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टैग: अधूरा रिश्ता जिसे अपना समझा

  • अधूरा रिश्ता

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    “यार, तेरी सगाई पक्की हो गई!”

     

    दोस्त की बात सुनकर आदित्य के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। घर में भी कई दिनों से खुशियों का माहौल था। रिश्ता कोई अनजान परिवार में नहीं, बल्कि अपने ही रिश्तेदारों में तय हुआ था। लड़की का नाम जानवी था। दोनों बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। इसलिए आदित्य को लगा कि इससे अच्छा रिश्ता शायद ही कहीं मिलेगा।

     

    सगाई में जब पहली बार उसने जानवी की उंगली में अंगूठी पहनाई, तो उसकी आँखों में ढेर सारे सपने थे। लेकिन जानवी की आँखों में वह चमक नहीं थी। आदित्य ने सोचा, “शायद शर्माती होगी।”

     

    सगाई के बाद आदित्य रोज़ उसे मैसेज करता।

    “कैसी हो?”

    “ठीक हूँ।”

     

    बस इतना ही जवाब आता।

     

    आदित्य कई बार सोचता कि शायद जानवी नई ज़िंदगी की जिम्मेदारियों को लेकर घबराई हुई है। इसलिए उसने कभी उस पर सवालों की बारिश नहीं की। वह हर छोटे-छोटे मौके पर उसे खुश करने की कोशिश करता। कभी उसकी पसंद की किताब भेज देता, तो कभी बिना किसी वजह के फूल। लेकिन हर बार जानवी सिर्फ “थैंक यू” लिखकर बात खत्म कर देती। आदित्य रात-रात भर उनकी आने वाली ज़िंदगी के सपने देखता, जबकि जानवी उन्हीं रातों में अपने फैसले को लेकर बेचैन होकर रोती रहती। दोनों एक ही रिश्ते में बंधे थे, लेकिन उनके दिल दो बिल्कुल अलग रास्तों पर चल रहे थे। एक तरफ सच्चा प्यार था, तो दूसरी तरफ मजबूरी और छिपा हुआ सच।

     

    वह घंटों उसके रिप्लाई का इंतज़ार करता, लेकिन जानवी कभी खुद से बात शुरू नहीं करती थी। आदित्य फिर भी यही सोचकर खुश रहता कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा।

     

     

     

    धीरे-धीरे उसने शादी के सपने बुनने शुरू कर दिए। उसने अपने कमरे की दीवार पर उनकी सगाई की तस्वीर लगा दी। मोबाइल के वॉलपेपर पर भी जानवी की मुस्कुराती तस्वीर थी। वह अपनी हर छोटी-बड़ी खुशी उसी से जोड़ चुका था।

     

    एक दिन आदित्य ने जानवी से कहा,

    “अगर तुम्हें कहीं घूमने का मन हो तो बताना, शादी से पहले परिवार के साथ चलेंगे।”

     

    जानवी ने सिर्फ इतना कहा,”देखते हैं।”

     

    उसका हर जवाब ऐसा ही होता। आदित्य को कभी-कभी अजीब लगता, लेकिन उसने कभी ज़बरदस्ती नहीं की।

     

    उधर जानवी एक ऐसे सच के साथ जी रही थी, जिसे बताने की हिम्मत उसमें नहीं थी।

     

    वह कॉलेज के दिनों से रोहन नाम के लड़के से प्यार करती थी। दोनों कई सालों से साथ थे। लेकिन जब घरवालों ने रिश्तेदारों में उसका रिश्ता तय किया, तो वह अपने परिवार के सामने कुछ बोल नहीं पाई। उसने सोचा, शायद वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा।

     

    लेकिन वक्त के साथ उसकी बेचैनी और बढ़ती गई।

    शादी की तारीख अब सिर्फ एक महीने दूर थी।

     

    एक शाम आदित्य बड़े प्यार से जानवी के लिए उसकी पसंद का सूट लेकर उसके घर पहुँचा। वह उसे सरप्राइज़ देना चाहता था।

     

    कमरे के बाहर पहुँचते ही उसे अंदर से किसी की आवाज़ सुनाई दी।

     

    “जानवी… आखिर कब तक ये सब चलेगा?”

     

    आदित्य रुक गया।

     

    जानवी रोते हुए कह रही थी,

    “रोहन, मैं मजबूर हूँ। मैं घरवालों को मना नहीं कर पाई।”

     

    रोहन बोला,

    “लेकिन तुम किसी और से शादी कैसे कर सकती हो? तुमने तो मुझसे साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं।”

     

    ये सुनते ही आदित्य के हाथ से गिफ्ट का बैग नीचे गिर गया।

     

    अंदर दोनों चौंक गए।

     

    कमरे में सन्नाटा छा गया।

     

    आदित्य की आँखों में आँसू थे, लेकिन आवाज़ बिल्कुल शांत थी।

     

    “एक बात पूछूँ, जानवी?”

     

    वह सिर झुकाकर खड़ी रही।”क्या तुम उससे प्यार करती हो?”

     

    कुछ पल की खामोशी के बाद जानवी ने धीरे से कहा,

    “…हाँ।”

     

    बस एक शब्द…

    और आदित्य के सारे सपने उसी पल टूट गए।

     

    उसने काँपती आवाज़ में पूछा,”तो फिर मुझसे सगाई क्यों की? एक बार सच बता देती… मैं खुद पीछे हट जाता।”

     

    जानवी फूट-फूटकर रोने लगी।

    “मैं डर गई थी… मुझे लगा घरवाले कभी नहीं मानेंगे।”

     

    आदित्य ने गहरी साँस ली।

     

    “घरवालों से डर गई… लेकिन मेरी ज़िंदगी के बारे में एक बार भी नहीं सोचा?”

     

    उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।

     

    आदित्य चुपचाप वहाँ से चला गया।

     

    उस रात उसने अपने कमरे की दीवार से सगाई की तस्वीर उतार दी। मोबाइल का वॉलपेपर बदल दिया। लेकिन यादें… उन्हें कहाँ हटाया जा सकता था।

     

    अगले दिन दोनों परिवार आमने-सामने बैठे।

     

    सबको सच्चाई पता चली।

     

    घर में गुस्सा, रोना और आरोपों का दौर शुरू हो गया।

     

    तभी आदित्य ने सबको रोकते हुए कहा,

     

    “किसी को दोष मत दीजिए। गलती सिर्फ इतनी हुई है कि सच समय पर नहीं बोला गया।”

     

    फिर उसने जानवी की ओर देखकर कहा,

     

    “अगर आज भी तुम्हारा दिल रोहन के लिए धड़कता है, तो मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं। रिश्ता भरोसे से चलता है, मजबूरी से नहीं।”

     

    इतना कहकर उसने अपनी सगाई की अंगूठी उतारी और मेज़ पर रख दी।

     

    उस पल कमरे में बैठे हर इंसान की आँखें नम थीं।

     

    कुछ दिनों बाद जानवी की शादी रोहन से हो गई।

     

    उधर आदित्य ने खुद को पूरी तरह काम में डुबो दिया। उसने किसी से शिकायत नहीं की, लेकिन अब वह पहले जैसा नहीं रहा।

     

    जो लड़का हर समय हँसता था, अब मुस्कुराने से पहले भी सोचता था।

     

    महीनों बाद एक दिन उसकी मुलाकात अपने पुराने स्कूल के शिक्षक से हुई।

     

    उन्होंने पूछा,

    “कैसे हो बेटा?”

     

    आदित्य मुस्कुराया और बोला,

    “ठीक हूँ।”

     

    शिक्षक ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,

     

    “बेटा, ज़िंदगी में हर इंसान तुम्हारी किस्मत नहीं होता। कुछ लोग सिर्फ तुम्हें मज़बूत बनाने आते हैं।”

     

    ये बात उसके दिल में उतर गई।

     

    उसने धीरे-धीरे खुद को सँभालना शुरू किया। परिवार के साथ समय बिताने लगा। अपने अधूरे सपनों को पूरा करने में लग गया।

     

    कई साल बाद एक शादी में उसकी मुलाकात फिर से जानवी से हुई।

     

    दोनों की नज़रें मिलीं।

     

    जानवी की आँखों में पछतावा था।

     

    वह धीरे से बोली,

    “मुझे माफ़ कर दोगे?”

     

    आदित्य हल्का-सा मुस्कुराया।

     

    “मैंने तुम्हें बहुत पहले माफ़ कर दिया था… क्योंकि नफ़रत लेकर जीने से ज़्यादा मुश्किल कुछ नहीं होता।”

     

    इतना कहकर वह आगे बढ़ गया।

     

    उस दिन जानवी की आँखों से आँसू बह निकले।

     

    उसे पहली बार समझ आया कि धोखा सिर्फ रिश्ता नहीं तोड़ता, किसी के भरोसे और मासूमियत को भी हमेशा के लिए बदल देता है।

     

    और आदित्य…

     

    उसने उस दर्द को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। क्योंकि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में साथ निभाने नहीं, बल्कि हमें ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाने आते हैं।