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  • विडियो सबूत

    विडियो सबूत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
    ” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
    राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
    ” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
    शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
    ” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
    रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
    चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
    ” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
    रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
    ” अब क्या किया जाए।”
    चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
    ” मुझे माफ करदो।”
    और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
    ” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
    शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
    ” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
    एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
    पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
    मीटिंग हॉल
    मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
    उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
    ” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
    प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
    ” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
    नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
    ” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
    एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
    ” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
    पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
    ” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
    एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
    एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
    ” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
    प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

  • मित्र…

    मित्र…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जिसका जैसा “चरित्र” होता है

    उसका वैसा ही “मित्र” होता है

    ”शुद्धता” होती है “विचारों” में

    “आदमी” कब “पवित्र”होता है

    फूलो में भी कीड़े पाये जाते हैं..,

    पत्थरों में भी हीरे पाये जाते हैं..

    बुराई को छोड़कर

    अच्छाई देखिये तो सही..,

    नर में भी नारायण पाये जाते हैं..

    मैं आप के साथ हूँ, ये मेरा भाग्य है

    पर आप मेरे साथ है, यह मेरा सौभाग्य है मित्र… ✍️✍️

  • सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अर्ज किया है,,

    बिछड़े हुए लोग जब बुरे दौर से मिलेंगे 

    दर्द जब भी मिलेंगे चारों ओर से मिलेंगे!!

    सुना है बहुत खुश है वो किसी ओर से मिल कर 

    आग तो तब लगेगी जब हम किसी ओर से मिलेंगे… 😎😎

  • मर क्यों नहीं जाते हो…??

    मर क्यों नहीं जाते हो…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    आखिर कह ही डाला उसने

     एक दिन…..

    इस कदर टूटे हो बिखर क्यो 

    नही जाती हो…..??

    कब तक निभाओगे ये 

    दर्द भरी जिंदगी…..??

    किसी रात खामोशी से मर

     क्यो नही जाती हो……?? 😭😭

  • इंसान को इंसान से अलग करता है..

    इंसान को इंसान से अलग करता है..

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    बके पास समान आंखें हैं लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं,

    बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है…देखने का नजरिया अपना अपना है वरना हर इंसान गलत ही नहीं होता… ✍️

  • आखिर कौन…??

    आखिर कौन…??

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    ना दोस्त है ना दुश्मन हैं

      हमसे लड़ता कौन ?

    ना तूफान हैं ना सैलाब हैं

      हमसे डरता कौन ?

    ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं

       हमको पढ़ता कौन ?

     ना साँसे हैं ना धड़कन हैं 

      हम पर मरता कौन ?

  • अच्छे इंसान की पहचान…

    अच्छे इंसान की पहचान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    स्त्री की भावनाएं सराय जैसी नहीं हैं

    कि कोई भी आया , रूका और चला गया

    स्त्री की भावनाएं मनमोहक महल जैसी हैं

    जिसमें या तो कोई आ नहीं सकता

    और यदि आ जाए

    तो फिर जीवन भर जा नहीं सकता

    एक औरत में अगर आपको कुछ जानना हैं

    तो मौन को पढ़िए..

    सुन्दरता देखनी हैं

    तो सादगी में ढूंढिए

    और खुशी देखनी हैं

    तो बंधनों से मुक्त करिये ….इससे बेहतर आप किसी स्त्री को समझ नहीं सकते. इसीलिए आप एक अच्छे स्त्री की संतान  है इसका पता बस ऐसे ही लग सकता है की आप दूसरे स्त्री को कितना समझते है और उसे कितना सम्मान देते है.. आपके कर्म ही आपको ऊंचा उठती है इसीलिए ज़ब भी कुछ कीजिये एक बार खुद से जरूर पूछिए क्या ये सही है.. और फिर ज़ब आपके अंदर से जवाब आये तो वो काम बिना डरे कर दीजिये.. पर इस बात का खास ध्यान रखे की आपके कारण किसी को तकलीफ ना हो.. क्योकि इस दुनिया मे गम देना आसान है पर किसी को ख़ुशी देना बहुत मुश्किल…तो किसी के चेहरे की ख़ुशी की वजह बने ना की उनकी तकलीफो की…✍️✍️

     

  • 💞💞प्यार का नशा…💞💞 पार्ट 4

    💞💞प्यार का नशा…💞💞 पार्ट 4

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    •  

    रिशाल के चेहरे पर थकान के निशान कम होने लगते हैं और वह आराम से बैठ जाता है। वरुणा अग्निहोत्री की देखभाल से वह अपने तनाव को भूलने लगता है।

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “देखो, बेटा। माँ का प्यार कितना अच्छा होता है। तुम्हें कभी भी अपनी माँ की देखभाल की जरूरत नहीं होती।”

    रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “हाँ, माँ। तुम सबसे अच्छी माँ हो।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और मुस्कराती हैं। वह रिशाल के माथे को चूम लेती हैं और कहती हैं, “मेरा बेटा मुझे सबसे प्यारा है।” सबका ख्याल रहता है इसको और सबकी फ़िक्र भी रहती है, रभी तो मेरा बेटा सबसे अच्छा है इस दुनिया मे जो किसी के आँखों मे आंसू भी नहीं आने देता है |”

    माँ की बाते सुन कर RA को अमानत के आंसू याद आ जाते है उसे याद आ जाता है की आज ही तो वो किसी के दर्द के कारण बना था |” 

    रिशाल को अपनी माँ का प्यार और लाड मिलती है, लेकिन उसका मन जो अमानत के आँखों के आंसू को सोचता है, वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और प्यार से पूछती हैं, “बेटा, आखिर बात क्या है? तुम इतना टेंशन में क्यों लग रहे हो? तुम्हारी माँ हूँ, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो।”

    रिशाल: (हिचकिचाते हुए) “कुछ नहीं, माँ। बस काम की तनाव है।”

    वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “नहीं, बेटा। तुम मुझे नहीं बता सकते कि यह सिर्फ काम की तनाव है। तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि कुछ और है। तुम्हारे दिल में क्या है, बताओ मुझे।”

    रिशाल: (माँ की बात सुनकर) “माँ… मैं नहीं जानता कि मैं क्या कहूँ।”

    वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “बेटा, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुम्हें कभी भी निराश नहीं करूँगी। तुम्हारे लिए मैं हमेशा यहाँ हूँ।”

    रिशाल वरुणा अग्निहोत्री की बात सुनकर अपने दिल की बात बताने की सोचता है, लेकिन वह अभी भी हिचकिचाता है…

    क्या Ra बता पायेगा अपने माँ को अपने दिल मे हो रही इस हलचल को??

    क्या वरुणा अग्निहोत्री करेंगी सपोर्ट अमानत को??

    क्या Ra मागेगा माफ़ी अमानत से??

    क्या होगा अमानत का रिएक्शन?? 

    ( मकान मालिक), अमानत के किराये का घर, सुबह के 10:00 बजे,

    मकान मालिक, ” दरवाजा खोलो, कामचोरो… अभी तक क्या सोये हुए हो… मेरा पैसा दो कब से आ आकर थक चूका हु या तो पैसा दो या फिर अपने कामचोर भाई को लेके यहां से दफा हो जाओ!”

    अमानत दरवाजे पर आवाज़ सुन अपने भाई को कहती है, ” तू फ़िक्र ना कर सब सही हो जायेगा ये अंकल तो ऐसे ही कहते है हमेशा तुम ये खाना खत्म कर और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ मे बात कर के आती हु ठीक है |”

    व्योम, ” ठीक है, दीदी,

    अमानत दरवाजा खोल बाहर आ जाती है और दरवाजे को लगा देती है,

    मकान मालिक, ” ये लो आ गयी कामचोर भाई की बहन जिसे करना तो कुछ नहीं है बस बहाना जितना बनवा लो आज न कोई भी बहाना नहीं चलेगा मुझे मेरा किराया चाहिए तो चाहिए वरना ये बोरिया बिस्तर लेके यहां से दफा हो जाओ अभी के अभी मुझे दूसरा किरायदार मिल गया है जो तुमसे ज़्यदा ही पैसे देने को तैयार है, और समय पर भी देने को तैयार है समझी ..

    .. to be continue…

  • सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    कहानी के इस भाग में एक रहस्य से पर्दा उठता है। जिसका इंतजार लगभग सभी को रहता है। चलिए कहानी की ओर चलें…
    ” अब रोने की बारी उनकी है। जिसने तुम्हें रूलाने की कोशिश की है । अब तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है। “
    शीला बोलती हुई,राधा को ढांढस बंधा रही थी। शीला और चांदनी दोनो मिलकर  राधा और रूपा को रस्सी के बंधन से आजाद कर चुकी थी । चारो सहेलियां एक दुसरे से आपस में लिपट कर रोने लगी थी। अब इन सभी के जिन्दगी में जो दु:ख के बादल छाये थे वो अब छट चुके थे। इन सबके जिवन में तुफान लाने वाला सख्श धराशाई होकर बेसुध फर्श पर परा था।
    “अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो, हमें यहां से चलना चाहिए।”
    बोलकर चांदनी बारी बारी से तीनो के तरफ देखती है।
    ” हां हमें चलना चाहिए इससे पहले की कोई और प्रोबलम खड़ा हो हमें यहां से निकल जाना चाहिए।”
    शीला भी अपने आप को शांत करते हुए आंख से आंसू के बुंद को साफ करते हुए बोली थी ।
    ” हां दीदी जायेंगे पर इसे ऐसे छोड़कर नहीं इसको इसके किए की सजा देने के बाद।”
    रूपा कठोर होते हुए बोली थी। राधा को बहुत बरा सदमा लगा था। वो अभी भी बहुत डरी हुई थी। उसे अभी भी यकिन नही हो रहा था की सब कुछ नॉर्मल हो गया है। और वो मन ही मन अपने आप को कोस भी रही थी। की ये जो कुछ भी हुआ है, सब उसी के वजह से हुआ है। और वो उसी के वजह से आज रूपा और चांदनी शीला के जान का भी खतरा हो सकता था।
    ” क्या इसको ऐसे हीं छोड़ दोगे दीदी आप लोग?”
    शीला और चांदनी के तरफ देखकर कमल के तरफ अपनी उंगली से इशारा करते हुए राधा बोली थी। और एक बार फीर राधा के आंख से आंसू बहने लगे थे।
    ” नहीं दीदी, हम लोग इस कमीने को छोड़ेंगे नहीं। बल्कि पुलिस में देंगे।”
    रूपा राधा के आंख से आंसू पोंछते हुए बोली थी। रूपा की बात सुनकर सभी रूपा को आशचर्य से देखने लगे थे। तीनो के मन में एक साथ एक बात चली थी। की रूपा कितनी समझदार है, वो कितनी समझदारी की बात कर रही है। पर राधा रूपा को समझदार के साथ साथ बहुत हिम्मत वाली भी मानने लगी थी। आज जिस तरह से रूपा कमल के साथ डटकर मुकाबला की थी। उसको कमल से मार भी खानी परी थी। पर वो जिस तरह से अपना हिम्मत नहीं हारी थी। रूपा की यही सब गुण राधा के नजर में रूपा को महान बना रही थी।
    अभी उधर ये सब चारो सहेलियों में चल हीं रहा था। कि इधर धीरे धीरे  कमल के हांथ पैर हिलने लग गया था। उसको होस आने लगा था। कमल का आंख धीरे धीरे खुलता है। कमल का हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं था। उसके बदन में अभी भी बहुत अ सहनीय दर्द हो रहा था। उसके मुंह से बहुत सारा खून भी बह गया था। ज्यादा खून बह जाने के कारण हीं कमल को होश नहीं आ पाया था। जब कमल का आंख खुलता है। तो वो नजर घुमाकर सभी लड़कियों के तरफ देखता है। वो कुछ बोलना चाहता है, पर वो कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। उसके शरीर के अंदर इतनी भी शक्ती नहीं बच पाई थी। की वो कुछ बोल भी पाये। यही सब सोचकर कमल अपने आप को बहुत लाचार और कमजोर महसूस कर रहा था।
    ” इसको मीटिंग हॉल में लेकर चलते हैं। वहां ले जा कर प्रिंसिपल मैम के हवाले कर देते हैं। अब वही  इसके साथ जो करना होगा करेंगे।”
    शीला अपनी समझदारी से सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” दीदी पुलिस को कॉल करके बुला लेते हैं ना, इसको पुलिस के हवाले कर देंगे।”
    बोल कर रूपा शीला को प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी थी।
    ” नही इसको प्रिंसिपल मैम के पास लेकर चलते हैं।”
    शीला रूपा को जबाव देते हुए बोली थी।
    ” नहीं दीदी इस भेड़िये को खुला छोड़ना ठीक नहीं होगा।”
    रूपा शीला से बोली थी। कमल को होश में आने के बाद उसके दिमाग में एक हीं बात राऊंड मारते हुए चल रहा था। की ये दोनो क्लास रूम में कैसे आया था। और आकर उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ दिया था। कमल का बात सही भी था। अगर उस टाइम शीला और चांदनी आ कर, कमल पर अटैक नहीं किया होता तो अभी सारा सिचुएशन उसके अंडर में होता। और शीला और चांदनी से उसको इतना मार नहीं पड़ा होता तो वो,अभी फर्श पर नहीं पड़ा होता।
    ” तुम दोनो अंदर कैसे आए?”
    कमल दर्द से कराहते हुए हिम्मत करते हुए शीला और चांदनी से अपनी बात पुछ हीं लिया था। ये आवाज चारो सहेलियों के कान में जैसे ही गई सभी आशचर्य से उस आती हुई आवाज के तरफ मुड़कर देखी। सभी सहेलियों के चेहरे के हाव भाव एक दम से बदल गये थे। सभी एक्शन मोड में आ गयी थी। सभी एक साथ एक बार फिर से कमल पर अटैक करने चल पड़ी थी। यह सीन देखकर कमल के होश उड़ गये थे। डर के मारे उसके पसीने छुटने लगे थे। वो सोचने लगा अब उसके शरीर में और मार बर्दास्त करने की छमता नहीं है। अब अगर और मार पड़ा तो वो जिन्दा बच नहीं पायेगा। इसी लिए अब वो दिमाग से काम लेना चाहा। कमल हिम्मत करके उठकर बैठ गया था।
    ” तो तुम्हें जानना है। की हम क्लास रूम के अंदर कैसे आए?”
    चांदनी कमल पर चीखते हुए जोर से बोली थी।
    ” हां इसे बता हीं देते हैं। की हम दोनो क्लास रूम के अंदर कैसे आए।”
    शीला चांदनी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली थी। हालाकी राधा और रूपा भी कमल के इस सवाल का जबाव जानना चाहती थी। वो दोनो भी अपनी दीदी के तरफ देखने लगी थी। सभी चलकर कमल के पास पहूंच गये थे। रूपा का लात कमल के पीठ पर पड़ता है। जो कमल अभी अभी उठकर बैठा हीं था। एक भारी चीख कमल के मुंह से निकल जाता है।
    ” पहले इसको इसके सवाल का जबाव सुनने दो बहन, फिर उसके बाद तुम इस पर अपना बॉक्सिंग का प्रेक्टिस कर लेना।”
    शीला रूपा को रोकते हुए बोली थी। सुनकर रूपा रूक जाती है।
    “इसमें तुम्हारी हीं बेवकूफी है भेड़िए।”
    चांदनी गुस्से से दांत पीस कर कमल के तरफ मुड़कर बोली थी।
    ” मैं चाहती तो, तुम्हें वहीं सबक सीखा सकती थी। जब तुम्हें रस्सी और डंडा लिये क्लास रूम के तरफ आते हुए देखी थी। और छुपकर तुम्हारा पीछा करने लगी थी।”
    बीना रूके शीला बोलते रही।
    ” .मैं जानना चाहती थी। की आखिर बात क्या है। तुम रस्सी और डंडे लेकर क्या करने वाले हो। और सोने पे सुहागा तो तब हुआ, जब तुम्हारा दोनो हांथ खाली नहीं होने के वजह से तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया। इसी बात का फायदा हमने उठायी और दोनो भीतर आके दरवाजे बंद कर ली थी। ताकी तुम्हें भी बचकर भागने नहीं दूं।”
    चांदनी ने कमल को पुरी बात बतायी थी ।
    ” दीदी जब आप पहले हीं आ गईं थी तो, आपने हमें पहले हीं क्यों नहीं बचाई थी। आप अपनी आंखों के सामने हमें रस्सी से बंधते और पिटते हुए देखी थी।”
    रूपा बोलकर शीला और चांदनी के तरफ सवालिया नजर से देखने लगी थी।
    ” इसका मतलब, दीदी मैं आपके आंखों के सामने बेहोश हुई थी।”
    राधा भी शीला और चांदनी से सवाल की थी। इस पर शीला और चांदनी कुछ भी नहीं बोलती है। बस दोनो अपना शर हां में हिला देती है।
    ये सुनकर कमल के पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी थी। उसमे अब हिम्मत भी नहीं थी। की वो उन सब से फाइट कर सके तो उसने अपनी जान बचाने का एक तरीका निकाला जो एक हारा हुआ हर इंसान लगभग यही करता है। और कमल ने भी वही किया था। वो झुक कर शीला के पैर पकर लिया था।
    ” मुझे माफ कर दो,मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है। प्लीज मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो।”
    कमल शीला के पैरों में गिरकर नाक रगड़ते हुए बोला था।
    ” कमीने सुअर की औलाद, तुम्हें माफ कर दूं। निकल गयी सारी हेकड़ी, अब रेप नहीं करेगा मेरी दीदी का हां।”
    रूपा गुस्से में अपनी आंखे लाल करते हुए कमल से बोली थी । और धमा धम दो लात उसको रसीद करदी थी। कमल रूपा के पैर की चोट खा कर पुरी तरह से हिल गया था। अब उसको समझ आने लगा था। की उसकी ग़लती छोटी नहीं है।
    ” अब पछतावा आ रहा है। अपने किये पर पहले ये क्यों नहीं सोचा अपना अंजाम ये सब करने से पहले।”
    चांदनी जो राधा के कंधे में अपनी बांह डाली हुई थी। कमल से  बोली थी।
    “माफी तो तुम्हें मिलने से रही, पर तुम्हे जेल जरूर मिलेगी।”
    रूपा कमल को बाल से खींचते हुए बोली थी।
    ” अब इसके साथ बहस करने से, कोई फायदा नही है दीदी।”
    कहानी और भी मजेदार होने वाली है ! पढिए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”

    रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। 

    लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”

    रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”

    रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,

    वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”

    रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”

    वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”

    रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”

    लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं, 

    रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”

    रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…

    वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।

    .. to be continue….