कमल राधा को भी बांध दिया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ था।ये बात तो आप लोग जानते हीं हैं की कैसे तीनो के बीच की बहस और लड़ाई इतनी बढ़ गई थी। जो कमल राधा को रेप करने तक की बात भी बोल दिया था। रेप की बात सुनकर राधा और रूपा बहुत घबरा गई थी। दोनो लड़की पसीने से पानी पानी हो गयी थी।
रेप एक ऐसा शब्द है। जो ये शब्द जीस कसी के नाम के साथ जुड़ जाती है। तो उसकी जिंदगी, जीते जी नरक बन जाती है। ये समाज बालात्कार को समाजिक और कानूनी एक बहुत हीं जघन्य अपराध के श्रेणी में रखा है। इस अपराध को करने वाले के खीलाफ बहुत सख्त कानून बनाया गया है। और इसमें सख्त से सख्त सजा देने का प्रवधान भी किया गया है। इसके अंदर सजा आजीवन जेल में रहने से लेकर फांसी की सजा तक भी दी जा सकती है।
आइए हमलोग अपनी कहानी के ओर बढ़ते हैं।
कमल का हौसला अब ज्यादा बढ़ गया था। वो दोनो लड़की पर कंट्रोल जो कर लिया था। राधा और रूपा अपने उपर से रस्सियों के बंधन से छुटने के लिये हांथ पैर तो नही मार सकती थी। क्योंकी बंधे हुए थे। बस अपनी ताकत लगाकर कसमसाने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी।
” देख तेरी ना करने की जिद्द ने तुम्हें कहां लाकर खड़ी कर दी है।तुम्हे शायद मालुम नही, मुझे ना सुनने की बिल्कुल भी आदत नहीं है। जब मैं अपनी मम्मी पापा के ना कहे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं। तो तुम्हारा कैसे करूंगा?”
” कमल राधा के तरफ देखते हुए बोला था। राधा सिर्फ लाचारी से कमल को देखती रहती है। कमल के बात में सच्चाई थी। वो एक अमीर बाप का बेटा था। उसके मॉम डैड उसे बहुत प्यार करते थे ! वे उसके हर जायज नजायज जिद्द को पुरा कर रहे थे। कोई भी चीज का मांग अगर कमल करता था। तो वो उसे लाकर हर हाल में देते थे । कमल के मॉम डैड कमल के पालन पोसन में किसी भी प्रकार के कोई कमी नहीं होने दिये थे। इसी लार प्यार का नतीजा है। की आज उनका बेटा एक रेपिस्ट बनने जा रहा था।
” तुम अपनी सोच कमीने, यहां से तुम बचकर नही जाएगा जिन्दा।”
रूपा कमल पर चिल्ला कर जोर से बोली थी ।
” तू इसी तरह फरफराती रह, तुम लोग कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो मेरा। कुछ भी नहीं करोगी तुम लोग। “
कमल रूपा से बोला और राधा के तरफ बढ़ा और उसकी गले में बांह डालकर अपने दुसरे हांथ से उसके गाल गर्दन को टच करते हुए हांथ नीचे के तरफ बढ़ा दिया था। ये देखकर रूपा को बहुत गुस्सा आ रही थी। वो कमल को कच्चा चबा जाना चाहती थी।
रूपा सोच रही थी। अगर अभी वो बंधी नहीं होती, और उसके हांथ पांव खुले होते तो वो कमल को अच्छा खासा सबक सीखा सकती थी। बंधे होने से वो अपने आपको बहुत हीं लाचार और मजबूर फील कर रही थी। वो यहां से निकलने का मन में तड़किव सोच रही थी। रूपा को आभास हो गयी थी। की रूपा राधा कमल के अलावा भी कोई क्लास रूम में मौजुद है। मगर कौन,वो सोची कही कमल और लोगों को तो नहीं बुला रखा है। हम दोनो से अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए। वो क्लास रूम के चारो तरफ अपनी नजर घुमाके देखने लगी थी। रूपा फिर सोची अगर कमल किसी को बुलाया होता तो वो हम लोगों के सामने लाता हमसे बदला लेने के लिए। फीर मन हीं मन बोली, नही नही शायद यह हमारा वहम है।अगर कमल किसी को बुलाया हुआ होता तो वो उसे छुपने को थोड़ी बोलता।
रूपा राधा के सामने थी। पर कुछ दूरी थी, और बीच में कमल था। अगर रूपा राधा को कुछ भी बताती की उसने क्या महसूस किया है।तो उस बात को कमल भी सुन सकता था। इस लिए रूपा कुछ नहीं बोली। और सोची कोई तो है पर कौन? रूपा अभी ये सब सोच हीं रही थी कि तभी कमल राधा को कस कर पकड़ कर अपने सीने से चिपका लेता है। और अपना चेहरा राधा के चेहरे के सामने ले जा कर राधा को चूमना चाहता है। कमल का मुंह राधा के मुंह से सटने हीं वाला था। की तभी एक साथ दो मुक्का कमल के दोनो जबड़े पर आकर पड़ा। हमला अचानक हुआ था। मुक्के के थ्रो इतना जबरदस्त था। की कमल के बत्तीसी हिल गया था। उसके मुंह से खून बहने लगा था। वो समझ नहीं पा रहा था की उस पर हमला कौन किया था। जब की वो क्लास रूम के दरवाजे को लॉक कर के रखा था। तो बाहर से कोई कैसे आ सकता था। सवाल हीं नही पैदा हो सकता है की कोई बाहर से आ जाए, क्लास रूम के अन्दर।
उसे अच्छे से याद था। कि जब वो दुबारा वापस क्लास रूम में आया था। तो दरवाजे को अच्छे से लॉक किया था। फीर ये कौन अंदर आगया था और कैसे? यही सवाल लिए कमल उपर की तरफ देखता है। देखकर कमल भौचक्का रह गया था। ये कैसे हो सकता है। ये दोनो अन्दर कैसे आ सकती हैं। दर्द तो बहुत हो रहा था कमल को पर इन सवालों के जबाव जानने के लिए। धीमी और रूआंसी आवाज में बोलता है।
तुम, तुम यहां कैसे आई?”
अब आप समझ हीं गये होंगे की वहां कौन आ गयी थी। कमल ये बोला हीं था की आठ दस लात सात आठ मुक्का कमल को और रसीद हो गया था। कमल दर्द से चीख उठा था। चांदनी और शीला कुछ भी बोल नही रही थी। बस उनके हांथ और पांव चल रहे थे।कमल को लग रहा था। कि जैसे अब उसके शरीर से जान नीकल हीं जायेगा। दोनो फाइटर बिल्कुल भी नहीं रूक रहे थे। ताबड़तोड़ लात और मुक्का बरसा रहे थे। मार मार के दोनो सहेली कमल का कचूमर बाहर कर दिया था। जब मार खा खा कर कमल बेहोशी से फर्श पर बेसुध हो गया था। तब दोनो दोस्त अपनी फाइट को विराम दी थी।
” तुम दोनो को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम आ गये हैं।
चांदनी अपने दोनो हाथों को मोड़कर अपने सीने से चिपका कर बोली थी।
” हां तुम लोग डरो मत, तुम्हारी दीदी तुम लोगों को कुछ नही होने देगी।”
शीला भी राधा और रूपा को देख कर बोली थी।
थैंक्यू दीदी, जो आप लोग यहां आ गयी ।
राधा को बोलते हुए आंसू बहने लगे थे।
” देखो, तुम्हे रोने की कोई जरूरत नही है। “
चांदनी राधा के पास जाकर उसके आंख से आंसू पोछने लगती है।
” हां बहन, अब रोने की बारी उनकी है। जिन्होने तुम्हारे आंखों में आंसू दिए हैं। चुप हो जाओ राधा। “
शीला बोलते हुए राधा के कंधे पर हाथ फेर रही थी। और शीला और चांदनी दोनो के बंधे रस्सी को खोलने लगती है।
आगे कि कहानी पढिए अगले भाग में….
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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