जादुई जंगल का ताकतवर पेड़
बहुत दूर, ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों के बीच एक ऐसा जंगल था, जिसका नाम था मायावी वन।
कहा जाता था कि यह कोई साधारण जंगल नहीं था। वहाँ पेड़ चलते थे, नदियाँ अपना रास्ता बदल लेती थीं और रात के समय आसमान में ऐसे सितारे दिखाई देते थे जो आम दुनिया में कभी नहीं दिखते थे।
लेकिन उस जंगल की सबसे बड़ी पहचान एक पेड़ था।
उसका नाम था अमरवृक्ष।
लोग कहते थे कि अगर कोई इंसान उस पेड़ तक पहुँचकर उसे अपने हाथों से छू ले, तो उसके अंदर ऐसी शक्ति आ जाती थी कि वह दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बन सकता था।
वह हवा को अपने इशारे पर मोड़ सकता था, पानी को रोक सकता था और अपनी ताकत से बड़े-बड़े पत्थर तक उठा सकता था।
लेकिन समस्या यह थी कि आज तक कोई उस पेड़ तक पहुँच ही नहीं पाया था।
कई राजा, सैनिक और जादूगर उसे खोजने जंगल में गए थे।
कुछ वापस लौट आए, लेकिन वे पेड़ तक नहीं पहुँच सके।
और कुछ तो कभी वापस ही नहीं आए।
धीरे-धीरे लोगों ने मान लिया कि अमरवृक्ष सिर्फ एक कहानी है।
लेकिन पहाड़ों के पास रहने वाला एक सत्रह साल का लड़का सोहन इन बातों पर विश्वास करता था।
उसके पिता बचपन से उसे उस पेड़ की कहानी सुनाते आए थे।
एक दिन सोहन ने पूछा, “पिताजी, अगर वह पेड़ सच में इतना ताकतवर है तो किसी ने उसे देखा क्यों नहीं?”
उसके पिता ने कहा, “क्योंकि वह पेड़ ताकत हर किसी को नहीं देता।”
“तो किसे देता है?”
पिता कुछ देर चुप रहे।
फिर बोले, “जिसके दिल में ताकत पाने की लालच नहीं होती।”
सोहन को यह बात समझ नहीं आई।
“लेकिन कोई उस पेड़ को ढूंढेगा ही क्यों अगर उसे ताकत नहीं चाहिए?”
पिता मुस्कुराए।
“यही तो अमरवृक्ष की सबसे बड़ी पहेली है।”
कुछ साल बाद सोहन के पिता अचानक गायब हो गए।
उनके कमरे में सिर्फ एक पुराना नक्शा मिला।
नक्शे पर मायावी वन बना था और उसके बीच लाल स्याही से एक निशान लगाया गया था।
सोहन समझ गया कि उसके पिता अमरवृक्ष की तलाश में गए थे।
उसने उसी दिन जंगल जाने का फैसला कर लिया।
अगली सुबह वह अपना छोटा सा बैग लेकर मायावी वन की तरफ निकल पड़ा।
जंगल के अंदर जाते ही उसे महसूस हुआ कि यहाँ कुछ अलग था।
हवा बिल्कुल शांत थी।
फिर अचानक एक पेड़ की शाखा उसके सामने आकर रास्ता रोकने लगी।
सोहन पीछे हट गया।
शाखा धीरे-धीरे वापस ऊपर चली गई।
“तो कहानी सच है,” सोहन ने खुद से कहा।
वह आगे बढ़ता गया।
कुछ दूर जाने के बाद उसे तीन रास्ते दिखाई दिए।
नक्शे पर भी तीन रास्ते बने थे।
पहले रास्ते के ऊपर लिखा था जो सबसे आसान दिखे, वही सबसे खतरनाक है।”
दूसरे रास्ते के ऊपर लिखा था“जो डराए, जरूरी नहीं कि वह दुश्मन हो।”
और तीसरे रास्ते पर लिखा था“जिसे चुनोगे, वही तुम्हें बदलेगा।”
सोहन काफी देर तक तीनों रास्तों को देखता रहा।
आखिर उसने दूसरा रास्ता चुना।
जैसे ही वह आगे बढ़ा, जंगल अचानक अंधेरा हो गया।
उसके सामने एक विशाल काला भेड़िया आकर खड़ा हो गया।
सोहन का दिल तेजी से धड़कने लगा।
भेड़िया गुर्राया।
सोहन ने हाथ में पकड़ी लकड़ी कसकर पकड़ ली।
लेकिन भेड़िया अचानक मुड़ा और आगे चलने लगा।
सोहन को अपने पिता की बात याद आई—
“जो डराए, जरूरी नहीं कि वह दुश्मन हो।”
वह भेड़िए के पीछे चल पड़ा।
कुछ दूर जाकर भेड़िया एक चट्टान के पास रुका और गायब हो गया।
वहाँ पत्थर पर एक छोटा सा चिन्ह बना था।
सोहन ने नक्शे को उससे मिलाया।
“ये रास्ता सही है!”
वह आगे बढ़ा।
लेकिन तभी जमीन हिलने लगी।
पेड़ों के बीच से आवाज आई—
“वापस चले जाओ…”
सोहन रुक गया।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं आया।
फिर वही आवाज आई—
“तुम्हें ताकत चाहिए… इसलिए तुम यहाँ तक आए हो।”
सोहन ने कहा, “नहीं!”
जंगल में हँसी गूँज उठी।
“हर इंसान ताकत चाहता है।”
सोहन कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा, “मुझे ताकत चाहिए… लेकिन खुद के लिए नहीं।”
जंगल अचानक शांत हो गया।
सोहन ने आगे कहा
“मेरे पिता को इस जंगल ने मुझसे छीन लिया है। मैं उन्हें ढूंढने आया हूँ। अगर अमरवृक्ष सच में उन्हें जानता है, तो मैं उसके पास जाऊँगा।”
अचानक उसके सामने रास्ता खुल गया।
पेड़ों के बीच से सुनहरी रोशनी आने लगी।
सोहन की आँखें उस रोशनी से चौंधिया गईं।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
और फिर जो उसने देखा, उसे देखकर उसकी सांस रुक गई।
एक विशाल पेड़ उसके सामने खड़ा था।
उसका तना चाँदी जैसा चमक रहा था।
उसकी शाखाएँ आसमान तक फैली थीं और उन पर हजारों सुनहरे पत्ते लगे थे।
हर पत्ता हवा के बिना भी हिल रहा था।
सोहन समझ गय यही अमरवृक्ष था।
वह धीरे-धीरे पेड़ के पास गया।
उसने हाथ आगे बढ़ाया।
लेकिन जैसे ही उसकी उंगलियाँ पेड़ को छूने वाली थीं, सामने अचानक उसके पिता दिखाई दिए।
“सोहन!”
वह खुशी से चिल्लाया।
“पिताजी!”
सोहन उनकी तरफ दौड़ा।
लेकिन पिता धुंध की तरह गायब हो गए।
सोहन समझ गया कि यह पेड़ की परीक्षा थी।
तभी अमरवृक्ष से आवाज आई
“अगर तुम्हें शक्ति मिल जाए, तो तुम सबसे पहले क्या करोगे?”
सोहन ने कहा, “मैं अपने पिता को ढूंढूँगा।”
“और उसके बाद?”
“मैं उन लोगों की मदद करूँगा जिन्हें अपनी रक्षा करने के लिए किसी ताकतवर इंसान की जरूरत है।”
“और अगर तुम्हारे पास दुनिया की सबसे बड़ी ताकत आ जाए?”
सोहन ने कुछ पल सोचा।
फिर बोला
“तो मैं कोशिश करूँगा कि उस ताकत का इस्तेमाल किसी को डराने के लिए न हो।”
पेड़ की शाखाएँ चमकने लगीं।
सुनहरी रोशनी पूरे जंगल में फैल गई।
सोहन ने धीरे से पेड़ को छू लिया।
अचानक उसके शरीर के चारों तरफ तेज हवा घूमने लगी।
जमीन हिलने लगी।
उसके हाथों में चमकती रोशनी दिखाई दी।
उसके अंदर एक ऐसी शक्ति जाग चुकी थी जिसकी कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी।
लेकिन तभी पेड़ ने कहा“तुमने मेरी शक्ति पा ली है।”
सोहन ने आश्चर्य से पूछा, “तो अब मैं दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान हूँ?”
पेड़ ने उत्तर दिया नहीं।”
सोहन चौंक गया।
“क्यों?”
“क्योंकि असली ताकत शरीर में नहीं होती।”
पेड़ की जड़ें अचानक चमकने लगीं।
और जमीन के नीचे से एक रास्ता खुल गया।
सोहन ने नीचे देखा।
वहाँ एक छोटी सी गुफा थी।
गुफा की दीवार पर उसके पिता का नाम लिखा था।
सोहन की आँखें भर आईं।
वह समझ गया कि उसके पिता अभी जीवित हो सकते हैं।
लेकिन तभी पेड़ की आवाज फिर गूँजी“अगर तुम उन्हें बचाना चाहते हो, तो तुम्हें अपनी नई शक्ति की पहली परीक्षा देनी होगी।”
सोहन ने पूछा “कैसी परीक्षा?”
अचानक जंगल के दूसरे छोर से एक भयानक गर्जना सुनाई दी।
पेड़ों के पत्ते कांपने लगे।
सोहन ने पीछे मुड़कर देखा।
अंधेरे के बीच दो विशाल चमकती आँखें दिखाई दे रही थीं।
पेड़ ने कहा“वह इस जंगल का रक्षक है।”
सोहन ने अपनी मुट्ठी बांधी।
अब उसे समझ आ गया था कि अमरवृक्ष तक पहुँचना ही असली मंजिल नहीं थी।
