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श्रेणी: जादुई परियों की कहानी

जादूगरनियां,जादू ,जादुई, परियों की कहानियां, कल्पना की वो दुनियां जहां सपने, उम्मीद एक नई कहानियां बनाते हैं।

  • जिन्न की दास्तान

    जिन्न की दास्तान

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    चलिए एक जिन्न की कहानी गढ़ते हैं — रहस्यमयी, जादुई और थोड़ी भावनात्मक भी।🌌 जिन्न की कहानी: “नीले धुएँ का रहस्य”पुराने किले की तहख़ाने में एक टूटा हुआ दीया पड़ा था। गाँव के बच्चे अक्सर वहाँ खेलने जाते, लेकिन उस दीये को छूने की हिम्मत किसी ने नहीं की।एक दिन मानव नाम का लड़का जिज्ञासा में दीये को उठाता है। जैसे ही उसने उसे रगड़ा, नीले धुएँ का बादल फैल गया और उसमें से एक जिन्न प्रकट हुआ।जिन्न ने कहा —

    “सदियों से मैं इस दीये में कैद हूँ। जिसने मुझे जगाया है, उसकी एक इच्छा पूरी करना मेरा वचन है।”मानव ने थोड़ी देर सोचा। वह सोना‑चाँदी, ताक़त या अमरता माँग सकता था। लेकिन उसने कहा 

    “मेरी इच्छा है कि हमारे गाँव में कभी कोई भूखा न सोए।”जिन्न मुस्कुराया। उसकी आँखों में चमक थी। उसने हाथ उठाया और आसमान में नीली रोशनी फैल गई। उस दिन से गाँव की ज़मीन इतनी उपजाऊ हो गई कि हर खेत सोने जैसी फसल देने लगा। मानव ने समझा कि असली जादू लालच में नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई में है। चलिए इस जिन्न की कहानी को श्रृंखला में आगे बढ़ाते हैं।🌆 जिन्न और खोया हुआ शहर मानव  के गाँव में खुशहाली लौट आई थी। लेकिन जिन्न के दिल में अब भी एक रहस्य छिपा था। उसने मानव  से कहा —

    “मेरी असली ताक़त उस खोए हुए शहर में है, जहाँ से मुझे कैद किया गया था। अगर तुम चाहो तो मेरे साथ चलो।”मानव ने हिम्मत जुटाई और जिन्न के साथ नीले धुएँ की सुरंग से गुज़रा। वे पहुँचे एक वीरान शहर में, जहाँ हर पत्थर पर जादू की छाप थी।लेकिन वहाँ एक शाप भी था —

    “जो भी इस शहर का रहस्य खोलेगा, उसे अपनी सबसे प्यारी चीज़ की क़ुर्बानी देनी होगी।”अब मानव को तय करना था: क्या वह जिन्न को आज़ाद करने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज़ छोड़ देगा, या शहर का रहस्य हमेशा के लिए दफ़न रहेगा?🔮जिन्न का आख़िरी वादा खोए हुए शहर की दीवारों पर पुरानी लिपियाँ चमक रही थीं। जिन्न ने मानव  से कहा —

    “यहाँ मेरी असली ताक़त छिपी है। लेकिन इसे पाने के लिए मुझे अपना आख़िरी वादा निभाना होगा।”मानव ने पूछा —

    “कौन‑सा वादा?”जिन्न ने धीमी आवाज़ में बताया —

    “जब मुझे कैद किया गया था, मैंने कसम खाई थी कि अगर कभी आज़ाद हुआ तो इंसानों की सबसे बड़ी कमजोरी — लालच — को मिटाऊँगा। लेकिन इसके लिए मुझे अपनी जादुई शक्ति छोड़नी होगी।”मानव चौंक गया। अगर जिन्न अपनी शक्ति छोड़ देगा तो वह साधारण हो जाएगा। लेकिन जिन्न मुस्कुराया और बोला —

    “दोस्ती का असली मतलब यही है, कि हम अपनी ताक़त दूसरों की भलाई के लिए कुर्बान करें।”जैसे ही जिन्न ने अपना वादा निभाया, शहर की दीवारें टूट गईं और नीली रोशनी आसमान में फैल गई। जिन्न अब साधारण इंसान बन चुका था, लेकिन उसकी आँखों में सुकून था। मानव ने समझा कि असली जादू दोस्ती और त्याग में है।🔮 जिन्न और दोस्ती का इम्तिहान जिन्न अब साधारण इंसान बन चुका था। मानव और वह गाँव लौटे, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी।गाँव में अचानक एक रहस्यमयी यात्री आया। उसने लोगों को सोने‑चाँदी का लालच दिया और कहा —

    “जो मेरे साथ चलेगा, उसे अमरता मिलेगी।”गाँव के कई लोग उसकी बातों में आ गए। मानव ने जिन्न की ओर देखा। जिन्न ने कहा —

    “यह वही इम्तिहान है जिसका डर मुझे था। इंसानों का लालच हमारी दोस्ती को तोड़ सकता है।”मानव  ने गाँव वालों को समझाने की कोशिश की —

    “अमरता का क्या फ़ायदा, अगर हम अपनी इंसानियत खो दें?”लेकिन यात्री ने चुनौती दी —

    “अगर तुम सच में दोस्त हो, तो साबित करो। जिन्न को मेरे साथ भेज दो, और मैं तुम्हें अमर कर दूँगा।”अब मानव के सामने सबसे कठिन चुनाव था:जिन्न को खो देना और अमरता पाना।या जिन्न को अपने पास रखना और इंसानियत बचाना। मानव ने गहरी साँस ली और कहा —

    “दोस्ती ही मेरी अमरता है। मैं जिन्न को कभी नहीं छोड़ूँगा।”यात्री की जादुई छवि टूट गई। असल में वह शहर का पुराना शाप था, जो लालच के रूप में सामने आया था। मानव और जिन्न ने मिलकर उसे हराया।गाँव वालों ने भी समझा कि असली ताक़त दोस्ती और भरोसे में है।🔮 जिन्न और समय का दरवाज़ा गाँव में शांति लौट आई थी, लेकिन जिन्न और मानव  को एक नई रहस्यमयी गुफ़ा मिली। गुफ़ा के भीतर एक विशाल दरवाज़ा था, जिस पर लिखा था —

    “यह दरवाज़ा अतीत और भविष्य दोनों खोलता है। लेकिन जो इसे खोलेगा, उसे अपने वर्तमान की क़ुर्बानी देनी होगी।”जिन्न ने कहा —

    “अगर हम इसे खोलें, तो हम जान पाएँगे कि मेरी कैद कैसे हुई और तुम्हारा भविष्य कैसा होगा। लेकिन हमें तय करना होगा कि क्या हम अपने आज को खोने का जोखिम उठाएँगे।”मानव  ने दरवाज़े को छुआ। अचानक दृश्य बदल गया।पहले उसने अतीत देखा: जिन्न को लालच और सत्ता के कारण कैद किया गया था।फिर उसने भविष्य देखा: गाँव में एक बड़ा संकट आने वाला है, जिसे रोकने के लिए उन्हें अभी से तैयारी करनी होगी।दरवाज़ा धीरे‑धीरे बंद होने लगा। मानव और जिन्न ने समझा कि समय का असली रहस्य यह है —

    “अतीत से सीखो, भविष्य की चिंता करो, लेकिन सबसे बड़ा जादू वर्तमान में जीना है।”वे दरवाज़े से बाहर निकले और गाँव लौट आए, अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत और समझदार।🌪️ जिन्न और गाँव का संकट समय के दरवाज़े से लौटते वक्त मानव  ने भविष्य का संकट देखा था। कुछ ही दिनों बाद वह संकट सच हो गया।गाँव पर भयानक सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं, खेत बंजर हो गए। लोग घबराने लगे कि अब उनका जीवन कैसे चलेगा।जिन्न ने कहा —

    “मेरे पास अब जादुई ताक़त नहीं है, लेकिन हम सब मिलकर इस संकट को हरा सकते हैं।”मानव और जिन्न ने गाँव वालों को एकजुट किया। उन्होंने मिलकर:पुराने कुओं को फिर से खोला।वर्षा जल को इकट्ठा करने के लिए तालाब बनाए।खेतों में नई तकनीक से खेती शुरू की।गाँव वालों ने समझा कि असली ताक़त जादू में नहीं, बल्कि एकता और मेहनत में है।धीरे‑धीरे बादल लौटे और बारिश हुई। गाँव फिर से हरा‑भरा हो गया। जिन्न ने मुस्कुराकर कहा —

    “अब मैं जानता हूँ कि इंसानियत ही सबसे बड़ा जादू है।”🔮जिन्न और अंतिम रहस्य गाँव में सब कुछ शांत था, लेकिन समय के दरवाज़े से लौटते वक्त जिन्न और मानव ने एक अजीब आवाज़ सुनी। वह आवाज़ कह रही थी —

    “तुमने अतीत देखा, भविष्य जाना, लेकिन असली रहस्य अभी बाकी है।”गुफ़ा की गहराई में एक चमकता हुआ पत्थर था। जिन्न ने उसे पहचान लिया —

    “यह वही पत्थर है, जिसमें मेरी कैद का असली कारण छिपा है।”।जिन्न और मानव ने पत्थर को छुआ। अचानक नीली रोशनी फैल गई और एक आवाज़ गूँजी —

    “जिन्न की असली आज़ादी तभी होगी जब वह अपने दिल की सच्चाई स्वीकार करेगा।”जिन्न ने गहरी साँस ली और कहा —

    “मेरी सच्चाई यह है कि मैं अब जादूगर नहीं रहना चाहता। मैं इंसान बनकर तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ।”पत्थर टूट गया। आसमान में नीली लहरें फैल गईं। जिन्न पूरी तरह आज़ाद हो गया और इंसान के रूप में गाँव का हिस्सा बन गया।गाँव वालों ने उसे अपनाया। पूरी सच्चाई सभी गांव वालों के सामने आई:जिन्न को कैद करने वाले लोग कभी उसके दोस्त हीं थे, लेकिन उन्होंने लालच और डर के कारण उसे धोखा दिया था। पत्थर में यह शाप था कि जब तक कोई इंसान निस्वार्थ भाव से जिन्न का साथ न दे, वह कभी आज़ाद नहीं होगा। मानव ने जिन्न का हाथ थामा और कहा —

    “अब तुम्हें किसी शाप की ज़रूरत नहीं। तुम्हारी आज़ादी मेरी दोस्ती है।”पत्थर टूट गया, नीली रोशनी आसमान में फैल गई। जिन्न पूरी तरह आज़ाद हो गया। लेकिन उसने इंसान बने रहने का फ़ैसला किया, ताकि वह मानव और गाँव वालों के साथ रह सके।गाँव वालों ने देखा कि असली जादू न सोने‑चाँदी में था, न अमरता में — बल्कि दोस्ती, भरोसे और त्याग में।कहानी यहीं पूरी होती है, लेकिन उसका संदेश हमेशा जीवित रहेगा।✨

  • परी मां (जलपरी की कहानी)

    परी मां (जलपरी की कहानी)

    पढ़ने का समय : 12 मिनट

     एक गाँव में सुहानी नाम की एक लड़की अपने पिता उदय और सौतेली माँ  मधु के साथ रहती थी , सुहानी की एक सौतेली बहन भी  निशा भी थी , सुहानी की माँ अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी , लेकिन वह सुहानी से नफरत करती थी और दिन भर घर के काम में लगा कर रखती थी , और उसे ठीक से खाना भी नहीं देती थी। 

     

    एक दिन मधु सुहानी को लेकर जंगल जाती है , और लकड़ी काटने लगती है ,  मधु के दिमाग में सुहानी को लेकर कुछ षडयंत्र चल रहा था।

     

    मधु सुहानी से बोली ,” मुझे बहुत प्यास लगी है , जरा पानी ले आओ “!

     

    सुहानी पानी लेने के लिए नदी के पास जाती है ,तो मधु भी दबे पाव सुहानी के पीछे चली जाती है।

     

    सुहानी बहुत ही मासूम थी , उसे पानी से डर लगता था , पर क्योंकि उसकी मां को प्यास लगी थी , इसलिए  वह डर डर के नदी के पास चली गई।

     

    अभी सुहानी पानी भरने के लिए झुकी ही थी कि मधु ने उसे नदी में धक्का दे दिया।

     

    सुहानी जैसे ही पानी में गिरी खुद को बचाने की कोशिश करने लगी पर क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था इसलिए वह नदी के किनारे नहीं आ पाई।

     

    सुहानी चीखते हुए बोली ,” मां प्लीज मुझे बचा लो “! 

     

    पर मधु पर कोई असर नहीं पड़ा और वह नफरत से हंसते हुए बोली , ” तुझे बचा लूं , ताकि  मेरी बेटी के हिस्से की खुशी तू खा जाए ,तेरे रहते मेरी बेटी का रिश्ता नहीं हो पाएगा , भगवान ने अक्ल तुझे भला ही कम दी है पर शक्ल बहुत अच्छी दी है , इसलिए जब तक तू जिंदा मेरी बेटी को दुनिया की सबसे अच्छी चीज नहीं मिलेगी “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” प्लीज मां बचा लो , मैं बेटी हूं आपकी “!

     

    मधु वह से जाते हुए बोली ,” तू बेटी नहीं है मेरी , सौतेली बेटी है “!

    सुहानी पानी में डूबती रही पर मधु वहां से जा चुकी थी।

     

     कुछ देर बाद जब सुहानी को होश आता है तो वह एक अलग ही दुनिया में होती है, जो बहुत खूबसूरत थी।

     

    सुहानी धीरे से अपनी आंखे खोलती है और इधर उधर देखती है तो उसे ही  तरफ सुंदर  पद पौधे फूल दिख रहे थे,  ये सब देखकर  एक पल के लिए वह बहुत खुश होती है ,और इधर उधर घूमते-घूमते थक जाती है तो पेड़ के नीचे बैठ जाती है।

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” यह मैं कहां आ गई ,यह कौन सा गांव है “? तभी उसकी नजर एक हवेली पर पड़ती है , सुहानी वह  से उठकर  उस हवेली का दरवाजा खोलती है ,तो उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती है।

     

    सुहानी को वहाँ एक खूबसूरत सी औरत दिखती है जो बड़ी सी कुर्सी में बैठी हुई थी।

     

    वह औरत मुस्कराकर बोली ,” तुम कौन हो ? और यहां कैसे आई “?

     

    सुहानी घबराते हुए बोली ,” मैं सुहानी हूं , और रामपुर गांव में रहती हूं ,और मैं नदी में गिर गई और यहां आ गई “!

     

    सुहानी की बात सुनकर वह औरत सोच में पड़ जाती है ,कि आखिर एक इंसान उनके  जललोक में कैसे आई ?

     

    वह औरत अपनी आंखे बंद करती है और उसे  सब सच पता चल जाता है।

     

     सुहानी बोली ,” आप कौन है और मैं कौन से गांव में हूं “?

     

    वह औरत मुस्कराकर उसके पास जाकर उसका सिर सहलाकर बोली ,” मैं   उर्वशी हूं इस जल लोक की रानी पारी और तुम नदी में गिर गई इसलिए हमारे लोक आ गई हो “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी घबरा गई , और डरते हुए पीछे होने लगी ।

     

    उर्वशी सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” घबराओ मत बेटा ,मैं तुम्हे कुछ नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी  ,मुझे मालूम है तुम्हारी मां ने तुम्हे मारने की कोशिश की “!

     

    उर्वशी की बात सुनकर सुहानी की आंखे भर आई और वह रोने लगी और उर्वशी को गले लगा लिया।

     

    सुहानी के उर्वशी को गले लगाते ही उर्वशी को  एक अलग सा एहसास हुआ जो वो समझ नहीं पा रही थी।

    उर्वशी  ने सुहानी को खाना खिलाया और फिर अपने साथ सुला दिया।

     

    सुहानी को सोता देख उर्वशी सोचने लगी , कि आखिर एक साधारण लड़की उनके लोक में कैसे आई ? और आखिर क्यों यह अपनी सी लग रही है ।

     

    अब ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और सुहानी जल लोक में ही रहने लगी ,और उर्वशी और सुहानी के बीच एक अलग ही रिश्ता बन गया , सुहानी उर्वशी को परी मां कहने लगी।

     

    एक दिन पारियों की बैठक में उर्वशी की दुश्मन शकीरा परी ने भरी सभा में शिकायत की कि उर्वशी ने इंसानों के साथ हाथ मिला लिया है ,जिससे उनके लोक को खतरा है तभी तो इंसानों के जासूस को अपनी बेटी बनाकर रखा है।

     

    शकीरा की बात सुनकर उर्वशी गुस्से से बोली ,” शकीरा सब तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं होते, और यह मासूम सी बच्ची तो खुद अपनो की ठुकराई हुई है किसी को क्या धोखा देगी “!

     

    शकीरा मुस्कराकर बोली ,” रानी परी आप भी तो सब छोड़कर इंसानी दुनिया चली गई थी , तो फिर है आप पर कैसे भरोसा करे “!

     

    शकीरा की बार सुनकर उर्वशी चुप हो गई ,उर्वशी को चुप होता देखकर शकीरा का हौसला बढ़ गया।

     

    शकीरा बोली ,” देखिए रानी परी या तो आप इस लड़की को मार दीजिए या इसकी दुनिया वापिस भेज दीजिए “!

     

    रात के समय  सुहानी खिड़की में बैठी कुछ सोच रही थी , और उसकी आँखें नम थी।

     

    सुहानी को उदास देख उर्वशी उसके पास जाकर बोली ,” क्या हुआ सुहानी इतनी उदास क्यों हो ? घर की याद आ रही है “?

     

    सुहानी नम आंखों से उर्वशी को गले लगा लेती है। और रोते हुए बोली ,” आखिर क्यों मेरी मां मुझे छोड़कर चली गई ? छोटी मां सही कहती थी मैं मनहूस हूं तभी उन्होंने मुझे नदी में फेंक दिया फिर भी मैं बच गई ,और यहां आकर आपके लिए भी मुसीबत बन गई “!

     

    उर्वशी सुहानी का सिर सहलाते हुए बोली ,” परेशान मत हो , मैं अब संभाल लूंगी , और  शकीरा तो हमेशा मेरे खिलाफ षडयंत्र रचती रहती है , चिंता मत करो मैं अब देख लूंगी “!

     

    सुहानी बोली ,” मैं अपनी दुनिया में वापिस जाना चाहती हूं “!

     

    उर्वशी बोली ,” यह क्या बोल रही हो ? उस दुनिया में तुम्हारी मां तुम्हारी जान की दुश्मन है , और तुम्हारे पिता भी हमेशा काम से बाहर रहते है , तो ऐसे में हमेशा तुम्हारी जान को खतरा रहेगा “!

     

    सुहानी बोली ,” परी मां आप चिंता मत करो , मां को अपनी गलती का एहसास हो गया होगा और वो भी मुझे याद करती होगी , इसलिए मैं अपने गांव जाना चाहती हूं”!

     

     उर्वशी परेशान होते हुए बोली ,”  सुहानी जल लोक में है किसी को भी उसकी मर्जी के खिलाफ नहीं रख सकते , अगर तुम जाना चाहती हो तो जाओ ,पर यह अंगूठी  हमेशा अपने पास रखना “!

     

    सुहानी अंगूठी देखते हुए बोली ,”  परी मां यह क्या है “?

     

    उर्वशी सुहानी की उंगली में अंगूठी पहनाते हुए बोली ,” यह जादुई अंगूठी है ,  अगर तुम किसी मुसीबत में हो और  जैसे ही इसे अपने होंठों से चूमकर मुझे याद करोगी , मैं आ जाऊंगी “!

     

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाकर अपने मन में सोचने लगी ,” मैं आपको किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती इसलिए यहां से जा रही हूं ,पर आपसे मुझे मां का प्यार मिला है , मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगी कि अगले जन्म में आप मेरी मां बने “!

     

     सुहानी यह सब मन में बोल रही थी, पर उर्वशी सुहानी के मन की बात सुन पा रही थी , उर्वशी की आंखे भी नम हो जाती है।

     

    कुछ देर बाद सुहानी नदी के किनारे खड़ी थी, सुहानी एक नजर नदी की ओर देखती है और फिर अपने घर चली जाती है।

     

    सुहानी जैसे ही अपने घर जाती है ,तो उसकी मां की नजर उस पर पड़ती है ,और वह बोली ,” यह क्या मैं सपना देख रही हूं , यह तो मर गई थी ,तो फिर यहां कैसे आई “?

     

     

    मधु गुस्से से सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” यहां क्या कर रही है “?

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मां मै घर लौट आई”!

     

    मधु बोली ,” निकल जा यहां से ,अब क्या लेने आई है कुलटा “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,”मां  आप यह क्या कह रही है “?

     

    अभी सुहानी रो ही रही थी तभी उदय आ गया , उदय को देख कर मधु रोते हुए बोली ,” देखिए जी आपकी यह बेटी हमारी नाक कटा के चली गई थी , जैसे तैसे हमने निशा की शादी की और अब यह लौट आई ताकि हमारी पूरे गांव में थू थू हो “!

     

     

    सुहानी अपने पिता के पास जाकर बोली ,” नहीं पिता जी , ऐसा कुछ नहीं है ,मैने कुछ भी किया “!

     

    सुहानी के पिता गुस्से से उसके गाल में एक थप्पड़ मारकर बोले ,” झूठ मत बोलो , तुम भी अपनी मां की तरह धोखेबाज निकली ,मेरी इज्जत उछाल कर भाग गई “!

     

    सुहानी बोली ,” नहीं पिता जी, मैं कहीं नहीं भागी , मां ने मुझे नदी में फेंक दिया था”!

     

    सुहानी की बात सुनकर  मधु सुहानी के बाल पकड़कर खींचते हुए घर के बाहर फेंक देती है और बोली ,” झूठ मत बोल , तू ही अपने किसी यार के साथ भाग गई ,जैसे तेरी मां तुझे पैदा करते ही अपने यार के साथ भाग गई ,तुझे इतनी शर्म नहीं की मैने अपनी बेटी की तरह थे पाला और तू यह इल्जाम लगा रही है मुझपर “!

     

     सुहानी रोते हुए बोली ,” छोटी मां झूठ मत बोलो ,जब जम जंगल लकड़ी लेने गए थे ,आपने ही मुझसे पानी मंगाया और जब मैं नदी में पानी लेने गई तो आपने धक्का दे दिया “!

     

    मधु सुहानी की बात सुनकर घबरा गई, और अपना झूठ छुपाने के लिए रोते हुए उदय के पास गई और बोली ,” यह झूठ बोल रही है ,आप तो जानते है इसी तैरना नहीं आता ,और अगर मैने इसे नदी में फेंका, तो यह बच कैसे गई “!

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” मुझे भी पता पर मैं बच गई ,और जल लोक में चली गई, और वहां परी मां के साथ रहने लगी “!

     

    सुहानी की बात सुनकर मधु उदय की ओर देखकर बोली ,” देखा यह खुद को बचाने के लिए कैसे झूठी कहानी बना रही है “!

     

    उदय मधु की बात में यकीन कर लेता है , और गुस्से से बोला ,” सुहानी झूठ मत बोलो “!

     

    पिता जी मैं झूठ नहीं बोल रही हूं। सुहानी ने रोते हुए कहा।

     

    मधु बोली ,” अच्छा झूठ नहीं बोल रही हो ,तो सबूत दो की तुम पानी में पारियों की दुनिया में चली गई थी ,और परी के साथ रह रही थी ,अरे तुम एक काम करो उस परी को ही क्यों। नहीं बुला लेती “! यह शब्द मधु ने हंसते हुए बोले।

     

    मधु की बात से सुहानी को उर्वशी का ख्याल आया ,और उसने अपने हाथ में पहनी अंगूठी को चूमकर उर्वशी को याद किया।

     

    कुछ ही पल में एक तेज रोशनी उत्पन्न हुई जिससे सभी की आंखे बंद हो गई, जब सुहानी ने आंखे खोली , तो उसके सामने उर्वशी थी।

     

    मधु और उदय ने जैसे ही आंखे खोली , उनकी आंखे उर्वशी को देखकर फटी की फटी रह गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप आ गई “!

     

    उर्वशी की नजरे मधु और उदय में टिकी हुई थी, और वह सुहानी का सिर सहला रही थी।

     

    सुहानी रोते हुए बोली ,” परी मां , छोटी मां कह रही है कि मैं भाग गई थी किसी के साथ , आप बताइए ना मैं आपके साथ थी, इन्हें लग रहा है मैं अपनी मां की तरह भाग गई थी “!

     

    उर्वशी हैरानी से बोली ,” मां , क्या तुम्हारी मां जिंदा है “?

     

    उदय बोला ,” हां जिंदा है इसकी मां , और  इसके सामने खड़ी है “!

     

    उदय की बात सुनकर उर्वशी और सुहानी एक दूसरे को देखने लगे “!

     

    उदय बोला ,” हां सुहानी यही है तुम्हारी मां उर्वशी, जो तुम्हे जन्म देते ही कहीं चली गई ,और सालों ढूंढा मैने इसे पर यह कहीं नहीं मिली, और आज मुझे पता चल रहा है यह एक परी है “!

     

    उर्वशी नम आंखों से बोली ,” मुझे माफ कर दो उदय , मैं क्या  करती , मैं जल लोक से बाहर की दुनिया देखने आई , और मेरी मुलाकात तुमसे हुई , और मुझे तुमसे प्यार हो गया , पर जब मैने तुमसे शादी की और मेरी बेटी का जन्म हुआ , तो मेरे पिता जी की हमारे दुश्मनों ने हत्या कर दी , और मुझे जल लोक को बचाने के लिए अपनी दुनिया में लौटना पड़ा , अगर मेरे दुश्मनों को मेरी बेटी का पता चलता तो उसकी जान को खतरा था इसलिए मैं वापिस लौट गई “!

     

    सच जानकर उदय और सुहानी की आंखे नम हो गई।

     

    सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप मेरी मां है”!

    उर्वशी सुहानी का माथा चूमती है और फिर उसके गालों को एक एक कर चूमकर अपनी ममता लुटाते हुए बोली ,” हां मैं हूं तुम्हारी मां , जिस दिन तुम जल लोक में आई , मैं उसी दिन सोच में पड़ गई थी कि आखिर एक साधारण इंसान जल लोक में कैसे आ सकता है ,काश मैने पहले सच जानने की कोशिश की होती “!

    उदय ने मधु को एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारकर कहा ,” तुमने मेरी बेटी की जान लेने की कोशिश की निकल जाओ यहां से “!

    मधु ने बहुत मन्नते की पर उदय ने उसकी एक ना सुनी और मधु को घर से बाहर निकाल दिया।

     उदय ने अपने अविश्वास के लिए उर्वशी और सुहानी से माफी मांगी। 

    उर्वशी ने भी उदय से माफी मांगी , और उदय से इजाजत लेकर  उर्वशी सुहानी को लेकर अपने जल लोक लौट गई ,और उसे परी की सारी शक्तियां दे दी, और जल लोक की राजकुमारी बना दिया। 

    इस तरह एक मासूम सी लड़की इतनी तकलीफें झेलने के बाद अपनी मां से मिल गई , और राजकुमारी बनकर जल लोक की परी बन गई ।

     

     

    Mysterious Chand