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    संग भींगने का क़रार

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    बरसात की बूंदों में छुपा है प्यार,  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार।  

    तेरे हाथों में मेरा हाथ थामे,  

    सपनों की राहों पर चलें हम साथ‑साथ।  

     

    भीगी ज़ुल्फ़ों में चाँदनी मुस्काए,  

    तेरी आँखों में मेरा चेहरा झलक जाए।  

    हर बूँद बने इज़हार‑ए‑मोहब्बत,  

    हर लम्हा कहे — तू ही मेरी राहत।  

     

    संग भींगना अब इबादत सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

    ओ मेरी जान, ओ मेरी दास्तान,  

    तेरे बिना अधूरा है मेरा अरमान।

     

    बरसात की पहली बूँद जब ज़मीं पर उतरी,  

    तेरी मुस्कान ने मेरी रूह को छू ली।  

    आज दिलों ने किया संग भींगने का क़रार,  

    हर लम्हा बने इश्क़ का इज़हार।  

     

    तेरे होंठों पर ठहरी हँसी की चमक,  

    मेरे दिल में जगाए मोहब्बत की ललक।  

    भीगी राहों पर चलें हम साथ‑साथ,  

    तेरे कदमों से सजें मेरी हर बात।  

     

    बूँदों की सरगम में गूँजे तेरा नाम,  

    तेरी बाहों में मिले मुझे आराम।  

    संग भींगना अब दुआ सा लगे,  

    तेरे संग हर मौसम जन्नत सा लगे।  

     

    ओ मेरी जान, ओ मेरी रूहानी गीत,  

    तेरे बिना अधूरी है मेरी हर प्रीत।  

    चलो आज वादा करें इस बरसात में,  

    संग भींगते रहेंगे हर मुलाक़ात में।