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  • रोशनी का सफर

    पढ़ने का समय : 5 मिनट
    1. नवरात्रि का पर्व था। चारों ओर दीपों की जगमगाहट, ढोल-नगाड़ों की गूंज, और भक्ति का वातावरण फैला हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो पूरी धरती अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर बढ़ रही हो। हर घर में माँ दुर्गा की आराधना हो रही थी, और हर मन में एक नई उम्मीद जाग रही थी।
    2. इसी शहर में आरव नाम का एक युवक रहता था। बाहर से देखने पर वह सामान्य दिखता था, लेकिन उसके मन में गहरा अंधकार था। वह हमेशा निराश रहता, लोगों से दूर भागता और अपने जीवन को बेकार समझता। उसके पिता का देहांत हो चुका था और माँ बीमार रहती थीं। जिम्मेदारियों के बोझ ने उसके भीतर की रोशनी को बुझा दिया था।
    3. नवरात्रि शुरू हुई, लेकिन आरव के लिए यह भी एक सामान्य दिन जैसा ही था। उसके घर में कोई सजावट नहीं थी, न ही पूजा का कोई उत्साह। उसकी माँ, जो बिस्तर पर लेटी थीं, धीरे से बोलीं,
    4. “बेटा, इस बार भी माँ दुर्गा की पूजा नहीं करोगे?”
    5. आरव ने उदासी से कहा,
    6. “माँ, इन सब चीज़ों से क्या बदल जाएगा? हमारे जीवन में तो सिर्फ अंधेरा ही है।”
    7. माँ मुस्कुराईं और बोलीं,
    8. “बेटा, अंधकार कभी अपने आप नहीं जाता, उसे मिटाने के लिए एक छोटी सी ज्योति भी काफी होती है।”
    9. आरव ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन ये शब्द उसके मन में कहीं गहराई तक उतर गए।
    10. अगले दिन, वह काम से लौट रहा था कि रास्ते में उसने एक छोटी सी बच्ची को देखा। वह एक टूटी हुई झोपड़ी के बाहर बैठी थी और मिट्टी के दीये बना रही थी। उसके कपड़े फटे हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी।
    11. आरव ने पूछा,
    12. “तुम ये दीये क्यों बना रही हो?”
    13. बच्ची ने मुस्कुराकर कहा,
    14. “नवरात्रि है ना भैया! लोग अपने घरों में रोशनी करेंगे, इसलिए मैं ये दीये बेचती हूँ। इससे मेरी माँ की दवाई आ जाएगी।”
    15. आरव हैरान रह गया। उसने सोचा, “इतनी छोटी बच्ची, इतनी मुश्किलों में भी खुश है, और मैं…?”
    16. उसने बच्ची से कुछ दीये खरीदे। बच्ची ने खुशी से कहा,
    17. “भैया, इन दीयों से आपका घर बहुत सुंदर लगेगा।”
    18. आरव ने हल्की सी मुस्कान दी, जो शायद महीनों बाद उसके चेहरे पर आई थी।
    19. घर लौटकर उसने उन दीयों को एक कोने में रख दिया। रात को जब बिजली चली गई, तो पूरा घर अंधेरे में डूब गया। उसकी माँ ने धीरे से कहा,
    20. “बेटा, वही दीये जला दो।”
    21. मन मारकर आरव ने एक दिया जलाया। जैसे ही वह छोटा सा दीपक जला, कमरे में हल्की सी रोशनी फैल गई। अंधकार पीछे हटने लगा।
    22. उस पल आरव को अपनी माँ की बात याद आई—“एक छोटी सी ज्योति भी अंधकार मिटा सकती है।”
    23. अगले दिन उसने घर को साफ किया और बाकी दीये भी जलाए। घर में एक अलग ही ऊर्जा महसूस हो रही थी। उसकी माँ के चेहरे पर भी खुशी लौट आई थी।
    24. धीरे-धीरे आरव के अंदर भी बदलाव आने लगा। उसने तय किया कि वह सिर्फ अपने जीवन का अंधकार नहीं मिटाएगा, बल्कि दूसरों के जीवन में भी रोशनी लाएगा।
    25. नवरात्रि के पाँचवे दिन, वह उसी बच्ची के पास गया। उसने देखा कि कई लोग दीये खरीद रहे थे, लेकिन कुछ लोग उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जा रहे थे।
    26. आरव ने सोचा, “अगर मैं मदद कर सकता हूँ, तो क्यों न करूँ?”
    27. उसने बच्ची से कहा,
    28. “तुम सारे दीये मुझे दे दो, मैं बेचने में तुम्हारी मदद करूँगा।”
    29. बच्ची की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
    30. उस दिन से आरव ने उस बच्ची के साथ मिलकर दीये बेचने शुरू किए। उसने अपने दोस्तों को भी बुलाया और सभी ने मिलकर गरीब लोगों के बनाए दीयों को खरीदकर शहर में बाँटना शुरू किया।
    31. धीरे-धीरे यह एक अभियान बन गया। लोग अब महंगे बिजली के लाइट्स छोड़कर मिट्टी के दीयों का उपयोग करने लगे। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा हुआ, बल्कि उन गरीब कारीगरों के जीवन में भी खुशियाँ आने लगीं।
    32. नवरात्रि के आठवें दिन, पूरे शहर में एक अलग ही नजारा था। हर घर में मिट्टी के दीये जल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे अंधकार पूरी तरह हार चुका हो और प्रकाश ने जीत हासिल कर ली हो।
    33. आरव की माँ ने उसे पास बुलाकर कहा,
    34. “देखा बेटा, एक छोटी सी ज्योति कितनी बड़ी रोशनी बन सकती है?”
    35. आरव की आँखों में आँसू थे, लेकिन ये आँसू दुख के नहीं, बल्कि खुशी और संतोष के थे।
    36. नवरात्रि के नौवें दिन, आरव ने एक छोटा सा आयोजन किया। उसने सभी लोगों को बुलाया और कहा,
    37. “हम सबके जीवन में कभी न कभी अंधकार आता है। लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। एक छोटी सी कोशिश, एक छोटा सा दीपक भी हमारे और दूसरों के जीवन को रोशन कर सकता है।”
    38. लोगों ने उसकी बात को ध्यान से सुना। उस दिन कई लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने आसपास के लोगों की मदद करेंगे और उनके जीवन में भी रोशनी लाने की कोशिश करेंगे।
    39. उस रात, जब पूरे शहर में दीप जल रहे थे, आरव छत पर खड़ा होकर आसमान की ओर देख रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे माँ दुर्गा खुद मुस्कुरा रही हों और उसे आशीर्वाद दे रही हों।
    40. अब वह वही आरव नहीं था जो कुछ दिन पहले था। उसके भीतर का अंधकार खत्म हो चुका था, और उसकी जगह एक उज्जवल प्रकाश ने ले ली थी।
    41. सीख:यह कहानी हमें सिखाती है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी सी रोशनी उसे मिटाने के लिए पर्याप्त होती है। हमें अपने जीवन की समस्याओं से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उनका सामना करना चाहिए। और अगर हम दूसरों के जीवन में थोड़ी सी भी खुशी और रोशनी ला सकें, तो वही सच्ची पूजा और सच्ची नवरात्रि होती है।नवरात्रि सिर्फ देवी की आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को दूर करके एक नई शुरुआत करने का अवसर है। जब हम खुद रोशनी बनते हैं, तभी हम दुनिया को सच में प्रकाशमय बना सकते हैं।
  • Unplanned lending

    पढ़ने का समय : 11 मिनट

    अनप्लेड लैंडिंग कुछ दोस्तों की एक शार्ट कहानी है जो एक जंगल में उनलोगो के फस जाने पर कैसे जीते है उसे दिखाया गया है… वहां उन्हें किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है और कैसे उनमे से कोई बच कर बाहर आए पता है इसे दर्शाया गया है.. हम आशा करते है आपलोगो को ये स्टोरी पसंद तो चले शुरू करते है जिंदगी की नई सफऱ…

     

     

     आसमा बिलकुल साफ था हाँ कुछ बादल सा छाया हुआ था, तब्बी उस आसमा से कुछ परिंदे जैसे दिखने वाले कुछ गुब्बारे निचे उतरते हुए दिखाई देते है |

     

        हवा का जोरदार बहाव मे वो गुब्बारे कही और जाने के जगह यहाँ उतने के ओये बिलकुल तैयार से थे उन्हें यहाँ उतने का कोई भी प्लान नहीं किया गया तह पर वो वही पर उतरने वाले थे |

     

    वो गुब्बारे जमीन पर लैंडिंग करते है और सभी के ऊपर लगी हुई आग बुझ सी जाती है, हुआ यु की कुछ इंसान जो की एक ग्रुप सा था सब कही और घूमने के लिए प्लान बनाया हुआ तह और वो इस गुब्बारे के जरिये ये दुनिया घूमना चाह रहे थे, पर उनकी किस्मत कहिये या फिर गलत वक़्त उनका गुब्बारा कही और जगह के बजाय इस घने जंगल मे लैंड हो जाता है |

     

     

    उन गुब्बारे के निचे आते ही उससे निकलता है कुछ इंसान जिसमे रहते है, महक, मिथ्या, सत्यम अमन और उनके कुछ और भी दोस्त सभी एक टूर पर निकले हुए से थे पर गलती थी 

     

     

    महक ने कहा, “यह क्या हुआ? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि गुब्बारे में कुछ समस्या थी।”

     

    सत्यम ने कहा, “चलो हम यहाँ से निकलते हैं और कोई रास्ता ढूंढते हैं।”

     

    अमन ने कहा, “लेकिन यहाँ कैसे निकलेंगे? यह तो घना जंगल है।”

     

    महक ने कहा, “हमें कुछ करना होगा। हम यहाँ नहीं रह सकते।”

     

    तभी उन्हें एक आवाज सुनाई दी। “कौन है वहाँ? क्या आप लोग ठीक हैं?”

     

    महक ने कहा, “हाँ, हम ठीक हैं। लेकिन हम यहाँ कैसे आए? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”

     

    आवाज ने कहा, “मैं ऋषि हूँ। मैं यहाँ रहता हूँ। मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।”

     

    महक ने कहा, “आप कैसे हमारी मदद कर सकते हैं?”

     

    रवि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद कर सकता हूँ। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”

     

    महक ने कहा, “हमारे पास न और कोई ऑप्शन भी नहीं है । लेकिन पहले हमें आप ये बताये की आपा है कौन और यहाँ क्या कर रहे गया और ये जगह क्या है हम यहाँ कैसे आ गये है ।”

     

    रवि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ।”महक ने कहा, “क्या हुआ? यह आवाज क्या है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन यह आवाज यहाँ के जंगल में अक्सर सुनाई देती है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “यह आवाज बहुत ही अजीब है। मुझे लगता है कि यह किसी खतरनाक जानवर की आवाज है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। हमें नहीं पता कि यहाँ क्या हो सकता है।”

     

    अमन ने कहा, “हाँ, हमें सावधान रहना होगा। चलो हम आगे बढ़ते हैं।”

     

    रवि ने कहा, “ठीक है। चलो हम आगे बढ़ते हैं। लेकिन ध्यान रखो, यहाँ कुछ भी हो सकता है।”

     

    वे सभी आगे बढ़ने लगे। लेकिन तभी उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा महल था, जो जंगल में छुपा हुआ था।

     

    महक ने कहा, “यह क्या है? यह महल यहाँ क्यों है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह महल बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    मिथ्या ने कहा, “हमें यहाँ नहीं आना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन रवि ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ आना होगा। यहाँ कुछ है जो हमें पता लगाना होगा।”

     

    और फिर वे सभी उस महल में घुस गए…महल के अंदर जाने के बाद, उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा कमरा था, जिसमें एक बड़ा सा आईना लगा हुआ था। और उस आईने में कुछ अजीब सी चीज़ें दिखाई दे रही थीं।

     

    सत्यम ने कहा, “यह क्या है? यह आईना क्यों इतना अजीब है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह आईना बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    अमन ने कहा, “यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”

     

    महक ने कहा, “हाँ, मुझे लगता है कि यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”

     

    तभी आईने में एक चीज़ दिखाई दी। वह एक लड़की थी, जो बहुत ही सुंदर थी। लेकिन उसकी आँखें बहुत ही डरावनी थीं।

     

    मिथ्या ने कहा, “यह कौन है? यह लड़की क्यों इतनी डरावनी लग रही है?”

     

    रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह लड़की इस महल की मालकिन थी। और वह बहुत ही खतरनाक थी।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन महक ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ रहना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह लड़की कौन है और वह क्यों इतनी डरावनी है।”

     

    महक ने आईने के सामने खड़े होकर कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम कौन हो और तुम यहाँ क्यों हो?”

     

    आईने में दिखाई दे रही लड़की ने धीरे से कहा, “मैं कृष्णा हूँ। और मैं इस महल की मालकिन हूँ।”

     

    रवि ने कहा, ” मिष्टी ? तुम वही मिष्टी हो जिसे मैं जानता हूँ?”

     

    मिष्टी ने कहा, “हाँ, मैं वही मिष्टी हूँ। लेकिन तुम मुझे नहीं जानते हो। तुमने मुझे कभी समझा नहीं है।”

     

    महक ने कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम्हारी कहानी क्या है?”

     

    मिष्टी ने कहा, “मेरी कहानी बहुत ही दर्दनाक है। मैं इस महल में फंस गई हूँ। और मुझे यहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “हम तुम्हारी मदद करेंगे। हम तुम्हें यहाँ से निकालेंगे।”

     

    मिष्टी ने कहा, “तुम मुझे यहाँ से निकाल सकते हो? तुम मुझे इस दर्द से मुक्त कर सकते हो?”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन तुम्हें हम पर विश्वास करना होगा।”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैं तुम पर विश्वास करती हूँ। मैं तुम्हारी मदद के लिए तैयार हूँ।”महक ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यह पता लगाना होगा कि तुम यहाँ कैसे फंस गई हो।”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैं यहाँ एक गलती की वजह से फंस गई हूँ। मैंने एक शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”

     

    रावण ने कहा, “एक शक्तिशाली जादू? तुमने क्या किया था?”

     

    मिष्टी ने कहा, “मैंने एक जादू का इस्तेमाल किया था जो मुझे अमर बना देता था। लेकिन मैंने उस जादू का गलत इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “तुम्हें यहाँ से निकालने के लिए हमें उस जादू को तोड़ना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “लेकिन यह आसान नहीं होगा। हमें उस जादू को तोड़ने के लिए एक शक्तिशाली जादू की जरूरत होगी।”

     

    अमन ने कहा, “मैं एक शक्तिशाली जादू जानता हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि वह जादू बहुत ही खतरनाक है।”

     

    महक ने कहा, “हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें उस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”

     

    और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया…उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया, लेकिन उन्हें पता था कि यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने अपने हाथ जोड़कर जादू की शुरुआत की।

     

    जादू के शब्दों को बोलने के बाद, एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।

     

    मिटू ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”

     

    ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को तोड़ रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”

     

    लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने गलती की है। यह जादू तुम्हें नहीं बचा सकता है।”

     

    महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें जादू को रोकना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”

     

    लेकिन जादू को रोकना मुश्किल था। यह जादू बहुत ही शक्तिशाली था और इसे रोकने के लिए उन्हें कुछ और करना होगा…उन्होंने जादू को रोकने के लिए एक और शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया। लेकिन यह जादू भी उतना ही खतरनाक था जितना कि पहला जादू।

     

    महक ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। यह जादू हमें भी नुकसान पहुंचा सकता है।”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें इस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”

     

    सत्यम ने कहा, “ठीक है, हम इस जादू का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन हमें सावधान रहना होगा।”

     

    उन्होंने जादू के शब्दों को बोलना शुरू किया और एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। जादू की शक्ति से महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।

     

    कृष्णा ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”

     

    ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को रोक रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”

     

    तभी जादू की शक्ति से महल के अंदर एक दरवाजा खुल गया और कृष्णा बाहर निकल गई। वह मुक्त हो गई थी।

     

    लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”

     

    महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह आवाज किसने की है और वह क्या चाहता है।”

     

    उन्होंने महल से बाहर निकलने का फैसला किया और जंगल में चलने लगे। लेकिन जंगल में उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा मंदिर था, जो जंगल में छुपा हुआ था।

     

    महक ने कहा, “यह क्या है? यह मंदिर यहाँ क्यों है?”

     

    मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ जाना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह मंदिर क्या है और यहाँ क्या होता है।”

     

    उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया और एक पुराने से पुजारी से मिले। पुजारी ने उन्हें बताया कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।

     

    पुजारी ने कहा, “यह मंदिर एक शक्तिशाली देवता को समर्पित है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”

     

    महक ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता? क्या आप हमें बता सकते हैं कि वह कौन है?”

     

    पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है।”मिथ्या ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता जो जंगल की रक्षा करता है? यह तो बहुत ही रोचक है। हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”

     

    पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है। वह किसी को भी मार सकता है जो जंगल को नुकसान पहुंचाता है।”

     

    महक ने कहा, “यह तो बहुत ही खतरनाक है। हमें सावधान रहना होगा।”

     

    तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”

     

    मिथ्या ने कहा, “यह आवाज फिर से सुनाई दे रही है। यह कौन है और वह क्या चाहता है?”

     

    पुजारी ने कहा, “यह वही देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह तुम्हें फिर से फंसाने की धमकी दे रहा है।”

     

    सत्यम ने कहा, “हमें यह पता लगाना होगा कि वह क्या चाहता है और हमें उसे रोकना होगा।”

     

    और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली देवता को रोकने के लिए एक योजना बनाई…

     

     

    ऋषि ने कहा, “मैं यहाँ रहता हूँ, लेकिन मेरी जिंदगी बहुत ही अजीब है। मैं कृष्णा नाम की एक लड़की से प्यार करता हूँ, लेकिन वह मुझ पर विश्वास नहीं करती है।”

     

    महक ने कहा, “क्यों? क्या हुआ था?”

     

    ऋषि ने कहा, “मैंने एक गलती की थी, जिसने कृष्णा को मुझसे दूर कर दिया था। लेकिन मैं उसे वापस पाना चाहता हूँ।”

     

    मिथ्या ने कहा, “आपकी कहानी बहुत ही दिलचस्प है। लेकिन हमें आपकी मदद करनी होगी।”

     

    सत्यम ने कहा, “हाँ, हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”

     

    अमन ने कहा, “हम आपको विश्वास करते हैं। लेकिन पहले हमें आपके प्लान के बारे में जानना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “ठीक है। मेरा प्लान है कि हम कृष्णा को यहाँ लाएंगे और मैं उसे अपने प्यार का इज़हार करूँगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। क्योंकि कृष्णा को मुझ पर विश्वास नहीं है।”

     

    महक ने कहा, “हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”

     

    ऋषि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले हमें एक समस्या का सामना करना होगा।”

     

    तभी उन्हें एक अजीब सी आवाज सुनाई दी। जो उन्हें डरा रही थी।महक, मिथ्या, सत्यम, अमन और उनके दोस्त सभी हैरान और परेशान थे कि उनका गुब्बारा इस घने जंगल में कैसे उतर गया। उन्होंने अपने टूर के लिए एक अलग ही जगह चुनी थी, लेकिन अब वे यहाँ फंस गए थे।

     

     

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | आगे का कहानी जानने के लिए आपलोग मेरे इस novel ” अनप्लानड लेंडिंग ” को जरूर पढ़े जो सिर्फ व सिर्फ namstestoryworld पर उपलब्ध है।

     

    🔹”और हाँ novel पसंद आया हो तो like, comment & share जरूर किजायेगा, ” क्युकी गाइस अभी मुझे आप लोगो के support का बहुत जरूरत है, इसलिए प्लीज आप लोग मेरे इस नॉवेल को सपोर्ट किजाये ताकि मै हर दिन एक नए chapter को लाने के लिए हमेसा ही motivate रहू | नॉवेल पढ़ने के लिए और अपना सबसे जायदा किमती समय मुझे देने के लिए धन्यवाद😊

     

     

     

     

  • कुछ तो है

    कुछ तो है

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    राधा और रूपा का इंतजार  करते करते  शीला और चांदनी को बहुत देर हो जाती है तो परेशान होकर दोनो सहेली क्लास के रूम के तरफ भागती है….शीला के क्लास वाले बिल्डिंग से मीटिंग हॉल बीच में चार बिल्डिंग छोड़कर थी ! दोनो तेजी से दौर कर अपने क्लास रूम पहुंच जाना चाहती थी।

    ” क्या हुआ नही हुआ एक बार फोन करके भी बता देती..”

    शीला बोली बोलते हुए शीला हांफ भी रही थी। तेजी से दौड़ने से शीला के सांस  चढ़ गई थी। यही हाल चांदनी की भी थी।

    ” हां उसे कॉल कर लेना चाहिए.”

    चांदनी बोली और अपना मोबाईल अपने जेब से निकालने लगी….

    ” मैं ही कर लेती हूं कॉल रूको शीला ऐसे में तुम बीमार पर जाओगी……चांदनी बोली और रूक गई…

    “.मेरी छोड़ो पहले उसको फोन लगाओ जल्दी”

    शीला बोलकर वो भी रूक जाती है ! चलते चलते दोनो तीन बिल्डिंग क्रोस कर गई थी ! अब दोनो की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई थी ! “ना जाने क्या हुआ है उन दोनो के साथ क्लास में कोई स्टूडेंटस भी नहीं थे “

     चांदनी बोलकर नम्बर डायल कर दी थी ! रिंग होने लगी थी अब दोनो कॉल रिसीव होने का इंतजार करने लगी थी। फुल रींग होने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं होती है ! 

    “नही उठाई”

    शीला चांदनी को मायूसी से देखी और बोली..

    ” नही”

    चांदनी बोली।

    ” रूपा के नम्बर पे लगाओ कॉल “

    शीला बोली शीला का दिल बैठा जा रहा था ! सेम कंडिशन से चांदनी भी गुजर रही थी।

    ” हां हां लगाती हूं “

     चांदनी बोली और स्क्रोल डाउन करने लगी चांदनी और शीला के चेहरा साफ उतर गया था ! ऐसा लग रहा था अब रो देगी दोनो ! फोन लगाकर अपने कान मे सटा लेती है ! चांदनी और शीला एक दूसरे को देख रही है। और मन हीं मन दोनो सोच रही थी की

     कुछ तो है..

     

    क्लास रूम

     

    ” देखो कमल मुझे जाने दो तुम्हारी ये हरकत मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है ! दीदी वेट कर कर के परेशान हो गई होंगी….राधा बोली और कमल के हांथ से अपना हांथ को झटक कर झटका मार कर छुड़ाना चाहा पर पकड़ इतनी मजबूत थी की छुड़ा नहीं पाई…

    ” अरे मेरी जान, तुम्हें छोड़ने के लिए थोड़े हीं ना पकड़ा हूं ! बहुत दिन से तुम्हे पकड़ना चाह रहा था पर तुम तो हांथ हीं नही लगती थी आज जब मौका मिला है तो तुम नखरा हीं ज्यादा करने लगी है ” कमल बोलता है…..

    ” कुत्ते हरामजादे छोड़ मेरी बहन को छोड़ कमीने छोड़..”

    रूपा बहुत गुस्से मे कमल से बोलती है.।

    ” तुम क्यों फड़ फड़ा रही है तुम्हें मैं कुछ नहीं करूंगा तुम बस शान्ती से तमाशा देखती जा “

    कमल रूपा को डांटते हुए बोला था।

    ” कमीने करेगा तो तब जब तू कुछ करने के लायक बचेगा, तब ना ..हमें बांधकर हिरो बन रहा है।अगर इतना हीं पावर है तुझमें तो खोल के दिखा मुझे फीर मैं बताती हूं की तू कहां का हिरो है ” बोलकर रूपा कमल को ललकारी ! बंधी तो राधा भी थी ! लेकिन राधा का एक हांथ कमल खोल रखा था ! जीसे पकड़ कर राधा को कमल बार बार अपने से चिपकाने की कोशिश करता रहता था ! 

    ” देख राधा आज तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता है ! चाहे तुम जितनी भी कोशिश कर लो “

    कमल घमंड में चुर होकर राधा से बोला था ! 

    ” तुम बिल्कुल भी ठीक नहीं कर रहे हो कमल, मैने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा जो तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो। देखो खोल दो हम दोनो को और जाने दो हमें,कहीं ऐसा ना हो की तुम्हें बाद में चलकर पछताना पड़े”

    राधा कमल को समझाते हुए बोली थी।

    ” नहीं मैं तुम्हें आज ऐसे कभी नहीं जाने दुंगा,आज तुम्हे मेरी होनी पड़ेगी “

    कमल राधा को गुस्से से देखते हुए बोला था। 

    ” तेरी इतनी मजाल की तू दीदी से इस तरह बात करेगा “

    रूपा बात आगे बढाते हुए फिर बोली…

    ” अपनी शक्ल देखा है कभी आईने में बड़ा आया है मेरी दीदी का लवर बनने वाला “

    बोलकर रूपा अपने बदन को गुस्से में कस मसाने लगती है ! 

    ” देख कमल मैं तेरी शिकायत प्रिंसीपल मैम से करूंगी अगर मेरी बात नहीं माना तो”

    राधा कमल को समझाने कि कोशिश की

    ” हरामजादी अभी तक तेरी गर्मी शांत नही हुआ है ! बहुत उछल रही है ना रूक अब मैं तुम्हें ऐसे नहीं छोड़ूंगा अब तेरा रेप होगा “

    कमल दांत पीसकर गुस्से से आंख लाल करते हुए बोला था ! रेप का नाम सुनकर राधा और रूपा दोनो बहुत घबरा गई थी !

    दोनो मन हीं मन सोच रही थी की कहां फस गई मैं  वे दोनो फोन भी नहीं कर सकती थी की शीला और चांदनी उन दोनो को मदद कर सके इन दोनो के फोन कमल छीन कर साइलेंट मोड में डालकर अलग रख दिया था ! कमल का नजर काफी समय से राधा पर था ! वो राधा को चाह रहा था ये बात अलग है की कभी भी कमल राधा को सामने से प्रपोज नहीं किया था ! राधा भी कभी इस बात को नोटिस नही किया था ! वैसे भी राधा प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर हीं रहना चाहती थी ! बस उसका मकसद था की पढाई लिखाई कर के अपना फ्यूचर बनाना उसको इन सब से कोई भी मतलब नहीं था। कमल भी अपने दिल में राधा को बसाये एक तरफा मोहब्बत लिए घुम रहा था। वो राधा को बताने वाला था की वो उससे प्यार करता है ! कई बार बात करने की कोशिश किया भी पर नहीं कर पाया था। क्यों की राधा कभी अकेली रहती हीं नहीं थी। चारो सहेलियां हमेशा साथ रहती थी कॉलेज में ! इसी लिए कमल को मौका नहीं मिल पाता था ! आज मीला भी तो सिच्यूशन हीं कुछ अलग बन गई थी। अब आप कहेंगे की ये क्लास रूम में कैसे पहुंचा तो बता दें दर असल कमल राधा और रूपा को मैन गेट से हीं पिछा कर रहा था ! जब देखा वो दोनो क्लास रूम में गई है तो पिछे पिछे कमल भी क्लास रूम में चला गया था। जब राधा और रूपा ने देखा तो 

    ” तुम,तुम यहां क्या कर रहे हो कमल?”

    .राधा कमल को उंगली से प्वाइंट  करते हुए बोली थी 

    ” मैं, मैं यहां तुमसे मिलने आया था।”

     कमल बोला और दोनो के पास आकर बैंच पर बैठ गया था ! 

    ” तुम जाओ यहां से हम लोग भीं जा रहें हैं मीटिंग हॉल में “

    रूपा कमल से बोली और उठने लगी…

    ” ठिक है तुम जाओ, हमे राधा से अकेले में कुछ बात करना है।”

    कमल रूपा से बोला था।

    क ,क क्या क्या, बात करना है तुमको मुझसे?”

     राधा हकलाते हुए आशचर्य से कमल को देख कर बोली थी।

    ” राधा रूको ना थोड़ी देर बात कर लो फीर चली जाना “

     कमल राधा से बोला और मुस्कुराने लगा…

    ” नही मुझे नही करनी है तुमसे कोई भी बात तुम चले जाओ यहां से  “

    .राधा कमल पर चिल्लाते हुए बोली थी।

    ” हां तुम जाओ यहां से मैं बोल देती हूं नहीं तो अच्छा नहीं होगा “

    रूपा गरज कर बोली..

    ” तुम लोग बेकार में ऐसी बातें कर रही हो “

    कमल शांत होते हुए बोला था !

    ”  मैं कहती हूं ना तुम जाओ यहां से तो जाओ मुझे परेशान मत करो “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…

    अरे खा म खा तुम लोग हाइपर हो रही हो कुछ भी ऐसी वैसी बात नही है “

    कमल दोनो को देखते हुए बोला था।

    ” चलो ठिक है, तो हम दोनो जा रहे हैं। ठिक है, तुम बैठो क्लास रूम में “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…. आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में ….

     

  • चार सहेलियां

    चार सहेलियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    मीटींग हॉल में छात्र छात्रायें जुटने लगे थे ! जीसको जहां जगह मिल रही थी बैठ जा रहे थे ! टीचर्स के टीम भी मीटींग हॉल में आ गये थे ! सभी लड़के लड़कियाँ लाईन से लगे कुर्सी पर आकर के बैठ रहे थे ! 
    शीला और चान्दनी भी चलकर मीटींग हॉल में प्रवेश करती है !आगे आगे शीला पीछे चान्दनी और उसके पीछे तीन चार लड़की हॉल के अंदर अपने सीट लेने के लिए बढ़ रही होती है ! ये सभी भी कुर्सीयों पर बैठ जाते हैं !
    चान्दनी अभी मीटींग स्टार्ट होने में टाईम है जरा राधा को कॉल करके पूछेगी कि वो कहां रह गई…. हमें रूपा से भी बात करना चाहिए …..शीला चान्दनी से कहने लगी और वो खुद भी अपनी फोन भी नीकालने लगी थी…हां ठिक है सही कह रही है तुम यहां तो बहुत शोर है बाहर नीकल के बात करनी पड़ेगी….चान्दनी बोलकर शीला को देखने लगी
    हां हां तो चलते हैं ना हॉल रूम से बाहर…चलके बात कर लेते हैं…बोली और शीला उठकर चान्दनी को दोनो हांथ पकर कर उठाने लगती है ! चान्दनी शीला के साथ उठकर चल देती है ! हॉल से बाहर निकलकर दोनो सहेली एक छोटा सा रास्ते की दुरी चलने के बाद गार्डेन में पहूंची…..गार्डेन में बने सीमेंट के बैन्च पर बैठ जाती है ! चलो अब करते हैं बात…तू लगायेगी फोन या मैं करूं कॉल….शीला चान्दनी से बोली ……मैं करती हूं कॉल ….वैसे मैतो सुबह भी बात की थी…चाहो तो अभी तुम बात करलो…वो भी हैप्पी हो जायेगी की दीदी की फोन आई…..बोलकर चान्दनी शीला के तरफ देखने लगी ……ओके चलो मैं हीं करती हूं कॉल उसे…बोलकर शीला ने मोबाईल में नम्बर स्क्रोल डाऊन करने लगी..नम्बर मील गया तो डाईल कर के स्पीकर पर डाल दिया था रिंग बजना स्टार्ट हो गया था जब आधे से ज्यादा रींग बज गया लास्ट होने वाली थी रींग तब कॉल रिसीव किया गया ….हैल्लो शीला दीदी माय लवली जान….कॉल रिसीव करते हीं राधा बोलती है !कैसी हो आप ….राधा फीर बोली……..मैं ठिक हूं कहां रह गई तूं कॉलेज नहीं आ रही क्या …..शीला राधा को बोली…..अरे तुने हीं मुझे कॉल करके बोली सुबह और तुमहीं नहीं आई….चान्दनी बोली….आ रही हूं मैं बस पहुंच हीं गई….क्या बात है आज फीर सभी सहेलियां एक साथ होंगे….रूपा भी मेरे साथ हीं आ रही है….राधा फोन पर बोलकर हंसने लगी……अरे हां ये तो अच्छी बात है….तो आ जाओ तुम दोनो जल्दी से ….शीला बोली….हां बस बस पहुंच हीं गई….राधा बोलकर फोन कट कर दिया…..फोन रखकर शीला और चान्दनी एक दुसरे को देखकर मुश्कुराने लगी थी….
    चार सहेलियों की जोड़ी पुरे कॉलेज में मशहुर धी सब लोग इन चारो के दोस्ती के मिशाल दिया करते थे !ये चारो जब एक साथ कहीं भी चली जाती थी कहीं भी एक साथ खड़ी हो जाती थी तो ये बिल्कुल भी नही लगता था की ये सभी सगी बहनें नहीं है ! चोरों के एक दुसरे के लिए ईज्जत प्यार सम्मान एक दुसरे के लिए समर्पन यही सब चारो दोस्तों को महान बनाती थी ! अईसा नहीं है की हमेशा इन सब में प्यार हीं रहता था…इनके भी जीन्दगी में उदासी मनमुटाव छोटे मोटे झगड़े भी इनके जीन्दगी में हिस्सा ले लेते थे ! ये बात अलग है की ज्यादा दिनो तक एक दुसरे बिना रह नही पाते थे ! कहते हैं ना की ऊतार चढाव हीं जिवन के दो पहलु है..दु:ख शु:ख तो जिवन के आधार है !किसी के शु़:ख में भले हीं साथ नहीं खड़ा हुआ हो लेकिन इन चारो में से कीसी को भी अगर दु:ख हुआ हो उस टाईम पर ये चारो सभी एक साथ चट्टान के तरह खड़े मिलते थे ! चान्दनी के फोन बजने लगती है….चान्दनी फोन रिसीव करती है…..कहां हो दीदी आप लोग मै और रूपा क्लास रूम में हैं……उधर से राधा बोली…..अरे हां मैं तुम लोगो को बताना हीं भुल गई थी.की हम क्लास रूम में नहीं हैं…तुम लोग मीटींग हॉल के तरफ आ जाओ हम लोग वहीं हैं…..चान्दनी राधा को फोन पर जबाव दिया ….ठिक है दीदी मैं अभी आई….राधा बोली….ओके आ जाओ तुम लोग जल्दी….बोलकर चान्दनी कॉल कट कर दी थी !
    उधर मीटींग हॉल में सभी प्रोफेसरस आ गये थे.सभी स्टूडेन्टस भी अपनी अपनी जगह लेकर बैठ चुके थे ! सभी छात्रों के मन में एकहीं शावाल थे जो बार बार दिमाग में घुम रहे थे जो की इतनी बड़ी मीटींग का अरेन्जमैंट किया गया था पर ये बात किसी के कानो कान तक भनक भी नहीं परे थे कि इतनी बरी मिटींग किस बात को लेकर बुलाई गई है..अब आप सोचीये इस मीटींग को सीक्रेट मीटींग कहा जाए तो तनीक भी ताज्जुव वाली बात नही होगी..है ना ?
    चलो अब हमें मीटींग हॉक के अन्दर चलना चाहिये…..शीला चान्दनी से बोली और क्लास रूम वाली बिल्डींग के तरफ नजर दौरादी…..राधा और रूपा कहां रह गई बोली थी क्लास रूम तक तो आ गई हूं फीर आने में इतनी देर कहां लगादी….चान्दनी थोरी परेशान होते हुए बोली और शीला कंधे पर प्यार से हांथ रखी…..आ जाए गी घबराओ मत आती हीं होगी हो सकता है क्लास रूम में बैठकर थारा रिलैक्स कर रही होगी….कमजोर तो वो पहले से हीं है आते आते थक गई होगी शीला बोली …नही मेरा दिल घबरा रहा है अभी तक तो उसे आ जाना चाहिए कहीं कुच्छ…..इससे पहले की चान्दनी अपनी बात पुरी कर पाती शीला बीच में हीं चान्दनी के बात काटते हुए बोली….कच्छ भी मत बोलो उसे कुच्छ नहीं हो सकता है ! अगर तुम अईसी बात सोचती हो तो चलो क्लास रूम चलकर हीं देख लेते हैं वैसे भी वो अकेले नहीं है रूपा भी साथ में है उसके….शीला चान्दनी पर थोरा सख्त लहजे में उसके आंख में आंख डालकर बोली…..तो चलो फीर क्लास रूम चलकर देखते है मेरा जी घबरा रहा है ….चान्दनी चीन्तीत होते हुये बोली….चान्दनी का चहकता हुआ चेहरा अब मुरझाने लगा था ! होगा भी क्यों नहीं अपने बहन से भी ज्यादा इन सभी दोस्तों को जो मानती थी…अईसा नहीं है की शीला कठोर है उसे इन सबकी फिकर नहीं है वो भी उतनी ही चीन्तीत थी जीतनी की चान्दनी थी..फर्क सिर्फ इतना था की चान्दनी चीन्ता साफ झलक रही थी और शीला अपनी चीन्ता बाहर नही आने देना चाह रही थी ! शीला की ये आदत भी थी की वो चाहे जितना भी टेन्शस में वो दुसरे के सामने जाहीर नही होने देती थी की वो कीसी टेन्शन में है या उसे कोई प्रोबलम है ! ये बात तो आप समझ हीं गये होंगे जब शीला की साईकिल खराब हुई थी तो अजय को जल्दी हांथ नही लगाने दिया था ! दोनो उठकर क्लास रूम के तरफ चल देती है !
    चलते चलते रास्ते में यही सोचती रहती है की कितनी ला परवाह हो गई है ये दोनो लड़की..जरासा सा भी हम लोगों की फिकर नहीं है उसके पास….सोचने का एक पहलु ये भी थी की कहीं उन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं हुआ है ! नही नही ये मैं क्या सोच रही हूं ! अईसा नहीं हो सकता उनके साथ ! लग भग एक हीं तरह के सोच दोनो सहेलियों के दिमाग में चल रही थी ! एक तरह से ये भी सोचना जायज थी ! क्योंकी सारे स्टूडेन्टस और टीचर्स मीटींग हॉल के तरफ गये हुए थे ! ये दोनो अकेली क्लास रूम में गई थी ! इस बात का फायदा उठाकर कहीं कोई ईन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं कर दिया …..चान्दी हमें जल्दी से जल्दी क्लास रूम पहुंचना चाहिए….शीला बोली अब शीला के मन में भी डर जन्म ले लिया था……हां हां तुम ठीक कह रही हो हमें जल्दी वहां पहुंच कर देखना चाहिए की आखीर बात क्या है ! चान्दनी बोलती है और उसके कदम तेज हो जती है ! भागो चान्दनी अब अईसे काम नहीं चलेगा……शीला बोलकर दौर लगा देती है ! यह देखकर की शीला दौर रही है ! चान्दनी भी तेजी से दौरने लगती है ! क्या होगा जब शीला और चान्दनी क्लास रूम पहुंचेगी…और मीटींग हॉल में क्या हुआ जानने के लिए पढिए आगे की कहानी अगले भाग में……

  • वेलकम कॉलेज

    वेलकम कॉलेज

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    ऑटो तेज रफ्तार में चल रही है ! अजय शील आपस में बाते करते हंस्ते मुश्कुराते आगे बढ़ रहे थे…अब थोरी दुर आगे हमें उतर कर जाना होगा आ गई वो जगह जहां हमें जाना है….बातो हीं बातों में पता हीं नही चला कब सफर पुरा हो गया…बोलकर अजय शीला के आँखों में देखने लगा

    अजय शीला के साथ और वक्त बिताना चाहता था…वो सोच सोच कर परेशान हो रहा था की अब छोर के जाना परेगा..पर क्या करे जाना तो परेगा जब से अजय शीला को देखा था तब से शीला के लिए एक अलग हीं प्रकार के उसके दिल में फिलींगस जाग गई थी ! शीला की खुबशुर्ती उसकी व्यवहार हाजीर जवाबी…उसकी आकर्शन नयन नक्स और तो और शीला का अजय के साथ बात करने का अंदाज अजय के दिल को तार तार कर रहा था….भाई साहब के बुरा हाल तो हो हीं रहा था…भाई साब गाड़ी रोकना….ड्राईवर से बोलकर शीला के तरफ बरे प्यार से देखने लगा….अब मुझे जाना होगा मैं जा रहा हूं आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा रास्ता ईतना जल्दी कट गया पता हीं नही चला…अजय शीला से बोलकर रिक्सा से उतर गया…..बस कुच्छ हीं दुर मैं भी उतरूंगी.मेरा कॉलेज भी आ हीं गई हैं..बोलकर शीला अजय को देखने लगी…अजय ड्राईवर को किराया दिया और साईड हो गया साईड में आकर शीला को वाय कहा….शीला भी अजय को वाय बोलकर हांथ हिलाने लगी…अजय भी हांथ हिला कर शीला को लगातार देखने लगा…..गाड़ी चलदी थी

    अजय वहीं खड़ा रह गया था..लग रहा था जैसे की किसीने उसको स्टेचू बोल दिया हो.और वो मुर्ती बन गया हो ! अजय शीला की गाड़ी को तब तक देखता रहा जब तक वो गाड़ी अजय के आँखो से ओझल नहीं हो गया…..जब गाड़ी अजय के नजर से गायब हुआ तब वो भी अपने मंजील के तरफ चला गया

    उधर गाड़ी कॉलेज के मैन गेट के पास आकर रूकी….लिजीए मैडम आपकी कॉलेज आ गई…..ड्राईवर शीला से गाड़ी रोकते हुए बोला…..जी…शीला बोलकर उतरने लगी और गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देकर अपने कॉलेज के तरफ आगे चल परी…..

    कॉलेज शहर बीचो बीच काफी दुर तक फैला हुआ है ! कॉलेज के चारो तरफ कंस्ट्रक्संस के मजबुत बॉन्डरी वॉल किया गया था कॉलेज के सभी बिल्डींगस तीन चार मंजीला ईमारत की थी….कॉलेज को बेहतरीन ढंग से सजाया गया था कॉलेज को अपना एक क्रिकेट स्टेडियम भी था गार्डेन पार्क रंग बिरंगी फुलों के पौधो से सजाया गया था…कॉलेज के अन्दर के सड़कों को अलग अलग कलर के टाईलों से डिजाईन किया गया था जो कॉलेज के शोभा में चार चांद लगा रहा था कॉलेज के गार्डेन में फलदार पेड़ भी लगाये गए थे…कॉलेज के सभी बिल्डींगस को बेहतरीन कलर से पेन्ट किया गया था….ग्राऊण्ड में स्ट्रीट लाईट और बील्डींगस के सभी रूम कैमड़े से लैस है…..यह कॉलेज शहर के सबसे टॉप लेवल के कॉलेजों मे से एक है….मैनगेट से ईंटर होके शीला अपने क्लास वाले बिल्डींग की और चलकर जाने लगी…बहुत सारे गर्लस वॉवाईस आ जा रहे थे शीला भी अपने रास्ते चली जा रही थी……वेल्कम यू कॉलेज माय डियर शीला…..एक जानी पहचानी पतली सी आवज शीला के कान में आकर परी ….बिना मुरे हीं शीला बोली वेल्कम माय स्वीट हॉर्ट चान्दनी…कैसी हो दो तीन दिन बाद नजर आई हो क्या बात….शीला चान्दनी से बोली….हैल्लो जान अभी तक तो तेरी नजर मुझपर परी भी नही है….चान्दनी बोलकर हंसने लगी…शीला मुरकर चान्दनी के तरफ देखती है….ओ…हो..जींस टॉप…..मस्त लग रही हो बेवी….शीला चान्दनी को देखकर मुश्कुराते हुए बोली….

    शीला और चान्दनी नम्बर वन फ्रेन्ड हैं…दोनो एक दुसरे के लिए हमेशा तईयार रहते हैं ! दोनो की दोस्ती स्कूल के दिनो से हीं चलती आ रही है ! पढ़ाई में भी दोनो बहुत अच्छे हैं ! किसी भी प्रकार की कोई भी प्रोबलम हो दोनो दोस्त मिलकर एक दुसरे के साथ डटकर सामना करके उस प्रोबलम को समाप्त कर लेते थे ! अईसा नहीं है की ये दोनो सिर्फ आपस में हीं व्यवहारिक थे…..बल्की ये दोनो सभी को अपना अच्छा दोस्त हीं मानते थे….इनके क्लास के हीं नही…बल्की कॉलेज के बहुत अईसे लड़के लड़कियाँ थे जो ईनके क्लास से सीनीयर और जुनियर थे….सभी ईन्हे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते थे ! पर ये बात अलग थी की…शीला चान्दनी राधा और रूपा….ये चार दोस्त आपस मे सबसे पक्के दोस्त थे ! जब ये चार दोस्तों कि पलटन एक साथ चलती थी ! तो नजारा देखकर सभी के दिल वाग वाग हो जाते थे…..तुम्हारी ड्रेस भी कुच्छ कम नहीं है….तुम भी बहुत सुन्दर लग रही हो मेरी जान…..शीला के कन्धे पर अपनी हांथ रखते हुए चान्दनी बोली…..राधा को फोन करके पूछी नही की वो कॉलेज आ रही है की नहीं….शीला चान्दनी के बाल के चोटी को अपने हांथ से सहलाते हुए बोली……हां की थी मैं फोन उसे बोली थी आऊंगी शायद आ भी गई होगी….उसका घर तो हम दोनो के घर से नजदीक हीं है ! बोलकर चान्दनी शीला के एक हांथ अपने हांथ में लेली….आज तो छोटी महारानी भी आ रही है….सुबह सुबह हीं कॉल करी थी…मेरी निंद भी नही खुली थी उस टाईम….बोल रही थी आ रही हूं मैं आप लोगों से स्पेशली कुच्छ कहना है….मैं बोली बोल ना क्या कहना चाहती हो तो मै खुद सबके सामने कहुंगी फोन पर नहीं….चान्दनी बोली…दोनो सहेली चलते चलते बात कर रहे थे….अच्छा तो होगी कोई बात जो रूपा आकर हीं हम लोगों को बताना चहती हो…कोई बात नही हम मिलेंगे उससे तो पता भी चल हीं जाएगी आखीर बात क्या है…बोलकर शीला चान्दनी को समझाने की कोसीस की…..

    चलते चलते दोनो दोस्त अपने क्लास रूम के पास पहुंच गई थी ! जैसे हीं क्लास में एन्टर होना चहा  वैसे हीं तीन चार छात्रायें क्लास रूम से बहर आ रही होती है….सभी की नजर शीला और चान्दनी पर परती है ! उस में से एक लड़की चान्दनी के पास आकर ….कैसी हो चान्दनी दीदी….आप दोनो बहुत सुन्दर लग रही हो आज….बोलकर दोनो के सामने खड़ी हो जाती है….आई एम फाईन….हम बहुत अच्छे हैं और तुम सब क्लास रूम से बाहर क्यों जा रही हो क्या बात हुई है….चान्दनी उस लड़की को जवाब देते हुये…उस लड़की से शवाल करदी थी ! हां तुम लोग बाहर क्यों जा रही हो….शीला भी सभी को पॉवाईंट करते हुए बोली थी….आज क्लास एक से डेढ़ घण्टे देरी से स्टार्ट होने वाली है…अभी सभी स्टूडैन्ट को प्रींशीपल मैम मीटींग हॉल में पहुंचने को बोली हैं…..वहां सभी स्टूडैन्टस और सभी प्रोफेसरों के बीच मीटींग होने वाली है ! इस लिए सभी छात्र छात्रायें मीटींग हॉल में जा रहे हैं….आप लोग भी चलिए….उस में से एक लड़की बोली…..अच्छा मैं समझ गई क्यों मीटींग बुलाई गई है..और मीटींग में क्या होने वाली है ! बोलकर शीला सभी के तरफ देखने लगी…..तुम क्या समझ गई जरा मुझे भी बताए गी की माजरा क्या है….बोलकर चान्दनी शीला के गाल पर अपने हांथ की चार उंगलीयाँ रखी…..चलो मीटींग हॉल वहीं सबको मालुम चल जाएगी की क्या होने वाला है ! शीला बोली और चान्दनी के हांथ पकर कर खीचीं और आगे चलने लगी…..चलो चलकर हीं देखते हैं की प्रीशीपल मैडम क्या कहती हैं……बोल कर चान्दनी शीला के साथ चल परती है ! साथ में सभी मीटींग हॉल के तरफ चल देते हैं ! 

    मीटींग हॉल में एक स्टेज लगी है…साऊंड का भी ईंतजाम किया गया है ! स्टेज के उपर कई सारी कुर्सीयां लगाई गई है ! स्टेज के सामने नीचे सभी स्टूडैन्टस के बैठने के लिए कुर्सीयां लगाई गई है जो दो साईडों में बांटा गया हैं ! एक तरफ लड़कों के लिए तो दुसरी तरफ लड़कियों के लिए…बीच मे रास्ता छोरा गया है ! लोगों के आने जाने के लिए……पढिए कहानी के  अगले भाग में ……रोमांचक किस्से….

    📚 इस कहानी के सभी भाग

    👉 भाग 7
    👉 भाग 8
    👉 भाग 9

  • मुस्कान और शरारतों भरा दिन

    मुस्कान और शरारतों भरा दिन

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    💫 पहली सुबह के बाद मुस्कान और शरारतों भरा दिन


    सुबह की चाय में आज
    थोड़ी सी नई मिठास थी,
    तुम्हारी आँखों की चमक में
    फिर वही पहली सी बात थी।


    नज़रें मिलतीं… झुक जातीं,
    होंठों पर आधी सी हँसी रहती,
    बातें छोटी-छोटी होतीं
    पर दिल की धड़कन तेज़ रहती।


    कभी तुम मुझे चिढ़ाती,
    कभी मैं तुम्हें सताता था,
    रूठने की सारी यादों को
    हम हँसकर दूर भगाता था।


    तुम्हारा यूँ पास से गुजरना,
    और हल्का सा छू जाना,
    मेरे हर पल को जैसे
    एक मीठा सा गीत बना जाना।


    दोपहर की धूप में भी
    तुम्हारी छाँव साथ रही,
    हर छोटी शरारत में
    मोहब्बत की बात रही।


    दिन यूँ ही बीतता गया—
    हँसी, नज़रों और बातों में,
    जैसे फिर से जी उठे हम
    पहली-पहली मुलाक़ातों में।


    🌙 फिर वही शाम दिलों की बढ़ती नज़दीकियाँ


    शाम ढली तो हवा में
    फिर वही नरमी उतर आई,
    तुम्हारे पास बैठते ही
    दिल में खामोशी मुस्कुराई।


    सूरज की आख़िरी किरणें
    तुम्हारे चेहरे को छू रही थीं,
    मेरी नज़रें चुपचाप
    तुम्हारी हर अदा को पढ़ रही थीं।


    बातें कम… एहसास ज़्यादा,
    धड़कनों का शोर सुनाई दे,
    तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में
    जैसे पूरी दुनिया समाई दे।


    धीरे से तुम और करीब आई,
    मैंने भी दूरी भुला दी,
    उस पल की गर्माहट ने
    हर थकान को सुला दी।


    न कोई जल्दी… न कोई शोर,
    बस दिलों का सुकून भरा मेल,
    शाम ने फिर से लिख डाला
    हम दोनों का नया सा खेल।


    रात की पहली आहट तक
    हम यूँ ही साथ बैठे रहे,
    बढ़ती नज़दीकियों में
    अपने सारे डर बहते रहे।

  • टैम्पो स्टैंड

    टैम्पो स्टैंड

    पढ़ने का समय : 6 मिनट
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    अजय ऑटो आने का ईंतजार कर रहा होता है ! कुच्छ कुच्छ देर पर अपने जेब से अपना मोबाईल फोन नीकाल कर टाईम देखता रहता है ! पता नहीं क्या हो गया है….आज एक भी ऑटो नजर नहीं आ रही है ! अजय ऑटो के ईंतजार करते हुए बोला …..कुच्छ लोग और टैम्पो का ईंतजार कर रहे होते हैं ! भीड़ भार से थोरा दुर यह गांव का छोटा सा ऑटो स्टैन्ड है ! यहां भीड़ भार कम होती है ! आप जानते हीं हैं…की गांव की सड़क कैसी होती है…यहां कम लोगों के हीं आना जाना होती है ! इस लिए ईस रूट में सवारी गाड़ी कम हीं चला करती है ..अब शहर जितना सुविधा तो नहीं ना मिलती है ! गांव में रहने वाले लोगों को..
    शहर में रहने वालें लोगों को तो हर प्रकार की सविधा उनके घर तक भी…पहुंच जाती है ! क्यों की शहर में अमीर लोग बहुत पैसे वाले लोग रहते हैं……और वे लोग ज्यादा पैसा खर्च करके…अपने दैनिक सुविधाओं को पुरा कर अपने जिवन आसान बनाते हैं ! आधी से ज्यादा सवारी से भरी हुई  ऑटो आकर रूकती है ! 
    अजय भीड़ को देख कर नहीं बैठता है ! दो तीन लोग उसमें बैठ कर चले जाते हैं ! अजय परेशानी से फीर से ऑटो आने का ईंतजार करने लगता है ! तभी एक सवारी से भरी टैम्पो आती है…अजय अपने हांथ हिलाकर ऑटो को रूकने का ईशारा करता है….ऑटो नही रूकता है !
    तभी एक तरफ से शीला कान्धे में पर्श और हांथ में किताब कॉपी लिए आती हुई नजर आती है ! शीला भी आकर खड़ी होती है ! हे भगवान मैं काफी लेट हो गई हूं….बस जल्दी से कोई गाड़ी मिल जाये….यह बोलकर शीला ईधर उधर नजर घुमाके देखने लगती है…..तभी शीला की नजर अजय पर परती है ! जो मायुशी से किसी सवारी गाड़ी आने का ईंतजार कर रहा होता है ! आप…..आप भी कहीं जाने के लिए गाड़ी का ईंतजार कर रहे हैं क्या….शीला ने अजय के पास आते हुये बोलकर अजय के जबाव का ईंतजार करने लगी…हां हां हमे भी मार्केट जाना था….अजय ने शीला को जबाव देते हुए बोला….मैं काफी देर से कीसी ऑटो पकरने के लिए बहुत मस्सकत कर रहा हूं कोई मिल हीं नहीं रही है ! अजय शीला के तरफ देखकर एक बार फीर बोला……शीला कुच्छ बोल पाती उसी समय एक ई-रिक्सा दोनो के पास आकर रूकी..
    कहां जाना है आप लोगों को….ई- रिक्सा वाला सभी सवारियों के तरफ देखते हुए जोर से बोलता है ! मार्केट तक…अजय रिक्से वाले के तरफ मुरते हुए बोला….जब कोई भी गाड़ी नही आ रही थी तब अजय….दुसरे साईड मुरकर खड़ा था…जब रिक्से वाले के कड़क आवाज अजय के कानों में परा तब अचानक मुरते हुए जबाव दिया था ! 
    चलिये आपका ईंतजार खत्म हुआ….अबतो गाड़ी भी आ गई है…शीला अजय के तरफ देखते हुए मुश्कुरा कर बोली…और हाथों चलने के लिए ईसारा करने लगी….हां हां चलिए चलते हैं ! अजय शीला को बरे प्यार से देखते हुए बोला रिक्से के अन्दर बैठने के लिए चल दिया…..चलिए सभी लोग जल्दी जल्दी बैठिए….रिक्से वाला सभी सावारियों के तरफ देखकर जोर से बोलता है….सभी लोग बारी बारी से गाड़ी में आकर बैठ जाते हैं ! अजय शीला आमने सामने बैठते हैं और जब सब लोग गाड़ी में चढ़जाते हैं तो गाड़ी चल देती है !
    दोनो आमने सामने बैठ तो गये थे पर थे दोनो खामोश….कुच्छ भी नाहीं अजय बोल रहा था नाहीं शीला हीं कुच्छ बोल रही थी…..गाड़ी अपने तेज स्पीड मे चल रही थी अन्य सावारी अपने आप में कुच्छ कुच्छ बाते कर रहे थे…तो कोई अपने घर परिवार में फोन लगा कर बाते कर रहे थे की मै ऑटो में बैठ गया हूं…इतने देर में वहां पहुंच जाऊंगा….आदि आदि बातों से ऑटो गुन्जने लगा था….ईधर शीला और अजय एक दुसरे को देख भी नहीं रहे थे…एक की नजर गाड़ी के इस तरफ तो दुसरे की नजर गाड़ी के उस तरफ….हां बीच बीच में गाड़ी में ब्रेक लगने टाईम पर नजर की एक दो बार टक्कर जरूर होती थी….अईसा नही है की अजय शीला एक दुसरे को नही जानते हैं…..दोनो में बात नही होती है…बल्की अभी कुच्छ सेचुयेशन हीं कुच्छ अयशी थी की दोनो एक दुसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे….अजय शोच रहा था की आज ईस लड़की को क्या हो गया कबसे कुच्छ भी बोल भी नही रही है….उधर भी वही हाल था….शीला के मन में भी वही सब चल रही थी की…आज ये लड़का कुच्छ बोल भी नहीं रहा है….बस नजर से नजर मिल जाती थी वो भी गाड़ी में ब्रेक लगने के टाईम पर…गाड़ी रूकती है किसी के आवाज लगाने पर कि गाड़ी रोको ड्राईवर जी हमें उतरना है…
    ड्राईवर गाड़ी रोक देता है साईड में कर कर….एक लेडिस और एक जैन्स गाड़ी से उतर ते हैं ! और ड्राईवर को किराये का पैसा देकर साईड हो जाते हैं…और गाड़ी फीर से चल परती है ! अब जब दो सीट खाली हो गई थी तो….दोनो के मन थोरा नॉर्मल हुआ था…..अब दोनो बाते करने के बारे में सोच रहे थे…पर सुरूआत कौन करे यही फैसला नहीं हो पा रहा था …..एक बार जब अजय का नजर शीला के तरफ गया तो उसने देखा शीला भी उसी के तरफ ध्यान से देख रही है ! जब अजय का नजर शीला के नजर पर परी तो शीला नजर हटाई नहीं….बल्की उसकी मुंह खुल गई…..आपसे कई मुलाकात हो गई है ! पर अभी तक आपका नाम नहीं जान पाई हूं….आप का नाम क्या हुआ…बोलकर शीला अजय को ध्यान से देखने लगी……मैं भी यही सोच रहा था मैने कई बार चाहा की आपसे आपका नाम पूछ लूं पर नहीं पूछ पाया….अजय बोलकर शीला को देखने लगा था ! अब तो मैने हीं पूछ लिया आपसे तो अब आप बता दिजिए…..बोलकर शीला अजय के जबाव का वेट करने लगी …अजय….शीला से बोला…..मै शीला…मेरा नाम शील है !शीला अजय को जबाव देते हए बोली……और अजय को गॉर से देखने लगी…….परिवार में और कौन कौन हैं?अजय शीला से पूछा…..पापा मम्मी एक बहन दो भाई दादा दादी तीन चाचा दो चाची…..और आपके….बोलकर शिला खिल खीला कर हंसने लगी…..पापा मम्मी चाचा चाची दादा दादी एक भाई एक बहन छोटी……..बोलकर अजय शीला को देखकर मुश्कुरा देता है ! शीला अजय का अपनी साईकिल ठिक करने वाली बात को याद करने लगती है !
    अरे आप कहां खो गईं….बोलकर अजय हंस देता है ! शीला भी मुश्कुरा देती है…….नही कुच्छ….थोरी देर रूक कर…..आपकी पढ़ाई….बोलकर शीला अजय के तरफ देखने लगी….पढ़ाई बीच में ही छोरना पर गया चुकी मेरे घर के माली हालत ठिक नहीं थी तो पढ़ाई छोर कर काम करना पर गया…बोलकर अजय शीला को बरे प्यार से देखने लगा था…साईड में होके रिक्सा रूकता है….दो लोग गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देते हैं….और गाड़ी आगे की ओर चल परती है…..

    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में……..

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  • झूठ से सच तक का सफर

    पढ़ने का समय : 4 मिनट


    सुबह का समय था। सूरज की पहली किरणें छोटे से गाँव सोनपुर के खेतों पर पड़ रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट से पूरा वातावरण गूंज रहा था। इसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसके अंदर एक बुरी आदत थी—वह जल्दी सफलता पाने के लिए छोटे-छोटे झूठ बोल देता था और कभी-कभी शॉर्टकट अपनाने की कोशिश करता था।


    रवि के पिता एक किसान थे और माँ घर का काम संभालती थीं। उनके पिता अक्सर कहा करते थे,
    “बेटा, मेहनत और सच्चाई की राह भले ही कठिन हो, लेकिन मंज़िल हमेशा वहीं मिलती है।”


    रवि यह बात सुन तो लेता था, पर उसे लगता था कि आज की दुनिया में चालाकी और शॉर्टकट से ही लोग जल्दी आगे बढ़ते हैं।


    एक दिन स्कूल में परीक्षा होने वाली थी। रवि ने ठीक से पढ़ाई नहीं की थी। उसे डर था कि अगर वह फेल हो गया तो उसके माता-पिता बहुत दुखी होंगे। उसी समय उसके दोस्त अमन ने उससे कहा,
    “अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें नकल करने में मदद कर सकता हूँ। मेरे पास सारे जवाब लिखे हुए हैं।”
    रवि पहले थोड़ा झिझका, लेकिन फिर उसने सोचा, “अगर मैं पास हो गया तो सब खुश होंगे। किसी को क्या पता चलेगा?”


    अगले दिन परीक्षा शुरू हुई। अमन ने चुपके से रवि को कागज़ पकड़ा दिया जिसमें सारे जवाब लिखे थे। रवि ने वही देखकर उत्तर लिख दिए। परीक्षा खत्म होने के बाद वह खुश था कि अब वह आसानी से अच्छे नंबरों से पास हो जाएगा।


    कुछ दिनों बाद परिणाम आया। रवि को कक्षा में सबसे ज्यादा अंक मिले। शिक्षक ने पूरी कक्षा के सामने उसकी तारीफ की और कहा,
    “रवि ने बहुत मेहनत की है। हमें उस पर गर्व है।”
    पूरा वर्ग तालियाँ बजाने लगा, लेकिन उस समय रवि का दिल खुश नहीं था। उसे अंदर-ही-अंदर लग रहा था कि उसने सबको धोखा दिया है।


    घर आकर जब उसने अपने पिता को परिणाम दिखाया, तो पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने रवि को गले लगाते हुए कहा,
    “मुझे पता था मेरा बेटा मेहनत करेगा और एक दिन हमारा नाम रोशन करेगा।”


    यह सुनकर रवि का सिर झुक गया। उस रात वह सो नहीं पाया। बार-बार उसके मन में वही बात आ रही थी कि उसने अपने पिता का विश्वास तोड़ दिया है।
    अगले दिन स्कूल में एक घटना हुई जिसने रवि की सोच पूरी तरह बदल दी।


    स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी लगनी थी। सभी बच्चों को कोई नया प्रयोग बनाकर लाना था। इस बार रवि ने सच में मेहनत करने की ठानी। उसने कई दिन तक किताबें पढ़ीं, अपने शिक्षक से सवाल पूछे और एक छोटा सा जल-शुद्धिकरण मॉडल तैयार किया।


    प्रदर्शनी के दिन बहुत लोग स्कूल आए। जब जज रवि के मॉडल के पास पहुँचे, तो उन्होंने उससे कई सवाल पूछे। रवि ने आत्मविश्वास से सभी सवालों के जवाब दिए क्योंकि इस बार उसने सच में मेहनत की थी।


    दिन के अंत में परिणाम घोषित हुए। रवि का मॉडल प्रथम स्थान पर आया। इस बार जब सबने तालियाँ बजाईं, तो रवि के चेहरे पर सच्ची खुशी थी।


    लेकिन उसी समय उसके मन में पुरानी परीक्षा की बात फिर से आ गई। उसे लगा कि अगर वह सच नहीं बताएगा तो उसकी यह खुशी अधूरी रहेगी।
    रवि सीधे अपने शिक्षक के पास गया और बोला,
    “सर, मुझे आपसे एक बात कहनी है।”


    शिक्षक ने मुस्कुराते हुए पूछा, “हाँ रवि, क्या बात है?”
    रवि ने हिम्मत करके सब सच बता दिया—कैसे उसने परीक्षा में नकल की थी और अच्छे अंक पाए थे। यह सुनकर शिक्षक कुछ देर चुप रहे।


    फिर उन्होंने शांत स्वर में कहा,
    “रवि, गलती करना बुरी बात नहीं है। लेकिन अपनी गलती को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात है। आज तुमने सच बोलकर साबित कर दिया कि तुम सच में एक अच्छे इंसान बन सकते हो।”


    शिक्षक ने उसे माफ कर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि अगली परीक्षा में उसे अपनी मेहनत से ही अंक लाने होंगे।
    जब रवि ने यह बात अपने पिता को बताई, तो पहले उन्हें थोड़ा दुख हुआ, लेकिन फिर उन्होंने मुस्कुराकर कहा,
    “मुझे तुम्हारे नंबरों से ज्यादा तुम्हारी सच्चाई पर गर्व है।”


    उस दिन के बाद रवि ने कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं चुना। वह हर काम ईमानदारी और मेहनत से करने लगा। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी। वह पढ़ाई में भी अच्छा करने लगा और स्कूल में सबके लिए एक उदाहरण बन गया।


    कई साल बाद वही रवि एक सफल वैज्ञानिक बना। जब भी वह बच्चों से मिलता, तो उन्हें हमेशा यही कहानी सुनाता कि कैसे एक छोटी सी बेईमानी उसे अंदर से परेशान करती रही, और कैसे सच्चाई ने उसे सही रास्ता दिखाया।


    (सीख)


    इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि..जीवन में सफलता पाने के लिए शॉर्टकट और झूठ का रास्ता आसान लग सकता है, लेकिन सच्ची खुशी और सम्मान केवल मेहनत और ईमानदारी से ही मिलता है। गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करना ही सबसे बड़ी बहादुरी है।
    और सच यही है—
    सच्चाई की राह भले ही लंबी हो, लेकिन वही रास्ता इंसान को असली मंज़िल तक पहुँचाता है। ✨

  • 💗 प्यार में पागल 💗

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    प्यार में पागल हुआ हूँ मैं,
    दुनिया की राहें भूल गया हूँ मैं,
    तेरी मुस्कान की रोशनी में,
    अपना हर सवेरा ढूँढ गया हूँ मैं।


    तेरी यादों की बारिश में भीगकर,
    दिल ने हर दर्द को गीत बना लिया,
    तेरे नाम की धड़कन सुनते-सुनते,
    मैंने खुद को ही तुझमें सजा लिया।


    लोग कहते हैं पागलपन है ये,
    पर मुझे तो इबादत सा लगता है,
    तेरी एक झलक के लिए ये दिल,
    हर पल सजदा करता रहता है।


    अगर ये पागलपन ही प्यार है,
    तो मुझे ये जुनून मंज़ूर है,
    तेरे साथ हो या तेरी यादों में,
    मेरा हर लम्हा बस तुझसे भरपूर है। 💖

  • गोल गप्पा

    गोल गप्पा

    पढ़ने का समय : 6 मिनट
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    गोल गप्पा का दुकान लगा हुआ है चार पांच लड़के गोल गप्पे खा रहे होते हैं कुच्छ दुर से चलकर एक लड़की गोल गप्पे के दुकान पर आती है ,”भईया कितने के गोल गप्पे देते है?”
    लड़की जीसका नाम शीला है गोल गप्पे वाले के तरफ देखते हुये बोली। 
    “दस रूपये के पांच मैडम जी कितने देदूं बोलिए ” गोल गप्पे वाले ने शीला के तरफ एक नजर देखते हुये बोला। काफी सालों से दिनेश गोल गप्पे के दुकान लगा रहा था दुर दुर से लोग आकर दिनेश के यहां का गोल गप्पा का स्वाद लेते थे कफी मशहुर हो गया था ये गोल गप्पे का दुकान लोग जब भी शाम के टाईम बाहर निकलते जैसे सौपींग करने कहीं घुमने तो दिनेश के हांथ के बने गोल गप्पे जरूर खाते थे।
    “बीस रूपये के बना दो तीखा थोरा कम करना भईया। ” शीला दिनेश को आग्रह करते हुये बोली।
    “चलो दोस्तों अपना तो हो गया अब चलते हैं। ” उस में से एक लड़का गोल गप्पा खा कर प्लेट नीचे रखते हुए बोलता है।
    “अरे अभी कहां पांच चार और खाले ना तब चलते हैं। ” दुसरा लड़का पहले लड़का से हंसते हुये बोलता है।   
    शीला गोल गप्पे वाले से बलती है ,” भईया जल्दी कर दो ना लेट हो रही है .”
    गोल गप्पे की दुकान पर आये शीला को आधे घंटे हो गई थी। होगी भी क्यों नही इतनी मशहुर गोल गप्पे के दुकान पर जो आई थी दर अशल दुकान पर काफी बहुत भीड़ होती है और सभी को अपना गोल गप्पा खाने के लिए अपने बारी का ईंतजार करना होता है दिनेश भी अपने सभी ग्राहंको को बारी बारी से गोल गप्पे खिलाने में व्यसत रहता है पांच से छह घंटे इनके बहुत ही मेहनती होते हैं तभी दुसरी ओर से एक लड़का एक गीत गुन गुनाते हुये गोल गप्पे के दुकान के तरफ आ रहा होता है।
    नीन्द आवे नही अंखिया में तुहीं बसल बारू संसीया में साधारन सा जिंस टी शर्ट पहने हांथ में एक पलास्टीक के बैग लिये बालों को हवा में उराते हुये दुकान के तरफ बढ़ रहा है होठों पे गीत लिये मुश्कुराते हुए गीत के बोल सुनकर वहां मौजूद सभी की भी नजर उस आती हुई आवाज के तरफ मुर जाता है मुरेगा भी क्यों नहीं वो आवाज हीं इतनी सुरीली थी। दुकान के पास आने पर एक लड़का जो अजय को सामने देख कर बहुत खुश था हंसते हुए बोला, “क्या अजय भाई कौन आपके शांस में बस गई है और आपकी निन्द चुरा रही है ?”
    उस लड़के ने अजय के हांथों में अपना हांथ रखते हुए बोला, ” नही नही अयसी कोई बात नही है। “
    बस अईसे ही बोलकर अजय अपने मुश्कान छुपाने लगा था अब आईये अजय के बारे में जानते हैं अजय एक साधारन किसान परिवार का सबसे बरा और होन हार बेटा था यूं कहिये एक अच्छे बेटा एक अच्छे भाई और एक अच्छे दोस्त सभी गुण अजय में कुट कुट कर भरी हो आज तक किसी को भी अजय निरास नही किया था लोग नाराज भी नही रहते थे अजय से दिनेश भईया गोल गप्पा खिलाईये हो दस बीस रूपया के अजय शीला के तरफ अपनी नजर तीरछी करके मगर देखते हुये बोला ये लिजीए मैडम दिनेश शीला को प्लेट देते हु़ए बोला शीला प्लेट पकर लेती है और गोल गप्पे मुंह में रख कर खाने लगती है ,”वाऊ बहुत टेस्टी है। “
    शीला गोल गप्पे खाते हुये बोलती है थोरा जल्दी जल्दी खिला दिजीए बोलकर खाने लगती है दिनेश भईया का गोल गप्पा अईसे हीं नही मशहुर है दिनेश भईया के हांथ में तो जादू है जो एकवार खाये बार बार आये ! अजय दिनेश की तारिफ करते हुए बोला शीला अजय को देख कर मुश्करा देती है पर बोलती ,”कुच्छ नहीं है। “
    तीसरा लड़का उठकर ,”चलो दोस्तों अब चलते हैं। “
    लड़का उठकर चल देता है तो सभी लोग चल देते हैं  
    एक चौराहा
    सड़क सुनसान होती है शीला अपनी साईकील चलाकर कहीं जा रही होती है साईकील चलाते हुये शीला काफी सुन्दर लग रही है शीला एक अमीर परिवार की बहुत हीं सुन्दर शुशील समझदार और मेहनती लड़की है जो अपनी पढ़ाई से अपने गांव समाज के साथ साथ अपने परिवार के भी नाम रौशन कर रही है अब आप सोचेंगे की पहले गांव समाज फीर बाद में परिवार का नाम रौशन कर रही है क्यूं बोला तो उसका भी एक कारन है जिसके बारे में बाद में विशेष चर्चा करेंगे अभी शीला साईकील थोरा स्पीड कर के तेज गती से साईकिल के पाईडील मार रही थी साईकिल भी बहुत तेज रफ्तार से सड़क पर दौर रही थी चौराहा आते आते शीला की साईकिल की चैन खट खटाती आवाज करती हुई उतर जाती है अब साईकिल की रफ्तार ज्यादा थी तो अचानक पाईडील रूकने बाद भी कुच्छ दुर जाकर रूकी शीला साईकिल के सीट से उतर कर साईकिल के चैन के तरफ देखती है उसका चेहरा गुस्से से लाल हो जाती है और शीला अपने साईकिल की चैन चढ़ाने की कोशीस करने लगती है ईस चैन को भी यहीं उतरना था शीला गुस्से में बर बरा ने लगती है क्या हो गया साईकिल गरबर हो गई कफी परेशान लग रहे हैं एक जानी पहचानी आवाज शीला के कान में आकर परी शीला आवाज की तरफ मुरकर देखी और बोली,” आप आप यहां क्या कर रहे हैं ?”
      शीला ने अजय के तरफ देख कर बोली शीला अपने माथे पर आये पसीना कलाई से पोछते हुए” ये महाराज परेशान कर रखा है ईसकी चैन लगहीं नहीं रही। “
    शीला साईकिल के पहिये को गोल गोल घुमाते हुए बोली। यह बोलते हुये शिला थोरा मायुश हो गई थी।
    “लाईये हम कोशीस करके देखते हैं। ” अजय शीला के नजदीक आते हुए बोला।
    “हो जायेगी एक बार और चढाने की कोशीश करते हैं। ” बोलकर शीला चैन चढाने लगती है दर अशल शीला अपना काम खुद करना जानती थी ईसी लिए अजय को अपनी साईकिल ठिक करने के लिए नही देना चाहती थी लाईए ना दिजिए ना हम टराई करके देखते हैं नही तो आप ऐसे हीं जुझती रह जायेंगी ये लिजिये आप भी अपने हांथ गन्दे कर लिजिए शीला अपना हांथ अजय को दिखाते हुये बोली जिसमे बहुत सारा काला तेल और ग्रीस लग गया था कोई बात नहीं अजय चेहरे पर हल्की मुश्कान लिए बोला शीला उठकर खड़ी हो जाती है अजय बैठ कर साईकिल पकर कर चैन ठिक करने की कोशीश करने लगता है अब सड़क पर लोग भी आने जाने लगे थे।
    आने जाने वाले लोग एक नजर शीला और अजय पर जरूर डाल देते थे कुच्छ देर मेहनत करने के बाद अजय कामयाब हो जाता है और साईकिल की चैन चढ़ाकर साईकिल ठीक कर देता है आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप अगर नही आते अभी तो मैं अईसे हीं स्ट्रगल करती रह जाती शीला अजय की तरफ दोनो हांथ जोरते हुए प्यार से बोली आप हांथ क्यों जोड़ रहे हैं इसकी कोई जरूरत नही है चलिए अबतो आपकी साईकिल भी ठीक हो गई है हां साईकिल तो ठीक हो गई शीला खुशी से हंस्ते हुए बोली तो फिर अब चला जाए अजय कपड़े से हांथ पोछते हुए बोला हां ठिक है शीला बोली और दोनो मुश्कुराते हुए अपने अपने रास्ते चल दिये  

    📚 इस कहानी के सभी भाग

    👉 भाग 1
    👉 भाग 2
    👉 भाग 3