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  • 💞💞प्यार का नशा पार्ट 6💞💞

    💞💞प्यार का नशा पार्ट 6💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अब आगे,

    व्योम को इतना ख्याल नहीं रहता है कु वो बिच सड़क पर aa गया है और तभी एक रज रफ़्तार से आती हुई कार जो व्योम के बिलकुल नजदीक आ रही थी वो हॉर्न बजती है पर व्योम को सुनाई नहीं देता है क्युकी उसका ध्यान कहीं और ही रहता है |”

    अमानत जैसे ही पीछे मुर देखती है उसकी हाथो से सामान छूट कर नीचर गिर जाता है और वो भागती हुई व्योम के पास जाती है और उसे खींच कर साइड करते हुए उस कार वाले को सुनाने लगती है,

    कुछ आगे जाकर वो कार भी रुक जाती है,

    अमानत, ” तू ठीक है न व्योम ये ज्या कर रहा है अभी तुझे किछ हो जाता तो मे क्या करती अपना ख्याल रखना चाहिए न, तभी कार उन दोनों के सामने आ जाती है और उससे बाहर आते है Ra….

    अमानत खरी हो जाती है, रिशाल अग्निहोत्री को देख उसे उस बिच पर हुई बातें याद आ जाती है, अपर आज उसकी गलती थी इसीलिए वो बिना कुछ सोचे समझें Ra को काफ़ी कुछ कहती है.. आज उसके भाई का सवाल था वो चुप कैसे रह सकती थी, देखते ही देखते काफ़ी भीड़ जमा हो जाती है, और सभी रिशाल अग्निहोत्री को एक आम लड़की से बात सुनता हूआ देख हस देते है |”

    रिशाल अग्निहोत्री जो अमानत से माफ़ी मांगने की सोच रहा था इस इंसिडेंट के बाद वो अमानत से बेहद नफरत करने लगता है आखिर अमानत न उसे सबके सामने बेज्जत जो किया, वो अमानत से बदला लेने का सोच कहता है,

    रिशाल अग्निहोत्री, ” मुझे माफ कर दो गलती से हो गया, पर मे इसीलिए भरपाई करना चाहता हु, तुम दोनों मेरे साथ चलो मे तुम्हे कहीं ले जाना चाहता हु |”

    अमानत, ” कहा ले जाना है हमें कहीं नहीं जाना आप जेसो के साथ जिसे बस अपने पेसो का रोब दिखाना आता है खड़ूस…

    रिशाल अग्निहोत्री अपने gusse को काबू मे कर व्योम को और फिर उसकी बहन को कार मे बिठा कर जबरदस्ती ही ले जाता है |”

    अमानत, ” ये क्या मज़ाक लगा रखा है आपने आप हमारे साथ जबरदस्ती केसव कर सकते है एक तो गलती करते है ऊपर से उतना एगो….

    रिशाल कुछ नहीं कहता है और कुछ दुरी पर एक अच्छे से हॉस्टल मे व्योम का एडमिशन करवा देता है जहा व्योम को वो भेज कर अपने फार्महाउस मे कार जाकर रोक अमानत को उतार देता है,

    अमानत -” ये सब क्या है मेरा भाई …. आपने उसे कहा छोड़ दिया है ये सबा क्या कर रहे है आप?? “

    क्या करेगा रिशाल अमानत के साथ??

    आखिर रिशाल न क्यों किया व्योम और अमानत को अलग अलग??

    क्या Ra के मन मे चल रहा है कोई और ही सवाल क्या अमानत कर पायेगी Ra का सामना?? 

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | आगे का कहानी जानने के लिए आपलोग इसलिए कहानी को आगे पढ़ते रहे और अपना सपोर्ट देते रहे.. 🙂

  • अबके बरस..💘💘

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    वाराणसी की गलियों में बारिश का अपना ही संगीत होता है—भीगी हुई मिट्टी की खुशबू, मंदिरों की घंटियों में घुलती बूंदों की लय, और गंगा के किनारे बहती ठंडी हवा। उसी शहर में, उसी बारिश के मौसम में, एक अधूरी प्रेम कहानी हर साल जन्म लेती थी… और हर साल अधूरी ही रह जाती थी।

     

    आरव को बारिश से प्यार था, लेकिन उससे भी ज़्यादा उस लड़की से, जो हर बरसात में अचानक उसकी जिंदगी में आ जाती थी—नैना।

     

    पहली बार वह उसे पाँच साल पहले सावन की पहली बारिश में मिला था। आरव अस्सी घाट पर भीगता हुआ खड़ा था, तभी उसने देखा—सफेद सलवार में एक लड़की, हाथों में चूड़ियाँ, बालों से टपकती बूंदें, और चेहरे पर अजीब सी मुस्कान। वह जैसे बारिश को महसूस नहीं कर रही थी, बल्कि बारिश उसके अंदर उतर रही थी।

     

    “तुम भीग क्यों रहे हो?” नैना ने पूछा था।

     

    आरव ने हंसते हुए जवाब दिया था, “क्योंकि बारिश रुकने का इंतजार करना मुझे पसंद नहीं।”

     

    “और मुझे बारिश में खो जाना पसंद है,” उसने कहा था।

     

    उस दिन दोनों घंटों साथ बैठे रहे। बातें खत्म ही नहीं हो रही थीं। जैसे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों। लेकिन शाम ढलते-ढलते, जब आरव ने उसका नंबर माँगा, नैना मुस्कुरा कर चली गई। बस इतना कहा—“अगर किस्मत हुई, तो अगले बरस मिलेंगे।”

     

    आरव को लगा था यह बस एक अजीब सी मुलाकात थी, जो खत्म हो गई। लेकिन अगले साल, ठीक उसी दिन, उसी जगह… नैना फिर मिल गई।

     

    “तुम आ गए,” उसने कहा।

     

    “तुम भी,” आरव ने जवाब दिया।

     

    उस दिन भी वही हुआ—लंबी बातें, हंसी, चाय, और फिर विदाई। कोई नंबर नहीं, कोई वादा नहीं। बस एक उम्मीद—“अबके बरस फिर मिलेंगे।”

     

    इस तरह चार साल बीत गए। हर साल सावन में वे मिलते, प्यार थोड़ा और गहरा होता, लेकिन कभी किसी ने इज़हार नहीं किया। जैसे दोनों को डर हो कि इज़हार करते ही यह जादू खत्म हो जाएगा।

     

    लेकिन पाँचवें साल कुछ बदल गया था।

     

    इस बार आरव ने तय कर लिया था—वह नैना को जाने नहीं देगा। वह उसे बताएगा कि वह उससे प्यार करता है, कि वह हर साल सिर्फ उसी के लिए जीता है, कि उसकी जिंदगी अब इन बरसाती मुलाकातों से कहीं ज़्यादा चाहती है।

     

    सावन की पहली बारिश हुई, और आरव अस्सी घाट पर पहले से खड़ा था। दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। हर आती-जाती लड़की में उसे नैना दिख रही थी। लेकिन वह नहीं आई।

     

    घंटे बीत गए। बारिश तेज़ हो गई। घाट खाली होने लगा। आरव का दिल टूटने लगा।

     

    “शायद इस बार किस्मत नहीं थी…” उसने खुद से कहा।

     

    वह जाने ही वाला था कि पीछे से वही आवाज़ आई—“इतनी जल्दी हार मान गए?”

     

    आरव पलटा। नैना थी। भीगी हुई, मुस्कुराती हुई… लेकिन इस बार उसकी आँखों में कुछ अलग था—जैसे कोई दर्द, कोई झिझक।

     

    “तुम आई क्यों नहीं?” आरव ने शिकायत की।

     

    “आई तो हूँ,” उसने धीरे से कहा, “बस थोड़ी देर हो गई।”

     

    दोनों फिर साथ बैठे। लेकिन इस बार बातचीत में वो पुरानी हल्कापन नहीं था। कुछ अनकहा, कुछ अधूरा सा हवा में तैर रहा था।

     

    आखिरकार, आरव ने हिम्मत जुटाई—“नैना, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।”

     

    “मत कहो,” उसने तुरंत कहा।

     

    “क्यों?”

     

    “क्योंकि अगर तुमने कह दिया, तो शायद हम फिर कभी नहीं मिल पाएंगे।”

     

    आरव चुप हो गया। “क्या मतलब?”

     

    नैना ने गहरी सांस ली। “हर साल मैं यहाँ इसलिए आती थी क्योंकि मुझे लगता था कि कुछ चीजें अधूरी ही खूबसूरत होती हैं। अगर हम इन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगे, तो ये टूट जाएंगी।”

     

    “लेकिन मैं अधूरा नहीं रहना चाहता,” आरव ने कहा। “मैं तुम्हारे साथ पूरा होना चाहता हूँ।”

     

    नैना की आँखों में आँसू आ गए। “तुम समझ नहीं रहे…”

     

    “तो समझाओ,” आरव ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा। “इस बार मैं तुम्हें ऐसे नहीं जाने दूंगा।”

     

    कुछ पल की खामोशी के बाद, नैना ने कहा—“मैं हर साल इसलिए आती थी क्योंकि मैं खुद से भाग रही थी। मेरी शादी तय हो चुकी थी… पाँच साल पहले ही।”

     

    आरव का दिल जैसे थम गया। “क्या?”

     

    “हाँ,” नैना ने सिर झुका लिया। “मैं हर साल यहाँ आती थी, क्योंकि तुम्हारे साथ वो जिंदगी जी पाती थी, जो मेरी नहीं थी।”

     

    “और अब?” आरव ने कांपती आवाज़ में पूछा।

     

    “अब मेरी शादी अगले महीने है,” उसने कहा।

     

    बारिश और तेज़ हो गई। जैसे आसमान भी इस कहानी का दर्द महसूस कर रहा हो।

     

    आरव ने कुछ देर तक कुछ नहीं कहा। फिर धीरे से बोला—“क्या तुम खुश हो?”

     

    नैना चुप रही।

     

    “सच-सच बताओ,” आरव ने ज़ोर दिया।

     

    उसकी आँखों से आँसू बह निकले। “नहीं।”

     

    “तो फिर ये शादी क्यों?” आरव ने पूछा।

     

    “क्योंकि मैंने कभी हिम्मत नहीं की,” उसने कहा। “मैंने कभी अपने दिल की नहीं सुनी।”

     

    आरव ने उसका हाथ कसकर पकड़ा। “तो अब सुनो। अबके बरस, हम इस कहानी को अधूरा नहीं छोड़ेंगे।”

     

    “लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं है,” नैना ने कहा।

     

    “कुछ भी आसान नहीं होता,” आरव मुस्कुराया, “लेकिन प्यार अगर सच्चा हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।”

     

    उस रात, दोनों ने बहुत देर तक बातें कीं। डर, उम्मीदें, सपने—सब कुछ सामने रख दिया। और पहली बार, उन्होंने अपने प्यार को नाम दिया।

     

    अगले कुछ दिन कठिन थे। नैना ने अपने परिवार से बात की। आँसू, गुस्सा, सवाल—सब कुछ हुआ। लेकिन इस बार, वह पीछे नहीं हटी।

     

    “मैं अपनी जिंदगी खुद चुनना चाहती हूँ,” उसने दृढ़ता से कहा।

     

    आरव भी उसके साथ खड़ा रहा। हर मुश्किल में, हर डर में।

     

    और फिर, एक दिन… सब बदल गया।

     

    नैना के परिवार ने आखिरकार उसकी बात मान ली। शायद उन्होंने उसकी आँखों में सच्चाई देख ली थी, या शायद उन्होंने समझ लिया था कि प्यार को रोका नहीं जा सकता।

     

    सावन की आखिरी बारिश थी। अस्सी घाट फिर भीग रहा था। लेकिन इस बार, कहानी अलग थी।

     

    नैना लाल साड़ी में थी, और आरव उसके सामने खड़ा था—हाथों में वरमाला।

     

    “तो अबके बरस…?” आरव ने मुस्कुराते हुए पूछा।

     

    “अबके बरस,” नैना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “हमेशा के लिए।”

     

    दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। बारिश उनके चारों ओर नाच रही थी, जैसे आशीर्वाद दे रही हो।

     

    “तुम्हें पता है,” आरव ने धीरे से कहा, “मुझे हमेशा लगता था कि बारिश हमें मिलाने के लिए आती है।”

     

    “और अब?” नैना ने पूछा।

     

    “अब लगता है,” उसने उसका हाथ थामते हुए कहा, “बारिश हमारी कहानी का हिस्सा बन गई है।”

     

    नैना मुस्कुरा दी। “शायद इसलिए, क्योंकि हमने इस बार उसे अधूरा नहीं छोड़ा।”

     

    गंगा के किनारे, बारिश की बूंदों के बीच, दो दिल आखिरकार एक हो गए।

     

    और उस दिन के बाद, हर सावन सिर्फ एक मौसम नहीं रहा—वह उनकी प्रेम कहानी का उत्सव बन गया।

     

    अबके बरस, उन्होंने सिर्फ एक-दूसरे को नहीं पाया… बल्कि अपनी पूरी जिंदगी पा ली।

  • 💞💞प्यार का नशा.. 💞💞पार्ट 5

    💞💞प्यार का नशा.. 💞💞पार्ट 5

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    अमानत, ” नहीं अंकल ऐसा मत कहिये मे आपका एक एक रुपया दे दूंगी बस कुछ समय और दे दीजिये मुझे बस काम मिलने ही वाला है आप मेरी बात को समझने की कोशिश कीजिये, आप यहाँ से निकाल देंगे तो मे कहा जाउंगी pls अंकल ऐसा मत करिये!”

    मकान मलिक, ” मे तो ऐसा ही करूँगा बहुत झेल लोया तुम दोनों का नतक अब अभी के अभी निकलो मेरे घर से पेसो की तो उम्मीद ही नहीं है तुम फातिचरों से निकलो मेरे घर से,

        ये कहते हुए मकान मालिक अपन कुछ गुंडों को घर खाली करवाने का इशारा करता है,

    अमानत बार बार हाथ जोरती है की उसे कुछ समय दे दे वो कुछ न कुछ कर लेगी उसे जॉब मिल जायेगा पर उसकी एक भी नहीं सुनी जाती है,

    आखिर मे अमानत और उसकी छोटे से भाई व्योम लो सामान के साथ बाहर फेक दिया जाता है और वाह से जाने लो कह दिया जाता है,

    अमानत के पास और कोई भी ऑप्शन नहीं रहता है तो उसे जाना ही परता है पर कहा जाय क्या करें उसे कुछ भी समझ नहीं आता है, वो अपने भाई के सामने ये सब नहीं दिखा सकती थी इसीलिए वो कहती है की वो इससे भी अच्छे घर मे जाएगी और सब ठीक हो जायेगा व्योम को सब कुछ दिलवाने का उसका जो सपना था वो एक ही पल मे टूट जाता है |”

    बिच सरक पर चलते हुए उसके भाई को प्यास लग जाती है, अमानत के पास बोटोल नहीं रहता है जिस कारण ओ परेशान हो जाती है और यहाँ वहा ढूंढती है, तभी उसे एक ठेले वाला दिखाई देता है और वो उससे पानी लेके अपने भाई व्योन को पिलाती है |”

    अमानत, ” तू ठीक है न व्योम? “

    व्योम, ” हाँ दीदी मे ठीक हु आप जब तक हो मुझे क्या होगा पर मे आपके लिए बोझ सा हो गया हु न आपको मेरे लिए कितना परेशान होना परता है न पता नहीं मे कब आपकी मदद के लिए बनूँगा सायद अंकल न सही कहते है मे न कामचोर हु तभी तो मे आपके दूँखों का कारण बन गया हु |”

    अमानत, ” नहीं नहीं व्योम ऐसा कुछ भी नहीं है तू ये सब मत सोच देख भगवान जब एक दरवाजा बंद करते है न तो उन्होंने पहले ही दूसरा दरवाजा सोच रखा होता है, तू देखना सब सही हो जायेगा तू बस अपने मन से न ये सबा वहम निकल दे समझ!”

    व्योम, ” आप सच कह रही है दीदी!”

    अमानत, ” तो ज्या तेरी बहन क्या तुझसे झूठ कहेगी भला!!

    अमानत अपने भाई को समझा देती है पर उसे खुद कुछ समझ नहीं आता है की आखिर अब करें क्या,

    अमानत, ” अच्छा रुक तू यही पर मे तेरे लिए कुछ खाने को लाती हु तुझे भूख लग गया होगा न,

    व्योम दीदी की बात पर सर हिला देता है क्युकी उसे सच मे भूख लग गयी थी, अमानत जैसे ही कुछ खाने को लाने के लिए ठेले के पास जाती है की तभी व्योम की नजर सड़क पर परी एक बेलून पर जाता है और वो उसे लेने के लिए बिच सड़क पर चला जाता है |”

    … to be continue…

  • विडियो सबूत

    विडियो सबूत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
    ” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
    राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
    ” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
    शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
    ” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
    रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
    चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
    ” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
    रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
    ” अब क्या किया जाए।”
    चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
    ” मुझे माफ करदो।”
    और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
    ” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
    शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
    ” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
    एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
    पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
    मीटिंग हॉल
    मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
    उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
    ” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
    प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
    ” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
    नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
    ” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
    एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
    ” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
    पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
    ” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
    एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
    एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
    ” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
    प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

  • मित्र…

    मित्र…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जिसका जैसा “चरित्र” होता है

    उसका वैसा ही “मित्र” होता है

    ”शुद्धता” होती है “विचारों” में

    “आदमी” कब “पवित्र”होता है

    फूलो में भी कीड़े पाये जाते हैं..,

    पत्थरों में भी हीरे पाये जाते हैं..

    बुराई को छोड़कर

    अच्छाई देखिये तो सही..,

    नर में भी नारायण पाये जाते हैं..

    मैं आप के साथ हूँ, ये मेरा भाग्य है

    पर आप मेरे साथ है, यह मेरा सौभाग्य है मित्र… ✍️✍️

  • सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

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    🎧 कहानी सुनें

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    अर्ज किया है,,

    बिछड़े हुए लोग जब बुरे दौर से मिलेंगे 

    दर्द जब भी मिलेंगे चारों ओर से मिलेंगे!!

    सुना है बहुत खुश है वो किसी ओर से मिल कर 

    आग तो तब लगेगी जब हम किसी ओर से मिलेंगे… 😎😎

  • मर क्यों नहीं जाते हो…??

    मर क्यों नहीं जाते हो…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    आखिर कह ही डाला उसने

     एक दिन…..

    इस कदर टूटे हो बिखर क्यो 

    नही जाती हो…..??

    कब तक निभाओगे ये 

    दर्द भरी जिंदगी…..??

    किसी रात खामोशी से मर

     क्यो नही जाती हो……?? 😭😭

  • इंसान को इंसान से अलग करता है..

    इंसान को इंसान से अलग करता है..

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बके पास समान आंखें हैं लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं,

    बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है…देखने का नजरिया अपना अपना है वरना हर इंसान गलत ही नहीं होता… ✍️

  • आखिर कौन…??

    आखिर कौन…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    ना दोस्त है ना दुश्मन हैं

      हमसे लड़ता कौन ?

    ना तूफान हैं ना सैलाब हैं

      हमसे डरता कौन ?

    ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं

       हमको पढ़ता कौन ?

     ना साँसे हैं ना धड़कन हैं 

      हम पर मरता कौन ?

  • अच्छे इंसान की पहचान…

    अच्छे इंसान की पहचान…

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    🎧 कहानी सुनें

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    स्त्री की भावनाएं सराय जैसी नहीं हैं

    कि कोई भी आया , रूका और चला गया

    स्त्री की भावनाएं मनमोहक महल जैसी हैं

    जिसमें या तो कोई आ नहीं सकता

    और यदि आ जाए

    तो फिर जीवन भर जा नहीं सकता

    एक औरत में अगर आपको कुछ जानना हैं

    तो मौन को पढ़िए..

    सुन्दरता देखनी हैं

    तो सादगी में ढूंढिए

    और खुशी देखनी हैं

    तो बंधनों से मुक्त करिये ….इससे बेहतर आप किसी स्त्री को समझ नहीं सकते. इसीलिए आप एक अच्छे स्त्री की संतान  है इसका पता बस ऐसे ही लग सकता है की आप दूसरे स्त्री को कितना समझते है और उसे कितना सम्मान देते है.. आपके कर्म ही आपको ऊंचा उठती है इसीलिए ज़ब भी कुछ कीजिये एक बार खुद से जरूर पूछिए क्या ये सही है.. और फिर ज़ब आपके अंदर से जवाब आये तो वो काम बिना डरे कर दीजिये.. पर इस बात का खास ध्यान रखे की आपके कारण किसी को तकलीफ ना हो.. क्योकि इस दुनिया मे गम देना आसान है पर किसी को ख़ुशी देना बहुत मुश्किल…तो किसी के चेहरे की ख़ुशी की वजह बने ना की उनकी तकलीफो की…✍️✍️