शुरुआत कुछ यूँ हुई थी,
जैसे सुबह में पहली किरण उतरती है,
सूखे मन के आँगन में
धीरे-धीरे कोई बारिश बिखरती है।
तेरी हँसी ने छू लिया था
मेरे खामोश लफ़्ज़ों का जहान,
और फिर हर धड़कन कहने लगी —
“तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरी पहचान।”
तेरी आँखों में मैंने
अपने हर ख़्वाब का घर देखा,
तेरे साथ हर मौसम में
प्यार का खिलता असर देखा।
कभी रूठना, कभी मनाना,
कभी बातों में रात गुज़र जाना,
तेरी मेरी प्रेम कहानी में
हर पल था जैसे कोई अफ़साना।
जब दुनिया ने सवाल किए,
हमने मुस्कुराकर साथ निभाया,
हर मुश्किल की धूप में भी
एक-दूजे को छाँव बनाया।
और अब जब वक़्त की किताब में
कई यादों के फूल सजे हैं,
तेरी मेरी प्रेम कहानी के
हर लम्हे आज भी ताज़ा खड़े हैं।
अंत भी ऐसा हो हमारा,
कि साँसें थम जाएँ मगर प्यार न रुके,
तेरा हाथ मेरे हाथ में हो
और दिल आख़िरी धड़कन तक तुझी को पुकारे।
क्योंकि तेरी मेरी प्रेम कहानी
सिर्फ़ शब्दों की बात नहीं,
ये वो एहसास है
- जो कभी खत्म होने वाली रात नहीं।

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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