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टैग: # प्यार#इंतज़ार

  • देश में मिला सच्चा प्यार

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

    जापानी लड़का जिसे भारत में सच्चा प्यार मिला

     

    हिरोतो जापान के टोक्यो शहर में रहता था। उम्र करीब तेईस साल थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे एक भारतीय कंपनी में छह महीने के प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिला। उसके परिवार ने उसे भारत जाने की खबर सुनकर बहुत सारी हिदायतें दीं।

     

    “खाने का ध्यान रखना।”

     

    “भीड़ में संभलकर रहना।”

     

    “और सबसे जरूरी… अपना काम पूरा करके जल्दी वापस आ जाना।”

     

    हिरोतो बस मुस्कुरा देता।

     

    उसे भारत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उसने फिल्मों और इंटरनेट पर भारत की कुछ तस्वीरें जरूर देखी थीं, लेकिन असली भारत कैसा है, यह उसे नहीं पता था।

     

    भारत पहुंचते ही उसे हर चीज नई लगी। अलग भाषा, अलग खाना, सड़क की भीड़, रंग-बिरंगे कपड़े और लोगों का एक-दूसरे से बेझिझक बात करना।

     

    शुरुआत में वह थोड़ा परेशान रहा।

     

    एक दिन ऑफिस जाते समय अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। हिरोतो सड़क किनारे खड़ा बारिश रुकने का इंतजार करने लगा।

     

    तभी उसके पास एक लड़की छाता लेकर आई।

     

    “आप जापान से हैं ना?”

     

    हिरोतो ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।

     

    “हां… लेकिन आपको कैसे पता?”

     

    लड़की हंस पड़ी।

     

    “आपके ऑफिस का कार्ड उल्टा लगा हुआ है।”

     

    हिरोतो ने अपना कार्ड देखा और झेंप गया।

     

    “ओह… धन्यवाद।”

     

    लड़की का नाम अनाया था।

     

    वह पास के कॉलेज में पढ़ती थी और उसी रास्ते से रोज आती-जाती थी।

     

    अनाया ने अपना छाता थोड़ा उसकी तरफ करते हुए कहा, “बारिश में ऐसे खड़े रहेंगे तो पूरी तरह भीग जाएंगे।”

     

    हिरोतो ने कहा, “लेकिन आपका छाता छोटा है।”

     

    “तो क्या हुआ? थोड़ा आप भीगिए, थोड़ा मैं।”

     

    दोनों हंस पड़े।

     

    वह उनकी पहली मुलाकात थी।

     

    इसके बाद वे अक्सर रास्ते में मिल जाते।

     

    कभी अनाया उससे हिंदी के शब्द सिखाती तो कभी हिरोतो उसे जापानी शब्द बताता।

     

    एक दिन अनाया ने पूछा, “तुम्हें भारत कैसा लग रहा है?”

     

    हिरोतो ने थोड़ी देर सोचकर कहा, “भारत… बहुत शोर वाला है।”

     

    अनाया ने आंखें बड़ी कर लीं।

     

    “बस?”

    हिरोतो मुस्कुराया।

    “और बहुत दिल वाला भी।”

    अनाया चुप हो गई।

    धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी होने लगी।

     

    हिरोतो को पहली बार महसूस हुआ कि वह भारत में अकेला नहीं है।

     

    जब उसे भारतीय खाना समझ नहीं आता, अनाया उसे बताती कि क्या खाना है। जब वह हिंदी बोलते हुए गलती करता, अनाया हंसती जरूर, लेकिन फिर सही शब्द भी सिखाती।

     

    एक दिन हिरोतो ने अनाया से कहा

    “मेरे जापान में बहुत दोस्त थे, लेकिन उनसे बात करते समय मुझे हमेशा लगता था कि मुझे खुद को सही साबित करना है।”

     

    अनाया ने पूछा, “और मेरे साथ?”

     

    “तुम्हारे साथ मुझे कुछ साबित नहीं करना पड़ता।”

     

    अनाया के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

     

    कुछ महीनों में हिरोतो को एहसास हो गया कि अनाया उसके लिए सिर्फ दोस्त नहीं रही।

    लेकिन वह अपनी भावनाएं कहने से डरता था।

    उसे पता था कि उसका प्रोजेक्ट खत्म होने वाला है।

    आखिर वह दिन भी आ गया।

     

    हिरोतो को जापान लौटना था।

    उसने अपना सामान पैक कर लिया।

     

    आखिरी शाम वह उसी जगह गया जहां उसकी और अनाया की पहली मुलाकात हुई थी।

     

    बारिश फिर हो रही थी।

    कुछ देर बाद अनाया वहां आई।

    उसने हिरोतो को देखकर पूछा“तो… कल जा रहे हो?”

    हिरोतो ने सिर हिला दिया।

    “हां।”

    दोनों कुछ देर चुप रहे।

    फिर अनाया ने पूछा

    “तुम वापस आओगे?”

    हिरोतो ने उसकी तरफ देखा।

     

    “अगर मैं कहूं कि तुम्हारी वजह से आना चाहता हूं?”

     

    अनाया की आंखों में नमी आ गई।

    “तो मैं कहूंगी… देर मत करना।”

    हिरोतो जापान चला गया

    लेकिन वहां पहुंचने के बाद भी भारत उसके मन से नहीं निकला।

     

    वह अपने काम में व्यस्त रहता, लेकिन हर शाम अनाया से बात करता।

     

    दोनों के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी थी, मगर बातचीत में वह दूरी कभी महसूस नहीं होती थी।

     

    एक दिन हिरोतो के पिता ने पूछा

    “तुम भारत को इतना याद क्यों करते हो?”

    हिरोतो ने कुछ पल चुप रहने के बाद कहा

    “क्योंकि वहां मुझे एक ऐसा इंसान मिला, जिसके सामने मैं खुद को छिपाना नहीं चाहता।”

    पिता ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा

    “क्या तुम उससे प्यार करते हो?”

    हिरोतो ने पहली बार बिना झिझक जवाब दिया

    “हां।”

    कुछ महीनों बाद हिरोतो वापस भारत आया।

    इस बार छह महीने के प्रोजेक्ट के लिए नहीं।

    वह हमेशा के लिए यहां काम करने आया था।

    अनाया को इस बारे में कुछ पता नहीं था।

     

    एक शाम वह उसी पुराने रास्ते पर जा रही थी, जहां पहली बार दोनों मिले थे।

    अचानक पीछे से आवाज आई

    “बारिश में ऐसे अकेले चलोगी तो पूरी तरह भीग जाओगी।”

    अनाया ने पलटकर देखा।सामने हिरोतो खड़ा था।

    उसके हाथ में वही छोटा-सा छाता था।

    अनाया कुछ बोल नहीं पाई।

    “तुम… वापस आ गए?”

    हिरोतो मुस्कुराया।

    “मैंने कहा था ना… अगर भारत में मेरा कोई इंतजार कर रहा होगा, तो मैं जरूर लौटूंगा।”

     

    अनाया की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

    “और अगर मैं इंतजार नहीं करती?”

    हिरोतो ने मुस्कुराकर कहा“तो मैं तुम्हें ढूंढता।”

    अनाया हंस पड़ी।

    बारिश तेज हो गई।

    हिरोतो ने छाता उसकी तरफ बढ़ाया।

    “अबकी बार पूरा छाता तुम्हारा।”

    अनाया ने कहा“नहीं, आधा-आधा।”

    दोनों एक ही छाते के नीचे आगे बढ़ने लगे।

     

    हिरोतो को उस दिन समझ आया कि सच्चा प्यार हमेशा एक जैसी भाषा बोलने वालों के बीच नहीं मिलता।

     

    कभी-कभी दो लोग अलग देश, अलग संस्कृति और अलग भाषा से होते हैं…

     

    फिर भी उनके दिल एक-दूसरे को बिना किसी अनुवाद के समझ लेते हैं।

    और हिरोतो के लिए भारत अब सिर्फ एक देश नहीं था।

     

    यह वही जगह थी जहां उसे अपना घर नहीं मिला था…

     

    बल्कि अपना इंसान मिल गया था।