ना दोस्त है ना दुश्मन हैं
हमसे लड़ता कौन ?
ना तूफान हैं ना सैलाब हैं
हमसे डरता कौन ?
ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं
हमको पढ़ता कौन ?
ना साँसे हैं ना धड़कन हैं
हम पर मरता कौन ?
दिल से निकली हुई जज़्बात ज़िन्दगी में शायरी बनती है।

ना दोस्त है ना दुश्मन हैं
हमसे लड़ता कौन ?
ना तूफान हैं ना सैलाब हैं
हमसे डरता कौन ?
ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं
हमको पढ़ता कौन ?
ना साँसे हैं ना धड़कन हैं
हम पर मरता कौन ?
इस जिंदगी के सफर में
थकान बहुत हैं,
अपनों के अपनों पर यहां
इल्जाम बहुत है,
शिकायतों का दौर देखता हूं तो
थम सा जाता हूं,
लगता है उम्र कम है और
इम्तिहान बहुत है…🥹🥹
प्यार में पागल हुआ हूँ मैं,
दुनिया की राहें भूल गया हूँ मैं,
तेरी मुस्कान की रोशनी में,
अपना हर सवेरा ढूँढ गया हूँ मैं।
तेरी यादों की बारिश में भीगकर,
दिल ने हर दर्द को गीत बना लिया,
तेरे नाम की धड़कन सुनते-सुनते,
मैंने खुद को ही तुझमें सजा लिया।
लोग कहते हैं पागलपन है ये,
पर मुझे तो इबादत सा लगता है,
तेरी एक झलक के लिए ये दिल,
हर पल सजदा करता रहता है।
अगर ये पागलपन ही प्यार है,
तो मुझे ये जुनून मंज़ूर है,
तेरे साथ हो या तेरी यादों में,
मेरा हर लम्हा बस तुझसे भरपूर है। 💖