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  • बोलने वाली तितली

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    बोलने वाली तितली

     

    एक हरे-भरे गांव के किनारे अन्वी नाम की बारह साल की लड़की अपनी मां के साथ रहती थी। अन्वी को पेड़-पौधों और फूलों से बहुत प्यार था। वह रोज सुबह घर के पीछे बने छोटे-से बगीचे में जाती, पौधों को पानी देती और तितलियों को उड़ते हुए देखती।

     

    अन्वी को सबसे ज्यादा पीली तितलियां पसंद थीं।

     

    वह अक्सर अपनी मां से कहती, “मां, काश तितलियां भी हमसे बातें कर पातीं।”

     

    मां हंसकर कहतीं, “अगर तितलियां बोलने लगेंगी तो शायद तुम्हें घर आने का समय ही नहीं मिलेगा।”

     

    अन्वी भी हंस देती।

     

    लेकिन एक सुबह उसकी जिंदगी में सचमुच ऐसी तितली आई, जो इंसानों की तरह बोल सकती थी।

     

    उस दिन अन्वी बगीचे में फूलों को पानी दे रही थी। तभी एक बड़ी-सी पीली तितली उड़ती हुई उसके पास आई और गुलाब के फूल पर बैठ गई।

     

    अन्वी उसे देखने लगी।

     

    अचानक तितली बोली—

     

    “आज फूलों को पानी थोड़ा ज्यादा मिल गया है।”

     

    अन्वी के हाथ से पानी का मग गिर गया।

     

    वह डरकर पीछे हट गई।

     

    “क… कौन बोला?”

     

    तितली ने अपने पंख हिलाए।

     

    “मैंने।”

     

    अन्वी की आंखें बड़ी हो गईं।

     

    “तुम बोल सकती हो?”

     

    “हां।”

     

    अन्वी कुछ देर तक उसे देखती रही।

     

    फिर उसने धीरे से पूछा, “लेकिन तितली बोल कैसे सकती है?”

     

    तितली हंसते हुए बोली, “यह सवाल तो मुझे भी नहीं पता।”

     

    अन्वी को यकीन नहीं हो रहा था कि उसके सामने एक बोलने वाली तितली बैठी है।

     

    उसने तितली का नाम पूछा।

     

    “तुम्हारा नाम क्या है?”

     

    तितली ने कहा, “मेरा नाम फुल्ली है।”

     

    उस दिन से अन्वी और फुल्ली दोस्त बन गए।

     

    फुल्ली रोज सुबह अन्वी के बगीचे में आती। दोनों घंटों बातें करते।

     

    फुल्ली उसे जंगल की बातें बताती। कौन-सा फूल कब खिलता है, कौन-सी जगह पर मीठे फल मिलते हैं और कौन-सा पेड़ बारिश से पहले अपनी पत्तियां बदल देता है।

     

    अन्वी बदले में उसे इंसानों की दुनिया के बारे में बताती।

     

    लेकिन फुल्ली ने अन्वी से एक बात हमेशा छिपाई।

     

    एक दिन अन्वी ने पूछा, “तुम बाकी तितलियों से अलग क्यों हो?”

     

    फुल्ली चुप हो गई।

     

    कुछ देर बाद बोली, “क्योंकि मुझे एक काम पूरा करना है।”

     

    “कैसा काम?”

     

    “मैं अभी नहीं बता सकती।”

     

    अन्वी को थोड़ी निराशा हुई, लेकिन उसने ज्यादा जोर नहीं दिया।

     

    कुछ दिनों बाद गांव में परेशानी शुरू हो गई।

     

    गांव के पास वाला तालाब सूखने लगा था।

     

    पेड़-पौधे मुरझाने लगे थे और खेतों में पानी की कमी हो गई थी।

     

    गांव के बड़े लोग परेशान थे।

     

    अन्वी ने फुल्ली से पूछा, “क्या तुम्हें पता है तालाब में पानी क्यों नहीं आ रहा?”

     

    फुल्ली ने कहा, “हां।”

     

    “तो बताओ!”

     

    फुल्ली ने कहा, “पहाड़ के पीछे एक पुरानी जलधारा है। उसका रास्ता पत्थरों से बंद हो गया है।”

     

    अन्वी ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता?”

     

    फुल्ली बोली, “हम तितलियां बहुत दूर तक उड़ती हैं। जो चीज इंसान नहीं देख पाते, वह हमें ऊपर से दिखाई देती है।”

     

    अन्वी ने गांव के लोगों को यह बात बताई।

     

    लेकिन किसी ने विश्वास नहीं किया।

     

    एक आदमी हंसकर बोला, “अब तितलियां भी गांव की समस्या बताने लगीं?”

     

    अन्वी चुप हो गई।

     

    लेकिन उसने हार नहीं मानी।

     

    अगली सुबह वह फुल्ली के साथ पहाड़ की तरफ निकल पड़ी।

     

    फुल्ली आगे-आगे उड़ रही थी और अन्वी पीछे चल रही थी।

     

    काफी दूर जाने के बाद वे एक पुराने रास्ते पर पहुंचे।

     

    वहां सचमुच पत्थरों का ढेर पड़ा था।

     

    पत्थरों के पीछे पानी की हल्की आवाज सुनाई दे रही थी।

     

    अन्वी समझ गई कि फुल्ली सच कह रही थी।

     

    वह तुरंत गांव वापस गई और कुछ लोगों को साथ लेकर आई।

     

    सबने मिलकर पत्थर हटाए।

     

    जैसे ही रास्ता खुला, पानी तेज बहाव के साथ नीचे की तरफ आने लगा।

     

    कुछ ही घंटों में तालाब में पानी भरने लगा।

     

    गांव के लोग खुश हो गए।

     

    जिस आदमी ने अन्वी का मजाक उड़ाया था, उसने उसके सामने आकर कहा, “हमें माफ करना। तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं किया।”

     

    अन्वी मुस्कुराई।

     

    लेकिन उसकी नजर फुल्ली को ढूंढ रही थी।

     

    फुल्ली कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।

     

    अगले दिन भी वह नहीं आई।

     

    अन्वी परेशान हो गई।

     

    तीसरे दिन वह अकेली बगीचे में बैठी थी।

     

    तभी फुल्ली उड़ती हुई आई।

     

    लेकिन इस बार उसके पंख पहले जैसे चमकीले नहीं थे।

     

    अन्वी ने पूछा, “तुम कहां थी?”

     

    फुल्ली बोली, “अपने घर।”

     

    “तुम्हारा घर कहां है?”

     

    फुल्ली ने आसमान की ओर देखा।

     

    “बहुत दूर।”

     

    अन्वी ने पूछा, “क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी?”

     

    फुल्ली चुप रही।

     

    फिर बोली, “हर दोस्त हमेशा साथ नहीं रहता, लेकिन उसकी याद हमेशा साथ रहती है।”

     

    अन्वी की आंखें भर आईं।

     

    “तुम ऐसी बातें क्यों कर रही हो?”

     

    फुल्ली ने कहा, “क्योंकि मेरा काम पूरा हो गया है।”

     

    अन्वी समझ गई कि वह दिन आने वाला है, जब फुल्ली चली जाएगी।

     

    अगली सुबह फुल्ली ने अन्वी को जंगल के उस हिस्से में बुलाया जहां हजारों रंग-बिरंगी तितलियां उड़ रही थीं।

     

    वहां एक बड़ा पुराना पेड़ था।

     

    फुल्ली ने कहा, “यही मेरा घर है।”

     

    अन्वी ने पूछा, “तुमने मुझे क्यों चुना?”

     

    फुल्ली मुस्कुराई।

     

    “क्योंकि तुमने कभी मुझे सिर्फ तितली नहीं समझा। तुमने मुझे दोस्त समझा।”

     

    अन्वी ने धीरे से कहा, “मैं तुम्हें भूलूंगी नहीं।”

     

    फुल्ली ने उसके हाथ पर बैठकर कहा, “और तुम हमेशा याद रखना—दुनिया में छोटी-सी चीज भी बड़ा बदलाव ला सकती है।”

     

    फिर फुल्ली ने अपने पंख फैलाए।

     

    वह बाकी तितलियों के साथ उड़ने लगी।

     

    अन्वी उसे दूर तक देखती रही।

     

    उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी।

     

    उस दिन के बाद अन्वी ने गांव के बच्चों को पौधे लगाने और फूलों की देखभाल करने के लिए प्रेरित किया।

     

    गांव में फिर से हरियाली लौटने लगी।

     

    कुछ महीनों बाद अन्वी के बगीचे में हजारों तितलियां आने लगीं।

     

    लेकिन उनमें से एक पीली तितली रोज सुबह गुलाब पर आकर बैठती।

     

    वह बोलती नहीं थी।

     

    फिर भी अन्वी उसे देखते ही मुस्कुरा देती।

     

    कभी-कभी हवा चलती और पीली तितली अपने पंख हिलाकर उड़ जाती।

     

    अन्वी धीरे से कहती—

     

    “मुझे पता है फुल्ली… तुम गई नहीं हो।”

     

    और उस पल उसे लगता जैसे फूलों के बीच से कोई बहुत धीमी आवाज आई हो—

     

    “सच्ची दोस्ती कभी खत्म नहीं होती।”

     

    अन्वी मुस्कुराती और अपने पौधों को पानी देने लगती।

     

    उसके लिए फुल्ली अब कोई रहस्यमयी बोलने वाली तितली नहीं थी।

     

    वह उसकी जिंदगी की वह दोस्त थी, जिसने उसे सिखाया था कि छोटी-सी उम्मीद भी कभी-कभी पूरी दुनिया को बदल सकती है।