रविवार की सुबह थी। घर में बड़ा ही शांत माहौल था। मम्मी मंदिर गई हुई थीं, पापा अखबार पढ़ते-पढ़ते सोफे पर ही खर्राटे मार रहे थे, और छोटा भाई सोनू मोबाइल में गेम खेलते-खेलते दुनिया से बेखबर था।
मैं किचन के दरवाजे पर खड़ी होकर सबको देख रही थी। अचानक मेरे दिमाग में एक खतरनाक… नहीं-नहीं… “महान” आइडिया आया।
“आज मैं खाना बनाऊंगी ओर सब को खुश कर दुगी!”
बस फिर क्या था… मेरे इस फैसले से मुझे तो बहुत खुशी हो रही थी, लेकिन मुझे नहीं पता था कि कुछ ही घंटों बाद घर वालों की हालत ऐसी होने वाली है कि वे भगवान से प्रार्थना करेंगे, “हे प्रभु, इसे दोबारा किचन में मत भेजना!”
मैंने पूरे आत्मविश्वास से एक थाली ओर चम्मच लेकर पीटते हुए ऐलान किया “सुनो सब लोग! आज का खाना मैं बनाऊंगी।”
पापा ने आधी नींद में ही पूछा “कौन… खाना बनाएगा…?”
“मैं!” खुशी से ताली बजाते ही कहा, इतना सुनते ही पापा की नींद ऐसे गायब हुई जैसे मोबाइल से बैटरी।
मम्मी भी तभी मंदिर से लौट आई थीं। उन्होंने जैसे ही मेरी बात सुनी, उनके हाथ से प्रसाद की थाली लगभग गिर ही गई।
“क्या कहा तुमने?”
मैं खुशी से मम्मी के पास जाके कहा, “मम्मी… आज मैं खाना बनाऊंगी। आपको आराम दूंगी।”
मम्मी ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई बहुत बड़ा मजाक कर रही हूं।
“बेटा… तुम्हें पता है किचन में गैस कैसे जलाते हैं?”
मैंने पूरे आत्मविश्वास से कहा, “यूट्यूब है ना मम्मी! और chatgtp गुरु भी तो है”
अब तो घर में सन्नाटा छा गया।
सोनू धीरे से बोला, “मम्मी… आज हम लोग बाहर खाना खा लें क्या?”
लेकिन अब तो मैं ठान चुकी थी। मैं सीधे किचन में घुस गई। सबसे पहले मैंने सोचा, क्या बनाऊं?
बहुत सोचने के बाद मैंने chatgtp पूछा , पर उसकी आधी बातें मेरे दिमाग से निकल गई फिर मैने खुद ही फैसला किया, आलू की सब्जी और रोटी,
वैसे मेरा मन तो था सही पनीर और पलाऊ, लेकिन फिर सोचा अरे अरे रुक जा पहले दिन ही इतना अच्छा खिलाओगी तो सब को हार्डटेक ही ना आ जाए।
इसलिए आलू की सब्जी और रोटी बनाने का फैसला किया। मैंने मोबाइल निकाला और यूट्यूब पर वीडियो चालू किया “5 मिनट में स्वादिष्ट आलू की सब्जी कैसे बनाएं।”
वीडियो देखकर मुझे लगा, “बस इतना सा काम है?” वो तो में यू चुटकी बजाते ही कर लूंगी। लेकिन असली फिल्म तो अब शुरू होने वाली थी।
मैंने गैस जलाई… पहले ही कोशिश में “फूsss…” की आवाज आई और मैं डरकर दो कदम पीछे कूद गई।
बाहर से पापा की आवाज आई , “सब ठीक है ना?”
मैं बोली “हां हां सब… कंट्रोल में है!”
हालांकि कंट्रोल में कुछ भी नहीं था। फिर मैंने कड़ाही चढ़ाई और उसमें तेल डाला। अब वीडियो में कहा गया —
“तेल गर्म होने दें।”
मैंने इंतजार किया… लेकिन मुझे लगा तेल तो बहुत देर से गर्म हो रहा है, तो मैंने गैस पूरी तेज कर दी।
बस फिर क्या था… तेल इतना गर्म हो गया कि जैसे ही मैंने जीरा डाला —
छन्न्न्न्न!!!!
तेल उछल कर बाहर आने लगा। मैं घबरा गई और चिल्लाई, “मम्म्म्म्म्मी!” मम्मी दौड़कर आईं। “क्या हुआ?”
मैं बोली, “ये तेल मुझ पर हमला कर रहा है!”
मम्मी ने माथा पकड़ लिया। “अरे गैस कम कर!”
मैंने जल्दी से गैस कम की और फिर किसी तरह आलू डाल दिए। अब अगला स्टेप था मसाले डालना।
लेकिन यहाँ से कहानी और मजेदार होने वाली थी।वीडियो में बोला गया, “एक चम्मच नमक डालें।”
मैंने नमक का डिब्बा उठाया… लेकिन पता नहीं कैसे मेरा हाथ फिसला और पूरा नमक कड़ाही में गिर गया।
मैंने सोचा “कोई बात नहीं… पानी डाल देंगे।” मैंने आधा जग पानी डाल दिया।
अब आलू की सब्जी नहीं… आलू का सूप बन गया था।
तभी सोनू किचन में आया। “दीदी… क्या बना रही हो?”
मैंने गर्व से कहा, “आलू की सब्जी।”
वह कड़ाही में देखकर बोला, “ये तो लग रहा है आलू तैरने की प्रैक्टिस कर रहे हैं।”
मैंने उसे घूरकर देख कर बोली “बाहर जा!”
अब बारी थी रोटी बनाने की। मैंने आटा निकाला और गूंधना शुरू किया। लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि आटे में पानी कितना डालना होता है।
मैंने थोड़ा पानी डाला… फिर लगा सूखा है… और पानी डाल दिया… फिर लगा अभी भी सूखा है… और पानी डाल दिया। कुछ ही देर में आटा नहीं… आटे का दलदल बन गया। मेरा हाथ उसमें फंस गया था।
सोनू फिर आया और बोला “दीदी… ये रोटी बनेगी या दीवार की पेंट?”
मैंने गुस्से में कहा “अगर और एक शब्द बोला ना… तो तुझे ही बेल कर तवे पर डाल दूंगी। और उसे भी नहीं सुधरा तो दीवार समझ के इसी आटे से पेंट कर दुगी”
सोनू डर कर भाग गया मैंने किसी तरह आटा संभाला और रोटी बेलने लगी।
पहली रोटी बनी… लेकिन वह गोल नहीं थी। वह भारत के नक्शे जैसी लग रही थी।
दूसरी रोटी… वह ऑस्ट्रेलिया जैसी लग रही थी।
तीसरी रोटी… वह तो पता नहीं किस ग्रह का नक्शा थी।
मम्मी चुपचाप दरवाजे से देख रही थीं।
उन्होंने पापा से धीरे से कहा “आज भूखे रहना पड़ेगा।”
आखिरकार खाना तैयार हो गया।
मैंने गर्व से सबको टेबल पर बुलाया। “आइए… आज का स्पेशल खाना तैयार है!”
पापा, मम्मी और सोनू ऐसे बैठ गए जैसे कोई परीक्षा देने जा रहे हों। सबसे पहले पापा ने सब्जी चखी।
जैसे ही उन्होंने पहला निवाला खाया… उनका चेहरा अचानक बदल गया। आंखें बड़ी हो गईं। पसीना आने लगा।
मैंने पूछा, “कैसी है?”
पापा बोले, “बेटा… नमक थोड़ा… ज्यादा है।” सोनू ने चखा और तुरंत पानी पीने लगा। “दीदी… ये सब्जी नहीं… नमक का समंदर है!”
अब मम्मी ने रोटी उठाई। उन्होंने तोड़ने की कोशिश की…
लेकिन रोटी इतनी सख्त थी कि वह टूटी ही नहीं।
पापा बोले, “ये रोटी है या ढाल?”
सोनू बोला,“अगर चोर घर में आ जाए तो इससे मार सकते हैं।”
मैं गुस्से में बोली, “इतनी भी खराब नहीं है!”फिर मैंने खुद खाया… और अगले ही सेकंड पानी के लिए ऐसे भागी जैसे मेरे 10th का एग्जाम हो। “अरे इस में तो सच में बहुत नमकीन है!”
घर में सब हंसने लगे।पापा बोले “बेटा… आज का अनुभव बहुत अच्छा था… लेकिन अगली बार हम सब पहले से अस्पताल का नंबर तैयार रखेंगे।”मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “कोई बात नहीं… पहली कुकिंग ऐसी ही होती है सब की।”
सोनू बोला, “दीदी… एक बात बोलूं?”
“क्या?”
“आप कविता और कहानी ही लिखो… खाना मत बनाओ।”बस फिर क्या था… पूरे घर में हंसी गूंजने लगी। उस दिन हमने आखिर में क्या किया? सबने मिलकर बाहर से पिज्जा ऑर्डर कर लिया।और मैंने मन ही मन फैसला किया “अगली बार कुकिंग करने से पहले… मम्मी से ट्रेनिंग जरूर लूंगी।”लेकिन आज भी जब घर में कोई बहुत ज्यादा नमक डाल देता है… तो पापा तुरंत कहते हैं —“लगता है आज फिर तुम्हारी पहली कुकिंग वाली रेसिपी याद आ गई!” और फिर पूरे घर में हंसी शुरू हो जाती है।
Lakshmi Kumari……

NSW नया लेखक – 🥉


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