🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

टैग: #प्यार #अहसास

  • बहन की राखी और भाई का राज़

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    बहन की राखी और भाई का राज़

     

    शहर के एक छोटे से मोहल्ले में सिया अपनी माँ के साथ रहती थी। रक्षाबंधन में बस दो दिन बाकी थे और सिया पूरे घर को सजाने में लगी थी।

     

    लेकिन एक बात उसे अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी।

     

    उसका बड़ा भाई आकाश पिछले कुछ महीनों से बहुत बदल गया था।

     

    पहले वह हर छोटी-बड़ी बात अपनी बहन को बताता था। सिया को कोई परेशानी होती तो सबसे पहले आकाश को फोन करती। लेकिन अब आकाश फोन तो करता था, मगर कुछ मिनट बात करके जल्दी से फोन रख देता।

     

    सिया कई बार पूछ चुकी थी,

     

    “भैया, आप मुझसे कुछ छिपा रहे हो क्या?”

     

    आकाश हर बार हंसकर कहता,

     

    “नहीं पगली, ऐसी कोई बात नहीं है।”

     

    लेकिन सिया को यकीन नहीं होता।

     

    इस बार रक्षाबंधन पर उसने आकाश के लिए खुद राखी बनाई थी। राखी के बीच में एक छोटा-सा चांदी का दिल लगा था।

     

    वह राखी हाथ में लेकर मुस्कुराई।

     

    “देखना भैया, इस बार आपसे एक बड़ा गिफ्ट लूंगी।”

     

    माँ ने पीछे से आवाज लगाई,

     

    “पहले भाई को आने तो दे।”

     

    सिया ने हंसकर कहा,

     

    “आएगा क्यों नहीं? उसने खुद कहा है कि इस बार रक्षाबंधन मेरे साथ मनाएगा।”

     

    लेकिन अगले ही दिन आकाश का फोन आया।

     

    “सिया, इस बार शायद मैं घर नहीं आ पाऊंगा।”

     

    सिया कुछ सेकंड चुप रही।

     

    “क्यों?”

     

    “काम बहुत है।”

     

    “आपने वादा किया था।”

     

    “पता है… लेकिन मजबूरी है।”

     

    “आपकी मजबूरी क्या है?”

     

    आकाश चुप हो गया।

     

    फिर बोला,

     

    “राखी संभालकर रखना। मैं जल्दी आने की कोशिश करूंगा।”

     

    फोन कट गया।

     

    सिया को गुस्सा आ गया।

     

    “हर बार यही! जरूर कुछ छिपा रहे हैं।”

     

    उस रात सिया ने तय किया कि वह खुद पता लगाएगी।

     

    अगली सुबह उसने आकाश के पुराने दोस्त करण को फोन किया।

     

    “करण भैया, आपको पता है आकाश भैया इन दिनों इतने परेशान क्यों रहते हैं?”

     

    करण कुछ पल चुप रहा।

     

    फिर बोला,

     

    “सिया, मुझे नहीं लगता कि मुझे तुम्हें बताना चाहिए।”

     

    “क्यों?”

     

    “क्योंकि आकाश खुद चाहता है कि तुमसे ये बात छिपी रहे।”

     

    सिया का दिल धड़क उठा।

     

    “मतलब कोई बड़ी बात है?”

     

    करण ने धीरे से कहा,

     

    “तुम उससे खुद पूछो।”

     

    “आप बस इतना बता दो कि वो ठीक हैं?”

     

    करण ने जवाब दिया,

     

    “हां, वो ठीक हैं।”

     

    लेकिन इस जवाब ने सिया की चिंता और बढ़ा दी।

     

    रक्षाबंधन की सुबह आ गई।

     

    घर में मिठाई बन रही थी। माँ ने पूजा की थाली सजा दी थी। सिया ने भी नए कपड़े पहन लिए थे।

     

    लेकिन उसका भाई अब तक नहीं आया था।

     

    दोपहर हो गई।

     

    फिर शाम।

     

    सिया बार-बार दरवाजे की तरफ देखती।

     

    माँ ने समझाया,

     

    “बेटा, शायद काम में फंस गया होगा।”

     

    सिया ने धीमे से कहा,

     

    “माँ, मुझे लगता है भैया किसी परेशानी में हैं।”

     

    तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

     

    सिया दौड़कर बाहर गई।

     

    सामने आकाश खड़ा था।

     

    चेहरे पर थकान थी, कपड़े भी सफर की वजह से थोड़े अस्त-व्यस्त थे।

     

    लेकिन हाथ में मिठाई का डिब्बा था।

     

    सिया उसे देखते ही कुछ पल चुप रही।

     

    फिर बोली,

     

    “आपने कहा था नहीं आओगे।”

     

    आकाश मुस्कुराया,

     

    “अपनी बहन की राखी छोड़कर कैसे रहता?”

     

    सिया ने उसकी तरफ ध्यान से देखा।

     

    “भैया… आप ठीक तो हो?”

     

    “बिल्कुल।”

     

    “झूठ।”

     

    आकाश हंस पड़ा।

     

    “अंदर चल।”

     

    सिया ने पूजा की थाली तैयार की।

     

    आकाश उसके सामने बैठ गया।

     

    सिया ने तिलक लगाया, आरती की और फिर अपनी बनाई हुई राखी निकाली।

     

    उसने राखी आकाश की कलाई पर बांध दी।

     

    “अब बताइए।”

     

    आकाश ने पूछा,

     

    “क्या?”

     

    “आपका राज़।”

     

    आकाश की मुस्कान अचानक गायब हो गई।

     

    माँ भी चुप हो गईं।

     

    आकाश ने कुछ देर अपनी राखी को देखा।

     

    फिर जेब से एक पुराना लिफाफा निकाला।

     

    उसने लिफाफा सिया की तरफ बढ़ाया।

     

    “इसे खोल।”

     

    सिया ने लिफाफा खोला।

     

    अंदर कुछ कागज थे।

     

    वह उन्हें पढ़ने लगी।

     

    उसकी आंखें अचानक बड़ी हो गईं।

     

    “ये क्या है?”

     

    आकाश ने धीरे से कहा,

     

    “तुम्हारे कॉलेज की फीस की रसीदें।”

     

    सिया ने हैरानी से पूछा,

     

    “लेकिन मेरी फीस तो…”

     

    “पिछले दो साल से मैं भर रहा हूं।”

     

    सिया कुछ बोल नहीं पाई।

     

    “माँ ने कहा था कि अब घर की हालत ऐसी नहीं कि तुम्हारी पढ़ाई का पूरा खर्च उठा सकें। मैंने सोचा, जब तक मैं हूं, तुम्हारी पढ़ाई नहीं रुकेगी।”

     

    सिया की आंखों में आंसू आ गए।

     

    “लेकिन आपने मुझे बताया क्यों नहीं?”

     

    आकाश मुस्कुराया।

     

    “क्योंकि मैं चाहता था कि तू अपनी पढ़ाई को लेकर कभी चिंता न करे।”

     

    सिया ने सिर झुका लिया।

     

    फिर अचानक उसकी नजर आकाश के हाथ पर पड़ी।

     

    उसकी कलाई पर हल्की चोट का निशान था।

     

    “ये कैसे हुआ?”

     

    आकाश ने हाथ पीछे कर लिया।

     

    “कुछ नहीं।”

     

    “भैया!”

     

    आकाश चुप रहा।

     

    सिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

     

    “सच बताइए।”

     

    आकाश ने लंबी सांस ली।

     

    “कुछ दिन पहले काम से लौटते समय रास्ते में गिर गया था।”

     

    “और आपने मुझे बताया तक नहीं?”

     

    “तू परेशान हो जाती।”

     

    सिया की आंखों से आंसू निकल आए।

     

    “मैं आपकी बहन हूं। आपकी परेशानी में परेशान होने का हक भी मेरा है।”

     

    आकाश कुछ नहीं बोला।

     

    तभी माँ ने धीमे से कहा,

     

    “सिया, अभी एक बात और है जो तुझे नहीं पता।”

     

    सिया ने माँ की तरफ देखा।

     

    माँ ने कहा,

     

    “तेरे भैया ने पिछले महीने अपनी बाइक बेच दी।”

     

    “क्या?”

     

    सिया ने आकाश की तरफ देखा।

     

    “क्यों?”

     

    आकाश चुप रहा।

     

    माँ बोलीं,

     

    “तेरे कॉलेज की आगे की पढ़ाई और हॉस्टल की फीस के लिए।”

     

    सिया की आंखों से आंसू लगातार बहने लगे।

     

    वह आकाश के पास जाकर बैठ गई।

     

    “भैया… आपको बाइक बहुत पसंद थी ना?”

     

    आकाश मुस्कुराया।

     

    “थी।”

     

    “फिर बेच दी?”

     

    “बाइक दोबारा खरीदी जा सकती है।”

     

    “लेकिन…”

     

    “लेकिन मेरी बहन की पढ़ाई का समय दोबारा नहीं आएगा।”

     

    सिया ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।

     

    “आप इतने अच्छे क्यों हो?”

     

    आकाश ने हंसकर कहा,

     

    “क्योंकि तू इतनी परेशान करने वाली बहन है।”

     

    दोनों हंस पड़े।

     

    लेकिन सिया का मन अभी भी भारी था।

     

    उसने राखी वाली कलाई को अपने हाथों में लिया।

     

    “भैया, आज मैं भी आपको एक वादा करूंगी।”

     

    “क्या?”

     

    “मैं आपकी मेहनत बेकार नहीं जाने दूंगी।”

     

    आकाश ने उसे देखा।

     

    “मतलब?”

     

    “मैं खूब पढ़ूंगी। अपने पैरों पर खड़ी होऊंगी। और एक दिन आपको वो सब वापस दूंगी जो आपने मेरे लिए छोड़ा है।”

     

    आकाश ने सिर हिलाया।

     

    “मुझे तुझसे कुछ वापस नहीं चाहिए।”

     

    “लेकिन मुझे देना है।”

     

    “क्यों?”

     

    सिया ने उसकी राखी की तरफ देखते हुए कहा,

     

    “क्योंकि आपने मेरी कलाई पर नहीं, मेरी जिंदगी पर भरोसे का धागा बांधा है।”

     

    आकाश की आंखें भी नम हो गईं।

     

    उसने बहन के सिर पर हाथ रखा।

     

    “बस एक बात याद रखना।”

     

    “क्या?”

     

    “जिंदगी में कितनी भी मुश्किल आए, अपने सपनों से समझौता मत करना।”

     

    सिया ने मुस्कुराकर कहा,

     

    “वादा।”

     

    कुछ साल बाद सिया ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली।

     

    उसे एक अच्छी नौकरी मिल गई।

     

    पहली तनख्वाह मिलते ही वह बाजार गई और एक डिब्बा लेकर घर लौटी।

     

    आकाश ने पूछा,

     

    “क्या लाई है?”

     

    सिया ने डिब्बा उसकी तरफ बढ़ाया।

     

    अंदर एक सुंदर घड़ी थी।

     

    आकाश ने हैरानी से पूछा,

     

    “मेरे लिए?”

     

    सिया ने मुस्कुराकर कहा,

     

    “उस बाइक की जगह तो नहीं ले सकती जो आपने मेरे लिए बेच दी थी… लेकिन ये आपकी मेहनत की पहली छोटी-सी वापसी है।”

     

    आकाश की आंखें भर आईं।

     

    सिया ने उसकी कलाई देखी।

     

    वही कलाई, जिस पर सालों पहले उसने एक छोटी-सी राखी बांधी थी।

     

    उसने धीरे से कहा,

     

    “भैया, आपका राज़ मुझे बहुत देर से पता चला।”

     

    आकाश मुस्कुराया।

     

    “और अब?”

     

    “अब समझ आया कि कुछ भाई अपनी बहन को सिर्फ राखी का तोहफा नहीं देते…”

     

    वह कुछ पल रुकी।

     

    “वे अपनी जिंदगी का एक हिस्सा उसके सपनों के नाम कर देते हैं।”

     

    आकाश ने बहन के सिर पर हाथ रखा।

     

    और उस दिन सिया को एहसास हुआ—

     

    राखी का धागा कलाई पर कुछ पल के लिए बंधता है, लेकिन भाई का प्यार पूरी जिंदगी साथ रहता है।