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  • अधूरी दास्तान

    पढ़ने का समय : 4 मिनट

    शहर की हल्की बारिश की बूँदें सड़कों पर गिर रही थीं। रिया अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी थी, हाथ में चाय का कप, और मन में एक अजीब सी उदासी। वह उस दिन से सोच रही थी, जब उसने आर्यन को आखिरी बार देखा था। वह आर्यन ही था—उसका पहला प्यार, उसका पहला सपना।

    कॉलेज की यादें अचानक ताजा हो गईं। लाइब्रेरी में किताबों की खुशबू, कैफेटेरिया में हँसी का शोर, और बारिश की उन छुप-छुप कर की मुलाकातों में जो मुस्कानें थी, वे सब कुछ आज भी उसकी आँखों के सामने जीवित थीं। आर्यन हमेशा कहते, “रिया, अगर तुम्हारे ख्वाबों में कोई जगह हो, तो मैं वहीं रहना चाहता हूँ।” रिया की आँखों में चमक आ जाती थी, और उसे लगता था कि उसका पूरा जीवन उसी मुस्कान में समा गया है।

    लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, कॉलेज की दुनिया छोड़कर असली जीवन में कदम रखने का समय आया। आर्यन को विदेश में नौकरी मिली, और रिया को शहर में ही रहना पड़ा। पहले तो दोनों ने हर रोज़ फोन किए, पत्र लिखे, और मिलने की कोशिश की, लेकिन दूरी और जिम्मेदारियों ने उनके बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर दी।

    और फिर वह दिन आया। आर्यन ने संदेश भेजा, “मुझे लगता है हमें अपनी राहें अलग करनी चाहिए। मैं हमेशा तुम्हें याद रखूँगा।” रिया का दिल टूट गया। उसने सारी उम्मीदें, सारे सपने और शायद खुद पर विश्वास तक खो दिया।

    सालों बाद, रिया अब एक सफल आर्ट डायरेक्टर थी। लेकिन मन में वह अधूरापन अभी भी था। एक दिन, उसे अपने पुराने कॉलेज के दोस्त का निमंत्रण मिला। समारोह में पहुँचते ही उसकी नजरें एक व्यक्ति पर टिक गईं—आर्यन। समय की रेत पर शायद हर चीज बदल जाती है, लेकिन उसकी मुस्कान अब भी वैसी ही थी।

    आर्यन भी उसे देखकर चौंका। थोड़ी देर के लिए जैसे समय ठहर गया। दोनों के बीच वही पुरानी गर्माहट और नज़ाकत की आभा फिर से जाग उठी। लेकिन अब वह बातचीत में नहीं, सिर्फ नजरों की खामोशी में थी।

    समारोह के बाद, दोनों पार्क में टहलते हुए पुराने दिनों की बातें करने लगे। वह वही बातें कर रहे थे, जो कभी चुपचाप अपने दिल में महसूस करते रहे थे। अब उनके शब्दों में अनुभव और समझ थी।

    आर्यन ने कहा, “रिया, उस दिन मैं बहुत छोटा और डरपोक था। मैंने अपने डर और जिम्मेदारियों के बीच तुम्हें खो दिया।”

    रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “और मैं भी खुद को दोष देती रही, सोचती रही कि शायद मैं तुम्हारे लिए पर्याप्त नहीं थी।”

    बारिश की बूँदें फिर से गिरने लगीं। रिया ने महसूस किया कि पुराने दर्द में अब कोई कड़वाहट नहीं थी, सिर्फ स्मृतियों की मिठास थी।

    लेकिन इस बार भी कहानी पूरी नहीं हो रही थी। जीवन की जटिलताओं और जिम्मेदारियों ने उन्हें अलग करने का फैसला किया। आर्यन को विदेश लौटना था, और रिया अपने शहर में नई प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थी।

    लेकिन इस बार, अलगाव में भी आशा थी। उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, और इस बार बिना किसी खामोशी के, अपने दिल की भावनाओं को साझा किया। आर्यन ने कहा, “हमारे बीच की दूरी अब फिर से मायने नहीं रखती। जब भी तुम्हारी याद आएगी, मैं तुम्हारे पास महसूस करूंगा।”

    रिया ने हँसते हुए जवाब दिया, “और मैं जानती हूँ कि अब अधूरी दास्तान भी अपने तरीके से पूरी हो रही है। हमारी यादें, हमारी बातें, हमारे सपने—ये सब अब हमारे दिलों में हमेशा के लिए रहेंगे।”

    समारोह खत्म हुआ। रिया अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी थी। बारिश धीमी हो गई थी। उसने अपने दिल में तय किया कि अधूरी दास्तान में भी खूबसूरती हो सकती है। वह अधूरी नहीं रही, क्योंकि उसने इसे अपने अनुभवों और यादों में पूरा कर लिया।

    अगली सुबह, रिया ने अपने फोन में एक संदेश देखा—आर्यन का।

    “रिया, जीवन हमें अलग रास्तों पर ले जा सकता है, लेकिन मेरे दिल में तुम्हारे लिए हमेशा एक जगह है। शायद हम साथ नहीं हैं, लेकिन इस अधूरी दास्तान की मिठास हमेशा हमारे बीच रहेगी। कभी कहीं, कभी किसी रूप में, हम फिर मिलेंगे।”

    रिया ने मुस्कुराते हुए बाहर देखा। सूरज की किरणें अब बरसात की बूँदों पर चमक रही थीं। उसने महसूस किया कि अधूरी दास्तान में भी एक तरह की पूर्णता होती है। कभी-कभी प्रेम का मतलब केवल साथ रहना नहीं, बल्कि अपने दिलों में उसकी याद को संजोना भी होता है।

    वह बालकनी पर खड़ी, बारिश की बची बूँदों को देखते हुए सोच रही थी—शायद जीवन की हर अधूरी कहानी में भी उम्मीद और सुंदरता छिपी होती है। और इस अधूरी दास्तान ने उसे यही सिखाया कि कभी-कभी अधूरापन ही प्रेम की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

    रिया ने धीरे से कहा, “शायद हमारी दास्तान अधूरी है, लेकिन यही अधूरापन इसे सबसे खास बनाता है।”

    और इस तरह, अधूरी दास्तान ने अपने अंतिम पन्ने पर एक नया अध्याय छोड़ दिया—एक अध्याय जो पूरी तरह प्रेम, यादों, और उम्मीद से भरा था।

  • सच्चाई…

    सच्चाई…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अगर सब कुछ पेसो से ख़रीदा जा सकता तो… मंदिरो में यु पेसो वाली की भीड़ ना लगती… सब कुछ पैसा नहीं पर सब पैसे के लिए ही जीते है.. आज अब अगर पैसा है तो नाम है वरना आप गुमनाम है.. पेसो के लिए ना कोई रिश्ता रह पता और ना कोई इंसानियत.. काश की इंसान जल्दी ही समझ पाते की पैसा ही सब नहीं… ✍️✍️

  • खामोश दीवारें

    खामोश दीवारें

    पढ़ने का समय : 4 मिनट
    1.  

    पुरानी हवेली गाँव के आख़िरी छोर पर खड़ी थी—टूटी-फूटी, पर अजीब तरह से जीवित। लोग उसे “खामोश दीवारों वाली हवेली” कहते थे। कहते हैं, उसकी दीवारें बोलती नहीं… मगर सब सुनती हैं। और जो कुछ सुनती हैं, उसे कभी भूलती नहीं।

    रवि, एक युवा पत्रकार, शहर से गाँव आया था। उसे अंधविश्वासों पर एक लेख लिखना था। गाँव वालों ने हवेली की कहानियाँ सुनाईं—रात में चीखें, खुद-ब-खुद खुलते दरवाज़े, और दीवारों पर उभरते चेहरे। रवि हँसा। उसे यकीन था कि ये सब दिमाग का खेल है।

    “अगर हिम्मत है, तो एक रात वहाँ गुज़ार कर देखो,” बुज़ुर्ग रामू काका ने चुनौती दी।

    रवि ने तुरंत हामी भर दी।

    उस रात, चाँद बादलों में छुपा हुआ था। हवेली के भीतर कदम रखते ही उसे एक अजीब सर्दी महसूस हुई, जैसे किसी ने उसकी साँसों को पकड़ लिया हो। दीवारों पर नमी थी, और कहीं-कहीं काई जमी हुई थी। हर कोना जैसे उसे घूर रहा था।

    “बस पुरानी जगह है,” उसने खुद को समझाया और अपना कैमरा सेट कर दिया।

    घड़ी ने बारह बजाए ही थे कि हवेली के भीतर से धीमी फुसफुसाहटें आने लगीं। रवि ने रिकॉर्डर चालू किया। आवाज़ें साफ़ नहीं थीं, पर उनमें दर्द था… जैसे कोई रो रहा हो।

    “कोई है?” रवि ने आवाज़ लगाई।

    अचानक सामने की दीवार पर कुछ हलचल हुई। जैसे पानी में लहर उठती है, वैसे ही दीवार हिलने लगी। और फिर… उस पर एक चेहरा उभर आया—एक औरत का चेहरा, आँखों में डर और होंठों पर अधूरी चीख।

    रवि का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने कैमरा उस ओर घुमाया।

    “मदद करो…” दीवार से आवाज़ आई।

    रवि पीछे हट गया। “ये… ये क्या है?”

    दीवार पर चेहरा और साफ़ होता गया। अब वह सिर्फ चेहरा नहीं था—पूरा शरीर उभर रहा था, जैसे कोई भीतर से बाहर आने की कोशिश कर रहा हो।

    “हमें मत भूलो…” एक और आवाज़ आई।

    रवि ने भागने की कोशिश की, पर दरवाज़ा बंद हो चुका था।

    हवेली की हर दीवार अब हिलने लगी थी। हर तरफ चेहरे उभरने लगे—बच्चे, औरतें, बूढ़े। सबके चेहरों पर एक ही भाव था—डर और पीड़ा।

    “तुम कौन हो?” रवि चिल्लाया।

    एक गहरी, भारी आवाज़ गूँजी, “हम वो हैं… जिनकी आवाज़ कभी सुनी नहीं गई।”

    अचानक कमरे में अंधेरा छा गया। और फिर… रवि को जैसे किसी ने अतीत में धकेल दिया।

    वह खुद को उसी हवेली में देख रहा था, लेकिन अब वह नई थी। चमचमाती, भव्य। अंदर एक अमीर ज़मींदार रहता था—शंकर सिंह।

    शंकर सिंह क्रूर आदमी था। गाँव वालों पर अत्याचार करता, खासकर औरतों और गरीबों पर। जो भी उसके खिलाफ आवाज़ उठाता, वो गायब हो जाता।

    रवि ने देखा—एक गरीब किसान अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रहा था। ज़मींदार के आदमी उसे घसीटकर हवेली में ले आए।

    “छोड़ दो मेरी बेटी को!” किसान चिल्लाया।

    शंकर सिंह हँसा, “यह हवेली है… यहाँ से कोई आवाज़ बाहर नहीं जाती।”

    और फिर… वह लड़की चीखी।

    रवि का शरीर काँप उठा।

    उसने देखा—उस लड़की को मार दिया गया। और उसकी लाश को दीवार के भीतर चुनवा दिया गया।

    “यहाँ हर दीवार में एक कहानी है,” वही भारी आवाज़ गूँजी।

    एक-एक करके रवि ने देखा—कितने लोग, कितनी चीखें, कितनी मौतें… सबको दीवारों में दफना दिया गया था।

    अचानक रवि वर्तमान में लौट आया। वह ज़मीन पर गिरा हुआ था, साँसें तेज़ चल रही थीं।

    दीवारें अब और पास आ रही थीं।

    “तुमने देख लिया… अब हमारी कहानी दुनिया को बताओ…” आवाज़ें गूँज रही थीं।

    रवि ने काँपते हुए कहा, “मैं बताऊँगा… मैं सब बताऊँगा!”

    एक पल के लिए सब शांत हो गया।

    फिर धीरे-धीरे दीवारें अपनी जगह पर लौट आईं। दरवाज़ा खुल गया।

    रवि भागता हुआ हवेली से बाहर निकला।

    अगले दिन गाँव में हलचल मच गई। रवि ने अपने कैमरे की फुटेज देखी—हर चीज़ रिकॉर्ड हो चुकी थी। चेहरे, आवाज़ें… सब कुछ।

    उसने शहर जाकर एक बड़ा लेख लिखा—“खामोश दीवारें: एक हवेली का सच”।

    उस लेख में उसने सिर्फ भूतों की कहानी नहीं लिखी, बल्कि उस अत्याचार की कहानी लिखी, जो सालों तक लोगों ने चुपचाप सहा।

    लेख वायरल हो गया।

    सरकार ने जाँच शुरू की। हवेली को तोड़ा गया। और सच सामने आया—दीवारों के भीतर से कई कंकाल मिले।

    गाँव वाले रो पड़े। उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने सालों तक डर के कारण चुप रहकर कितना बड़ा अपराध होने दिया।

    कुछ महीने बाद, उसी जगह एक स्मारक बनाया गया।

    रवि फिर वहाँ आया।

    अब हवेली नहीं थी, पर हवा में वही ठंडक थी।

    “अब हम खामोश नहीं हैं…” जैसे कोई फुसफुसाया।

    रवि मुस्कुराया।

    (शिक्षा)

    यह कहानी सिर्फ भूतों की नहीं है। यह उन आवाज़ों की है जिन्हें समाज अक्सर दबा देता है। जब हम अन्याय देखकर भी चुप रहते हैं, तो हम भी उस अपराध का हिस्सा बन जाते हैं। खामोश दीवारें हमें याद दिलाती हैं कि सच्चाई को छुपाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता।

    हमें हर अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि अगर हम चुप रहे, तो कल वही दीवारें हमारी भी कहानी सुनाएँगी।

  • 😱 वीरान हवेली 😱

    😱 वीरान हवेली 😱

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    गाँव के बाहर, सूखे पेड़ों और घने कोहरे के बीच एक हवेली खड़ी थी—टूटी हुई, जर्जर, लेकिन अजीब तरह से ज़िंदा। लोग उसे “वीरान हवेली” कहते थे। कहते हैं, वहाँ सिर्फ खामोशी नहीं रहती… वहाँ कुछ और भी है—जो साँस लेता है, देखता है, और इंतज़ार करता है।

    गाँव में एक नियम था—सूरज ढलने के बाद उस हवेली की ओर कोई नहीं जाएगा।

    लेकिन हर नियम की तरह, इसे भी तोड़ने वाला कोई न कोई होता है।

    अर्जुन, शहर से आया एक युवा ब्लॉगर, अंधविश्वासों को झूठ साबित करने के लिए मशहूर था। उसने गाँव की इस हवेली के बारे में सुना और तुरंत फैसला किया—वह रात वहीं बिताएगा।

    “वहाँ मत जाओ बेटा… वो जगह ठीक नहीं है,” एक बुज़ुर्ग महिला ने कांपती आवाज़ में कहा।

    अर्जुन मुस्कुराया, “डर सिर्फ दिमाग में होता है, हकीकत में नहीं।”

    उस रात, कैमरा और टॉर्च लेकर वह हवेली के भीतर चला गया।

    दरवाज़ा चरमराहट के साथ खुला—जैसे किसी ने उसे भीतर आने का निमंत्रण दिया हो।

    अंदर कदम रखते ही उसे सड़ांध की गंध महसूस हुई। हवा ठंडी थी, असामान्य रूप से ठंडी। जैसे वहाँ कोई अदृश्य चीज़ उसकी साँसों के साथ खेल रही हो।

    अर्जुन ने कैमरा चालू किया, “तो दोस्तों, आज हम इस कथित भूतिया हवेली में रात बिताने वाले हैं…”

    उसकी आवाज़ हवेली में गूँजने लगी—और फिर अचानक… एक और आवाज़ उसी गूँज में शामिल हो गई।

    “…रात बिताने वाले हैं…”

    अर्जुन रुक गया।

    “कोई है?” उसने पूछा।

    कोई जवाब नहीं।

    उसने खुद को संभाला, “इको है… बस इको।”

    लेकिन यह इको नहीं था।

    रात के बारह बजते ही हवेली का माहौल बदल गया।

    ऊपर की मंज़िल से कदमों की आवाज़ आने लगी—धीमी, घसीटती हुई।

    ठक… ठक… ठक…

    अर्जुन ने टॉर्च उठाई और सीढ़ियों की ओर बढ़ा।

    जैसे ही वह ऊपर पहुँचा, एक कमरा खुद-ब-खुद खुल गया।

    दरवाज़ा धीरे-धीरे चरमराया… और अंदर घुप अंधेरा।

    “कोई है तो बाहर आओ!” अर्जुन ने ज़ोर से कहा।

    अचानक टॉर्च झिलमिलाई… और बुझ गई।

    अब सिर्फ अंधेरा था।

    और उस अंधेरे में… किसी की साँसें।

    अर्जुन का दिल तेज़ धड़कने लगा।

    फिर… उसके बिल्कुल पास किसी ने फुसफुसाया—

    “तुम आ गए…”

    अर्जुन चीख पड़ा और पीछे हट गया।

    कमरा खाली था।

    लेकिन दीवार पर… खून से लिखा था—

    “यहाँ से कोई नहीं जाता।”

    अर्जुन अब घबराने लगा था, लेकिन उसका अहंकार उसे रोक रहा था।

    “ये सब कोई ट्रिक है… कोई मुझे डराने की कोशिश कर रहा है,” उसने खुद से कहा।

    तभी उसकी नज़र कमरे के कोने में पड़ी—एक पुराना आईना।

    आईने में उसका प्रतिबिंब दिख रहा था… लेकिन कुछ अजीब था।

    उसका प्रतिबिंब मुस्कुरा रहा था।

    जबकि अर्जुन नहीं।

    उसने धीरे-धीरे हाथ उठाया…

    लेकिन आईने में खड़ा “वह” पहले ही हाथ उठा चुका था।

    अर्जुन के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

    “तुम… कौन हो?” उसने काँपते हुए पूछा।

    आईने में खड़ा “वह” धीरे-धीरे बोला—

    “मैं… वही हूँ… जो तुम बनोगे।”

    अचानक आईना चटक गया। काँच के टुकड़े ज़मीन पर गिर गए।

    और हर टुकड़े में… अलग-अलग चेहरे दिखाई देने लगे—रोते हुए, चिल्लाते हुए, मदद माँगते हुए।

    अचानक अर्जुन को अजीब दृश्य दिखने लगे—जैसे वह अतीत में पहुँच गया हो।

    वही हवेली… लेकिन नई।

    अंदर एक अमीर परिवार रहता था।

    लेकिन वह परिवार खुश नहीं था।

    घर का मालिक, रघुवीर सिंह, बेहद निर्दयी इंसान था। वह अपने नौकरों और गरीबों पर अत्याचार करता था।

    एक दिन, एक नौकरानी ने उसके खिलाफ आवाज़ उठाई।

    “बस बहुत हो गया साहब! हम इंसान हैं, जानवर नहीं!”

    रघुवीर की आँखों में क्रोध भर गया।

    “इस हवेली में सिर्फ मेरी आवाज़ चलती है,” उसने गरजते हुए कहा।

    उस रात… उस नौकरानी की चीखें पूरे घर में गूँजीं।

    लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

    क्योंकि सब डरते थे।

    और अगली सुबह… वह गायब थी।

    रवि—नहीं, अर्जुन—ने देखा, उसकी लाश को हवेली के अंदर ही कहीं छुपा दिया गया।

    एक नहीं… कई लोग।

    हर वो इंसान जिसने अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई—गायब कर दिया गया।

    अचानक अर्जुन वर्तमान में लौट आया।

    हवेली अब पहले से भी ज़्यादा डरावनी लग रही थी।

    दीवारों से खून रिस रहा था।

    फर्श पर पैरों के निशान बन रहे थे—अपने आप।

    और फिर…

    सामने अंधेरे से एक आकृति बाहर आई।

    वह इंसान नहीं था।

    उसका चेहरा आधा सड़ा हुआ था, आँखें काली… और शरीर से खून टपक रहा था।

    “तुमने देखा… हमारा दर्द…” उसने भारी आवाज़ में कहा।

    अर्जुन पीछे हटने लगा।

    “मुझे जाने दो…”

    “जाना?” वह हँसा—एक भयानक, गूँजती हुई हँसी।

    “जो यहाँ आता है… वो सच जानता है…”

    “और सच जानने की कीमत होती है…”

    अचानक पीछे से दर्जनों हाथ निकलकर अर्जुन को पकड़ने लगे—दीवारों से, फर्श से, हर जगह से।

    “नहीं! मुझे छोड़ दो!” वह चीखा।

    “तुम भी वैसे ही हो…” आवाज़ें गूँजीं।

    “तुम भी चुप रहते… अगर तुम्हारे सामने यह सब होता…”

    अर्जुन सन्न रह गया।

    उसे एहसास हुआ—वह भी शायद कुछ नहीं करता।

    वह भी डर जाता।

    वह भी चुप रहता।

    और यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी।

    “मुझे माफ़ कर दो…” उसने रोते हुए कहा।

    “मैं… मैं सबको सच बताऊँगा… मैं आवाज़ उठाऊँगा…”

    कुछ पल के लिए सब शांत हो गया।

    फिर धीरे-धीरे वे हाथ गायब हो गए।

    अंधेरा छंटने लगा।

    दरवाज़ा खुल गया।

    सुबह, गाँव वालों ने देखा—अर्जुन हवेली के बाहर पड़ा था, बेहोश।

    जब उसे होश आया, उसकी आँखों में डर नहीं… बल्कि एक सच्चाई थी।

    उसने सब कुछ बताया।

    पहले किसी ने विश्वास नहीं किया।

    लेकिन जब हवेली की खुदाई हुई…

    तो सच्चाई सामने आ गई।

    कई कंकाल, पुराने सबूत… और एक खौफनाक इतिहास।

    गाँव वालों को अपनी चुप्पी पर शर्म आई।

    उन्होंने सालों तक डर के कारण अन्याय को सहा… और उसी ने उस हवेली को शापित बना दिया।

    कुछ महीनों बाद, हवेली को गिरा दिया गया।

    उस जगह एक स्मारक बना—उन सभी के लिए, जिनकी आवाज़ कभी सुनी नहीं गई।

    अर्जुन फिर वहाँ आया।

    अब वहाँ शांति थी।

    लेकिन हवा में एक हल्की फुसफुसाहट अभी भी थी—

    “अब हम आज़ाद हैं…”

    अर्जुन ने आँखें बंद कीं।

    और इस बार… उसे डर नहीं लगा।

     

    (शिक्षा)

    यह कहानी हमें सिखाती है कि अत्याचार सिर्फ करने वाला ही दोषी नहीं होता, बल्कि उसे चुपचाप सहने और देखने वाले भी उतने ही जिम्मेदार होते हैं।

    जब समाज अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना बंद कर देता है, तो वही अन्याय एक दिन अभिशाप बनकर लौटता है।

    डर से बड़ी कोई बुराई नहीं, और सच से बड़ी कोई ताकत नहीं।

  • भाग – 1 इश्क का पैगाम

    भाग – 1 इश्क का पैगाम

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

     

     

     

     

     

     

     

    • भाग – 1 इश्क का पैगाम

    सकरी की माटी और रूह की पहली प्यास

     

    बिहार राज्य के पूर्णिया जिला के सकरी गाँव की सरहद पर जब शाम उतरती है, तो ऐसा लगता है मानो किसी नवयौवना ने अपनी सिंदूरी साड़ी का पल्लू पूरे आकाश पर फैला दिया हो। वह धूल भरी पगडंडी, जिसके दोनों ओर बाँस के झुरमुट हवा में धीरे-धीरे सरसराते थे, जैसे कोई पुराना आशिक अपनी प्रेमिका के कान में कोई गुप्त मंत्र फूँक रहा हो। इसी पगडंडी पर धूल उड़ाती हुई जब ईशान की काली जीप रुकी, तो पूरे गाँव के सन्नाटे में एक अजीब सी हलचल मच गई।

     

    ईशान, जिसके चेहरे पर दिल्ली की भागदौड़ और ‘ब्रेकअप्स’ की थकान साफ़ झलक रही थी, जीप से नीचे उतरा। उसने चश्मा हटाया और एक लम्बी साँस ली। हवा में नीम के पत्तों की कड़वाहट और जलते हुए उपलों की वह सोंधी महक थी, जिसे बहुत से लेखक ने अपनी कहानियों में अमर कर दिया था। ईशान के लिए यह केवल एक ‘लोकेशन’ नहीं थी; यह एक ऐसी दुनिया थी जहाँ प्रेम आज भी अपनी आदिम शुद्धता में जीवित था।

    “यही है सकरी…” ईशान बुदबुदाया। उसके हाथ में कैमरा था, लेकिन मन में एक ऐसी बेचैनी थी जिसे वह खुद समझ नहीं पा रहा था। वह यहाँ एक डॉक्यूमेंट्री शूट करने आया था, लेकिन उसके भीतर का आधुनिक युवा, जो केवल ‘शॉर्ट-टर्म’ रिश्तों और ‘कैजुअल डेटिंग’ का आदी था, यहाँ की शांति से डर रहा था। उसे क्या पता था कि सकरी की यह शांति किसी बड़े तूफान के आने की आहट है।

    गाँव के बीचों-बीच एक पुराना पोखर था, जिसे लोग ‘हंसिया पोखर’ कहते थे। शाम का वक्त था। गाँव की औरतें और लड़कियाँ अपने घड़ों में पानी भरने वहीं जुटती थीं। ईशान टहलता हुआ उधर ही निकल गया। वहीं उसकी मुलाकात मंजरी से हुई।

    मंजरी… वह कोई मामूली लड़की नहीं थी। वह सकरी की धूप और बारिश से बनी एक ऐसी मूरत थी, जिसे देखकर पत्थर भी पिघल जाए। उसने हलके नीले रंग की सूती साड़ी पहनी थी, जिसका पल्लू उसके कंधे से ढलक कर उसकी सुडौल कमर पर आ टिका था। जब वह पानी भरने के लिए पोखर की सीढ़ियों पर झुकी, तो उसकी साड़ी का एक हिस्सा भीग गया। वह भीगा हुआ कपड़ा उसके जिस्म से इस तरह चिपक गया था, मानो साड़ी ने उसके शरीर की हर वक्रता (curve) को चूमने की कसम खा ली हो।

    ईशान का कैमरा हाथ में ही रह गया। उसने कई बार फैशन शोज़ में अधनंगी मॉडल को देखा था, लेकिन मंजरी के उस भीगे हुए रूप में जो ‘शुद्ध कामुकता’ थी, उसने ईशान के पैरों तले की ज़मीन खिसका दी। वह आकर्षण केवल शारीरिक नहीं था; वह रूह की एक ऐसी पुकार थी जिसे ईशान ने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मंजरी के गोरे और सुडौल बदन पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें सूरज की आखिरी किरणों में ऐसे चमक रही थीं, जैसे किसी कलाकार ने सोने की राख बिखेर दी हो।

    मंजरी ने जैसे ही आहट पाकर पीछे मुड़कर देखा, उसकी आँखें ईशान की आँखों से टकराईं। वह क्षण जैसे अनंत काल के लिए थम गया। मंजरी की आँखों में वह ग्रामीण लज्जा तो थी, लेकिन साथ ही एक ऐसी आग भी थी जो सीधे कलेजे को चीर कर पार निकल जाए। प्रेम की भाषा में कहें तो, “मंजरी की चितवन में वह जादू था, जो सावन की पहली फुहार में मिट्टी से उठने वाली उस महक में होता है, जो मन को पागल कर देती है।

    उसने अपनी पायल की छन-छन के साथ एक कदम पीछे हटाया। उसके भीगे बदन की सिहरन दूर खड़े ईशान तक पहुँच रही थी। ईशान के भीतर का आधुनिक पुरुष, जो हमेशा शब्दों और तर्कों से खेलता था, आज गूंगा हो गया था। उसे अपनी रगों में खून की गति तेज होती महसूस हुई। वह मंजरी के करीब जाना चाहता था, उसे छूना चाहता था, यह देखना चाहता था कि क्या यह हाड़-मांस की बनी कोई इंसान है या सिर्फ उसका कोई सपना।

    “कौन हैं आप?” मंजरी की आवाज़ में कोई डर नहीं था, बल्कि एक अजीब सा अधिकार था। उसकी आवाज़ ऐसी थी जैसे पुरानी बांसुरी से कोई विरह का राग निकल रहा हो।

    ईशान ने खुद को संभाला। “मैं… मैं शहर से आया हूँ। कुछ तस्वीरें खींचने।”

    मंजरी हल्का सा मुस्कुराई। उस मुस्कुराहट ने उसके चेहरे पर वह नूर बिखेरा कि ईशान को लगा जैसे पूरी कायनात सिमट कर वहीं आ गई हो। “तस्वीरें? हमारी क्या तस्वीरें खींचिएगा बाबू? यहाँ तो सब कुछ पुराना है, धूल भरा है।”

    “नहीं…” ईशान ने आगे बढ़कर कहा, उसकी आवाज़ में एक गहरी हूक थी, “यहाँ वो है, जो मेरी दुनिया में खो चुका है। यहाँ ‘इश्क’ अपनी असली शक्ल में है।”

    मंजरी ने अपनी नज़रें झुका लीं। उसके गालों पर गुलाबी रंग उभर आया, जो शायद उस शाम की लाली से भी ज्यादा गहरा था। वह अपनी गागर उठाकर जाने लगी, लेकिन उसका भीगा आँचल रास्ते में पड़ी एक झाड़ी में फँस गया। जैसे ही उसने उसे छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाया, साड़ी का वह भीगा हिस्सा और भी तन गया, जिससे उसके शरीर की बनावट ईशान के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो गई। ईशान का गला सूखने लगा। आज की ‘फास्ट लाइफ’ में जहाँ सेक्स सिर्फ एक ज़रूरत थी, यहाँ उसे महसूस हुआ कि एक स्पर्श की प्यास क्या होती है।

    मंजरी ने शरमाते हुए आँचल छुड़ाया और एक बार पीछे मुड़कर ईशान को देखा। उस एक नज़र में हज़ारों पैगाम थे, आमंत्रण भी, डर भी और एक अनकही चाहत भी।

    उस रात, सकरी के डाक-बंगले में लेटे हुए ईशान को नींद नहीं आई। बाहर झींगुरों का शोर था और दूर कहीं कोई बिरहा गा रहा था। उसे बार-बार मंजरी का वह भीगा बदन, उसकी सुराहीदार गर्दन पर थमी पानी की वो बूंद और उसकी आँखों की वो आग याद आ रही थी। उसने महसूस किया कि उसका शहरी दिल, जो अब तक केवल ‘डेटिंग ऐप्स’ के छोटे-छोटे पैगामों में खुशी ढूँढता था, अब एक बड़ी आग में जलने को तैयार है।

    सकरी की वह रात गवाह थी कि एक आधुनिक प्रेमी और एक ग्रामीण प्रेमिका के बीच की वह दीवार अब टूटने वाली थी। यह केवल एक प्रेम कहानी की शुरुआत नहीं थी; यह दो अलग-अलग दुनियाओं के टकराने और एक होने की दास्तान थी, जहाँ जिस्म की प्यास और रूह की तलाश एक दूसरे में मिलने वाली थी।

    जारी…..

     

    मेरे प्यारे पाठकों, “इश्क का पैगाम” का यह पहला भाग आपको कैसा लगा? क्या सकरी गाँव की माटी की महक और मंजरी की वो पहली सिहरन आपके दिल तक पहुँची?

    पढ़ने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया! ❤️

    यह एक लम्बी और रोमांचक यात्रा है। आपकी हर एक टिप्पणी (Comment) और प्रतिक्रिया मुझे आगे लिखने की ऊर्जा देगी। कृपया  अपने विचार जरूर लिखें और कहानी पसंद आये, तो उपहार स्वरूप स्टीकर भेजकर प्रोत्साहित करें।

    सधन्यवाद 

     

     

  • फाइटर बेटियां

    फाइटर बेटियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    चलो ठिक है तो हम दोनो जा रहे हैं ! तुम बैठो क्लास रूम मे…राधा बोली और जाने लगी….रूको राधा तुम ऐसे नहीं जा सकती मेरे सवाल का जबाव दिए बगैर…कमल को गुस्सा आने लगा था !

    ” मैं क्या जबाव दूं ..कौनसी बात का जबाव दूं, हां “

    राधा डांटते हुए कमल से बोली थी। बिना रूके फीर बोली…

    ” देखो, मैं ना तो तुम्हें चाहती हूं। ना हीं मेरे मन मे तुम्हारे लिए कुछ है। ना था ना है ना रहेगा “

    राधा अपने तरफ से बात साफ करते हुए बोली थी।

    ” तुम्हें समझ में नही आता क्या कुछ भी?,जब दीदी मना कर रही है, तो तुम क्यो पागलों जैसी हरकत कर रहे हो।”

    रूपा कमल को समझाने की कोशिश की थी।

    ” देखो तुम्हें जो समझना है समझो, पर आज मैं तुम्हे पाकर रहूंगा राधा “

     अपनी उंगलियों से चुटकियां बजाते हुए कमल, अपना डिसीजन क्लियर कर दिया था ।

    ” तुम बहुत गलत कर रहे हो कमल, तुम्हें पता भी है, कि तुम क्या कह रहे हो। जिस बात का कोई मतलब हीं नही है।”

    राधा कमल को, समझा बुझा कर उससे अपना पिछा छुड़वाना चाह रही थी । 

    ” क्या तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है? “

    कमल राधा के आंखों से आंख मिलाकर बोला था।

    ” बिल्कुल नहीं “

    राधा कमल को जबाव देते हुए बोली थी।

    ” जब दीदी बोल दी है नही, तो अब तुम्हारा यहां रूकने का कोई मतलब हीं नही बनता है। अब तुम जा सकते हो,जाओ जल्दी यहां से “

    रूपा कमल को गुस्से से देखते डांट कर जोर से हुए बोली थी।

     

    क्लास बिल्डिंग रास्ता 

     

    इधर चांदनी रूपा के नम्बर पर कॉल लगा रही थी। रिंग बजकर कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, दुबारा से नम्बर डायल कर दी थी। इस बार भी कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, हैरानी से शीला के तरफ देखी।

    ” ये भी कॉल नही उठा रही है । “

     चांदनी शीला से बोली।

    ” चलो चलकर देखते हैं।अब वहीं जाकर पता चलेगा, की आखिर बात क्या है। “

    शीला चांदनी से बोली और आगे चलने लगी थी।

    ” ठीक चलो वही चलते हैं। “

    बोलते हुए चांदनी भी चल पड़ी थी। आज पहली बार हुआ था की राधा और रूपा इन दोनो के कॉल रिसीव नही की थी ।इससे पहले जब भी ये दोनो, राधा या रूपा को कॉल करती थी।तो कॉल रिसीव होते हीं उनके चहकती हुई खनखनाती हुई आवाजों से इनका स्वागत होता था। पड़ ना जाने आज क्या हो गया था ,की कॉल रिसीव हीं नही हो रही थी। यही सोचते हुए दोनो आगे बढ़ रही थी।

     

    क्लास रूम 

     

    ” रूपा जुवान सम्भल कर बात करो, तुम्हें बीच में बोलने के लिए किसने बोला है। अगर तुमको जाना है, तो तुम जा सकती हो।राधा कहीं नहीं जा रही है। मैं बोल दिया तो बोल दिया। “

    कमल रूपा को आंख दिखाते हुए बोला था ।

    ” अबे मजनू के औलाद, तुम्हे बात कुछ समझ में आता है की नहीं। बहुत बात से  समझा लिया तुमको, अब शायद  तुम लात खाके हीं मानोगे। “

    रूपा कमल पर चिल्ला कर गुस्से से चीखते हुए बोली थी।

    ” कमल तुम जाओ यहां से,मैं तुम्हे बार बार बोल रही हूं। मुझे छोड़ दो, मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है। तुम क्या, किसी भी लड़के के लिए मेरे दिल में कुछ भी नहीं है। समझो बात को, और जाओ यहां से। “

    राधा बोली,राधा बोल रही थी। इतने में कमल राधा का हांथ पकड़ लेता है। राधा झटक कर कमल से अपना हांथ छुड़ा लेती है। कमल जितना भी राधा के पास आना चाह रहा था। राधा कमल से उतनी हीं दुर जा रही थी। यह देखकर कमल का सब्र का बांध टुटता जा रहा था। कहते हैं, लोग प्यार में पागल हो जाता है। और जब प्यार एक तरफा हो तो पागल पंती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। कमल को गुस्सा इस बात से नहीं था। की राधा ने उसे रिजेक्ट किया था। बल्की गुस्सा इस बात से था।की वो ऐसा कर कैसे सकती है। मैं हेंडसम हूं। पढा लिखा हूं। पैसा प्रोपर्टी है हमारे पास, फीर भी मुझे ये रिजेक्ट कर रही है। यही कारण है। की प्यार रिस्पेक्ट आदर से शुरूआत हुई बात अब जोर जबर्दस्ती नीच पंती तक पहुंच गयी थी। 

    ” समझा समझा कर थक गयी हूं तुम्हे, पर तुम हो की समझने का नाम हीं नहीं ले रहे हो। “

    राधा बोली और अपनी आंख लाल करते हुए कमल को देखी।

    ” मुझे कुछ नहीं समझना है। अब जो भी समझना है। सिर्फ और सिर्फ तुन्हें समझना है। बोलकर कमल राधा के गाल को हांथ लगाना चाहता है। पर इससे पहले की कमल का हांथ राधा के गाल को टच करता उससे पहले हीं कमल के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा थप्पड़ के साउंड इतना तेज था। की पूरा क्लास रूम गन गना गया था। थप्पड़ खा कर जब कमल पिछे मुरा तो देखा, रूपा अपनी कमर पर हांथ रखी हुई कमल के तरफ देख रही थी। 

    ” तुम, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे थप्पड़ मारने की “

    कमल रूपा को गुस्से से देखते हुए बोला था। अभी भी कमल का हांथ उसके गाल पर हीं था।

    ” वैसे हीं, जैसे तुम्हारा हिम्मत हुआ।  मेरी दीदी के साथ बदसलूकी करने का “

    बोलकर रूपा कमल को घुरने लगी थी।

    ” महंगा पड़ेगा, तुम लोगों को ये थप्पड़ । समझी तुम.”

    कमल रूपा पर गुर्राया।

    ” क्या महंगा पड़ेगा बे “

    बोलकर रूपा  तेजी से झपट कर कमल के कमर पर एक लात मारी कमल अपने आप को सम्भाल पाता इससे पहले रूपा ताबड़तोड़ मुक्का बरसाने लगी। अब जब कमल को मार पर हीं गया था। तो वो भी कहां पिछे रहने वाला था। उसने रूपा के गाल पर जोरदार तमाचा मारा रूपा हिल गयी थी।  पर वो रूकी नही अब पहले से और भी ताकत के साथ कमल पर अटैक करी थी।

    ” ले मजनू की औलाद, ये ले, और ले “

    रूपा लगातार कमल के पेट में पंच कर रही थी। 

    ” रूपा तुम ज्यादा उड़ रही हो तुम,  पड़ कुचलना पड़ेगा तुम्हारी। समझी रूपा की बच्ची। “

    कमल दांत पीस कर रूपा के तरफ देखते हुए बोला था।

    ” पड़ कुचलेगा हराम खोर, तेरी तो मैं जान निकाल दूंगी। मेरी दीदी को परेशान करता है। अब तो तुझे उपर वाला भी नही बचा सकता है। ले, ये ले लात खा कमीने। सुधर तो तुम सकते नहीं, तो मर जायेगा ऐसे हीं।  तुम्हारे खानदान में सारे कमीने ही होंगे इस लिए तुम ऐसी नीच वाला हरकत करता है। “

    बोलते हुए रूपा कमल को बेसुध पिटाई कर रही थी।मार खाते हुए कमल कराह रहा था। राधा जो ये सब देख रही थी। रूपा को रोकना चाह रही थी। पर कमल के हरकत से उसे भी बहुत दु:ख पहुंचा था।चाहकर भी वो रूपा को नही रोक पायी वो भी कमल के ठीक सामने आकर खरी हो गयी थी।

    ”  चला भी जा अब, जा,क्यों पिटाई खा रहा है। “

    राधा कमल को रूपा के हाथों पिटते हुए कमल पर दया दिखाते हुए गंभीर स्वर में बोली थी।

    क्या कमल पिटाई खा कर चला गया?या उसने कोई चाल चली। क्या रूपा कमल के चंगुल से राधा को बचा पाई?या रूपा भी फंस गई। क्या शीला और चांदनी राधा और रूपा के पास पहूंच पाई ? क्या होगा राधा और रूपा के साथ? क्या होगा कमल का अगली चाल इन्हीं सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए इस कहानी के साथ। आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में…..।

  • तुम और मैं- एक प्रेम कहानी ❤️

    तुम और मैं- एक प्रेम कहानी ❤️

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

     

    बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की के शीशे पर गिर रही थीं। हवा में एक अजीब सी ठंडक थी, जो दिल के अंदर तक उतर रही थी। आरव अपनी कॉफी के कप को थामे खिड़की के पास खड़ा था, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा हो। शायद किसी ऐसे इंसान का, जो उसकी जिंदगी में कभी था… और अब नहीं था।

    उसकी नजरें बाहर सड़क पर टिकी थीं, लेकिन उसका मन अतीत की गलियों में भटक रहा था।

    “तुम और मैं… क्या सच में बस एक कहानी बनकर रह गए?” उसने खुद से धीमे से कहा।

     

    तीन साल पहले…

    कॉलेज का पहला दिन था। भीड़, शोर, नए चेहरे—सब कुछ नया और थोड़ा डराने वाला भी। आरव हमेशा की तरह चुप रहने वाला लड़का था। उसे भीड़ में रहना पसंद नहीं था।

    तभी अचानक किसी से टकरा गया।

    “ओह सॉरी!” एक मीठी सी आवाज आई।

    आरव ने नजर उठाई—सामने एक लड़की थी, बड़ी-बड़ी आँखें, चेहरे पर हल्की मुस्कान, और बाल हवा में लहराते हुए।

    “कोई बात नहीं,” उसने धीमे से कहा।

    “मैं नंदिनी हूँ,” उसने मुस्कुराते हुए हाथ बढ़ाया।

    आरव ने थोड़ा हिचकिचाते हुए हाथ मिलाया—“आरव।”

    उस दिन बस इतना ही हुआ। लेकिन शायद वही एक पल था, जब उनकी कहानी शुरू हो चुकी थी।

     

    दिन बीतते गए, और नंदिनी धीरे-धीरे आरव की जिंदगी का हिस्सा बन गई। वह उसकी खामोशी को समझती थी, और उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देती थी।

    “तुम इतना चुप क्यों रहते हो?” एक दिन नंदिनी ने पूछा।

    “पता नहीं… आदत है,” आरव ने जवाब दिया।

    “तो बदलो आदत। मैं हूँ ना, बातें करने के लिए,” उसने हंसते हुए कहा।

    और सच में, नंदिनी के साथ रहते-रहते आरव बदलने लगा। अब वह मुस्कुराता था, हंसता था, और कभी-कभी बेवजह बातें भी करता था।

    दोनों साथ में कैंटीन जाते, लाइब्रेरी में घंटों बैठते, और कभी-कभी बिना किसी वजह के बस कॉलेज के गार्डन में घूमते रहते।

    एक दिन बारिश हो रही थी—ठीक वैसे ही जैसे आज।

    “चलो भीगते हैं!” नंदिनी ने उत्साह से कहा।

    “पागल हो क्या? बीमार हो जाओगी,” आरव ने कहा।

    “तुम साथ हो ना, कुछ नहीं होगा,” उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

    और उस दिन पहली बार आरव ने खुद को पूरी तरह खुला हुआ महसूस किया। बारिश की बूंदें, नंदिनी की हंसी, और दिल में एक अनकहा सा एहसास…

    शायद यही प्यार था।

     

    एक शाम, कॉलेज के गार्डन में बैठकर आरव बहुत देर तक कुछ सोचता रहा।

    “क्या हुआ?” नंदिनी ने पूछा।

    “कुछ कहना है…” उसने धीरे से कहा।

    “तो कहो ना,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

    आरव ने गहरी सांस ली—“नंदिनी… मुझे लगता है मैं तुमसे… प्यार करने लगा हूँ।”

    कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।

    नंदिनी ने उसे देखा… और फिर हल्के से मुस्कुरा दी।

    “मुझे लगा तुम कभी नहीं कहोगे,” उसने कहा।

    “मतलब?” आरव ने हैरानी से पूछा।

    “मतलब… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ,” उसने धीरे से कहा।

    उस दिन, उनकी कहानी ने एक नया मोड़ लिया—दोस्ती से प्यार तक का सफर पूरा हो चुका था।

     

    अब हर दिन खास होता था। छोटी-छोटी बातें भी बड़ी खुशियाँ बन जाती थीं।

    “जब तुम साथ होती हो ना, सब आसान लगने लगता है,” आरव ने एक दिन कहा।

    “और जब तुम साथ होते हो, दुनिया अच्छी लगने लगती है,” नंदिनी ने जवाब दिया।

    दोनों ने साथ में सपने देखे—एक साथ जिंदगी बिताने के, हर मुश्किल को साथ पार करने के।

    लेकिन जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती, जैसी हम सोचते हैं।

    दूरी

    कॉलेज खत्म होने वाला था।

    एक दिन नंदिनी बहुत चुप थी।

    “क्या हुआ?” आरव ने पूछा।

    “मुझे एक जॉब ऑफर मिला है… दूसरे शहर में,” उसने धीमे से कहा।

    आरव कुछ पल के लिए चुप रह गया।

    “तो जाओ ना… ये तो अच्छी बात है,” उसने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा।

    “और तुम?” नंदिनी की आंखों में सवाल था।

    “मैं यहीं रहूंगा… मेरी फैमिली…” आरव ने जवाब दिया।

    दोनों जानते थे—ये फैसला आसान नहीं था।

    टूटन

    दिन बीतते गए, और दूरी बढ़ती गई। फोन कॉल्स कम हो गए, मैसेजेस में वो गर्माहट नहीं रही।

    एक दिन नंदिनी ने कहा—“शायद हमें थोड़ा स्पेस चाहिए…”

    आरव ने कुछ नहीं कहा।

    वो समझ गया था—ये ‘स्पेस’ असल में ‘दूरी’ बन चुका था।

    धीरे-धीरे बात करना बंद हो गया।

    और एक दिन, सब खत्म हो गया।

     

    तीन साल बाद…

    आरव अभी भी उसी शहर में था, उसी खिड़की के पास खड़ा।

    तभी दरवाजे की घंटी बजी।

    उसने दरवाजा खोला…

    सामने नंदिनी खड़ी थी।

    वही मुस्कान, वही आंखें… लेकिन अब उनमें एक अलग सी गहराई थी।

    “हाय,” उसने धीरे से कहा।

    “नंदिनी… तुम?” आरव हैरान था।

    “अंदर आ सकती हूँ?” उसने पूछा।

    फिर से

    दोनों चुपचाप बैठे रहे कुछ देर तक।

    “कैसे हो?” नंदिनी ने पूछा।

    “ठीक हूँ… तुम?” आरव ने जवाब दिया।

    “ठीक नहीं थी… इसलिए वापस आ गई,” उसने कहा।

    आरव ने उसकी तरफ देखा—“क्यों?”

    नंदिनी की आंखों में आंसू थे—“क्योंकि मैंने समझ लिया… कि जिंदगी में सब कुछ मिल सकता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं।”

    “और तुम?” उसने पूछा।

    आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—“मैंने कभी तुम्हें भुलाया ही नहीं।”

    नई शुरुआत

    बारिश फिर से शुरू हो गई थी।

    नंदिनी खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई—“याद है? हम पहली बार ऐसे ही भीगे थे।”

    “हाँ… और तुमने कहा था—‘तुम साथ हो ना, कुछ नहीं होगा’,” आरव ने मुस्कुराते हुए कहा।

    नंदिनी ने उसकी तरफ देखा—“अब भी कह सकती हूँ?”

    आरव उसके पास आया, उसका हाथ थाम लिया—“अब तो हमेशा साथ रहूंगा।”

    दोनों खिड़की के पास खड़े होकर बारिश को देखते रहे।

    इस बार, कोई डर नहीं था। कोई दूरी नहीं थी।

    बस दो लोग थे—जो कभी एक-दूसरे से बिछड़ गए थे, लेकिन फिर से मिल गए।

     

    “तुम और मैं…” नंदिनी ने कहा।

    “एक कहानी नहीं… एक जिंदगी,” आरव ने उसकी बात पूरी की।

    बारिश की बूंदें अब भी गिर रही थीं, लेकिन इस बार वो ठंडक नहीं, बल्कि एक नई गर्माहट लेकर आई थीं।

    शायद कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं…

    वो बस थोड़ा रुकती हैं, ताकि फिर से शुरू हो सकें।

    और ये कहानी भी… अब शुरू हुई थी। ❤️

  • शायरी…

    शायरी…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जो हमसे दूर हुए…

    हम उसे भूल गये… 😎😎

  • रोशनी का सफर

    पढ़ने का समय : 5 मिनट
    1. नवरात्रि का पर्व था। चारों ओर दीपों की जगमगाहट, ढोल-नगाड़ों की गूंज, और भक्ति का वातावरण फैला हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो पूरी धरती अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर बढ़ रही हो। हर घर में माँ दुर्गा की आराधना हो रही थी, और हर मन में एक नई उम्मीद जाग रही थी।
    2. इसी शहर में आरव नाम का एक युवक रहता था। बाहर से देखने पर वह सामान्य दिखता था, लेकिन उसके मन में गहरा अंधकार था। वह हमेशा निराश रहता, लोगों से दूर भागता और अपने जीवन को बेकार समझता। उसके पिता का देहांत हो चुका था और माँ बीमार रहती थीं। जिम्मेदारियों के बोझ ने उसके भीतर की रोशनी को बुझा दिया था।
    3. नवरात्रि शुरू हुई, लेकिन आरव के लिए यह भी एक सामान्य दिन जैसा ही था। उसके घर में कोई सजावट नहीं थी, न ही पूजा का कोई उत्साह। उसकी माँ, जो बिस्तर पर लेटी थीं, धीरे से बोलीं,
    4. “बेटा, इस बार भी माँ दुर्गा की पूजा नहीं करोगे?”
    5. आरव ने उदासी से कहा,
    6. “माँ, इन सब चीज़ों से क्या बदल जाएगा? हमारे जीवन में तो सिर्फ अंधेरा ही है।”
    7. माँ मुस्कुराईं और बोलीं,
    8. “बेटा, अंधकार कभी अपने आप नहीं जाता, उसे मिटाने के लिए एक छोटी सी ज्योति भी काफी होती है।”
    9. आरव ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन ये शब्द उसके मन में कहीं गहराई तक उतर गए।
    10. अगले दिन, वह काम से लौट रहा था कि रास्ते में उसने एक छोटी सी बच्ची को देखा। वह एक टूटी हुई झोपड़ी के बाहर बैठी थी और मिट्टी के दीये बना रही थी। उसके कपड़े फटे हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी।
    11. आरव ने पूछा,
    12. “तुम ये दीये क्यों बना रही हो?”
    13. बच्ची ने मुस्कुराकर कहा,
    14. “नवरात्रि है ना भैया! लोग अपने घरों में रोशनी करेंगे, इसलिए मैं ये दीये बेचती हूँ। इससे मेरी माँ की दवाई आ जाएगी।”
    15. आरव हैरान रह गया। उसने सोचा, “इतनी छोटी बच्ची, इतनी मुश्किलों में भी खुश है, और मैं…?”
    16. उसने बच्ची से कुछ दीये खरीदे। बच्ची ने खुशी से कहा,
    17. “भैया, इन दीयों से आपका घर बहुत सुंदर लगेगा।”
    18. आरव ने हल्की सी मुस्कान दी, जो शायद महीनों बाद उसके चेहरे पर आई थी।
    19. घर लौटकर उसने उन दीयों को एक कोने में रख दिया। रात को जब बिजली चली गई, तो पूरा घर अंधेरे में डूब गया। उसकी माँ ने धीरे से कहा,
    20. “बेटा, वही दीये जला दो।”
    21. मन मारकर आरव ने एक दिया जलाया। जैसे ही वह छोटा सा दीपक जला, कमरे में हल्की सी रोशनी फैल गई। अंधकार पीछे हटने लगा।
    22. उस पल आरव को अपनी माँ की बात याद आई—“एक छोटी सी ज्योति भी अंधकार मिटा सकती है।”
    23. अगले दिन उसने घर को साफ किया और बाकी दीये भी जलाए। घर में एक अलग ही ऊर्जा महसूस हो रही थी। उसकी माँ के चेहरे पर भी खुशी लौट आई थी।
    24. धीरे-धीरे आरव के अंदर भी बदलाव आने लगा। उसने तय किया कि वह सिर्फ अपने जीवन का अंधकार नहीं मिटाएगा, बल्कि दूसरों के जीवन में भी रोशनी लाएगा।
    25. नवरात्रि के पाँचवे दिन, वह उसी बच्ची के पास गया। उसने देखा कि कई लोग दीये खरीद रहे थे, लेकिन कुछ लोग उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जा रहे थे।
    26. आरव ने सोचा, “अगर मैं मदद कर सकता हूँ, तो क्यों न करूँ?”
    27. उसने बच्ची से कहा,
    28. “तुम सारे दीये मुझे दे दो, मैं बेचने में तुम्हारी मदद करूँगा।”
    29. बच्ची की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
    30. उस दिन से आरव ने उस बच्ची के साथ मिलकर दीये बेचने शुरू किए। उसने अपने दोस्तों को भी बुलाया और सभी ने मिलकर गरीब लोगों के बनाए दीयों को खरीदकर शहर में बाँटना शुरू किया।
    31. धीरे-धीरे यह एक अभियान बन गया। लोग अब महंगे बिजली के लाइट्स छोड़कर मिट्टी के दीयों का उपयोग करने लगे। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा हुआ, बल्कि उन गरीब कारीगरों के जीवन में भी खुशियाँ आने लगीं।
    32. नवरात्रि के आठवें दिन, पूरे शहर में एक अलग ही नजारा था। हर घर में मिट्टी के दीये जल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे अंधकार पूरी तरह हार चुका हो और प्रकाश ने जीत हासिल कर ली हो।
    33. आरव की माँ ने उसे पास बुलाकर कहा,
    34. “देखा बेटा, एक छोटी सी ज्योति कितनी बड़ी रोशनी बन सकती है?”
    35. आरव की आँखों में आँसू थे, लेकिन ये आँसू दुख के नहीं, बल्कि खुशी और संतोष के थे।
    36. नवरात्रि के नौवें दिन, आरव ने एक छोटा सा आयोजन किया। उसने सभी लोगों को बुलाया और कहा,
    37. “हम सबके जीवन में कभी न कभी अंधकार आता है। लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। एक छोटी सी कोशिश, एक छोटा सा दीपक भी हमारे और दूसरों के जीवन को रोशन कर सकता है।”
    38. लोगों ने उसकी बात को ध्यान से सुना। उस दिन कई लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने आसपास के लोगों की मदद करेंगे और उनके जीवन में भी रोशनी लाने की कोशिश करेंगे।
    39. उस रात, जब पूरे शहर में दीप जल रहे थे, आरव छत पर खड़ा होकर आसमान की ओर देख रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे माँ दुर्गा खुद मुस्कुरा रही हों और उसे आशीर्वाद दे रही हों।
    40. अब वह वही आरव नहीं था जो कुछ दिन पहले था। उसके भीतर का अंधकार खत्म हो चुका था, और उसकी जगह एक उज्जवल प्रकाश ने ले ली थी।
    41. सीख:यह कहानी हमें सिखाती है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी सी रोशनी उसे मिटाने के लिए पर्याप्त होती है। हमें अपने जीवन की समस्याओं से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उनका सामना करना चाहिए। और अगर हम दूसरों के जीवन में थोड़ी सी भी खुशी और रोशनी ला सकें, तो वही सच्ची पूजा और सच्ची नवरात्रि होती है।नवरात्रि सिर्फ देवी की आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को दूर करके एक नई शुरुआत करने का अवसर है। जब हम खुद रोशनी बनते हैं, तभी हम दुनिया को सच में प्रकाशमय बना सकते हैं।
  • Unplanned lending

    पढ़ने का समय : 11 मिनट

    अनप्लेड लैंडिंग कुछ दोस्तों की एक शार्ट कहानी है जो एक जंगल में उनलोगो के फस जाने पर कैसे जीते है उसे दिखाया गया है… वहां उन्हें किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है और कैसे उनमे से कोई बच कर बाहर आए पता है इसे दर्शाया गया है.. हम आशा करते है आपलोगो को ये स्टोरी पसंद तो चले शुरू करते है जिंदगी की नई सफऱ…

     

     

     आसमा बिलकुल साफ था हाँ कुछ बादल सा छाया हुआ था, तब्बी उस आसमा से कुछ परिंदे जैसे दिखने वाले कुछ गुब्बारे निचे उतरते हुए दिखाई देते है |

     

        हवा का जोरदार बहाव मे वो गुब्बारे कही और जाने के जगह यहाँ उतने के ओये बिलकुल तैयार से थे उन्हें यहाँ उतने का कोई भी प्लान नहीं किया गया तह पर वो वही पर उतरने वाले थे |

     

    वो गुब्बारे जमीन पर लैंडिंग करते है और सभी के ऊपर लगी हुई आग बुझ सी जाती है, हुआ यु की कुछ इंसान जो की एक ग्रुप सा था सब कही और घूमने के लिए प्लान बनाया हुआ तह और वो इस गुब्बारे के जरिये ये दुनिया घूमना चाह रहे थे, पर उनकी किस्मत कहिये या फिर गलत वक़्त उनका गुब्बारा कही और जगह के बजाय इस घने जंगल मे लैंड हो जाता है |

     

     

    उन गुब्बारे के निचे आते ही उससे निकलता है कुछ इंसान जिसमे रहते है, महक, मिथ्या, सत्यम अमन और उनके कुछ और भी दोस्त सभी एक टूर पर निकले हुए से थे पर गलती थी 

     

     

    महक ने कहा, “यह क्या हुआ? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि गुब्बारे में कुछ समस्या थी।”

     

    सत्यम ने कहा, “चलो हम यहाँ से निकलते हैं और कोई रास्ता ढूंढते हैं।”

     

    अमन ने कहा, “लेकिन यहाँ कैसे निकलेंगे? यह तो घना जंगल है।”

     

    महक ने कहा, “हमें कुछ करना होगा। हम यहाँ नहीं रह सकते।”

     

    तभी उन्हें एक आवाज सुनाई दी। “कौन है वहाँ? क्या आप लोग ठीक हैं?”

     

    महक ने कहा, “हाँ, हम ठीक हैं। लेकिन हम यहाँ कैसे आए? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”

     

    आवाज ने कहा, “मैं ऋषि हूँ। मैं यहाँ रहता हूँ। मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।”

     

    महक ने कहा, “आप कैसे हमारी मदद कर सकते हैं?”

     

    रवि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद कर सकता हूँ। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”

     

    महक ने कहा, “हमारे पास न और कोई ऑप्शन भी नहीं है । लेकिन पहले हमें आप ये बताये की आपा है कौन और यहाँ क्या कर रहे गया और ये जगह क्या है हम यहाँ कैसे आ गये है ।”

     

    रवि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ।”महक ने कहा, “क्या हुआ? यह आवाज क्या है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन यह आवाज यहाँ के जंगल में अक्सर सुनाई देती है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “यह आवाज बहुत ही अजीब है। मुझे लगता है कि यह किसी खतरनाक जानवर की आवाज है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। हमें नहीं पता कि यहाँ क्या हो सकता है।”

     

    अमन ने कहा, “हाँ, हमें सावधान रहना होगा। चलो हम आगे बढ़ते हैं।”

     

    रवि ने कहा, “ठीक है। चलो हम आगे बढ़ते हैं। लेकिन ध्यान रखो, यहाँ कुछ भी हो सकता है।”

     

    वे सभी आगे बढ़ने लगे। लेकिन तभी उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा महल था, जो जंगल में छुपा हुआ था।

     

    महक ने कहा, “यह क्या है? यह महल यहाँ क्यों है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह महल बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    मिथ्या ने कहा, “हमें यहाँ नहीं आना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन रवि ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ आना होगा। यहाँ कुछ है जो हमें पता लगाना होगा।”

     

    और फिर वे सभी उस महल में घुस गए…महल के अंदर जाने के बाद, उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा कमरा था, जिसमें एक बड़ा सा आईना लगा हुआ था। और उस आईने में कुछ अजीब सी चीज़ें दिखाई दे रही थीं।

     

    सत्यम ने कहा, “यह क्या है? यह आईना क्यों इतना अजीब है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह आईना बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    अमन ने कहा, “यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”

     

    महक ने कहा, “हाँ, मुझे लगता है कि यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”

     

    तभी आईने में एक चीज़ दिखाई दी। वह एक लड़की थी, जो बहुत ही सुंदर थी। लेकिन उसकी आँखें बहुत ही डरावनी थीं।

     

    मिथ्या ने कहा, “यह कौन है? यह लड़की क्यों इतनी डरावनी लग रही है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह लड़की इस महल की मालकिन थी। और वह बहुत ही खतरनाक थी।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन महक ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ रहना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह लड़की कौन है और वह क्यों इतनी डरावनी है।”

     

    महक ने आईने के सामने खड़े होकर कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम कौन हो और तुम यहाँ क्यों हो?”

     

    आईने में दिखाई दे रही लड़की ने धीरे से कहा, “मैं कृष्णा हूँ। और मैं इस महल की मालकिन हूँ।”

     

    रवि ने कहा, ” मिष्टी ? तुम वही मिष्टी हो जिसे मैं जानता हूँ?”

     

    मिष्टी ने कहा, “हाँ, मैं वही मिष्टी हूँ। लेकिन तुम मुझे नहीं जानते हो। तुमने मुझे कभी समझा नहीं है।”

     

    महक ने कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम्हारी कहानी क्या है?”

     

    मिष्टी ने कहा, “मेरी कहानी बहुत ही दर्दनाक है। मैं इस महल में फंस गई हूँ। और मुझे यहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “हम तुम्हारी मदद करेंगे। हम तुम्हें यहाँ से निकालेंगे।”

     

    मिष्टी ने कहा, “तुम मुझे यहाँ से निकाल सकते हो? तुम मुझे इस दर्द से मुक्त कर सकते हो?”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन तुम्हें हम पर विश्वास करना होगा।”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैं तुम पर विश्वास करती हूँ। मैं तुम्हारी मदद के लिए तैयार हूँ।”महक ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यह पता लगाना होगा कि तुम यहाँ कैसे फंस गई हो।”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैं यहाँ एक गलती की वजह से फंस गई हूँ। मैंने एक शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”

     

    रावण ने कहा, “एक शक्तिशाली जादू? तुमने क्या किया था?”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैंने एक जादू का इस्तेमाल किया था जो मुझे अमर बना देता था। लेकिन मैंने उस जादू का गलत इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “तुम्हें यहाँ से निकालने के लिए हमें उस जादू को तोड़ना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “लेकिन यह आसान नहीं होगा। हमें उस जादू को तोड़ने के लिए एक शक्तिशाली जादू की जरूरत होगी।”

     

    अमन ने कहा, “मैं एक शक्तिशाली जादू जानता हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि वह जादू बहुत ही खतरनाक है।”

     

    महक ने कहा, “हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें उस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”

     

    और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया…उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया, लेकिन उन्हें पता था कि यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने अपने हाथ जोड़कर जादू की शुरुआत की।

     

    जादू के शब्दों को बोलने के बाद, एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।

     

    मिटू ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”

     

    ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को तोड़ रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”

     

    लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने गलती की है। यह जादू तुम्हें नहीं बचा सकता है।”

     

    महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें जादू को रोकना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन जादू को रोकना मुश्किल था। यह जादू बहुत ही शक्तिशाली था और इसे रोकने के लिए उन्हें कुछ और करना होगा…उन्होंने जादू को रोकने के लिए एक और शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया। लेकिन यह जादू भी उतना ही खतरनाक था जितना कि पहला जादू।

     

    महक ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। यह जादू हमें भी नुकसान पहुंचा सकता है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें इस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “ठीक है, हम इस जादू का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन हमें सावधान रहना होगा।”

     

    उन्होंने जादू के शब्दों को बोलना शुरू किया और एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। जादू की शक्ति से महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।

     

    कृष्णा ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”

     

    ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को रोक रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”

     

    तभी जादू की शक्ति से महल के अंदर एक दरवाजा खुल गया और कृष्णा बाहर निकल गई। वह मुक्त हो गई थी।

     

    लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”

     

    महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह आवाज किसने की है और वह क्या चाहता है।”

     

    उन्होंने महल से बाहर निकलने का फैसला किया और जंगल में चलने लगे। लेकिन जंगल में उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा मंदिर था, जो जंगल में छुपा हुआ था।

     

    महक ने कहा, “यह क्या है? यह मंदिर यहाँ क्यों है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ जाना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह मंदिर क्या है और यहाँ क्या होता है।”

     

    उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया और एक पुराने से पुजारी से मिले। पुजारी ने उन्हें बताया कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।

     

    पुजारी ने कहा, “यह मंदिर एक शक्तिशाली देवता को समर्पित है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    महक ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता? क्या आप हमें बता सकते हैं कि वह कौन है?”

     

    पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है।”मिथ्या ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता जो जंगल की रक्षा करता है? यह तो बहुत ही रोचक है। हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”

     

    पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है। वह किसी को भी मार सकता है जो जंगल को नुकसान पहुंचाता है।”

     

    महक ने कहा, “यह तो बहुत ही खतरनाक है। हमें सावधान रहना होगा।”

     

    तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”

     

    मिथ्या ने कहा, “यह आवाज फिर से सुनाई दे रही है। यह कौन है और वह क्या चाहता है?”

     

    पुजारी ने कहा, “यह वही देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह तुम्हें फिर से फंसाने की धमकी दे रहा है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यह पता लगाना होगा कि वह क्या चाहता है और हमें उसे रोकना होगा।”

     

    और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली देवता को रोकने के लिए एक योजना बनाई…

     

     

    ऋषि ने कहा, “मैं यहाँ रहता हूँ, लेकिन मेरी जिंदगी बहुत ही अजीब है। मैं कृष्णा नाम की एक लड़की से प्यार करता हूँ, लेकिन वह मुझ पर विश्वास नहीं करती है।”

     

    महक ने कहा, “क्यों? क्या हुआ था?”

     

    ऋषि ने कहा, “मैंने एक गलती की थी, जिसने कृष्णा को मुझसे दूर कर दिया था। लेकिन मैं उसे वापस पाना चाहता हूँ।”

     

    मिथ्या ने कहा, “आपकी कहानी बहुत ही दिलचस्प है। लेकिन हमें आपकी मदद करनी होगी।”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”

     

    अमन ने कहा, “हम आपको विश्वास करते हैं। लेकिन पहले हमें आपके प्लान के बारे में जानना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “ठीक है। मेरा प्लान है कि हम कृष्णा को यहाँ लाएंगे और मैं उसे अपने प्यार का इज़हार करूँगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। क्योंकि कृष्णा को मुझ पर विश्वास नहीं है।”

     

    महक ने कहा, “हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले हमें एक समस्या का सामना करना होगा।”

     

    तभी उन्हें एक अजीब सी आवाज सुनाई दी। जो उन्हें डरा रही थी।महक, मिथ्या, सत्यम, अमन और उनके दोस्त सभी हैरान और परेशान थे कि उनका गुब्बारा इस घने जंगल में कैसे उतर गया। उन्होंने अपने टूर के लिए एक अलग ही जगह चुनी थी, लेकिन अब वे यहाँ फंस गए थे।

     

     

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | आगे का कहानी जानने के लिए आपलोग मेरे इस novel ” अनप्लानड लेंडिंग ” को जरूर पढ़े जो सिर्फ व सिर्फ namstestoryworld पर उपलब्ध है।

     

    🔹”और हाँ novel पसंद आया हो तो like, comment & share जरूर किजायेगा, ” क्युकी गाइस अभी मुझे आप लोगो के support का बहुत जरूरत है, इसलिए प्लीज आप लोग मेरे इस नॉवेल को सपोर्ट किजाये ताकि मै हर दिन एक नए chapter को लाने के लिए हमेसा ही motivate रहू | नॉवेल पढ़ने के लिए और अपना सबसे जायदा किमती समय मुझे देने के लिए धन्यवाद😊