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टैग: #बिछड़ना

  • साथियों से बिछड़ गया

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

    बादलों का गुच्छा जो अपने साथियों से बिछड़ गया 

     

    तूफान लगातार बढ़ता जा रहा था।

     

    एक तरफ बादलू था और दूसरी तरफ उसके साथी।

     

    बीच में काले बादलों और तेज हवाओं की एक बड़ी दीवार खड़ी थी।

     

    धवल बार-बार चिल्ला रहा था—

     

    “बादलू! हमारी तरफ मत आना! तूफान बहुत तेज है!”

     

    लेकिन बादलू अपने दोस्तों को देखकर रुकना नहीं चाहता था।

     

    वह बोला—

     

    “मैं तुम्हें छोड़कर फिर कहीं नहीं जाऊँगा!”

     

    वह आगे बढ़ा।

     

    हवा उसे पीछे धकेल रही थी।

     

    कभी वह ऊपर चला जाता, कभी नीचे।

     

    उसने अपनी पूरी ताकत लगाई।

     

    धीरे-धीरे वह तूफान की दीवार के पास पहुँच गया।

     

    लेकिन तभी बिजली चमकी और जोरदार गरज हुई।

     

    बादलू डरकर पीछे हट गया।

     

    उसने पहली बार समझा कि सिर्फ अपने साथियों तक पहुँचने की इच्छा काफी नहीं थी। उसे सही रास्ता भी खोजना होगा।

     

    तभी उसे बूढ़े पेड़ की बात याद आई—

     

    “हवा को दुश्मन मत समझना। वही हवा तुम्हें उनके पास पहुँचा सकती है।”

     

    बादलू ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

     

    उसने हवा को महसूस किया।

     

    एक दिशा से हवा बहुत तेज आ रही थी, लेकिन दूसरी दिशा में हवा धीरे-धीरे घूम रही थी।

     

    बादलू ने उसी दिशा को चुना।

     

    वह सीधे तूफान में जाने के बजाय उसके किनारे-किनारे आगे बढ़ने लगा।

     

    कुछ देर बाद तूफान थोड़ा कमजोर हुआ।

     

    धवल ने उसे देखा।

     

    “बादलू! अब दाईं तरफ आओ!”

     

    बादलू धवल की बताई दिशा में बढ़ने लगा।

     

    धीरे-धीरे दोनों के बीच की दूरी कम होने लगी।

     

    और आखिरकार…

     

    बादलू अपने साथियों के पास पहुँच गया।

     

    धवल ने उसे देखते ही कहा—

     

    “तुम्हें पता है हमने तुम्हें कितना ढूँढ़ा?”

     

    बादलू की आँखों में खुशी थी।

     

    “मुझे लगा था मैं तुम्हें कभी नहीं देख पाऊँगा।”

     

    बाकी बादल भी उसके चारों तरफ इकट्ठा हो गए।

     

    एक छोटा सा बादल बोला—

     

    “तुम बहुत बदल गए हो।”

     

    बादलू ने मुस्कुराकर पूछा—

     

    “कैसे?”

     

    छोटे बादल ने कहा—

     

    “पहले तुम्हें सिर्फ दूर-दूर घूमना था। अब तुम वापस आने की बात कर रहे हो।”

     

    सभी हँस पड़े।

     

    लेकिन तभी धवल ने कहा—

     

    “हमें जल्दी आगे बढ़ना होगा।”

     

    “क्यों?”

     

    धवल ने नीचे धरती की तरफ इशारा किया।

     

    “देखो।”

     

    नीचे एक बहुत बड़ा इलाका सूखा पड़ा था।

     

    नदियाँ छोटी हो गई थीं।

     

    तालाब लगभग सूख चुके थे।

     

    खेतों में फसल मुरझा रही थी।

     

    बादलू को उस छोटे गांव की याद आ गई, जहाँ उसने थोड़ी-सी बारिश की थी।

     

    उसने कहा—

     

    “हमें बारिश करनी होगी।”

     

    एक बड़ा बादल बोला—

     

    “लेकिन हमारे पास इतना पानी नहीं है।”

     

    बादलू ने कहा—

     

    “अगर हम सब एक साथ मिल जाएँ तो?”

     

    धवल ने उसकी बात समझ ली।

     

    “तुम कहना चाहते हो कि हमें अपना पानी एक जगह इकट्ठा करना चाहिए?”

     

    “हाँ।”

     

    सभी बादल एक साथ आने लगे।

     

    हवा भी उनकी मदद करने लगी।

     

    धीरे-धीरे बादलों का बड़ा गुच्छा तैयार हो गया।

     

    पहले एक बूंद गिरी।

     

    फिर दूसरी।

     

    फिर अचानक तेज बारिश शुरू हो गई।

     

    नीचे खेतों में पानी पहुँचने लगा।

     

    सूखी नदी में हल्की धारा बहने लगी।

     

    गांव के लोग घरों से बाहर निकल आए।

     

    वही छोटी बच्ची जिसने पहले बारिश के लिए आसमान की ओर देखा था, खुशी से चिल्लाई—

     

    “बारिश आ गई!”

     

    बादलू उसे ऊपर से देख रहा था।

     

    उसके मन में एक अलग ही खुशी थी।

     

    धवल ने कहा—

     

    “अब समझ आया कि तुम उस दिन अकेले होकर भी इतने खुश क्यों थे।”

     

    बादलू ने पूछा—

     

    “क्यों?”

     

    धवल बोला—

     

    “क्योंकि तुमने किसी की मदद की थी।”

     

    बादलू मुस्कुराया।

     

    “हाँ। उस दिन मुझे लगा था कि मैं अपने साथियों से बिछड़ गया हूँ। लेकिन शायद उसी वजह से मैं उस गांव तक पहुँच पाया।”

     

    कुछ दिनों बाद मौसम साफ हो गया।

     

    बादलों का गुच्छा फिर अपने पुराने रास्ते पर चल पड़ा।

     

    बादलू अब पहले जैसा नहीं था।

     

    उसे अभी भी नई जगहें देखना पसंद था, लेकिन अब वह बिना बताए कहीं नहीं जाता था।

     

    एक दिन उसने धवल से कहा—

     

    “अगर मैं फिर कभी दूर जाना चाहूँ तो?”

     

    धवल ने हँसकर कहा—

     

    “तो पहले हमें बताना।”

     

    “और अगर हवा मुझे उड़ा ले गई?”

     

    “तो हम तुम्हें ढूँढ़ने निकल पड़ेंगे।”

     

    दोनों हँसने लगे।

     

    समय बीतता गया।

     

    बादलू ने कई जगहों पर बारिश की।

     

    कहीं सूखे खेतों को पानी मिला, कहीं जंगलों को नई हरियाली मिली और कहीं छोटे बच्चों ने बारिश में खेलकर खुशी मनाई।

     

    एक दिन वही बूढ़ा पेड़ दूर से बादलू को देख रहा था।

     

    बादलू ने उसे पहचान लिया।

     

    वह नीचे आया और बोला—

     

    “आपने सही कहा था। कभी-कभी रास्ता भटकना जरूरी होता है।”

     

    बूढ़ा पेड़ मुस्कुराया।

     

    “अब तुम्हें समझ आया?”

     

    बादलू ने कहा—

     

    “हाँ। मैं अपने साथियों से बिछड़ा जरूर था, लेकिन उस सफर ने मुझे अपने बारे में बहुत कुछ सिखाया।”

     

    पेड़ ने पूछा—

     

    “और सबसे बड़ी बात?”

     

    बादलू ने आसमान में अपने साथियों की ओर देखा।

     

    “कि अकेले उड़ना अच्छा लग सकता है, लेकिन अपनों के साथ लौटना उससे भी ज्यादा खूबसूरत होता है।”

     

    धवल ने दूर से आवाज लगाई—

     

    “बादलू! चलो!”

     

    बादलू मुस्कुराया और अपने साथियों के पास लौट गया।

     

    उस दिन से बादलों का वह गुच्छा हमेशा साथ-साथ चलता।

     

    कभी कोई बादल थोड़ा दूर निकल जाता तो बाकी उसे आवाज देकर वापस बुला लेते।

     

    और जब भी तेज हवा चलती, बादलू सबसे पहले कहता—

     

    “सब साथ रहना!”

     

    सभी हँसते और एक-दूसरे के करीब आ जाते।

     

    कहते हैं, आसमान में बादलों के कई गुच्छे आज भी एक साथ चलते दिखाई देते हैं।

     

    शायद उनमें से कोई बादलू का परिवार भी हो।

     

    और जब कभी कोई छोटा सा बादल अपने साथियों से दूर चला जाता है, तो हवा उसके कानों में जैसे एक बात कहती है—

     

    “रास्ते कितने भी लंबे हों, अगर अपने साथ हों तो कोई भी सफर मुश्किल नहीं होता।”

     

    और बादलू की कहानी हमें यही सिखाती है कि कभी-कभी जिंदगी हमें अपनों से दूर जरूर ले जाती है, लेकिन अगर दिल में उनका प्यार और वापस लौटने की इच्छा हो, तो कोई दूरी हमेशा के लिए नहीं रहती।

     

    समाप्त।