🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

टैग: #आत्मसम्मान #दर्द

  • पायल की अधूरी मुस्कान

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    पायल पूरे घर की जान थी। अठारह साल की पायल जहां होती, वहां जैसे हंसी अपने आप चली आती थी। कभी वह आंगन में अपनी छोटी बहन के साथ खेलती, कभी छत पर कपड़े सुखाते हुए गाना गुनगुनाती और कभी दादी के पास बैठकर उनकी पुरानी बातें सुनते-सुनते खुद ही हंसने लगती। उसकी मां अक्सर उसे देखकर कहतीं, “पायल, तू कभी बड़ी भी होगी या हमेशा ऐसी ही बच्ची बनी रहेगी?” पायल हंसकर जवाब देती, “मां, बड़ी होकर क्या करना है? अभी तो मैं बिल्कुल ठीक हूं।” पिता भी मुस्कुराकर कहते, “इसे अभी बड़ा मत करो। हमारी बेटी अभी बच्ची ही है।” लेकिन पायल के अठारह साल के होते ही घर का माहौल थोड़ा बदल गया। एक दिन उसकी मां रसोई में काम कर रही थीं कि पड़ोस की चाची आ गईं। “बहन, तुम्हारी बेटी के लिए एक अच्छा रिश्ता आया है।” मां ने तुरंत कहा, “अभी तो पायल अठारह की हुई है। इतनी जल्दी शादी की क्या जरूरत है?” पिता ने भी साफ कह दिया, “अभी उसकी पढ़ाई पूरी होने दो। शादी बाद में करेंगे।” पायल ने दूर से उनकी बातें सुनीं तो राहत की सांस ली। उसे शादी का मतलब ही समझ नहीं आता था। उसके लिए जिंदगी का मतलब था अपनी सहेलियों के साथ घूमना, पढ़ाई करना, मां के साथ बाजार जाना और दादी के पास बैठकर उनकी बातें सुनना। लेकिन घर में सबसे ज्यादा चिंता दादी को थी। कुछ दिनों बाद दादी ने पायल के पिता को अपने पास बुलाया। “बेटा, मैं जानती हूं तुम्हें लगता है कि पायल अभी छोटी है। लेकिन मेरी उम्र भी तो देख।” पिता चुप रहे। दादी ने धीरे से कहा, “पता नहीं मेरी सांसें कब तक साथ देंगी। मैं बस अपनी पोती को दुल्हन बने देखना चाहती हूं।” “मां, ऐसी बातें मत करो।” “बेटा, मेरी एक इच्छा है। क्या तू वो भी पूरी नहीं करेगा?” पिता के पास कोई जवाब नहीं था। मां ने भी समझाया, “मांजी, रिश्ता अच्छा होना चाहिए। सिर्फ आपकी इच्छा के लिए इतनी जल्दी फैसला लेना ठीक नहीं।” लेकिन दादी अपनी बात पर अड़ी रहीं। आखिरकार एक रिश्ता आया। लड़के का नाम था वेद। वेद एक अच्छे परिवार से था। नौकरी करता था और देखने में भी शांत स्वभाव का लगता था। उसके परिवार ने पायल को देखा और रिश्ता पसंद कर लिया। पायल से जब पूछा गया तो उसने धीमे से कहा, “जैसा आप लोगों को सही लगे।” वह खुद शादी के लिए तैयार थी या नहीं, यह शायद वह खुद भी नहीं जानती थी। कुछ ही महीनों में पायल दुल्हन बन गई। लाल जोड़े में बैठी पायल को देखकर दादी की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “आज मेरी सबसे बड़ी इच्छा पूरी हो गई।” पायल मुस्कुरा दी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस मुस्कान के पीछे पूरा घर खुश था, उसी मुस्कान को आने वाले दिनों में बहुत कुछ सहना पड़ेगा। शादी के बाद जब पायल पहली बार वेद के घर पहुंची तो उसने मन में सोचा, “अब यही मेरा घर है।” वह वेद को खुश करने की पूरी कोशिश करती। सुबह उसके लिए चाय बनाती। रात को पूछती, “थक गए हो?” लेकिन वेद का व्यवहार बिल्कुल अलग था। वह पायल से ज्यादा बातें नहीं करता था। पायल पहले तो समझ नहीं पाई। एक दिन उसने हिम्मत करके पूछा, “वेद, आप मुझसे नाराज हैं क्या?” वेद ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “नहीं।” “फिर आप मुझसे बात क्यों नहीं करते?” वेद कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “पायल, मुझे थोड़ा समय चाहिए।” पायल ने मासूमियत से पूछा, “किस चीज के लिए?” वेद ने कोई जवाब नहीं दिया। दिन गुजरते गए। पायल की हंसी अब घर में कम सुनाई देने लगी। एक शाम वह कमरे में सामान रख रही थी कि वेद का फोन बजा। वेद फोन लेकर बाहर चला गया। पायल ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन रात को जब वह कमरे में लौटा तो उसके चेहरे पर अजीब सी बेचैनी थी। पायल ने पूछा, “सब ठीक है?” “हां।” “आप कुछ परेशान लग रहे हो।” वेद ने कहा, “पायल, हर बात पूछना जरूरी नहीं होता।” उस एक वाक्य ने पायल को अंदर तक चुप कर दिया। कुछ दिनों बाद उसे असली बात पता चली। वेद किसी और लड़की को पसंद करता था। शादी से पहले भी वह उसी लड़की के करीब था। वेद के परिवार ने किसी वजह से उस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया और उसकी शादी पायल से करवा दी। पायल को यह बात वेद की बहन से पता चली। उस रात वह बहुत देर तक अपने कमरे में बैठी रही। जब वेद आया तो पायल ने सीधे पूछा, “क्या आपको कोई और पसंद है?” वेद अचानक रुक गया। उसकी चुप्पी ही पायल के लिए जवाब थी। “तो फिर आपने मुझसे शादी क्यों की?” वेद ने धीमे स्वर में कहा, “मैंने शादी अपनी मर्जी से नहीं की थी।” पायल की आंखों में आंसू आ गए। “और इसमें मेरी क्या गलती है?” वेद चुप रहा। “मैंने तो कभी आपसे कुछ नहीं मांगा। बस इतना चाहती थी कि आप मुझे अपना समझें।” वेद ने नजरें झुका लीं। पायल ने अपने आंसू पोंछे। “आप मुझे पसंद नहीं करते, ये बात मैं समझ सकती हूं। लेकिन मेरी कोई गलती नहीं है। मुझे सजा क्यों मिल रही है?” वेद के पास कोई जवाब नहीं था। उस रात पायल पहली बार अपनी शादी के जोड़े को देखकर रोई। जिस लाल जोड़े को पहनकर उसने सोचा था कि उसकी नई जिंदगी शुरू होगी, वही जोड़ा अब उसे अपनी मजबूरी की याद दिला रहा था। अगले दिन पायल ने दादी को फोन किया। “दादी…” “क्या हुआ मेरी बच्ची?” पायल कुछ बोल नहीं पाई। दादी समझ गईं। “तू रो रही है?” पायल ने आंसुओं के बीच कहा, “दादी, आपने कहा था ना कि मुझे दुल्हन बने देखना चाहती हो?” “हां बेटा।” “देख लिया ना?” दादी कुछ समझ नहीं पाईं। पायल बोली, “लेकिन दादी… मुझे खुश दुल्हन देखना था ना?” दादी के हाथ कांपने लगे। उन्हें पहली बार अपनी जिद का एहसास हुआ। उन्होंने कहा, “पायल, मुझसे गलती हो गई।” पायल रोते हुए बोली, “आपकी गलती नहीं थी दादी। शायद किसी की गलती नहीं थी। बस मेरी जिंदगी का फैसला बहुत जल्दी कर दिया गया।” दादी की आंखों से आंसू बहने लगे। उधर वेद भी सब सुन रहा था। उस रात उसे पहली बार महसूस हुआ कि पायल सिर्फ उसकी पत्नी नहीं, बल्कि एक ऐसी लड़की थी जिसे बिना उसकी इच्छा जाने एक ऐसे रिश्ते में डाल दिया गया था जहां उसे अपनापन तक नहीं मिल रहा था। अगले दिन वेद पायल के सामने आया। “पायल।” पायल ने उसकी तरफ देखा। वेद ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ गलत कर रहा था।” पायल चुप रही। “मेरे मन में किसी और के लिए भावनाएं थीं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हें नजरअंदाज करना सही था।” पायल ने धीमे से पूछा, “अब क्या चाहते हो?” वेद कुछ पल चुप रहा। “मैं चाहता हूं कि हम जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। पहले दोनों परिवार बैठकर बात करें। तुम्हारी जिंदगी का फैसला तुम्हारी इच्छा के बिना अब कोई नहीं करेगा।” पायल ने पहली बार उसकी आंखों में देखा। उसे नहीं पता था कि वेद बदल पाएगा या नहीं। लेकिन पहली बार उसे लगा कि शायद उसकी आवाज भी मायने रखती है। और उसी दिन उसने मन में एक बात तय कर ली— शादी हो जाने से लड़की की जिंदगी खत्म नहीं होती। उसकी खुशी, उसकी इच्छा और उसका सम्मान भी उतना ही जरूरी है। पायल की मुस्कान अभी पूरी तरह वापस नहीं आई थी। लेकिन उसके अंदर अपनी जिंदगी के लिए खड़े होने की हिम्मत जरूर लौटने लगी थी।

    Avatar photo

    Auther preeti Sharma

    मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं