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टैग: #जिम्मेदारी #भरोसा

  • दो घरों के बीच बटा एक आदमी

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

    दो घरों के बीच बंटा एक आदमी

     

    शहर से थोड़ा दूर बसे एक छोटे से गांव में शान अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। पिता की तबीयत अक्सर खराब रहती थी और घर की जिम्मेदारी धीरे-धीरे शान के कंधों पर आ गई थी। मां की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि बेटे का घर बस जाए, ताकि वह भी चैन से जी सके।

     

    शान की उम्र करीब पच्चीस साल थी, जब उसकी शादी परिवार वालों ने नंदिनी से कर दी।

     

    नंदिनी बहुत साधारण परिवार की शांत और समझदार लड़की थी। वह ज्यादा बोलती नहीं थी, लेकिन उसके मन में अपने पति और नए परिवार के लिए बहुत सम्मान था।

     

    शादी के बाद शान को नौकरी के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा।

     

    जाते समय नंदिनी ने पूछा, “आप इतनी जल्दी चले जाएंगे?”

     

    शान ने मुस्कुराकर कहा, “क्या करूं? नौकरी है। कुछ साल मेहनत कर लूं, फिर तुम्हें भी अपने पास बुला लूंगा।”

     

    नंदिनी ने विश्वास से सिर हिला दिया।

     

    “मुझे आप पर भरोसा है।”

     

    शान शहर चला गया।

     

    कुछ महीनों बाद नंदिनी ने एक बेटे को जन्म दिया। उसका नाम रखा गया आरव।

     

    शान जब घर आया और पहली बार बेटे को गोद में उठाया तो उसकी आंखों में आंसू आ गए।

     

    “इतना छोटा है…”

     

    नंदिनी मुस्कुराई।

     

    “आपका बेटा है।”

     

    शान ने बच्चे के माथे को चूमा।

     

    “मैं इसके लिए बहुत कुछ करूंगा।”

     

    समय बीतता गया।

     

    दो साल बाद उनके घर दूसरा बेटा हुआ। उसका नाम रखा गया अंश।

     

    अब नंदिनी की पूरी दुनिया अपने दोनों बच्चों और शान के इर्द-गिर्द घूमती थी।

     

    शान हर महीने पैसे भेजता था। फोन पर बच्चों से बातें करता और नंदिनी से कहता—

     

    “बस थोड़ा और वक्त। फिर मैं तुम्हें और बच्चों को अपने पास ले आऊंगा।”

     

    नंदिनी हर बार यही कहती—

     

    “ठीक है, मैं इंतजार करूंगी।”

     

    लेकिन शहर की जिंदगी ने धीरे-धीरे शान को बदलना शुरू कर दिया।

     

    उसी शहर में उसके ऑफिस में रिया नाम की एक लड़की काम करती थी। दोनों की दोस्ती हुई और धीरे-धीरे वह दोस्ती ऐसी जगह पहुंच गई, जहां शान को अपनी पहली शादी, अपने बच्चों और नंदिनी का इंतजार सब कुछ छोटा लगने लगा।

     

    एक दिन रिया ने उससे कहा—

     

    “तुम हमेशा कहते हो कि तुम्हारा परिवार गांव में है। लेकिन तुम यहां अकेले रहते हो। आखिर कब तक?”

     

    शान ने नजरें झुका लीं।

     

    “मुझे पता नहीं।”

     

    रिया ने कहा, “अगर तुम मेरे साथ रहना चाहते हो तो पुराने रिश्ते को खत्म कर दो।”

     

    शान चुप रहा।

     

    उसके मन में नंदिनी का चेहरा आया।

     

    लेकिन उसने उस आवाज को दबा दिया।

     

    कुछ ही समय बाद शान ने रिया से दूसरी शादी कर ली।

     

    उसने अपने परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

     

    गांव में नंदिनी अब भी उसका इंतजार कर रही थी।

     

    एक शाम दोनों बच्चे आंगन में खेल रहे थे।

     

    आरव ने पूछा, “मां, पापा कब आएंगे?”

     

    नंदिनी ने मुस्कुराकर कहा, “जल्दी आएंगे बेटा।”

     

    अंश ने मासूमियत से पूछा, “पापा हमारे लिए खिलौना लाएंगे?”

     

    नंदिनी ने दोनों को गले लगा लिया।

     

    “हां, बहुत सारे खिलौने लाएंगे।”

     

    लेकिन उस रात नंदिनी के फोन पर शान का संदेश आया—

     

    “कुछ दिनों तक मुझे फोन मत करना। काम बहुत ज्यादा है।”

     

    नंदिनी को पहली बार कुछ अजीब लगा।

     

    उसने कई बार फोन किया, लेकिन शान ने फोन नहीं उठाया।

     

    कुछ दिन बाद शान के एक पुराने दोस्त ने नंदिनी को सच बता दिया।

     

    “भाभी… शान ने शहर में दूसरी शादी कर ली है।”

     

    नंदिनी कुछ पल तक बिल्कुल शांत बैठी रही।

     

    उसे लगा जैसे किसी ने उसके कानों में गलत बात कह दी हो।

     

    “क्या?”

     

    “मुझे बहुत पहले से पता था, लेकिन हिम्मत नहीं हुई बताने की।”

     

    नंदिनी की आंखों से आंसू निकल पड़े।

     

    उसने अपने दोनों बच्चों को देखा।

     

    आरव और अंश अभी भी अपने पिता का इंतजार कर रहे थे।

     

    उस रात नंदिनी ने पहली बार अपने बच्चों के सामने रोने से खुद को रोक नहीं पाया।

     

    आरव उसके पास आया।

     

    “मां, आपको क्या हुआ?”

     

    नंदिनी ने जल्दी से आंसू पोंछे।

     

    “कुछ नहीं बेटा।”

     

    “पापा ने आपको कुछ कहा?”

     

    नंदिनी ने उसे सीने से लगा लिया।

     

    “नहीं… तुम्हारे पापा ने कुछ नहीं कहा।”

     

    लेकिन उसके दिल में बहुत कुछ टूट चुका था।

     

    कुछ महीनों तक नंदिनी ने शान से कोई सवाल नहीं किया।

     

    वह बस अपने दोनों बच्चों को पालती रही।

     

    उधर शान अपनी दूसरी पत्नी रिया के साथ शहर में रहने लगा।

     

    शुरुआत में उसे लगा कि उसने अपनी जिंदगी का सबसे अच्छा फैसला लिया है।

     

    लेकिन कुछ ही महीनों बाद रिया को शान की पहली शादी और बच्चों के बारे में पता चल गया।

     

    एक दिन उसने पूछा—

     

    “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम्हारे दो बच्चे हैं?”

     

    शान चुप रहा।

     

    रिया ने गुस्से में कहा—

     

    “तुमने मेरे साथ भी झूठ बोला।”

     

    शान के पास कोई जवाब नहीं था।

     

    जिस झूठ को वह अपनी पहली पत्नी से छिपा रहा था, वही झूठ अब उसके दूसरे रिश्ते को भी तोड़ने लगा था।

     

    एक दिन ऑफिस से लौटते समय शान को खबर मिली कि उसके पिता बहुत बीमार हैं।

     

    वह तुरंत गांव पहुंचा।

     

    घर के बाहर वही पुराना आंगन था।

     

    नंदिनी बच्चों के साथ बैठी थी।

     

    शान को देखते ही दोनों बच्चे दौड़ पड़े।

     

    “पापा!”

     

    आरव उससे लिपट गया।

     

    अंश ने उसका हाथ पकड़ लिया।

     

    “पापा, आप इतने दिनों बाद आए!”

     

    शान की आंखें भर आईं।

     

    उसने दोनों बच्चों को गले लगा लिया।

     

    फिर उसकी नजर नंदिनी पर पड़ी।

     

    वह पहले से बहुत शांत लग रही थी।

     

    शान ने धीमे से कहा—

     

    “नंदिनी…”

     

    नंदिनी ने सिर्फ इतना पूछा—

     

    “अब क्यों आए हो?”

     

    शान के पास कोई जवाब नहीं था।

     

    “पापा बीमार हैं।”

     

    “मैं जानती हूं।”

     

    कुछ देर चुप्पी रही।

     

    फिर नंदिनी ने कहा—

     

    “तुमने दूसरी शादी कर ली, यह सुनकर मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात का नहीं हुआ कि तुमने मुझे छोड़ दिया।”

     

    शान ने उसकी तरफ देखा।

     

    नंदिनी की आंखों में आंसू थे।

     

    “मुझे दुख इस बात का हुआ कि तुमने अपने बच्चों को भी छोड़ दिया।”

     

    शान सिर झुका कर खड़ा रहा।

     

    “आरव हर रात पूछता था कि पापा कब आएंगे। अंश तुम्हारे लिए दरवाजे पर बैठा रहता था।”

     

    शान की आंखों से आंसू गिरने लगे।

     

    नंदिनी ने कहा—

     

    “तुम्हें मुझसे प्यार नहीं था, ठीक है। लेकिन बच्चों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?”

     

    यह सवाल शान के दिल में उतर गया।

     

    वह पहली बार खुद को आईने में देख रहा था।

     

    उसे याद आया कि उसने कभी बच्चों से वादा किया था कि वह उनके लिए सब कुछ करेगा।

     

    लेकिन वह वादा भी वह भूल गया था।

     

    शान ने हाथ जोड़ दिए।

     

    “मुझे माफ कर दो।”

     

    नंदिनी ने सिर हिला दिया।

     

    “माफी मांगना आसान है शान। लेकिन जो साल तुमने हमसे छीन लिए, वो वापस नहीं आएंगे।”

     

    शान कुछ नहीं बोल पाया।

     

    उस दिन उसने अपने पिता के सामने भी सब सच स्वीकार कर लिया।

     

    पिता ने कमजोर आवाज में कहा—

     

    “बेटा, घर छोड़ना आसान होता है… लेकिन जिम्मेदारी से भागकर कोई खुश नहीं रह सकता।”

     

    शान के पास कोई जवाब नहीं था।

     

    वह अपने बच्चों के पास गया।

     

    आरव ने पूछा—

     

    “पापा, अब आप हमारे साथ रहोगे?”

     

    शान की आंखों से आंसू बहने लगे।

     

    उसने बेटे को गले लगाकर कहा—

     

    “मैं तुम्हें फिर कभी अकेला महसूस नहीं होने दूंगा।”

     

    लेकिन नंदिनी ने तुरंत कहा—

     

    “बच्चों से किया वादा निभाना। मेरे लिए नहीं।”

     

    शान ने सिर झुका लिया।

     

    उसे समझ आ चुका था कि परिवार केवल एक छत के नीचे रहने का नाम नहीं है।

     

    परिवार वह रिश्ता है जिसमें किसी एक की खुशी के लिए दूसरे की पूरी जिंदगी नहीं कुचली जाती।

     

    शान ने अपनी गलतियों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

     

    उसने दूसरी पत्नी से भी सच-सच बात की और अपने दोनों बच्चों की जिम्मेदारी स्वीकार की।

     

    नंदिनी ने उसे वापस पति के रूप में स्वीकार किया या नहीं, यह फैसला उसने तुरंत नहीं किया।

     

    लेकिन एक मां होने के नाते उसने बच्चों को उनके पिता से दूर भी नहीं किया।

     

    समय के साथ शान रोज बच्चों से मिलने लगा।

     

    वह उनके स्कूल जाता, उनके साथ बैठता और उनकी छोटी-छोटी बातें सुनता।

     

    उसे अब समझ आ चुका था कि पैसे भेज देना पिता होने की पूरी जिम्मेदारी नहीं थी।

     

    कभी-कभी बच्चों को सिर्फ पिता की जरूरत होती है।

     

    और नंदिनी?

     

    उसने खुद को फिर से संभालना सीख लिया।

     

    उसने शान को माफ करने में समय लिया, क्योंकि टूटे हुए भरोसे को जोड़ना शब्दों से नहीं, सालों की सच्चाई से होता है।

     

    शान को आखिरकार समझ आया कि उसने दूसरी शादी करके कोई नया जीवन नहीं पाया था।

     

    उसने बस अपने पुराने जीवन की जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश की थी।

     

    और जिम्मेदारियों से भागने वाला इंसान चाहे कितनी भी दूर चला जाए…

     

    एक दिन उसे अपने किए हुए फैसलों के सामने वापस खड़ा होना ही पड़ता है।