सीडेंट किया है?” 

    उस छात्र ने चारों सहेलियों से सवाल किया था।

    इस सवाल का जवाब आप हम, और ये चारों सहेलियां जानते हैं। लेकिन यहां मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग नहीं जानते थे। अब एक बात और है कि क्या यह सहेलियां जो भी बात बोलेगी क्या वहां मौजूद सभी लोग क्या इनके बात का विश्वास करेंगे? अगर नहीं, तो फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा। वही करने के लिए शीला अपने मन में कुछ सोच कर अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थी। सभी कमल को फर्श पर लिटा कर वहीं एक तरफ खड़े हो जाते हैं। अगर कमल की सच्चाई सबके सामने उजागर करना है। तो उसे सबसे पहले होश में लाना होगा, शीला मन-ही-मन ये सोच रही थी। बिना उसको होश में लायें या बिना उसके मुंह से उसके बातों को कोई नहीं मानेगा क्यों मानेगा कैसे मानेगा कोई नहीं मानेगा। हम भी नहीं मानेंगे और आप तो मान हीं नहीं सकते हैं। क्यों की कमल अभी भी बेहोश पड़ा था। चोट उसको लगा था। अब अगर ये चारों सहेलियां बोलेगी की कमल ने उसे परेशान किया है तो इस बात को प्रमाणित भी करना होगा। जो कि कमल के बेहोश रहते संभव नहीं था। यह सीन देख कर प्रोफेसर और प्रिंसिपल मैम भी आश्चर्य चकित रह गए थे।

    प्रिंसिपल मैम इन चारों को देख कर बोलतीं हैं।

    ” शीला चांदनी राधा रूपा क्या है ये सब? तुम सब मिलकर कमल के साथ क्या की हो?”

     थोड़ा रुक कर प्रिंसिपल मैम फिर बोलना शुरू करतीं हैं।

    ” ये बेहोश क्यों हो गया है? सब कुछ सही सही बताओ तुम सब।”

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर पर बैठी हुई हीं इन चारों से सवाल की थीं। शीला प्रिंसिपल मैम को उनके सवाल का जवाब देना चाहती थी। डर इस बात का था कि उसके बात का कोई विश्वास नहीं करेगा।  यही कारण था कि वो कुछ बोलने से बच रही थी। अब प्रिंसिपल मैम उससे सीधा सवाल कर ली थी। तो अब वो चुप कैसे रह सकती थी। 

    क्या होगा जब कमल को होश आयेगा? ये चारों सहेलियां कब तक चुप रहेगी? क्या कमल को होश आयेगा? जब कमल की सच्चाई सभी के सामने आयेगा फिर क्या होगा? इन सभी सवालों के जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग ….. प्यार एक अहसास , कहानी अजय शीला की नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……

     

     

  • ग्रुप कॉल

    ग्रुप कॉल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने  चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…

    इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।

    ” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”

    शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।

    कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।

    ” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “

    कमल जोर से बोला था।

    ” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”

    शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।

    शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।

    ” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “

    बोल कर कमल जोर से हंसा

    ” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”

     कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ  टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।

    इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।

    उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।

    ” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “

    दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।

    ” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”

     फिर राधा की भी आवाज आई

    ” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”

    जबाव देते हुए रूपा बोली

    ” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”

    ” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”

    चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।

    ” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”

    राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “

    रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।

    फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है।  शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।

    ” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”

    कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ‌।

    शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।

    कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही  कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।

     ” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”

    शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।

    मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..

  • वो आखरी मेसेज

    वो आखरी मेसेज

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    तकरीबन सवा साल बीत गया था उसे गए हुए,

    कल अचानक उसका एक मैसेज आया

    सिर्फ एक शब्द लिखा था, 

     

    “सुनो…”

     

    मैंने फोन हाथ में लिया, पर उंगलियाँ कांप रही थीं,

    दिल ने कहा सब कह डालो जो इन महीनों में सहा है,

    दिमाग ने कहा खामोश रहो, उसने तुम्हें कब का भुला दिया है।

    ​मैंने टाइप करना शुरू किया

    “पता है? तुम्हारे जाने के बाद मैंने हंसना छोड़ दिया है,” (फिर मिटा दिया…) फिर लिखा

    “आज भी रात को जब नींद खुलती है, तो फोन में तुम्हारा नाम ढूंढते है,” (फिर मिटा दिया…) 

     

    आखिर में मैंने सिर्फ इतना लिखा “कहो, कैसे हो?” उसका जवाब आया

    “बस यूं ही याद आ गई थी, लगा तुम बदल गए होगे।” मैंने मन ही मन मुस्कुराया,

    अंदर एक टीस उठी और आंखों के कोर भीग गए।

    बदल तो वो लोग जाते हैं जिनके पास कोई और होता है,

    हम जैसे लोग तो बस एक ही याद के सहारे पूरी उम्र गुज़ार देते हैं।

     

    ​तभी स्क्रीन पर ‘Typing…’ दिखा और फिर गायब हो गया,

    शायद उसे भी एहसास हो गया था…

    कि कुछ सवाल पूछने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है।

    ​उस दिन फिर समझ आया

    कुछ लोग हाल पूछने नहीं,

    सिर्फ ये तसल्ली करने आते हैं,

    कि तुम आज भी उनकी यादों की कैद में हो या रिहा हो गए!💔💔💔

     

     

  • बदलाव…!!

    बदलाव…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    घर बदलें गलियां बदलीं

    शहरों में मकां बदले,

    मौसम ने भी करवट ले कर

    अपने रंग दिखाये है ,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है ,

    रिश्ते बदले लोगों ने भी

    अपने मतलब से वफादारी दिखाई है,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है,

    तुम भी बदल रहे हो वक्त के हाथों,

    जब बदलाव की आंधी में

    खुद को सब बदल रहे तो

    मेरे बदलने में क्या बुराई है ,

    हवाओं का रुख भी बदला हुआ है  ,

    मैं बदलूं खुद को खुद ही की जद्दोजहद से ,

    अब नहीं परवाह करनी बेवजह

    के लोगों की ,ना ढ़लना मुझे

    औरो के कायदों में ,

    सुकून के पल खुद के लिए

    चुरा लूं जिंदगी से,

    बदलाव जरूरी है तो क्यों

    ना मैं खुद के लिए जीयूं??

    क्यों मेरे लिए ही वक्त की मारमारी है  ,

    बदलाव जरूरी है ना तो

    दुनिया के ढकोसलों को तुम्हीं सम्हालो  ,

    मैं उड़ती रहूं मदमस्त होकर गगन में …!!

  • दहलीज़ के पार…

    दहलीज़ के पार…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अल्हड सी कन्या मुस्कान

    लिए होंठों पर आई अपने

    साजन के द्वार, कौतूहल

    और जिज्ञासा से हुआ जिसका सत्कार,

    हंसी ठिठोली हवाओं में फैली  ,

    फिर भी चेतायी गई एक बार ,

    देखो! अब तुम हो गृह लक्ष्मी

    इस घर की, इस दहलीज़

    को तुम पहचान लो,

    स्वछंद विचरण करना

    घर के कोने कोने में,

    किन्तु दहलीज़ को पार ना करना ,

    मनोकामनाएं पूर्ण होगीं सभी तुम्हारी ,

    बस दहलीज़ से दूरी बनाए

    रखना , माना आधुनिकता

    का दौर है लेकिन वो क्या है ना,

    हम सामाजिक बंधनों में बंधे हुए हैं  ,

    दहलीज़ के पार जाना ब्याहता

    नारी का ,घर के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है,

    अधिक शिक्षित नारी को उद्दंड बनाता है,

    दहलीज़ पे ही सम्मान टिका हुआ है

    ऐसा ढकोसले वालों को लगता है  , 

     

    नारी को सशक्त बनाना उसे उदद्दंड और अनुशासनहीन नहीं बनाता है  , खैर ये कविता रू़ढीवादी विचार धारा को दर्शाती है…!!

  • साजन साजन तेरी दुल्हन_तुझको पुकारे_आजा_❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरी राहों में बिछे हैं मेरे अरमान सारे,

    • तेरे बिना अधूरे हैं ये ख्वाब हमारे।

    साजन, तेरी दुल्हन हर पल तुझे ही पुकारे,

    आ जा कि थम जाएँ ये इंतज़ार के किनारे।

    सिंदूर की लकीरों में बस तेरा ही नाम है,

    मेरी हर धड़कन पे लिखा तेरा पैगाम है।

    साजन, तेरी दुल्हन सजी बैठी है चौखट पे,

    आ जा कि तेरे बिना सब कुछ वीरान है।

    भीगी सी पलकों में तेरी तस्वीर बसाई है,

    तेरे ख्यालों से ही ये दुनिया सजाई है।

    साजन, तेरी दुल्हन अब और ना तरसाए खुद को,

    आ जा कि तेरे बिना हर खुशी पर परछाई है।

    रूठी हुई रातें भी तुझसे ही मानेंगी,

    सूनी ये बाहें बस तुझको ही जानेंगी।

    साजन, तेरी दुल्हन तेरे कदमों की आहट सुने,

    आ जा कि ये साँसें अब तुझसे ही चलेंगी।

  • परी मां (जलपरी की कहानी)

    परी मां (जलपरी की कहानी)

    पढ़ने का समय : 12 मिनट

     एक गाँव में सुहानी नाम की एक लड़की अपने पिता उदय और सौतेली माँ  मधु के साथ रहती थी , सुहानी की एक सौतेली बहन भी  निशा भी थी , सुहानी की माँ अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी , लेकिन वह सुहानी से नफरत करती थी और दिन भर घर के काम में लगा कर रखती थी , और उसे ठीक से खाना भी नहीं देती थी। 

     

    एक दिन मधु सुहानी को लेकर जंगल जाती है , और लकड़ी काटने लगती है ,  मधु के दिमाग में सुहानी को लेकर कुछ षडयंत्र चल रहा था।

     

    मधु सुहानी से बोली ,” मुझे बहुत प्यास लगी है , जरा पानी ले आओ “!

     

    सुहानी पानी लेने के लिए नदी के पास जाती है ,तो मधु भी दबे पाव सुहानी के पीछे चली जाती है।

     

    सुहानी बहुत ही मासूम थी , उसे पानी से डर लगता था , पर क्योंकि उसकी मां को प्यास लगी थी , इसलिए  वह डर डर के नदी के पास चली गई।

     

    अभी सुहानी पानी भरने के लिए झुकी ही थी कि मधु ने उसे नदी में धक्का दे दिया।

     

    सुहानी जैसे ही पानी में गिरी खुद को बचाने की कोशिश करने लगी पर क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था इसलिए वह नदी के किनारे नहीं आ पाई।

     

    सुहानी चीखते हुए बोली ,” मां प्लीज मुझे बचा लो “! 

     

    पर मधु पर कोई असर नहीं पड़ा और वह नफरत से हंसते हुए बोली , ” तुझे बचा लूं , ताकि  मेरी बेटी के हिस्से की खुशी तू खा जाए ,तेरे रहते मेरी बेटी का रिश्ता नहीं हो पाएगा , भगवान ने अक्ल तुझे भला ही कम दी है पर शक्ल बहुत अच्छी दी है , इसलिए जब तक तू जिंदा मेरी बेटी को दुनिया की सबसे अच्छी चीज नहीं मिलेगी “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” प्लीज मां बचा लो , मैं बेटी हूं आपकी “!

     

    मधु वह से जाते हुए बोली ,” तू बेटी नहीं है मेरी , सौतेली बेटी है “!

    सुहानी पानी में डूबती रही पर मधु वहां से जा चुकी थी।

     

     कुछ देर बाद जब सुहानी को होश आता है तो वह एक अलग ही दुनिया में होती है, जो बहुत खूबसूरत थी।

     

    सुहानी धीरे से अपनी आंखे खोलती है और इधर उधर देखती है तो उसे ही  तरफ सुंदर  पद पौधे फूल दिख रहे थे,  ये सब देखकर  एक पल के लिए वह बहुत खुश होती है ,और इधर उधर घूमते-घूमते थक जाती है तो पेड़ के नीचे बैठ जाती है।

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” यह मैं कहां आ गई ,यह कौन सा गांव है “? तभी उसकी नजर एक हवेली पर पड़ती है , सुहानी वह  से उठकर  उस हवेली का दरवाजा खोलती है ,तो उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती है।

     

    सुहानी को वहाँ एक खूबसूरत सी औरत दिखती है जो बड़ी सी कुर्सी में बैठी हुई थी।

     

    वह औरत मुस्कराकर बोली ,” तुम कौन हो ? और यहां कैसे आई “?

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” मैं सुहानी हूं , और रामपुर गांव में रहती हूं ,और मैं नदी में गिर गई और यहां आ गई “!

     

    सुहानी की बात सुनकर वह औरत सोच में पड़ जाती है ,कि आखिर एक इंसान उनके  जललोक में कैसे आई ?

     

    वह औरत अपनी आंखे बंद करती है और उसे  सब सच पता चल जाता है।

     

     सुहानी बोली ,” आप कौन है और मैं कौन से गांव में हूं “?

     

    वह औरत मुस्कराकर उसके पास जाकर उसका सिर सहलाकर बोली ,” मैं   उर्वशी हूं इस जल लोक की रानी पारी और तुम नदी में गिर गई इसलिए हमारे लोक आ गई हो “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी घबरा गई , और डरते हुए पीछे होने लगी ।

     

    उर्वशी सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” घबराओ मत बेटा ,मैं तुम्हे कुछ नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी  ,मुझे मालूम है तुम्हारी मां ने तुम्हे मारने की कोशिश की “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी की आंखे भर आई और वह रोने लगी और उर्वशी को गले लगा लिया।

     

    सुहानी के उर्वशी को गले लगाते ही उर्वशी को  एक अलग सा एहसास हुआ जो वो समझ नहीं पा रही थी।

    उर्वशी  ने सुहानी को खाना खिलाया और फिर अपने साथ सुला दिया।

     

    सुहानी को सोता देख उर्वशी सोचने लगी , कि आखिर एक साधारण लड़की उनके लोक में कैसे आई ? और आखिर क्यों यह अपनी सी लग रही है ।

     

    अब ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और सुहानी जल लोक में ही रहने लगी ,और उर्वशी और सुहानी के बीच एक अलग ही रिश्ता बन गया , सुहानी उर्वशी को परी मां कहने लगी।

     

    एक दिन पारियों की बैठक में उर्वशी की दुश्मन शकीरा परी ने भरी सभा में शिकायत की कि उर्वशी ने इंसानों के साथ हाथ मिला लिया है ,जिससे उनके लोक को खतरा है तभी तो इंसानों के जासूस को अपनी बेटी बनाकर रखा है।

     

    शकीरा की बात सुनकर उर्वशी गुस्से से बोली ,” शकीरा सब तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं होते, और यह मासूम सी बच्ची तो खुद अपनो की ठुकराई हुई है किसी को क्या धोखा देगी “!

     

    शकीरा मुस्कराकर बोली ,” रानी परी आप भी तो सब छोड़कर इंसानी दुनिया चली गई थी , तो फिर है आप पर कैसे भरोसा करे “!

     

    शकीरा की बार सुनकर उर्वशी चुप हो गई ,उर्वशी को चुप होता देखकर शकीरा का हौसला बढ़ गया।

     

    शकीरा बोली ,” देखिए रानी परी या तो आप इस लड़की को मार दीजिए या इसकी दुनिया वापिस भेज दीजिए “!

     

    रात के समय  सुहानी खिड़की में बैठी कुछ सोच रही थी , और उसकी आँखें नम थी।

     

    सुहानी को उदास देख उर्वशी उसके पास जाकर बोली ,” क्या हुआ सुहानी इतनी उदास क्यों हो ? घर की याद आ रही है “?

     

    सुहानी नम आंखों से उर्वशी को गले लगा लेती है। और रोते हुए बोली ,” आखिर क्यों मेरी मां मुझे छोड़कर चली गई ? छोटी मां सही कहती थी मैं मनहूस हूं तभी उन्होंने मुझे नदी में फेंक दिया फिर भी मैं बच गई ,और यहां आकर आपके लिए भी मुसीबत बन गई “!

     

    उर्वशी सुहानी का सिर सहलाते हुए बोली ,” परेशान मत हो , मैं अब संभाल लूंगी , और  शकीरा तो हमेशा मेरे खिलाफ षडयंत्र रचती रहती है , चिंता मत करो मैं अब देख लूंगी “!

     

    सुहानी बोली ,” मैं अपनी दुनिया में वापिस जाना चाहती हूं “!

     

    उर्वशी बोली ,” यह क्या बोल रही हो ? उस दुनिया में तुम्हारी मां तुम्हारी जान की दुश्मन है , और तुम्हारे पिता भी हमेशा काम से बाहर रहते है , तो ऐसे में हमेशा तुम्हारी जान को खतरा रहेगा “!

     

    सुहानी बोली ,” परी मां आप चिंता मत करो , मां को अपनी गलती का एहसास हो गया होगा और वो भी मुझे याद करती होगी , इसलिए मैं अपने गांव जाना चाहती हूं”!

     

     उर्वशी परेशान होते हुए बोली ,”  सुहानी जल लोक में है किसी को भी उसकी मर्जी के खिलाफ नहीं रख सकते , अगर तुम जाना चाहती हो तो जाओ ,पर यह अंगूठी  हमेशा अपने पास रखना “!

     

    सुहानी अंगूठी देखते हुए बोली ,”  परी मां यह क्या है “?

     

    उर्वशी सुहानी की उंगली में अंगूठी पहनाते हुए बोली ,” यह जादुई अंगूठी है ,  अगर तुम किसी मुसीबत में हो और  जैसे ही इसे अपने होंठों से चूमकर मुझे याद करोगी , मैं आ जाऊंगी “!

     

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाकर अपने मन में सोचने लगी ,” मैं आपको किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती इसलिए यहां से जा रही हूं ,पर आपसे मुझे मां का प्यार मिला है , मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगी कि अगले जन्म में आप मेरी मां बने “!

     

     सुहानी यह सब मन में बोल रही थी, पर उर्वशी सुहानी के मन की बात सुन पा रही थी , उर्वशी की आंखे भी नम हो जाती है।

     

    कुछ देर बाद सुहानी नदी के किनारे खड़ी थी, सुहानी एक नजर नदी की ओर देखती है और फिर अपने घर चली जाती है।

     

    सुहानी जैसे ही अपने घर जाती है ,तो उसकी मां की नजर उस पर पड़ती है ,और वह बोली ,” यह क्या मैं सपना देख रही हूं , यह तो मर गई थी ,तो फिर यहां कैसे आई “?

     

     

    मधु गुस्से से सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” यहां क्या कर रही है “?

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मां मै घर लौट आई”!

     

    मधु बोली ,” निकल जा यहां से ,अब क्या लेने आई है कुलटा “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,”मां  आप यह क्या कह रही है “?

     

    अभी सुहानी रो ही रही थी तभी उदय आ गया , उदय को देख कर मधु रोते हुए बोली ,” देखिए जी आपकी यह बेटी हमारी नाक कटा के चली गई थी , जैसे तैसे हमने निशा की शादी की और अब यह लौट आई ताकि हमारी पूरे गांव में थू थू हो “!

     

     

    सुहानी अपने पिता के पास जाकर बोली ,” नहीं पिता जी , ऐसा कुछ नहीं है ,मैने कुछ भी किया “!

     

    सुहानी के पिता गुस्से से उसके गाल में एक थप्पड़ मारकर बोले ,” झूठ मत बोलो , तुम भी अपनी मां की तरह धोखेबाज निकली ,मेरी इज्जत उछाल कर भाग गई “!

     

    सुहानी बोली ,” नहीं पिता जी, मैं कहीं नहीं भागी , मां ने मुझे नदी में फेंक दिया था”!

     

    सुहानी की बात सुनकर  मधु सुहानी के बाल पकड़कर खींचते हुए घर के बाहर फेंक देती है और बोली ,” झूठ मत बोल , तू ही अपने किसी यार के साथ भाग गई ,जैसे तेरी मां तुझे पैदा करते ही अपने यार के साथ भाग गई ,तुझे इतनी शर्म नहीं की मैने अपनी बेटी की तरह थे पाला और तू यह इल्जाम लगा रही है मुझपर “!

     

     सुहानी रोते हुए बोली ,” छोटी मां झूठ मत बोलो ,जब जम जंगल लकड़ी लेने गए थे ,आपने ही मुझसे पानी मंगाया और जब मैं नदी में पानी लेने गई तो आपने धक्का दे दिया “!

     

    मधु सुहानी की बात सुनकर घबरा गई, और अपना झूठ छुपाने के लिए रोते हुए उदय के पास गई और बोली ,” यह झूठ बोल रही है ,आप तो जानते है इसी तैरना नहीं आता ,और अगर मैने इसे नदी में फेंका, तो यह बच कैसे गई “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मुझे भी पता पर मैं बच गई ,और जल लोक में चली गई, और वहां परी मां के साथ रहने लगी “!

     

    सुहानी की बात सुनकर मधु उदय की ओर देखकर बोली ,” देखा यह खुद को बचाने के लिए कैसे झूठी कहानी बना रही है “!

     

    उदय मधु की बात में यकीन कर लेता है , और गुस्से से बोला ,” सुहानी झूठ मत बोलो “!

     

    पिता जी मैं झूठ नहीं बोल रही हूं। सुहानी ने रोते हुए कहा।

     

    मधु बोली ,” अच्छा झूठ नहीं बोल रही हो ,तो सबूत दो की तुम पानी में पारियों की दुनिया में चली गई थी ,और परी के साथ रह रही थी ,अरे तुम एक काम करो उस परी को ही क्यों। नहीं बुला लेती “! यह शब्द मधु ने हंसते हुए बोले।

     

    मधु की बात से सुहानी को उर्वशी का ख्याल आया ,और उसने अपने हाथ में पहनी अंगूठी को चूमकर उर्वशी को याद किया।

     

    कुछ ही पल में एक तेज रोशनी उत्पन्न हुई जिससे सभी की आंखे बंद हो गई, जब सुहानी ने आंखे खोली , तो उसके सामने उर्वशी थी।

     

    मधु और उदय ने जैसे ही आंखे खोली , उनकी आंखे उर्वशी को देखकर फटी की फटी रह गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप आ गई “!

     

    उर्वशी की नजरे मधु और उदय में टिकी हुई थी, और वह सुहानी का सिर सहला रही थी।

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” परी मां , छोटी मां कह रही है कि मैं भाग गई थी किसी के साथ , आप बताइए ना मैं आपके साथ थी, इन्हें लग रहा है मैं अपनी मां की तरह भाग गई थी “!

     

    उर्वशी हैरानी से बोली ,” मां , क्या तुम्हारी मां जिंदा है “?

     

    उदय बोला ,” हां जिंदा है इसकी मां , और  इसके सामने खड़ी है “!

     

    उदय की बात सुनकर उर्वशी और सुहानी एक दूसरे को देखने लगे “!

     

    उदय बोला ,” हां सुहानी यही है तुम्हारी मां उर्वशी, जो तुम्हे जन्म देते ही कहीं चली गई ,और सालों ढूंढा मैने इसे पर यह कहीं नहीं मिली, और आज मुझे पता चल रहा है यह एक परी है “!

     

    उर्वशी नम आंखों से बोली ,” मुझे माफ कर दो उदय , मैं क्या  करती , मैं जल लोक से बाहर की दुनिया देखने आई , और मेरी मुलाकात तुमसे हुई , और मुझे तुमसे प्यार हो गया , पर जब मैने तुमसे शादी की और मेरी बेटी का जन्म हुआ , तो मेरे पिता जी की हमारे दुश्मनों ने हत्या कर दी , और मुझे जल लोक को बचाने के लिए अपनी दुनिया में लौटना पड़ा , अगर मेरे दुश्मनों को मेरी बेटी का पता चलता तो उसकी जान को खतरा था इसलिए मैं वापिस लौट गई “!

     

    सच जानकर उदय और सुहानी की आंखे नम हो गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप मेरी मां है”!

    उर्वशी सुहानी का माथा चूमती है और फिर उसके गालों को एक एक कर चूमकर अपनी ममता लुटाते हुए बोली ,” हां मैं हूं तुम्हारी मां , जिस दिन तुम जल लोक में आई , मैं उसी दिन सोच में पड़ गई थी कि आखिर एक साधारण इंसान जल लोक में कैसे आ सकता है ,काश मैने पहले सच जानने की कोशिश की होती “!

    उदय ने मधु को एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारकर कहा ,” तुमने मेरी बेटी की जान लेने की कोशिश की निकल जाओ यहां से “!

    मधु ने बहुत मन्नते की पर उदय ने उसकी एक ना सुनी और मधु को घर से बाहर निकाल दिया।

     उदय ने अपने अविश्वास के लिए उर्वशी और सुहानी से माफी मांगी। 

    उर्वशी ने भी उदय से माफी मांगी , और उदय से इजाजत लेकर  उर्वशी सुहानी को लेकर अपने जल लोक लौट गई ,और उसे परी की सारी शक्तियां दे दी, और जल लोक की राजकुमारी बना दिया। 

    इस तरह एक मासूम सी लड़की इतनी तकलीफें झेलने के बाद अपनी मां से मिल गई , और राजकुमारी बनकर जल लोक की परी बन गई ।

     

     

    Mysterious Chand