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  • पेसो की भूखी

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    पैसों की भूखी लड़की

     

    शहर में कियारा नाम की एक लड़की रहती थी। देखने में वह बहुत शांत और समझदार लगती थी, लेकिन उसके दिल में एक ही चाहत थी—बहुत सारा पैसा।

     

    कियारा का मानना था कि दुनिया में इज्जत, प्यार और रिश्ते सब पैसों से खरीदे जा सकते हैं।

     

    वह अक्सर अपनी सहेलियों से कहती—

     

    “जिसके पास पैसा है, उसी की दुनिया में कीमत है।”

     

    उसका परिवार बहुत अमीर नहीं था। पिता छोटी-सी दुकान चलाते थे और मां घर संभालती थीं। उन्होंने अपनी हैसियत के हिसाब से कियारा को अच्छी परवरिश दी थी, लेकिन कियारा को हमेशा लगता था कि उसे इससे कहीं ज्यादा मिलना चाहिए।

     

    कॉलेज खत्म करने के बाद उसने नौकरी करने की कोशिश की, लेकिन कुछ महीनों में ही उसे नौकरी छोटी लगने लगी।

     

    तभी उसने एक अलग रास्ता चुन लिया।

     

    वह अमीर लड़कों से दोस्ती करने लगी।

     

    पहली बार उसकी मुलाकात एडवर्ड से हुई। एडवर्ड एक बड़े कारोबारी का बेटा था। महंगी कार, अच्छे कपड़े और हर समय दोस्तों से घिरा रहता था।

     

    कियारा ने उससे दोस्ती की।

     

    कुछ ही दिनों में एडवर्ड को कियारा पसंद आने लगी।

     

    एक शाम कियारा ने उदास चेहरा बनाकर कहा—

     

    “मेरी मां की तबीयत बहुत खराब है।”

     

    एडवर्ड तुरंत परेशान हो गया।

     

    “क्या हुआ?”

     

    “डॉक्टर ने कुछ महंगी दवाइयां लिखी हैं। लेकिन मेरे पास पैसे नहीं हैं।”

     

    एडवर्ड ने बिना ज्यादा सवाल किए पैसे दे दिए।

     

    कियारा ने मुस्कुराकर कहा—

     

    “तुम बहुत अच्छे हो।”

     

    कुछ दिनों बाद उसने फिर पैसे मांगे।

     

    फिर एक नया बहाना।

     

    फिर एक नई जरूरत।

     

    धीरे-धीरे एडवर्ड ने कियारा पर हजारों रुपये खर्च कर दिए।

     

    एक दिन जब एडवर्ड ने उससे शादी की बात की तो कियारा ने अचानक कहा—

     

    “मुझे लगता है हम दोनों एक-दूसरे के लिए सही नहीं हैं।”

     

    एडवर्ड हैरान रह गया।

     

    “लेकिन तुम तो कहती थी कि तुम मुझे पसंद करती हो।”

     

    कियारा ने ठंडी आवाज में कहा—

     

    “पसंद करना और शादी करना अलग बातें हैं।”

     

    और अगले ही दिन वह शहर छोड़कर चली गई।

     

    एडवर्ड को बाद में समझ आया कि कियारा को उससे प्यार नहीं था।

     

    उसे सिर्फ उसके पैसे से मतलब था।

     

    लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

     

    कियारा नए शहर में पहुंची।

     

    वहां उसकी मुलाकात लियाम से हुई।

     

    लियाम एक साधारण परिवार से था। वह नौकरी करता था और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अपने माता-पिता को भेजता था।

     

    कियारा ने जब यह जाना कि लियाम अमीर नहीं है तो पहले उसने उससे दूरी बनाई।

     

    लेकिन लियाम का स्वभाव अच्छा था।

     

    वह हमेशा दूसरों की मदद करता।

     

    धीरे-धीरे कियारा ने सोचा—

     

    “अगर इसे मेरे लिए थोड़ा खर्च करने की आदत पड़ जाए तो?”

     

    उसने लियाम से दोस्ती शुरू कर दी।

     

    लियाम जल्दी ही उसे पसंद करने लगा।

     

    वह अपनी छोटी-सी सैलरी में भी कियारा को खुश करने की कोशिश करता।

     

    कभी उसके लिए फूल लाता।

     

    कभी छोटा-सा उपहार।

     

    कियारा को यह सब पसंद तो नहीं था, लेकिन वह उसे उम्मीद देती रही।

     

    एक दिन उसने कहा—

     

    “मेरे पास एक जरूरी काम है, लेकिन मुझे पैसे चाहिए।”

     

    लियाम ने पूछा—

     

    “कितने?”

     

    “जितने तुम दे सको।”

     

    लियाम ने अपनी कई महीनों की बचत में से कुछ पैसे उसे दे दिए।

     

    उसके पास ज्यादा नहीं था, फिर भी उसने अपनी जरूरतें रोक दीं।

     

    कुछ दिनों बाद कियारा ने फिर पैसे मांगे।

     

    इस बार लियाम ने कहा—

     

    “कियारा, मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं हैं।”

     

    कियारा नाराज हो गई।

     

    “तो फिर तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?”

     

    लियाम चुप हो गया।

     

    उस दिन पहली बार उसे कियारा की बातों में प्यार नहीं, लालच दिखाई दिया।

     

    लेकिन उसने खुद को समझाया—

     

    “शायद वह किसी परेशानी में होगी।”

     

    कुछ समय बाद कियारा ने लियाम से और पैसे मांगे।

     

    लियाम ने मना कर दिया।

     

    “मेरे पिता की दवाइयां भी चल रही हैं। मैं अभी और पैसे नहीं दे सकता।”

     

    कियारा ने बिना सोचे कहा—

     

    “तुम इतने भी अच्छे नहीं हो जितना मैं समझती थी।”

     

    लियाम ने उसकी तरफ देखा।

     

    “मैंने तुम्हारे लिए अपनी क्षमता से ज्यादा किया है।”

     

    कियारा ने कहा—

     

    “लेकिन मुझे उससे क्या?”

     

    लियाम का दिल टूट गया।

     

    उसे समझ आ गया कि वह जिस लड़की के लिए इतना कुछ कर रहा था, उसके लिए वह सिर्फ पैसे देने वाला इंसान था।

     

    कुछ दिनों बाद कियारा वहां से भी चली गई।

     

    लेकिन इस बार वह किसी अमीर लड़के की तलाश में नहीं थी।

     

    वह एक बड़े शहर में पहुंची, जहां उसकी मुलाकात नोलन नाम के एक बहुत अमीर युवक से हुई।

     

    नोलन को कियारा बहुत पसंद आई।

     

    उसने उसे महंगे उपहार दिए।

     

    कियारा को लगा कि अब उसकी जिंदगी बदल गई है।

     

    उसने नोलन के साथ महंगे होटल, पार्टियां और यात्राएं शुरू कर दीं।

     

    लेकिन नोलन बहुत समझदार था।

     

    उसने जल्दी ही समझ लिया कि कियारा की दिलचस्पी उसमें नहीं, उसके पैसे में है।

     

    एक दिन उसने जानबूझकर कहा—

     

    “मेरे सारे पैसे खत्म हो गए हैं।”

     

    कियारा चौंक गई।

     

    “क्या?”

     

    “मेरी कंपनी में बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। अब मेरे पास कुछ नहीं बचा।”

     

    कियारा का व्यवहार उसी दिन बदल गया।

     

    वह बोली—

     

    “तो अब हमें अलग हो जाना चाहिए।”

     

    नोलन ने पूछा—

     

    “इतनी जल्दी?”

     

    कियारा ने कहा—

     

    “मैं ऐसी जिंदगी नहीं जी सकती।”

     

    नोलन मुस्कुराया।

     

    “तो तुम्हें मुझसे नहीं, मेरे पैसों से प्यार था।”

     

    कियारा ने कोई जवाब नहीं दिया।

     

    नोलन ने कहा—

     

    “मैंने तुम्हें परखने के लिए झूठ बोला था। मेरे पैसे खत्म नहीं हुए।”

     

    कियारा के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं।

     

    “नोलन, मेरी बात सुनो…”

     

    “नहीं।”

     

    नोलन ने उसे रोक दिया।

     

    “तुम्हें लगता है कि तुम लोगों को छोड़कर आगे बढ़ रही हो। लेकिन असल में तुम हर बार अपने अंदर कुछ खोती जा रही हो।”

     

    कियारा वहां से चली गई।

     

    पहली बार उसे किसी ने उसके लालच का आईना दिखाया था।

     

    कुछ दिनों तक वह अकेली रही।

     

    उसके पास पैसे थे, कपड़े थे, गहने थे, लेकिन कोई ऐसा इंसान नहीं था जिसे वह अपना कह सके।

     

    उसे एडवर्ड याद आया।

     

    लियाम याद आया।

     

    उनकी छोटी-छोटी बातें याद आईं।

     

    उसे एहसास हुआ कि उसने हर रिश्ते की कीमत पैसे से लगाई थी।

     

    एक दिन उसे खबर मिली कि लियाम की मां बीमार हैं।

     

    कियारा अचानक उसके शहर पहुंच गई।

     

    लियाम ने दरवाजा खोला तो उसे देखकर हैरान रह गया।

     

    “तुम यहां?”

     

    कियारा की आंखों में आंसू थे।

     

    “मैं माफी मांगने आई हूं।”

     

    लियाम कुछ नहीं बोला।

     

    “मैंने तुम्हारे साथ गलत किया। तुमने मेरे लिए अपनी जरूरतें तक रोक दीं और मैंने तुम्हारे प्यार की कीमत पैसे से लगा दी।”

     

    लियाम ने धीरे से कहा—

     

    “मैंने तुम्हें माफ कर दिया।”

     

    कियारा ने पूछा—

     

    “क्या तुम मुझे फिर से अपनी जिंदगी में जगह दोगे?”

     

    लियाम ने सिर हिला दिया।

     

    “माफ करना और वापस स्वीकार करना दो अलग बातें हैं।”

     

    कियारा की आंखों से आंसू बहने लगे।

     

    उसे उस दिन समझ आया कि पैसा खोने का डर जितना बड़ा नहीं होता, उससे कहीं बड़ा डर होता है किसी का भरोसा खो देना।

     

    कियारा ने पहली बार खुद के लिए नौकरी शुरू की।

     

    शुरुआत में उसे छोटी नौकरी मिली।

     

    उसने शिकायत नहीं की।

     

    वह मेहनत करने लगी।

     

    धीरे-धीरे उसने अपने खर्च खुद उठाने शुरू किए।

     

    अब अगर कोई उसे महंगा उपहार देता तो वह पहले पूछती—

     

    “क्यों?”

     

    उसके लिए प्यार का मतलब बदल चुका था।

     

    कई साल बाद एक दिन वह उसी शहर के एक छोटे कैफे में बैठी थी।

     

    सामने एक गरीब बच्ची अपनी मां के साथ खाना खा रही थी।

     

    बच्ची की नजर कियारा के महंगे बैग पर थी।

     

    कियारा ने अपना बैग देखा और मुस्कुराई।

     

    उसने बैग नहीं दिया।

     

    बल्कि बच्ची के लिए खाना मंगवाया।

     

    बच्ची मुस्कुराई।

     

    कियारा के मन को पहली बार किसी चीज से सुकून मिला।

     

    उसे समझ आ गया था—

     

    पैसा जिंदगी को आराम दे सकता है, लेकिन किसी के दिल में अपनी जगह नहीं खरीद सकता।

     

    और जो इंसान हर रिश्ते को पैसों के तराजू पर तौलता है, एक दिन उसके पास बहुत कुछ होते हुए भी ऐसा कुछ नहीं बचता जिसे वह अपना कह सके।