जिस दिन सबको खो दूँगी,
उस दिन तुम्हें पा लूँगी,
जिस दिन अपनों से छूटेगा मेरा हाथ,
उस दिन तेरा हाथ थाम लूँगी,
और जिस दिन तुमने भी हाथ छोड़ दिया,
उस दिन खुद को भी खो दूँगी।
Lakshmi Kumari

NSW अनुभवी लेखक -🥇

यादों का झोंका
कितना खूबसूरत होता है,
किसी की यादों का झोंका,
वो चाहे हमें भूल भी जाए,
हम उसे भूल नहीं पाते।
रहे वो दूर कहीं भी,
हमारी यादों में वही बसता है,
दिल के हर कोने में
उसका नाम ही सजता है।
जब यादों का झोंका आता है,
कभी होंठों पर हँसी ले आता है,
तो कभी चुपके से
आँखों को नम कर जाता है।
कुछ पल मीठे बन जाते हैं,
कुछ दर्द भी दे जाते हैं,
फिर भी ये यादों के झोंके
दिल को बहुत भाते हैं।
यादों के इस अनमोल झोंके को
हम उम्रभर संजोए रखते हैं,
बीते लम्हों की खुशबू को
सीने से लगाए रखते हैं।
मरते दम तक इंसान
अच्छी यादों को याद कर मुस्कुराता है,
क्योंकि यादों का साथ ही
हर तन्हाई में काम आता है।
Lakshmi Kumari…….

NSW अनुभवी लेखक -🥇

**भाग 1: **
एक समय की बात है, एक हरे-भरे और सुंदर जंगल में कई जानवर रहते थे। इस जंगल का नाम था ‘हरीनगरी’। यह एक अद्भुत स्थान था, जहाँ हर तरह के जानवर, पक्षी, और कीड़े-मकोड़े एक साथ रहते थे। जंगल की हवा में मिठास थी और चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। यहाँ के पेड़ अपनी ऊँचाई में आसमान को छूते थे, जबकि उनके नीचे खिलने वाले फूलों की खुशबू ने पूरे जंगल को महका रखा था। पक्षियों की चहचहाहट और जल की शांत धारा की आवाज़ ने इस जगह को और भी मनमोहक बना दिया था।
हरीनगरी में रहने वाले जानवर बहुत खुश थे। सुबह होते ही, सूरज की किरणें पेड़ों के बीच से छनकर आती थीं और जंगल का हर कोना रोशन कर देती थीं। जानवर एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलते थे, खाने की तलाश में निकलते थे, और जीवन की खुशियों का आनंद लेते थे। लेकिन इस खुशहाल जीवन के बीच एक छोटी सी समस्या थी – मित्रता की कमी।
जंगल में हर जानवर अपने में मशगूल था। सियार अपने शैतानी खेलों में, बंदर अपने यांगमय उलझनों में, और खरगोश अपनी दौड़ में इतने व्यस्त थे कि किसीने दूसरे के बारे में सोचना भी बंद कर दिया था। यह बात कुकी नाम की एक कछुए के लिए बहुत निराशाजनक थी। कुकी ने देखा कि जंगल में सभी जानवरों के पास एक दूसरे के लिए समय नहीं था और इसे बहुत बुरा लगा।
कुकी एक प्यारी सी कछुआ थी, जो हमेशा अपनी धीमी गति और छोटे पैरों के कारण मजाक का विषय बनती थी। लेकिन इस बात ने उसे कभी कमजोर महसूस नहीं कराया। कुकी जानती थी कि उसकी धैर्य शक्ति और समझदारी की कोई तुलना नहीं हो सकती। अपने अकेलेपन से परेशान होकर, एक दिन उसने अपने मन में ठान लिया कि उसे दोस्तों की तलाश करनी होगी।
उसने सोचा कि अगर वह जंगल के अन्य जानवरों से दोस्ती कर पाएगी, तो शायद उसकी जिंदगी में खुशियाँ वापस आ जाएंगी। उसने अपने अन्य दोस्तों से बात करने का निश्चय किया। पहले तो उसने मैनू नामक एक प्यारी-सी गिलहरी को बुलाया, जो एक ऊँचे पेड़ पर रहती थी। कुकी मैनू के पास पहुँची और बोली, “नमस्कार मैनू! क्या तुम मेरे साथ खेलोगी?”
मैनू ने उसकी ओर देखा और हँस कर बोली, “कुकी, तुम तो बहुत धीमी हो! मैं तुम्हारे साथ कैसे खेल सकती हूँ?”
कुकी थोड़ी निराश हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने सोचा, “मैं कहीं और कोशिश करूंगी।” फिर वह जंगल के पास एक छोटे तालाब की ओर चली गई, जहाँ कुछ मेंढ़क कूद रहे थे। उसने वहाँ जाकर कहा, “नमस्कार दोस्तों! क्या मैं आपके साथ खेल सकती हूँ?”
मेंढ़कों ने उसे घूरा और एक ने बोला, “तुम तो चल नहीं सकती, हम तुम्हारे साथ कैसे खेल सकते हैं? तुम बहुत धीमी हो।” कुकी का हृदय फिर से टूट गया, लेकिन उसने एक बार फिर खुद को संभाला।
इस प्रकार, दिन बीतते गए और कुकी ने एक-एक कर कई जानवरों से दोस्ती करने की कोशिश की, लेकिन सभी ने उसे उसकी धीमी गति के कारण अस्वीकार कर दिया। एक दिन, यकायक उसने सोचा, “क्या धीमें चलने में कुछ गलत है? क्या मैं इसे अपने फायदे में नहीं बदल सकती?” सोचते-सोचते, उसने यह फैसला किया कि उसे अपनी योग्यता का प्रभावी ढंग से उपयोग करना होगा।
उसने जंगल में एक नई योजना बनाई। उसने सोचा कि दोस्त बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह हो सकता है कि वह उन जानवरों की सहायता करे जो तेज दौड़ने में सक्षम हैं। कुकी ने अपने दिमाग में यह योजना बनाई कि यदि वह अपने दोस्तों की मदद करेगी, तो शायद वे उसकी धीमी गति और धैर्य को समझेंगे और उसकी पहचान को सही मायने में सराहेंगे।
अगले दिन, जब सूरज की किरणें हरीनगरी पर बिखर गईं, कुकी ने एक योजना बनाई। उसने देखा कि एक बार तीन छोटे चूहों के झुंड में एक बड़ी समस्या आ गई थी। एक चूहा अपने रास्ते से भटक गया था और अब उसे अपने घर लौटने में बहुत कठिनाई हो रही थी। कुकी ने ठान लिया कि वह इस चूहे की मदद करेगी।
कुकी धीरे-धीरे चूहे के पास पहुँची और कहा, “नमस्कार! क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ?” चूहा घबराया हुआ था, लेकिन उसके आँखों में एक आशा की किरण थी। चूहे ने कहा, “मैं अपने घर नहीं पहुँच पा रहा हूँ। रास्ता भूल गया हूँ।”
कुकी ने बिना किसी देर के कहा, “कोई बात नहीं! तुम मुझसे साथ आओ, मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक पहुँचाने में मदद करूँगी।” चूहा थोड़ा संकोच में था क्योंकि वह जानता था कि कुकी धीमी थी, लेकिन उसे उसकी मदद की आवश्यकता थी। उसके पास कोई और विकल्प नहीं था, इसलिए वह कुकी के पीछे चलने लगा।
कुकी अपनी धीमी गति से चूहे के साथ चलने लगी। वह रास्ते में कई चीज़ें बताने लगी – वह पेड़, फुल और पत्तियों के बारे में बात कर रही थी। चूहा उसे सुनकर अच्छा महसूस करने लगा, और उसे मज़ा आने लगा। धीरे-धीरे वह उसकी छाया में चलने लगा और बातें करने लगा।
आखिरकार, कुकी और चूहा उस जगह पहुँचे जहाँ चूहे का घर था। चूहा खुशी से कूदने लगा और कहा, “धन्यवाद, कुकी! तुमने मेरी बहुत मदद की। मैंने सोचा था कि तुम धीमी हो, लेकिन तुमने मुझे यहाँ लाने में बड़ी सहायता की।”
कुकी को खुशी हुई। उसे पता चला कि उसकी धीमी गति ने उसे चूहे के साथ बातचीत करने का समय दिया, और उसके लिए यह एक महत्वपूर्ण अनुभव था।
इस घटना के बाद, कुकी ने यह काम जारी रखा। वह अन्य जानवरों की मदद करने लगी – कभी-पकड़ने में, कभी-खाने की तलाश में, और कभी-अच्छे विचार साझा करने में। धीरे-धीरे, जंगल के जानवरों ने उसकी मदद को पहचाना और उसकी सराहना करने लगे।
दिन-ब-दिन, कुकी के प्रति सभी जानवरों की धारणा बदलने लगी। अब जानवर उसे देखकर मुस्कुराते थे, उसे बुलाते थे, और उसके साथ खेलने के लिए उत्साहित रहते थे। अब कुकी अकेली नहीं थी, उसके चारों ओर दोस्त थे – गिलहरियाँ, मेंढ़क, चूहे और अन्य जानवर।
जंगल में वो खुशियों की भावना लौट आई, और सभी जानवर एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। अब कुकी ने बहुत सी मित्रता की और उसे अपना मूल्य समझ में आ गया। उसने सिद्ध कर दिया कि सच्ची मित्रता उसी समय बढ़ती है जब हम एक-दूसरे का सम्मान करें और मदद करने के लिए आगे बढ़ें।
जंगल में अब हंसी और खेल का माहौल था, और कुकी ने यह सुनिश्चित किया कि वह हमेशा अपनी धीमी गति का उपयोग करके नए दोस्त बनाती रहे। अब हरीनगरी हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहने लगी।

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पढ़ने का समय : 6 मिनट
सावरी का कॉलेज का पहला दिन था। वह अपनी नाक पर चश्मा लगाकर, गोरखा पहनकर कॉलेज गई। गोरखा उसका पहचान का हिस्सा बन चुका था, और वह इससे कभी पीछे नहीं हटी। लेकिन आज, उसके गोरखे का रंग और अधिक चमकीला लग रहा था। गोरखा पहनने के पीछे उसका एक गहरा कारण था, जिसे शायद किसी ने नहीं समझा।
कॉलेज के नए माहौल में प्रवेश करते ही, लड़के और लड़कियां उसकी ओर टेढ़ी नजर से देखने लगे। कुछ ने उसे घूरा, कुछ बुदबुदाए और कुछ ने अदब से मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से कहा, “क्या फर्क है, ये गोरखा पहनकर आई है!” सावरी के मन में एक डर सताने लगा। उसने हमेशा यही समझा था कि देखने के मामले में वह अलग है। उसके चेहरे पर एसिड के जले हुए निशान थे, जिन्हें वह किसी से छिपाना चाहती थी। उसे लगता था कि अगर किसी ने उसके चेहरे पर ध्यान दिया, तो सब उसकी उपहास करेंगे और उससे दूर रहना पसंद करेंगे।
जब उसकी दोस्त जिया ने उससे पूछा, “तू गोरखा क्यों पहनती है, हर कोई तो पैंट-टॉप्स में आता है?” तो सावरी ने संकोच में सिर झुका लिया। उसका चेहरा धुंधला हो गया, जैसे उसने अपने अंदर की लड़ाई को छिपा लिया हो। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखों के इशारे से जिया को समझाया कि यह एक गहरा विषय है, जिसे सुलझाना आसान नहीं है।
कॉलेज के पहले दिन, सावरी ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह किसी को अपने बारे में कुछ न बताने दे। लेकिन एक दिन, जब वह लाइब्रेरी में बैठी थी, उसने एक दोस्ताना आवाज सुनी। “तो तुम गोरखा में क्यों आती हो? क्या तुम्हें लगता है कि इससे तुम किसी से अलग लगती हो?” यह आवाज आयशा की थी, जो मुस्लिम समुदाय की एक लड़की थी। सावरी ने अपने दिल की धड़कन को धीमा करने की कोशिश की। उसने अपनी आंखों में खामोशी के साथ जवाब दिया, “बस, मेरी पसंद है।”
आयशा ने उसकी आंखों में गहराई देखी और समझ गई कि सावरी कुछ छुपा रही है। वह पास आई और धीमी आवाज में समझाया, “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जब तुम अपनी पहचान को छुपाती हो, तो तुम खुद को एक बंधन में बांध लेती हो।” सावरी इस बात को सुनकर चुपचाप मुस्कुरा दी, लेकिन उसके दिल में एक हलचल थी। वह जानती थी कि आयशा सही कह रही है, लेकिन उसके लिए वह खुद को दिखाना बहुत कठिन था।
दिन बीतते गए, और सावरी ने धीरे-धीरे कुछ दोस्तों को बना लिया। लेकिन कॉलेज में जब भी कोई नया आया, सभी के बीच चर्चाओं का केंद्र बनी हुई थी सावरी का गोरखा। सावरी ने यह भी पाया कि कुछ लड़के उसे देखकर मजाक करते, “वह तो गोरखा की रानी है!” उसे भले ही इस बात का दुख नहीं हुआ लेकिन वह महसूस करती थी कि कुछ लोग उसके प्रति संवेदनशील नहीं थे।
एक दिन, कॉलेज में एक वर्कशॉप का आयोजन हुआ, जिसमें सभी को अपनी कहानी साझा करने के लिए कहा गया। सावरी ने सोचा कि शायद यहां वह अपनी कहानी साझा कर पाएगी। उसने अपनी आँखों को बंद किया और खुद को यह बताते हुए अंदर से मजबूत बनाने की कोशिश की, “मैं खुद को दूसरों के सामने क्यों नहीं रख सकती?” लेकिन जब उसकी बारी आई, तो वह झिझक गई।
सावरी ने अपने गोरखे का पल्ला खींचते हुए एक गहरी सांस ली। वह जानती थी कि उसका यह क्षण उसके लिए कितना महत्वपूर्ण था। कॉलेज की वर्कशॉप में जब उसने अपने गोरखे को नीचे फेंका, तो कमरे में गहरी खामोशी छा गई। सभी की आंखें उसकी ओर थीं। कुछ क्षणों के लिए, उसने सोचा कि क्या उसने सही किया? लेकिन फिर, उसके मन में एक ताकत का अहसास हुआ। यह केवल उसका चेहरा नहीं था, बल्कि यह उसकी पूरी कहानी थी, जिसे उसने अब तक छिपाने की कोशिश की थी।
“मैं सावरी हूँ,” उसने धीरे-धीरे कहना शुरू किया, “और मेरा ये चेहरा, इसने मुझे ताकत दी है। यह एक एसिड हमले का परिणाम है। मुझे पहले लगा कि अपने चेहरे को छिपाकर मैं खुद को औरों से अलग रख सकती हूँ, लेकिन आज मैंने समझा कि यह मुझे और भी अधिक खड़ा बनाता है।”
कमरे में उसके शब्दों की गूंज ने सबको झकझोर दिया। कुछ लड़कियों के चेहरे पर जबरदस्त सहानुभूति का भाव था, और कुछ लड़कों की आंखों में अफसोस। सावरी ने अपनी कहानी को आगे बढ़ाया, “यह सब एक दिन हुआ जब मैं स्कूल जा रही थी। अचानक मेरे किसी परिचित ने मुझ पर एसिड फेंक दिया। मेरे चेहरे के जले हुए निशान एक दाग हैं, लेकिन यह मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा हैं। मैंने इससे लड़ाई लड़ी है, और आज मैं इसे अपने गोरखे के माध्यम से स्वीकार कर रही हूँ।”
आगंतुकों में से एक लड़के ने पूछा, “ये गोरखा तुम्हारे लिए क्या मतलब रखता है?” सावरी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “यह मेरे साथ एक पहचान है। यह बताता है कि मैं खुद को कैसे देखती हूँ। मैं इसे पहन कर यह नहीं छिपा रही हूँ कि मैं अलग हूँ, बल्कि यह मेरे गर्व का प्रतीक है।”
धीरे-धीरे, लोग उसकी बातों को सुनने लगे। उन्हें समझ में आने लगा कि सावरी का गोरखा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि यह उसके आत्मविश्वास, संघर्ष और साहस का प्रतीक था। कोई भी व्यक्ति जब खुद को स्वीकार करता है, तो वह बाकी दुनिया को भी साहस देता है।
उसने अपनी कहानी में यह भी कहा कि किस तरह पिछले दिनों में लोग उसके गोरखे को मज़ाक में लेते थे। “लेकिन अब मैं समझती हूँ कि यह उनका मामला है, मेरा नहीं। मैं अपनी पहचान के लिए शर्मिंदा नहीं हूँ। मेरे अंदर ऐसा कुछ नहीं है जिसकी मैं शर्म करूँ।” उसकी आवाज़ में अब आत्मविश्वास था।
इस शेयरिंग से न केवल सावरी, बल्कि अन्य छात्रों ने भी अपने अपने अनुभव साझा किए। यह वर्कशॉप एक जागरूकता कार्यक्रम बन गई थी, जिसमें सबने अपने जीवन की कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की। एक अन्य लड़की ने कहा, “मुझे भी मेरी क्यूटनेस के लिए हमेशा सफेद त्वचा की जरूरत महसूस होती थी। लेकिन अब मुझे अपने असली रूप को स्वीकार करने की जरूरत है।”
वर्कशॉप के अंत में, सभी छात्रों ने सावरी के प्रति एकजुटता दिखाई। उन्होंने उसे सराहा और कहा कि वह उनकी टेम्पलेट में हमेशा से थी। इसने सावरी के मन में एक नई ऊर्जा का संचार किया। वह जानती थी कि यह सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए एक नई शुरुआत थी। उसने यह अनुभव किया कि सबका अनुभव अलग है, लेकिन सबकी लड़ाई एक ही है – खुद को स्वीकारना।
उस दिन के बाद, सावरी ने कॉलेज में अपनी आवाज़ को और ऊँचा किया। इस तरह साबरी ने कुरूप चेहरे को सबके सामने गोरखे की मदद
से अपनी एक नई पहचान बना ली।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

सौरभ कॉलेज का बिगड़ा हुआ लड़का था, जिसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी। वो हमेशा क्लास में लेट आता और पढ़ाई से ज्यादा समय नशे और दोस्तों के साथ बिताता था। एक दिन, कॉलेज में एक नया लड़का आया, जिसका नाम आकाश था। आकाश बेहद गंभीर और संजीदा था, लेकिन उसकी सोच और व्यवहार में एक अलग तरह की गहराई थी।
आकाश ने सौरभ को पहले दिन ही देखा और समझा कि वह एक कठिन दौर से गुजर रहा है। उसने सौरभ से दोस्ती करने का फैसला किया। शुरुआत में सौरभ ने इसे हल्के में लिया, लेकिन आकाश की मेहनत और दोस्ती ने धीरे-धीरे उसका मन बदल दिया। आकाश ने सौरभ को समझाया कि जीवन में सही दिशा में चलना कितना ज़रूरी है और पढ़ाई की अहमियत को जाने बिना भविष्य को संवारना मुश्किल है।
एक दिन, आकाश ने सौरभ को एक किताब दी और कहा, “ये किताब तुझे सोचने पर मजबूर करेगी।” सौरभ ने शुरुआत में अनमने तरीके से पढ़ना शुरू किया, लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ता गया, उसके अंदर की जिज्ञासा जाग गई। आकाश ने उसे न केवल पढ़ाई की दिशा में प्रेरित किया, बल्कि उसे अपनी जिंदगी के प्रति नई दृष्टि भी दी।
एक दिन सौरभ ने आकाश से कहा चलो क्लब चलते हैं आकाश तो माना करते है लेकिन सौरभ के जिंदा करने पर वो चला जाता हैं। लेकिन ओह सौरभ से एक भूल हो जाती है मजाक मजाक में उसने आकाश को दारू पीला देता है
सौरभ ने जब देखा कि आकाश धीरे-धीरे नशे के असर में डूबता जा रहा है, तो उसे यह एहसास हुआ कि उसकी ये मजाकिया हरकत कहीं न कहीं उनकी दोस्ती के लिए खतरा बन गई है। शुरू में तो वह सोचता रहा कि वह बस थोड़ी मस्ती कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे आकाश की स्थिति बिगड़ती गई, सौरभ को समझ में आया कि यह मजाक की सीमा से बाहर जा चुका है।
उसने जल्दी से आकाश को पकड़ा और उसे बाथरूम ले जाकर उसे पानी पीने के लिए कहा। “आकाश, मैं माफ़ी चाहता हूँ, मैं जानता था कि मैंने मजाक किया, लेकिन मैंने तुम्हें बहुत अधिक पीने दिया। तुम ठीक हो जाओ,” सौरभ ने कहा, उसकी आवाज़ में चिंता थी।
आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, सौरभ। लेकिन तुम समझते हो कि ये मजाक और जिम्मेदारी का मिक्सचर नहीं होता है। मैं जानता था कि तुम मुझे उत्साहित करने के लिए ये कर रहे हो, लेकिन कभी-कभी मजाक अपनी सीमाएं पार कर जाता है।”
आकाश की तबियत धीरे धीरे ओर बिगड़ती जा रही थी।
सौरभ ने आकाश को बाथरूम में लिटाया और उसके माथे पर पानी का छींटा मारकर उसे जगाने की कोशिश की। आकाश की आंखें थकी-थकी थीं, और उसके शरीर में झुनझुनी आ चुकी थी। सौरभ को भय लगने लगा था। जब उसे लगा कि आकाश बेहोश हो रहा है, उसने तुरंत उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन आकाश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।
“आकाश! तुम्हें सुनाई दे रहा है? तुम ठीक हो जाओ!” सौरभ ने चिल्लाया। वह बेताब हो गया था, और उसके अंदर एक भयावह डर समाने लगा। आकाश की तबियत और बिगड़ती गई, और अंततः उसे पता चला कि उसके मजाक ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। उसकी उंगलियां कांपने लगीं और उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
सौरभ बिना समय गंवाए, अपने दोस्त को अपने कंधों पर लेकर बाहर की ओर भागा। क्लब का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। सभी लड़के-लड़कियों की नजरें उन पर थी, और कुछ लोग उनकी मदद के लिए आए। “क्या हुआ? क्या उसने कुछ खाया या पीया?” एक छात्र ने पूछा।
“वो ठीक नहीं है! उसे जल्दी अस्पताल लेजाने की जरूरत है!” सौरभ ने तेजी से उत्तर दिया, उसके गले में एक भारी भावुकता थी। भीड़ में से कुछ छात्र मदद के लिए आगे बढ़े और उन्होंने आकाश को सहारा दिया। सौरभ ने अपने दोस्तों को कहा, “किसी को एम्बुलेंस बुलाने दो! हमें जल्दी करना होगा!”
कुछ ही क्षणों में, एम्बुलेंस वहां पहुंची। सौरभ ने आकाश को सारा ध्यान देकर एम्बुलेंस में लिटाया। उसकी आंखों में आंसू थे, और दिल में पछतावा। “मैंने तुम्हें इस हालत में नहीं देखना चाहा था, आकाश,” वह बुदबुदाया। आकाश की आंखें अब आधी बंद थीं, लेकिन उसने धीरे से सौरभ को देखा।
“सौरभ,” उसने मुश्किल से कहा, “यह तुम्हारी गलती नहीं है। लेकिन हम सबको अपनी सीमाएं जाननी चाहिए।”
सौरभ ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मैंने तुम्हें समझने की बजाय मजाक में लेने की गलती की। मैं नहीं जानता था कि यह सब इतनी गंभीरता से बदल जाएगा।” वह खुद को कोसने लगा। एम्बुलेंस में डॉक्टर ने जांच शुरू की, और सौरभ ने अपनी दीर्घकालिक चिंता को बाहर नहीं आने दिया।
जब एम्बुलेंस अस्पताल पहुंची, तो सौरभ आकाश के
माथे पर हाथ रखे हुए उसके साथ आया। अस्पताल के अंदर, डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत आकाश का इलाज शुरू किया। सौरभ की धड़कनें तेजी से चल रही थीं। वह इंतज़ार के दौरान अपने किए पर पछताने लगा। उसने सोचा, “अगर मैंने उस दिन मजाक नहीं किया होता, तो आज यह सब नहीं होता।”
कुछ समय बाद, एक डॉक्टर ने आकर सौरभ से कहा, “उसकी हालत स्थिर है, लेकिन उसे कुछ समय की ज़रूरत होगी। हम उसे सामान्य स्थिति में वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।” सौरभ ने राहत की सांस ली, लेकिन उसका दिल अभी भी भारी था।
आकाश थोड़ी देर बाद होश में आया। उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं और सौरभ को देखा। “सौरभ, क्या हुआ?” उसने मिचली आवाज़ में पूछा।
“तुम ठीक हो, लेकिन तुमने बहुत ज़्यादा पी लिया था। मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो गलत था,” सौरभ ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।
आकाश ने मुस्कुराकर कहा, “मैं जानता हूँ, तुमने क्या सोचा। लेकिन याद रखो, ज़िन्दगी में मजाक और जिम्मेदारी के बीच में एक सही संतुलन होना चाहिए। हर बात में सीमाएं होती हैं।”
सौरभ ने सिर झुकाया और सोचा कि आकाश की सोच कितनी मज़बूत है, भले ही वह खुद मुश्किल में था। “मैंने तुम्हें समझा नहीं, दोस्त। कभी-कभी हम अपनी मस्ती के लिए दूसरों को खतरे में डालते हैं।”
आकाश ने कहा, “जो हुआ, वह हुआ। हम समझने लगे हैं कि हमारी दोस्ती का क्या महत्व है। हम एक-दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं, यह जानना ज्यादा ज़रूरी है।”
अस्पताल में कुछ समय बिताने के बाद, आकाश ठीक होने लगा। इस घटना ने सौरभ को गहराई से प्रभावित किया। उसने पढ़ाई में भी ध्यान देना शुरू कर दिया, और आकाश के साथ विचार साझा करने लगा।
सौरभ ने आकाश से कुछ किताबें उधार लीं और उनके बारे में चर्चाएं करने लगा। आकाश की प्रेरणादायक बातें अब सौरभ के लिए एक नए सिरे से जीवन जीने का माध्यम बन गईं। अब वह अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता था।
उनकी दोस्ती अब और भी मजबूत हो चुकी थी। आकाश ने सौरभ को सिखाया कि सुधार केवल तब संभव है जब हम अपने गलतियों से सीखते हैं। सौरभ ने आकाश को वादा किया कि वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जाएगा, और वह अपने लक्ष्य की ओर मेहनत करेगा।
“जब हम एक-दूसरे का साथ देंगे, तो हम और भी मजबूत होंगे,” सौरभ ने कहा।
“बिल्कुल, यही दोस्ती का असली अर्थ है,” आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा।
ऐसे ही, सौरभ और आकाश की दोस्ती ने साबित कर दिया कि सही दोस्त की मौजूदगी ही इंसान को सही दिशा में ले जा सकती है और मुश्किल परिस्थितियों में मदद कर सकती है।
Lakshmi Kumari

NSW अनुभवी लेखक -🥇

पढ़ने का समय : 7 मिनट
सोनिया एक चकाचौंध से भरे शहर में रहने वाली एक होशियार और महत्वाकांक्षी लड़की थी। उसका सपना था कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अपने पांव जमा सके और एक शिक्षक बनकर न सिर्फ अपने सपनों को साकार करे, बल्कि अपने पिता का सपना भी पूरा करे। उसके पिता एक शिक्षक थे और वे हमेशा सोनिया को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करते रहे थे।
सोनिया कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी, जहाँ उसे अपने अध्यापकों से लेकर सहपाठियों तक सभी का प्यार और सम्मान मिलता था। वह पढ़ाई में अव्वल थी और अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर थी। लेकिन, अचानक उसकी ज़िंदगी में एक मोड़ आया। कॉलेज में उसकी मुलाकात अजय से हुई, जो उसकी कक्षा का होशियार लड़का था। दोनों के बीच दोस्ती जल्दी ही गहरी हो गई और प्यार का रंग भी उन पर चढ़ने लगा।
सोनिया ने अपने सपने को छोड़कर अजय के साथ विवाह करने का निर्णय लिया। उसके मन में एक ख्याल था कि शादी के बाद वह अपने सपनों को फिर से आगे बढ़ा सकेगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसे एहसास हुआ कि विवाह के बाद उसकी जिम्मेदारियों में इजाफा हो गया। घर, परिवार और अन्य ज़िम्मेदारियों ने उसे अपने सपनों से दूर कर दिया।
अजय एक व्यवसाय में व्यस्त हो गया और सोनिया को घर के कामकाज और परिवार की देखभाल में वक्त गुजारना पड़ा। धीरे-धीरे उसने अपने अध्यापक बनने के सपने को भुला दिया। उसे यह समझ में आया कि प्यार में पड़ने के चक्कर में उसने अपनी शिक्षा और अपने भविष्य को अधूरा छोड़ दिया।
उस समय सोनिया को यह एहसास हुआ कि सपने सिर्फ देखने से नहीं पूरे होते; उन्हें पाने के लिए मेहनत और सही निर्णय लेना जरूरी है। उसने अपने पिता के सपने को याद करते हुए ठान लिया कि वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करेगी और अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
सोनिया ने अपने सपनों को जीवित रखने का फैसला किया। पहले कुछ महीने चुनौतीपूर्ण रहे, क्योंकि उसे घर के कामों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालना था। लेकिन उसने दृढ़ निश्चय किया कि अब वह अपने लक्ष्य को हासिल करेगी।
वह दिन की शुरुआत जल्दी करती, सुबह के नाश्ते के बाद कुछ समय पढ़ाई के लिए समर्पित करती और फिर घर के दूसरे काम करती। जब उसके पति अजय घर आते, वह उनकी मदद करती, लेकिन पढ़ाई का समय हमेशा अपने लिए निर्धारित रखती। धीरे-धीरे अजय ने सोनिया के प्रयासों की सराहना की और उसे प्रोत्साहित करने लगा।
सोनिया ने कॉलेज के अपने शिक्षकों से संपर्क किया और अपने पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए फिर से प्रवेश लिया। उसने कड़ी मेहनत की, और अपने बीच के खोए हुए वर्षों को जल्दी से पूरा करने के लिए रात-रात भर पढ़ाई की। उसने अपने साथियों से मदद ली, अध्ययन समूहों में शामिल हुई और फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने में सफल हो गई।
सोनिया ने अपनी मेहनत के फल देखने शुरू कर दिए। उसने परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए, और अंततः वह स्नातक की डिग्री प्राप्त करने में सफल रही। उसे अपनी मेहनत का फल मिला और वह अपने कॉलेज में टॉपर भी बनी।
अब सोनिया अपने पिता के सपने को पूरा करने के एक कदम और करीब थी। उसने तुरंत टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई शुरू की। उसके मन में एक आध्यात्मिक उद्देश्य जाग उठा था कि वह न केवल एक शिक्षक बनेगी, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी।
अजय, जो पहले थोड़ा सहज था, अब देख रहा था कि सोनिया ने कितनी मेहनत की है और उसने अपने सपनों को पुनर्जीवित किया है। उसने भी उसे सपोर्ट करना शुरू किया, और दोनों ने मिलकर एक खुशहाल जीवन जीने का संकल्प लिया।
सोनिया टीचर ट्रेनिंग में भी अव्वल रही और उसे अपनी कठिनाईयों से उबरना इतना सरल नहीं था। लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। आखिरकार, एक दिन वह अपने पहले क्लासरूम में खड़ी थी। जब उसने अपने छात्रों का सामना किया, तो उसे अपने सपनों की उस हकीकत का एहसास हुआ जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रही थी।
उसे उन बच्चों के चेहरों में वो संभावना दिखाई दी, जिसे उसने कभी अपने अंदर देखा था। सोनिया ने उन्हें पढ़ाने का काम सिर्फ सेकेण्डरी या हाई स्कूल की किताबों तक सीमित नहीं रखा; उसने उन्हें जीवन के महत्त्वपूर्ण पाठ भी पढ़ाए। उसने उन्हें सिखाया कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
सोनिया का संघर्ष न केवल उसके लिए, बल्कि उसके परिवार और सभी छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया। उसने यह साबित कर दिया कि जीवन में चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन अगर अपने सपनों के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।
सोनिया की शिक्षिका बनने की यात्रा ने उसे न केवल एक पेशेवर बना दिया, बल्कि एक सशक्त महिला भी बना दिया। जैसे-जैसे वह अपने छात्रों के साथ समय बिताती, उसने देखा कि कई बच्चे उनके सपनों को पाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्रथाओं और सीमाओं ने उनके सपनों के रास्ते में बाधाएं डाली थीं। सोनिया ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया और अपने छात्रों की मदद करने के लिए एक नया रास्ता चुनने का निश्चय किया।
सोनिया ने छात्रों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की। उसने स्कूल में ट्यूशन क्लासेस आयोजित कीं, जहाँ उसने वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का फैसला किया। उसकी इस पहल ने स्कूल में पठन-पाठन की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद की और कई बच्चों को उनकी पढ़ाई के प्रति उत्साहित किया। सोनिया की मेहनत और प्रतिबद्धता ने उसके छात्रों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
उसने अन्य शिक्षकों को भी इस मुहिम में अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया। उसने एक वर्कशॉप का आयोजन किया जिसमें शिक्षकों को समर्पण और प्रेरणा के साथ छात्रों को पढ़ाने की तकनीक सिखाई गई। इस वर्कशॉप में यह सिखाया गया कि किस तरह से बच्चों के साथ सही से संवाद किया जाए और उनके समस्याओं को समझा जाए।
सोनिया के इस प्रयास से न केवल छात्रों की शिक्षा में सुधार हुआ, बल्कि शिक्षकों के बीच भी एक नई ऊर्जा आई। सभी ने मिलकर एक समुदाय बनाया जो पढ़ाई को आसान और मजेदार बनाने के लिए कार्य कर रहा था। सोनिया का नाम अब न केवल उसके विद्यालय में, बल्कि पूरे शहर में सुनाई देने लगा।
समय के साथ, सोनिया की शिक्षिका के रूप में पहचान बढ़ी और उसे विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा। उसने अपने अनुभव साझा किए और अन्य युवाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। इसके अलावा, उसने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी बात की, यह बताते हुए कि कैसे शिक्षा एक महिला को अपने सपनों को पूर्ण करने की शक्ति देती है।
अपनी सफलता के साथ, सोनिया ने एक चैरिटी फाउंडेशन शुरू किया, जिसका उद्देश्य कमज़ोर और वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करना था। उसने इस फाउंडेशन के माध्यम से कई बच्चों को scholarships प्रदान की और उनके लिए आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई।
सोनिया के इस प्रयास ने न केवल उसके जीवन को बदल दिया, बल्कि कई बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया। उसकी कहानी ने पूरे समाज में एक नई सोच को जन्म दिया। लोग अब शिक्षा को केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं का रास्ता मानने लगे।
समाज में सोनिया का योगदान और उसकी प्रेरक कहानी ने उसे एक रोल मॉडल बना दिया। वह हमेशा इस विश्वास में रही कि एक शिक्षिका न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाती है, बल्कि वह अपने छात्रों के जीवन में एक दिशा दिखाने का भी काम करती है।
सोनिया ने खुद को संजोते हुए अपने पति अजय के साथ मिलकर परिवार को भी संभाला। अजय उसके सपनों का सबसे बड़ा समर्थक बन गया था। उसने सोनिया के सभी कार्यों में उसका साथ दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया। दोनों ने मिलकर एक खुशहाल परिवार बनाया, जिसमें सपनों को साकार करने का मजा था।
आखिरकार, सोनिया ने अपने पिता के सपनों को सच करने के साथ-साथ अपने अपने सपनों को भी पूरा किया। उसकी जीवन यात्रा ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, समर्पण और शिक्षा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। उसने यह दिखाया कि अगर आप अपने सपनों की ओर निरंतर बढ़ते रहें, तो कोई भी चीज़ आपको रोक नहीं सकती।
सोनिया की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों का पीछा कर रहा है। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, अगर आपके पास जुनून और दृढ़ता हो, तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
Lakshmi Kumari

NSW अनुभवी लेखक -🥇